मथुरा : एक तरफ़ किसान अपनी फसल चौपट होने के कारण आत्महत्या करने को मजबूर हैं तो वहीं दूसरी ओर मथुरा महोत्सव जारी है। हालांकि सांसद हेमामालिनी का दावा है कि इस महोत्सव से हुई आमदनी से गरीब किसानों की मदद की जाएगी।
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मथुरा : एक तरफ़ किसान अपनी फसल चौपट होने के कारण आत्महत्या करने को मजबूर हैं तो वहीं दूसरी ओर मथुरा महोत्सव जारी है। हालांकि सांसद हेमामालिनी का दावा है कि इस महोत्सव से हुई आमदनी से गरीब किसानों की मदद की जाएगी।
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मथुरा : एक तरफ़ किसान अपनी फसल चौपट होने के कारण आत्महत्या करने को मजबूर हैं तो वहीं दूसरी ओर मथुरा महोत्सव जारी है। हालांकि सांसद हेमामालिनी का दावा है कि इस महोत्सव से हुई आमदनी से गरीब किसानों की मदद की जाएगी। भारी विरोध के बावजूद आयोजित मथुरा महोत्सव के खिलाफ समाजवादी पार्टी व अन्य दलों द्वारा बहिष्कार किया जा रहा है। महोत्सव का उद्घाटन करने आए प्रदेश के पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह कार्यक्रम स्थल नहीं पहुंचे। मथुरा महोत्सव का विरोध करते हुय सपा कार्यकर्ताओ ने हाईवे पर पुतला दहनकर विरोध प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के वीआईपी पास के वितरण को लेकर भाजपा के कई कार्यकर्ता भी विरोध प्रदर्शनों में मौजूद थे। इन पार्टी कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि चाटुकारों और चहेतों को पास उपलब्ध कराए जा रहे हैं। दूसरी ओर, कार्यक्रम स्थल पर भारी अव्यवस्थाएं देखी गईं। पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं थी। स्टालों पर उपलब्ध पानी की बोतलें 30 रुपये तक बेची जा रहीं थीं। चाऊमीन, छोले-कुल्चे, पाव-भाजी जैसी खाने-पीने की चीजें काफी महंगी और खराब गुणवत्ता की देखी गईं।
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जम्मू-कश्मीर में श्री अमरनाथ की पवित्र यात्रा हिन्दू तीर्थ यात्रियों की आस्था का प्रतीक है। यह यात्रा हर वर्ष सावन के महीने में शुरू होती है। देश के विभिन्न भागों से आए लाखों श्रद्धालु दक्षिण कश्मीर स्थित श्री अमरनाथ जी की गुफा में प्राकृतिक रूप से बर्फ से बने शिवलिंग की अराधना करते हैं। इस यात्रा का काफी महत्व है इसलिए यह जरूरी है कि प्रत्येक श्रद्धालु को यात्रा के इतिहास के बारे में सतही जानकारी हो। यात्रा के दौरान बालटाल और पहलगाम के रास्ते पवित्र गुफा तक जाने वाले मार्ग पर स्थित विभिन्न धार्मिक स्थलों की जानकारी लेना भी जरूरी है। यहां यह बताना उचित होगा कि बहुत कम लोग अनंतनाग जिले में भगवान शिव के एक अन्य तीर्थ स्थल छोटा अमरनाथ जी के बारे में जानते होंगे जो बिजबेहरा कस्बे से करीब सात किलोमीटर दूर छोटे से गांव थजवार में स्थित है। यहां पहाड़ की चोटी पर भगवान शिव की एक गुफा है जहां सावन की पूर्णिमा के दिन भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। इसी दिन दो महीने तक चलने वाली वार्षिक अमरनाथ यात्रा समाप्त हो जाती है। ऐसा माना जाता है कि बूटा मलिक नाम के एक मुस्लिम चरवाहे