मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान के लीलामंच पर आज रामलीला के दौरान राजा जनक ारा विश्वामित्र व राम, लक्ष्मण को स्वयंवर का निमंत्रण भेजा था। दोनों भाईयों के साथ विश्वमित्र जनकपुरी के समीप आ गये जब रामचन्द्र की मनोहरताई देखी तो भईया लक्ष्मण सहित अत्यन्त प्रसन्न हुये। बाबली, कुए, नदी, तालाब, नाना भांति के थे और उनका पानी अमृत तुल्य था। मणियों की सीढिया बनी हुयी थीं। एस के मद से मतवाले भौरे गुजार रहे थे। नाना प्रकार के पक्षी भांति भांति की सुंदर बोलियां बोल रहे थे। वर्ण के कमल खिल रहे थे। जानकी जी को दोनो भाई दिखाई नहीं दिये। नेत्र थक गये, पलकों ने गिरना छोउ़ दिया। देहत सुध भूल गयी। उसी समय लता भवन में राम लक्ष्मण दोनो भाई प्रकट हुये। दोनों भाई नील, पीत, कमल की समान शरीर वाले हैं। सिर पर सुंदर चिकने काले बाल, निके बीच फूलों की कलियों के गुच्छे लटकते हैं। माथे पर तिलक तथा चलने पर पसीने की एक बूंद शोभायमान है। हृदय में मणियों की माला लटक रही है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान के रंगमंच पर आज उपरोक्त लीलाआंे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पसादी चैधरी, दीनानाथ नरेन्द्र कुमार की ओर से रही। इस दौरान उम्रश अग्रवाल, बनवारी लाल गर्ग, सर्वेश शर्मा, जुगल, रामनारायण गर्ग, विनोद अग्रवाल, संजय, अनूप, नरेन्द्र दरवै बाले विपुल पारीख आदि उपस्थित थे।
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