मथुरा

नई दिल्ली । मोदी कैबिनेट ने प्रचलन से बाहर चुके 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों के रखने की सीमा को लेकर बुधवार को एक अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। इसके तहत केंद्र सरकार 31 मार्च के बाद किसी के पास एक सीमा से ज्यादा 500 और 1000 के पुराने नोट पाए जाने पर चार साल तक की जेल हो सकती है। इसके साथ ही पुराने नोटों में लेन-देन करने पर पांच हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है। यहीं नहीं, सरकार और रिजर्व बैंक की इन नोटों के धारकों को उनके नोट का मूल्य देने का वादा करने वाली देनदारी भी समाप्त हो जाएगी। वैसे तो पुराने नोट 30 दिसंबर के बाद ही बैंकों में नहीं लिए जाएंगे, लेकिन कुछ विशेष मामलों में इन्हें 31 र्माच तक रिजर्व बैंक जमा किया जा सकेगा। मोदी कैबिनेट द्वारा पारित इस अध्यादेश का नाम है- The specified bank notes cessation of liabilities ordinance खबरों के मुताबिक, पुराने नोट रखने की सीमा 10 हजार तक रखी जा सकती है। इस नियम का उल्लंघन करने पर 50 हजार रुपये अधिकतम या जितनी राशि मिलेगी उसका पांच गुना जुर्माना, जो भी ज्यादा हो, लगाया जा सकता है।  सूत्रों ने कहा कि ऐसे नोट रखने वाले इन्हें 31 मार्च तक रिजर्व बैंक में जमा करा सकते हैं। हालांकि इस अवधि को भी घटाया जा सकता है। इससे पहले 1978 में मोरारजी देसाई की जनता पार्टी सरकार ने 1000, 5000 और 10,000 का नोट बंद करने के बाद सरकार की देनदारी को समाप्त करने के लिए इसी तरह का अध्यादेश लाया गया था। 8 नवंबर को नोटबंदी के ऐलान के साथ ही सरकार ने यह भी कहा था कि पुराने नोट 31 मार्च तक जमा कराए जा सकते हैं। 30 दिसंबर तक बैंकों और डाक घरों में पुराने नोट जमा कराए जा सकते हैं जबकि इसके बाद यह नोट सिर्फ रिजर्ब बैंक ऑफ इंडिया में जमा कराए जा सकेंगे। हालांकि, बाद के नोटिफिकेशंस में यह उस तारीख का जिक्र नहीं है कि आरबीआई में कब तक पुराने नोट जमा कराए जा सकेंगे। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पिछले महीने कहा था कि कुछ कानूनी कदम उठाने की जरूरत हो सकती है। आरबीआई के पूर्व गवर्नर डी. सुब्बाराव ने भी कहा था पुराने नोटों को कानूनी तौर पर पूरी तरह अमान्य करने के लिए कुछ कानूनी बदलावों की जरूरत पड़ सकती है। अध्यादेश के जरिए सरकार 30 दिसंबर के बाद पुराने नोट पाए जाने पर सख्त कार्रवाई कर सकती है।  लोगों के पास पुराने नोट रखने की सीमा तय की जा सकती है और अगर किसी के पास तय सीमा से ज्यादे पुराने नोट मिले तो उन पर जुर्माना लगाया जा सकता है। पुराने नोट रखने की सीमा 10,000 रुपये तय की जा सकती है और इससे ज्यादा पाए जाने पर 50 हजार रुपये या बरामद राशि का 5 गुना जुर्माना लगाया जा सकता है।            साभार-khaskhabar.com  