को एक ऋषि ने कोयले का एक बोरा दिया। घर पहुंचने के बाद मलिक ने पाया कि बोरे में सोना भरा हुआ है। वह इतना खुश हो गया कि खुशी के मारे ऋषि का आभार व्यक्त करने के लिए वापस उनके पास पहुंचा। वहां उसने एक चमत्कार देखा। उसे एक गुफा देखकर अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ। तभी से पवित्र गुफा वार्षिक तीर्थ यात्रा का स्थान बन गई। एक पौराणिक कथा के अनुसार इस गुफा में भगवान शिव ने माता पार्वती को समस्त सृष्टि की रचना और मानवता के लिए मोक्ष के तरीकों का रहस्य बताया था। कबूतरों के एक जोड़े ने उनकी बातचीत सुन ली और तभी से वे अमर हो गए। कबूतरों के इस जोड़े ने गुफा को अपना चिरकालिक स्थान बना लिया और आज भी गुफा में श्रद्धालुओं को दो कबूतर बैठे हुए दिखाई देते हैं। श्री अमरनाथ जी की यात्रा का सबसे छोटा मार्ग कश्मीर घाटी के गंदेरबल जिले में बालटाल के रास्ते है। बालटाल गर्मियों की राजधानी श्रीनगर से करीब 60 किलोमीटर दूर और प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सोनमर्ग से करीब 15 किलोमीटर दूर है। बालटाल के रास्ते जाने वाले श्रद्धालुओं को खड़ी चट्टानों के साथ संकरे रास्तों से गुजरना पड़ता है। तीर्थयात्रियों को पवित्र गुफा तक पहुंचने से पहले करीब तीन किलोमीटर बर्फीले रास्ते से जाना पड़ता है। अकसर देखा गया है कि इस रास्ते पर मौसम खराब हो जाता है और वर्षा के कारण श्रद्धालुओं के लिए परेशानी खड़ी हो जाती है। खराब मौसम के बावजूद श्रद्धालुओं का दृढ़ विश्वास नहीं डगमगाता। हालांकि इस मार्ग से कम लोग जाते हैं। अधिकतर श्रद्धालु पहलगाम के रास्ते जाने का विकल्प चुनते हैं। बालटाल के रास्ते जाने पर श्रद्धालुओं को गंदेरबल जिले में स्थित माता खीर भवानी मंदिर में स्थित पवित्र झरने का दर्शन करने का अवसर मिल जाता है। ऐसा माना जाता है कि यदि कोई अप्रिय घटना होनी हो तो इस झरने का रंग बदल जाता है। पिछले वर्ष जून 2014 में ऐसी घटना देखने को मिली जब झरने का रंग बदलकर लाल हो गया और इसके बाद सितम्बर 2014 के पहले सप्ताह में कश्मीर घाटी में बाढ़ आई। पहलगाम के रास्ते से श्रद्धालुओं को रघुनाथ जी मंदिर के दर्शन करने के साथ-साथ अनंतनाग जिले में स्थित मार्तंड के सूर्य मंदिर को देखने का अवसर मिलता है। विश्व प्रसिद्ध पहाड़ी स्थल, पहलगाम यात्रा का आधार शिविर है जो श्रीनगर से 100 किलोमीटर दूर है। यहां से श्रद्धालु सड़क के रास्ते अथवा पैदल जा सकते हैं। श्रद्धालु प्रसिद्ध लिड्डर नदी के तट पर स्थित भगवान शिव के मंदिर तक पहुंचते हैं। भगवान शिव का एक अन्य प्राचीन मामल मंदिर लिड्डर नदी के साथ लगे पहाड़ पर स्थित है और देखने लायक है। पहलगाम बर्फ से ढके पहाड़ों और घने जंगलों से घिरा हुआ है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव ने अपने वाहन नंदी को यही छोड़ दिया था और वे पवित्र गुफा की ओर प्रस्थान कर गए थे। इस स्थान का नाम बेल गांव था जो समय बीतने के साथ पहलगाम बन गया। आधार शिविर पहलगाम से यात्रा शुरू होने पर पहला पड़ाव 16 किलोमीटर दूर चंदनवाड़ी में है। चंदनवाड़ी जाने वाली सड़क पर गाड़ियां जा सकती है। इस स्थान