परंपरागत कंस मेले को लेकर चतुर्वेद और यादव समाज रहा उत्साहित
मथुरा। भारत प्रसिद्ध कंस मेला आज शहर में धूमधाम से सम्पन्न हुआ। चतुर्वेद और यादव समाज द्वारा अलग-अलग स्थानों पर दुराचारी राजा कंस का वध लाठी-डंडों से झूर-झूर कर किया गया। ‘ छज्जू लाये खाट के पाॅय, मार-मार लठ्ठन धुरि करि आये’ के उद्घोषों से कान्हा की भूमि गूंज उठी। आधी रात से देवोत्थान एकादशी परिक्रमा शुरू हो रही है। 21 कोसीय परिक्रमा मार्ग में परिक्रमार्थियों की सुख-सुविधा के लिए समाज सेवी संगठनों ने जहां व्यापक व्यवस्थाएं की है वहीं मथुरा नगर क्षेत्र में पालिका की लापरवाही के चलते परिक्रमार्थियों को अक्षय नवमी परिक्रमा की भांति गंदगी का सामना करना पड़ेगा।
मथुरा के दुराचारी राजा कंस का वध आज परम्परागत रूप से सम्पन्न हुआ। श्रीमाथुर चतुर्वेद परिषद द्वारा छत्ता बाजार स्थित तिवारी (हनुमान) गली से राजा कंस का विशालकाय पुतला आगरा रोड स्थित रंगेश्वर मंदिर के निकट कंस टीले तक चतुर्वेद समाज के लोग हाथों में चमचमाती लाठियों से घेर कर लाए, हाथी पर सवार होकर भगवान श्रीकृष्ण बलदेव कंस टीले पहुंचे और परम्परागत मल्ल विद्या अपनाते हुए कंस वध किया। भारी संख्या में मौजूद चतुर्वेद समाज के लोगों ने कंस के विशालकाय पुतले को लाठी डंडों से झूर डाला। इसके बाद शहर में कंस वध शोभायात्रा निकाली गई। जिसमें कंस पुतले के अवशेषों को भांग की तरंग में लाठी-डंडों से झूरते चतुर्वेद समाज के लोगों के उद्घोष ‘ छज्जू लायै खाट के पायै, मार-मार लठ्ठन धुरि करि आयै, वायी कंस की ढाड़ी लायै, वाहि कंस की मुछें लायै’’ की से गुंजायमान हो गई। देररात तक आगरा रोड स्थित जवाहरहाट से विश्राम घाट तक चतुर्वेद समाज की शोभायात्रा में भगवान श्रीकृष्ण के युग से जुड़ी विभिन्न झांकियां आकर्षण का केन्द्र बनी रही। शोभायात्रा में माथुर चतुर्वेद परिषद के मुख्य संरक्षक महेश पाठक, अध्यक्ष दिनेश पाठक, गिरधारी लाल पाठक, नवीन चतुर्वेदी, विश्वनाथ पाठक, राकेश तिवारी, उमाकांत चतुर्वेदी, मुकेश चतुर्वेदी संता, आशीष चतुर्वेदी, अजय चतुर्वेदी, प्रयाग नाथ चतुर्वेदी, आदि मौजूद थे। यादव समाज द्वारा जनरलगंज स्थित नगरपालिका से कंस वध शोभायात्रा निकाली गई। सदर स्थित रामलीला मैदान में यदुवंशियों ने दुराचारी राजा कंस का वध किया। इस मौके पर डा. देवेन्द्र यादव, भोला यादव, रविन्द्र यादव, रविन्द्र यादव, दिगम्बर सिंह, लाल बाबू यादव, बंटू यादव, आदि प्रमुख रूप से मौजूद थे।
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