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धारावाहिक 'साथ निभाना साथिया' में पिछले ६ वर्षों से चिराग मोदी उर्फ़ मोटा भाई की भूमिका निभाने के बाद धारावाहिक में नीरज भारद्धाज का ट्रैक ना आने के कारण उन्होंने धारावाहिक छोड़ दिया,जिसके कारण वे चर्चा में रहे और दूसरा अपनी पत्नी उपासना सिंह यानि कपिल शर्मा के शो की बुवा को तलाक देने को लेकर भी वे चर्चा में है। कई हिंदी फिल्मों और कई भोजपुरी फिल्मों में भी बतौर हीरो काम करने वाले बहुमुखी प्रतिभाशाली एक्टर नीरज भारद्धाज ने दूरदर्शन के और सेटेलाईट चैनलों के धारावाहिकों में पिछले कई वर्षों से काम किया और कर रहे है। लेकिन अब नीरज भारद्धाज ने पूरा ध्यान फिल्मो पर केंद्रित कर दिया है। अभी वे निर्माता शंभू पांडे की हिंदी फ़ीचर फिल्म 'वफ़ा २', मेहुल कुमार की हिंदी फीचर फिल्म,'शादी के बाद लव मैरेज', हिंदी फिल्म 'कैफ़े कॉफी' कर रहे है। और पहली बार निर्देशक मोहनदास की मराठी फिल्म 'निष्ठां' और पहली बार ही निर्देशक शांतिकेतन की एक मलयालम फिल्म भी कर रहे है। क्या अब नीरज भारद्धाज धारावाहिको में काम नहीं करेंगे या केवल फिल्मो में ही काम करेंगे ? जब यह सवाल उनसे पूछा गया तो नीरज भारद्धाज ने कहा,"आजकल धारावाहिकों में केवल महिलाओं को ही प्रमुखता दी जा रही है और पुरुषों को केवल शो पीस की तरह खड़ा रक्खा जाता है और कभी कबार उनका ट्रैक आता है वर्ना वे केवल खाना पूर्ति के लिए होते है। और इसके लिए निर्माता या निर्देशक कहते है चैनल कहता है और चैनल कहता कि यह सब निर्माता और निर्देशक के ऊपर है। भाई यदि महिलाओं से ही धारावाहिक चलता है तो पुरुष कलाकारों को क्यों लेते है? आखिर एक कलाकार कोई ढंग का काम ही नहीं कर पायेगा तो उसको संतुष्टि कैसे मिलेगी? पैसा ही सबकुछ नहीं होता है। और आप जब तक टीवी पर दिखते है तब तक लोग जानते है, शो ख़तम हुआ लोग भूल जाते है और फिल्म में यदि कोई कलाकार एक भी अच्छा सीन दे दिया तो वह हमेशा याद रक्खा जाता है। इसलिए आजकल फिल्मे ज्यादा कर रहा हूँ। धारावाहिक भी करूँगा, यदि अच्छा और चैलेंजिग रोल मिला तो करूँगा। मैं केवल पैसे के लिए धारावाहिकों में केवल खड़ा होकर तमाशा देखू और खाना पूर्ति का काम अब नहीं करूँगा।"     

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मथुरा। इलैक्ट्रनिक चैनल के पत्रकार हरीश माहौर के आकस्मिक निधन पर ब्रज प्रेस क्लब व उप्र मान्यता संवाद समिति द्वारा संयुक्त रूप से की गई मुआवजे की पहल रंग लाई है। मृत परिवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सहायतार्थ राशि के रूप में 20 लाख रूपए मुआवजा देने की घोषणा की है। बतादें कि ब्रज प्रेस क्लब के अध्यक्ष व उपजा प्रदेश उपाध्यक्ष कमलकांत उपमन्यु एडवोकेट के नेतृत्व में पत्रकारों ने जिलाधिकारी नितिन बंसल से मिलकर मृतक के बच्चों व परिजनों को आर्थिक सहायता और आवास प्रदान किये जाने की मांग की थी। उपजा प्रदेश उपाध्यक्ष की पहल पर डीएम नितिन बंसल ने मात्र दो घंट के भीतर तत्काल संस्तुति कर सहायता आवेदन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को फैक्स द्वारा भेज दिया है। इसी पर संज्ञान लेते हुए सोमवार को मुख्समंत्री ने मृत पत्रकार हरीश माहौर के परिजनों को 20 लाख रूपए मुआवजा देने की घोषणा की है। उप्र मान्यता संवाद समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी व ब्रज प्रेस क्लब के अध्यक्ष कमलकांत उपमन्यु एडवोकेट ने जिला प्रशासन व मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है।