तक पहुंचने के लिए तीर्थयात्री उचित दरों पर उपलब्ध सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल कर सकते हैं। लिड्डर नदी के किनारे का दृश्य बेहद रमणीक है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव ने इस स्थान पर अपने माथे पर चंदन पाउडर मला था इसलिए इसका नाम चंदनवाड़ी पडा। चंदनवाड़ी पहुंचने के बाद यात्रा काफी कठिन और चुनौती भरे मार्ग से पिस्सू टॉप की तरफ बढ़ती है। हर हर महादेव का जाप करते हुए इस कठिन मार्ग से गुजरते हुए किसी का भी मन आनंदित हो उठता है और कठिन रास्ता भी आसान लगने लगता है। खड़ी चढ़ाई वाले यात्रा के इस दौर को पूरा करने के बाद श्रद्धालु कहीं रूककर आराम करते हैं। शेषनाग अगला पड़ाव है जहां तीर्थयात्री पवित्र झरने में स्नान करते हैं और एक रात रूकते हैं। ऐसा माना जाता है कि शेषनाग के पवित्र झरने में स्नान करके सभी पाप धुल जाते हैं। माना जाता है कि भगवान शिव ने पवित्र गुफा की ओर जाते समय अपने शेषनाग को इसी झरने पर छोड़ दिया था। यह स्थान वास्तव में बर्फ की चोटियों से घिरी झील है जिसकी शक्ल सांप के सिर की तरह दिखाई देती है। पवित्र यात्रा का अगला चरण महागुन टॉप की तरफ टेढ़ा-मेढ़ा खड़ी चढ़ाई वाला मार्ग है। अधिक ऊँचाई और ऑक्सीजन की कमी होने के कारण इस स्थान पर श्रद्धालुओं को सांस लेने में दिक्कत होती है। कुछ श्रद्धालुओं को उबकाई आने लगती है। सूखे मेवे और खट्टी-मीठी वस्तुएं जैसे नींबू ऐसी स्थिति में लाभदायक हो सकता है। पूरे रास्ते पर श्रद्धालुओं के लिए चिकित्सा सुविधाएं मुफ्त में उपलब्ध है। आगे बढ़ने पर रास्ता नीचे की तरफ पोष पथरी के घास के मैदानों की ओर चला जाता है जो जंगली सुगंधित फूलों और जड़ी बूटियों से घिरा हुआ है। लेकिन कहा जाता है कि जो भी यहां कुछ समय रूक जाता है वह सुगंध के कारण गहरी नींद में सो जाता है। अत: यह सलाह दी जाती है कि इस स्थान पर अधिक समय नहीं बिताए और अगले पड़ाव पंचतरणी की तरफ बढ़े। पंचतरणी बर्फ से ढकी पाँच चोटियों से घिरा है जहां तीर्थयात्री आराम करते हैं और रात गुजारते हैं। अगले दिन यात्रा पवित्र अमरनाथ गुफा के लिए शुरू होती है यहां अमरावती और पंचतरणी का संगम होता है। श्रद्धालु पवित्र गुफा में दर्शन से पहले अमरावती में स्नान करते हैं। साधु और तीर्थयात्री श्रीनगर में दशनामी अखाड़े से पैदल छड़ी मुबारक यात्रा शुरू करते हैं। आवश्यक अनुष्ठानों के बाद छड़ी मुबारक पवित्र गुफा की तरफ बढ़ने से पहले प्रसिद्ध शंकराचार्य मंदिर और दुर्गानाग मंदिर जाती है। पैदल यात्रा के दौरान अवंतीपुरा मंदिर, बिजबेहरा के शिव मंदिर, रघुनाथ जी मंदिर और अनंतनाग में मट्टन स्थित मार्तंड सूर्य मंदिर पर धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। इन अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालुओं को भजन-कीर्तन करते देखा जा सकता है और पूरा वातावरण जीवंत हो उठता है। छड़ी मुबारक सावन पूर्णिमा (रक्षा बंधन) के दिन श्री अमरनाथ जी के दर्शन करती है। इसी के साथ पवित्र यात्रा का समापन हो जाता है। 