मथुरा। विट्ठलेश महाराज की पुण्य स्मृति में एवं श्रीगोपाल ब्रज यात्रा महोत्सव के स्वर्ण जयन्ती के उपलक्ष्य में चल रही ब्रज चैरासी कोस दर्शन पद यात्रा के अन्तर्गत गत दिवस बृषभानपुर ;बरसानाद्ध धाम में गोपाल भक्तों ने श्री लाड़ली जी के सान्निध्य में ठाकुर जी के विभिन्न उत्सवों का आयोजन बड़े ही भक्ति भाव के साथ किया। जहां पर उन्होंने बरसाने की तीर्थ परिक्रमा, दानगढ़, मानगढ़, मोरकुटी, गहवरवन, सांखरीखोर के दर्शन किये तथा सांखरीखोर पर ठाकुर जी की दानलीला महोत्सव का आयोजन किया एवं गोपाल मंदिरीय ब्रज कीर्तन समाज का आयोजन ब्रज के विभिन्न कलाकारों ने मिलकर किया। तथा ठाकुर जी की दानलीला का शास्त्रीय संगीत एवं ब्रज लोकतान संगीत के माध्यम से गायन किया। तथा ठाकुर जी के लिए विशेष केसर युक्त ठण्डाई भांग का भोग लगाया गया। तथा भक्तों के मध्य वितरित किया गया। बरसाने धाम में भक्तों ने ठाकुर जी विवाह महोत्सव का बड़ा ही सुन्दर आयोजन यात्रा परिसर में किया किया जिसमें यात्रा में चल रहे श्री गोपाल जी एवं सालिगराम के स्वरूप एवं तुलसीजी का विवाह महोत्सव मनाया गया। यात्रा मण्डल में ठाकुर जी का विवाह मण्डप सजाया गया तथा अग्यौनी बारात के रूप में ठाकुर जी की शोभायात्रा भी निकाली गयी, जिसमें भक्त मण्डली ठाकुर जी के हरिनाम संकीर्तन करते हुए नित्य करते हुए आनन्द ले रहे थी।
ठाकुर जी का वैदिक परम्परा के अनुसार विवाह मनोरथ किया गया। यात्रियों का बारातियों के रूप में स्वागत करके भण्डारे का आयोजन किया गया। बरसाना धाम के अन्तर्गत अंजन वन रघौली, पियासो, कदमखण्डी, करहैला, पीली पोखर, के भी दर्शन यात्रियों ने किये। बरसाने धाम से चलकर प्रेम सरोवर, रीठौरा संकेतवन, चरण पहाड़ी होते हुए यात्रा नन्दगाँव पहुंची। जहां पर नन्द भवन के दर्शन किये गये। नन्दगांव की परिक्रमा, उध्यव क्यारी, रासलीला के दर्शन किये। तथा नन्दगांव में श्री गोपाल जी महाराज का नन्द महोत्सव मनाया गया। जिसमें ठाकुर जी के नन्दमहोत्सव के पदों का गायन हुआ एवं सुन्दर पुष्पों से सुसज्जित पालने में श्री ठाकुर जी के दर्शन का विशेष मनोरथ का आयोजन किया गया। नन्दगांव से चलकर यात्रा जाव, कोकिलावन, पाण्डवगंगा दर्शन करते हुए बठैन, पहुंचे जहां पर होली उत्सव का मनोरथ किया गया। तथा चरणगंगा, दहगांव, ब्रजभूषण जी के दर्शन, रासौली होते हुए कोटवन पहुंची। जहां पर हिण्डोला रास महोत्सव का उत्सव किया गया। तथा चमेलीवन रामलीला स्थल, क्षीरसागर, शेषशायी, पौड़ानाथ, के दर्शन करते हुए यात्रा ने कोटवन पर विश्राम किया है जहां पर ठाकुर जी की गौचारण लीला का मनोरथ किया गया। पुरूषोत्तम लाल महाराज ने कहा श्री यह प्राचीन लीलास्थलियां ठाकुर जी की विविध लीलाओं की साक्षी रही है। इनके संरक्षण के प्रति जन मानस में जनजागरण पैदा करें तथा सरकार से भी इन सभी लीला स्थलियों को संरक्षित स्थल घोषित करने की मांग करते हैं।
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