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पहलवानी और कुश्ती की चर्चा इन दिनों बहुत हो रही है। सिल्वर स्क्रीन पर इस सब्जेक्ट पर बनी दो फिल्मों ने धमाल मचाया है। अब इसी को लेकर तीसरी की चर्चा भी शुरू हो गई है। जब कुश्ती की बात हो तो भारत में पहला नाम दारा सिंह का आता है। दारा सिंह के जीवन पर आधारित एक फिल्म बनाने की बात की जा रही है। इसमें अक्षय कुमार ने अपनी इच्छा भी जताई थी। हां यह जरूर है कि दारा सिंह के बेटे बिंदू इस फिल्म को लेकर पशोपेश में हैं। इस बारे मं अभिनेता विंदू दारा सिंह ने कहा कि अभिनेता अक्षय कुमार उनके दिवंगत पिता पहलवान-अभिनेता दारा सिंह की जिंदगी पर बनने वाली फिल्म में काम करने को लेकर उहापोह की स्थिति में हैं। बिंदु कहते हैं कि अक्षय उनके पिता की जिंदगी पर बनने वाली फिल्म के लिए उपयुक्त हैं। उनका कहना है कि इस फिल्म को लेकर अक्षय से बात भी हुई थी, उन्होने अभी तक पटकथा नहीं सनी है। ऐसे में अभी कहा नहीं जा सकता है कि वे इस फिल्म में काम करेंगे या नहीं। यह जरूर हैकि हम चाहते हैं कि वे इस फिल्म को करें। वह थोड़ी उलझन में हैं, वह सोच रहे हैं। यह जरूरहै कि अक्षय और बिंदू कई फिल्मों में एक साथ काम कर चुकेहैं। दोनों ने कम्बख्त इश्क, मुझसे शादी करोगी, हाउसफुल, हाउसफुल 2 और जोकर जैसी फिल्मों में काम कर चुके हैं।      साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । कमजोर मांग और वायदा में कमजोरी के संकेतों के बीच दिल्ली सर्राफा बाजार में सोमवार को सोना 250 रूपये गिरकर 11 माह के निम्न स्तर 27,550 रूपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। औद्योगिक इकाइयों और सिक्का निर्माताओं की ओर से कमजोर उठान के कारण चांदी भी 210 रूपये कमजोर होकर 38,600 रूपये प्रति किलो पर बंद हुई। बाजार सूत्रों ने कहा कि बाजार में नकदी की कमी के मद्देनजर आभूषण और फुटकर विक्रेताओं की मांग में निरंतर गिरावट से सोना दबाव में है। सरकार ने आठ नवंबर को कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए 500 रूपये और 1,000 रूपये के पुरानी श्रृंखला के नोटों का चलन रोक दिया था जिसके कारण बाजार में नकदी की समस्या चल रही है। चांदी तैयार की कीमत 210 रूपये की गिरावट के साथ 38,600 रूपये प्रति किलो रह गई जबकि चांदी साप्ताहिक डिलीवरी की कीमत 460 रूपये की गिरावट के साथ 38,465 रूपये प्रति किलो पर बंद हुई।        साभार-khaskhabar.com  

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बेंगलुरू । लंदन ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता भारतीय बैडमिंटन स्टार सायना नेहवाल के लिए यह साल काफी मुश्किल रहा है। शटलर सायना ने पैर की चोट से उबरने के बाद ऑस्ट्रेलियन ओपन जीता लेकिन रियो ओलंपिक के दौरान उनके घुटने में बड़ी चोट लग गई, जिससे वे महिला एकल वर्ग स्पर्धा के दूसरे दौर से ही बाहर हो गईं। इसके बावजूद सायना के कोच विमल कुमार का मानना है कि उन्हें जनवरी में होने वाली प्रीमियर बैडमिंटन लीग (पीबीएल) में खेलने से दूर रहने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि बैडमिंटन लीग अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की तरह कठिन मुकाबला नहीं है। विमल से जब पूछा गया कि सायना को पीबीएल से आराम देना क्या सही नहीं होगा क्योंकि वे अभी चोट से उबरी हैं तो उन्होंने कहा कि सायना को पीबीएल से दूर रहने की कोई जरूरत नहीं है। इससे उनके करिअर प्रोफाइल में बढ़ोतरी होगी। यह लीग इतनी कठिन नहीं है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट जितनी प्रतिस्पर्धी नहीं है। कोच ने कहा कि पीबीएल दो महीने तक नहीं खेली जाती जैसे टी20 टूर्नामेंट इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल)। उन्होंने कहा कि पीबीएल आईपीएल या किसी अन्य क्रिकेट लीग की तरह नहीं है जो दो महीने तक चलती है। यह दो हफ्ते तक चलती है जो आकर्षण का केंद्र रहती है। विमल ने कहा कि पीबीएल से सायना के ट्रेनिंग सत्र पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि यहां 16 अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट हैं जो उसे फिट रखेंगे। उन्होंने कहा कि पीबीएल किसी भी तरह से भारतीय महिला एकल स्टार के ट्रेनिंग कार्यक्रम को प्रभावित नहीं करेगी क्योंकि यहां 15 से 16 अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट हैं।         साभार-khaskhabar.com  

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