2014 में करीब 3,72,909 यात्रियों ने श्री अमरनाथ जी की यात्रा की थी। तीर्थयात्रियों को यात्रा करते समय कुछ एहतियाती उपाय करने चाहिए। कठिन मार्ग होने के कारण तीर्थयात्री संतुलन बनाए रखने के लिए अपने हाथ में एक छड़ी रखें और स्पोर्ट्स शूज़ पहनें। यात्रा की चुनौतियों का सामना करने के लिए यात्री अपने पास कम समान रखें और एक प्राथमिक उपचार किट लेकर जाएं। ठंडे मौसम से बचने के लिए गर्म कपड़े ले जाना जरूरी है क्योंकि रास्ते में मौसम बदलता रहता है। पिछले कुछ वर्षों में अमरनाथ यात्रियों की जो जन-हानि हुई हैं उसका एकमात्र कारण यात्रियों के पास पर्याप्त गर्म कपड़ों का नहीं होना था। यात्रा के लिए पंजीकरण और आवश्यक उपायों की जानकारी श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड ने अपनी वेबसाइट Shriamarnathjishrine.com पर दी हुई है। वेबसाइट में आवेदन फॉर्म और बैंक की शाखाओं की पूरे पते के साथ राज्यवार सूची है जिस पर यात्री अपना पंजीकरण करा सकते हैं।
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सौख के गांव सीगांपट्टी में शिविर लगाकर किसानों को मुआवजे के चेक वितरित करते समाज कल्याण विभाग के एडीओ आर डी शमा, भरतसिंह कुन्तल, हेमराज सिंह व अन्य सौंख समाचार। कस्बा के समीपवर्ती गांव सीगांपट््टी में शुक्रवार को पूर्व माध्यमिक विद्यालय सीगांपट्टी में श्वििर लगाकर किसानों को मुआवजे के चेक बांटे। समाज कल्याण विभाग के एडीओ आर डी शर्मा के मुताबिक शक्रवार को ग्राम पंचायत सीगांपट्टी में शिविर लगाकर 400 किसानों को करीब 41 लाख रूपये के मुआवजे के चेक बांटे गये। इस मौके लेखपाल शिवचरन, भरतसिंह कुन्तल, प्रधान प्रतिनिधि वीरपाल सिंह, हेमराज सिंह कुन्तल, एनपीआरसी भगवान सिंह, नरेन्द्र सिंह, पूरनसिंह, कर्मवीर सिंह, सुमित मल्होत्रा, विकास यादव, बलवीर सिंह, बदन सिंह, चतुरसिंह, बच्चूसिंह, पुष्पेन्द्र सिंह आदि उपस्थित थे।
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मथुरा : जनपद क्षेत्र में बारिश व ओलावृष्टि से 90 फीसदी तक फसल बर्बाद हो चुकी है और मुआवजा पाने के लिए किसान लगातार दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।
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मथुरा : जनपद क्षेत्र में बारिश व ओलावृष्टि से 90 फीसदी तक फसल बर्बाद हो चुकी है और मुआवजा पाने के लिए किसान लगातार दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। शुक्रवार दोपहर को विकास खण्ड चौमुहां के दलोता में एक अन्य किसान नत्थो की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। गरीबी से जूझ रहे इस किसान की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई। फसल में लागत कर्ज लेकर लगाई गई थी। छाता के नजदीक गांव जलालपुर के एक किसान राम प्रसाद ने आत्महत्या करने की धमकी दी है। उनका आरोप है कि लेखपाल मनमानी कर रहे हैं और पीड़ितों को मुआवजे के चेक नहीं दिए जा रहे हैं। फसल बर्बाद होने के बाद अब पशुओं के चारे की भी समस्या खड़ी हो गई है। पशु विभाग के आंकड़े बताते हैं कि जनपद में आठ लाख से अधिक पशु हैं। इनमें दुधारू पशुओं की संख्या अधिक है। अगर इन पशुओं को समय पर चारा नहीं मिला तो जनपद में दूध की कमी आ जाएगी। ऐसे हालत में पशुपालक पशुओं को कट्टीघरों में बेचने पर भी मजबूर हो जाएंगे। कुछ किसानों ने पशुओं की संख्या में कमी आने की बात भी कही है। दूसरी ओर, जनपद क्षेत्र के ही छटीकरा मार्ग स्थित अक्षयपात्र के वृंदावन चंद्रोदय मंदिर परिसर में 25 और 26 अप्रैल को ‘मथुरा महोत्सव’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। सांसद हेमामालिनी द्वारा कराए जा रहे इस आयोजन में बॉलीवुड की कई नामचीन हस्तियां भाग लेंगी। पहले दिन 25 अप्रैल को हेमामालिनी कृष्ण वंदना प्रस्तुत करेंगी। ईशा देओल, चांदनी शर्मा और ब्रज के कलाकार मयूर नृत्य और कैलाश खेर गायन प्रस्तुति देंगे। वहीं 26 अप्रैल को श्रद्धा कपूर, अदिति राव, गोविंदा, जैकलीन फर्नाडीज, अर्जुन कपूर, आयुष्मान आदि कृष्ण लीलाओं पर नृत्य और शंकर महादेवन गायन की प्रस्तुति देंगे। इससे पूर्व, यह आयोजन 11 और 12 अप्रैल को इसी परिसर में होना था जिसे भारी जन विरोध के चलते स्थगित कर दिया गया था।
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मथुरा। जिलाधिकारी राजेश कुमार द्वारा पल्स पोलियो अभियान विशाल रैली को झंडी दिखाकर रवाना किया जायेगा। सघन पल्स पोलियो प्रतिरक्षण अभियान के प्रचार प्रसार हेतु एक विशाल रैली का आयोजन दिनांक 24 अपै्रल को प्रातः 10.30 बजे से राजकीय इण्टर काॅलेज से किया जायेगा। विभिन्न विद्यालयों के कक्षा 01 से 10 तक के सभी छात्र छात्रायें इस रैली में भाग लेंगी। रैली राजकीय इण्टर काॅलेज मथुरा से प्रारम्भ होकर होलीगेट होते हुए जिला चिकित्सालय मथुरा में सभा के रूप में परिवर्तित हो जायेगी।
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राया। विद्युत विभाग की लापरवाही व भ्रष्टाचार की वजह से कस्बे की जनता परेशान है। कस्बे में आये दिन तार टूटते रहते है। जगह जगह बिजली के खम्बें व विद्युत लाइनें जर्जर अवस्थाओं में पहुँच चुके है। कस्बे के किसी न किसी फीडर पर हर समय कोई न कोई तार टूटता रहता है। अथवा कही न कही अकसर फाॅल्ट हो जाता है। विद्युत विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों की लापरवाही व उदासीन रवैये के चलते यहीं छोटे छोटे फाॅल्ट बमुश्किल सही हो पाते है। एक ही दिन में दर्जनों बार शट डाउन लिया जाता है। जब इन विद्युत समस्याओं की शिकायत विभागीय लोगों से की जाती है तो विद्युत कर्मचारी व अधिकारी फोन नही उठाते है। विद्युत इस गम्भीरतम समस्या केा लेकर गौ रक्षा सेवा समिति के अध्यक्ष राकेश बंसल ने कस्बे के अवर अभियन्ता से जब शिकायत की तो अवर अभियन्ता साहब कहना था कि क्या मैं बिजली ठीक करूँगा कर्मचारियों से कहो व बिजली घर जाकर शिकायत करो। जब स्थानीय लोगो द्वारा बिजली घर जाया जाता है। तो वहाँ कोई भी कर्मचारी शिकायत सुनने के लिए तैयार नही होता। क्षेत्र में कई ट्रांसफार्मर भी विद्युत कर्मचारियों की लापरवाही से फुंका पड़े है। लेकिन अभी तक विभागीय लोगों ने उनकी सुधि नही ली है। सिर्फ वैकल्पिक व्यवस्था बना कर काम चला रहे है। विद्युत विभाग में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। चाहें आप नया कनैक्शन ले रहे हो या पुराना कनैक्शन कटवाना है। या केविल सही करानी कोई कार्य बिना लेनदेन के नही होता है। मीटर लगवाने के नाम पर अवैध वसूली चल रही है। बिजली कब आती है कब चली जाती है कोई पता नही है। बिजली के बिल जमा कराने में एक या दो महीने की देरी हो जाती है तो कनैक्शन कटाने या रिपोर्ट लिखाने की धमकी देकर अवैध वसूली की जाती है। भारतीय गौरक्षा समिति के अध्यक्ष राकेश बंसल ने कहा है। कि अब भारतीय गौरक्षा समिति इसका विरोध करेगी अगर कोई कर्मचारी रिश्वत लेते हुए या अवैध वसूली करते पकडा गया तो उसकी शिकायत उच्च अधिकारियों के सामने मय सबूत की जायेगी।
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मथुरा। भूमि अधिग्रहण के विरोध में अखिल भारतीय काग्रेंस कमेटी द्वारा आयोजित रैली की सफलता और युवा नेता राहुल गान्धी द्वारा दो माह के अज्ञातवास के बाद नये रूप में किसानों की पीड़ा को लेकर उनके साथ केन्द्र सरकार की किसान विरोधी नीतियों के विरोध में जिस प्रकार काग्रेंस के संघर्ष करने का आव्हान किया गया। उससे कांग्रेंस के कोने कोने के कार्यकर्ताओं में ऊर्जा का संचार हुआ हैं। रैली में जनपद से भाग लेकर लौटे हजारों कार्यकर्ता उत्साह से परिपूर्ण नजर आ रहे हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि काग्रेंस अब राहुल गान्धी के नेतृत्व में कुछ समय के बाद अपने पुराने स्थान में सफल होगी। रैली में भाग लेकर लोटे जिलाध्यक्ष आबिद हुसैन व शहर अध्यक्ष मलिक अरोड़ा ने कहा कि राहुल गान्धी ने अज्ञातवास के दौरान काग्रेंस की पूर्व में हुई पराजय पर गहनता से मन्थन कर पुनः किसान मजदूरों के हितों में सडकों पर उतर कर सघर्ष करने का निर्णय लिया हैं। बहुत समय के बाद का्रगेंस अब पूरे जोश खरोश में नजर आर रही हैं। नेताद्वय ने कहा कि काग्रेंस किसान विरोधी भूमि अधिग्रहण बिल का पूरी ताकत के साथ विरोध करेगी तथा कांग्रेंस कार्यकर्ता केन्द्र की भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कथनी और करनी का अन्तर जनता के बीच जाकर बतायेगे। दिल्ली में आयोजित रैली में भाग लेने वालों में बिहारी कान्त तिवारी, लियाकत कुरैशी, विनोद शर्मा, अब्दुल जव्वार, महेन्द्र गौतम, मास्टर प्रताप सिंह, जितेन्द्र मणि, कीर्ति कौशिक, विनेश सनवाल, बिहारी लाल, दीपक वर्मा, राजरानी निमेष, नीलम कुलश्रेष्ठ, अजय शर्मा, शिखा चैधरी, कमलेश चैधरी, सिम्मी बेगम, दिनेश विन्दल, पूरन प्रकाश कौशिक, एमएम शर्मा, निशान्त अहमद, रितेश वाल्मीकि, चैध्री ओमवीर सिंह, प्रदीप शर्मा, आरके मैसी आदि थे।
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मथुरा। विप्रकुल के जनक भगवान महर्षि परशुराम की जयन्ती ब्रम्ह समाज द्वारा धूमधाम से मनाई गई। इसी क्रम में अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर भगवान परशुराम का अभिषेक कर पूजन किया गया। श्री परशुराम शोभायात्रा समिति के तत्वाधान में आयोजित गान्धी पार्क में अभिषेक समिति के अध्यक्ष पं0 रामगोपाल शर्मा ने अभिषेक कर पूजन किया। इस अवसर पर पूर्व पालिकाध्यक्ष श्याम सुन्दर उपाध्याय, रमाकान्त गोस्वामी, संजय शर्मा, पन्नालाल गौतम, संजय शर्मा, देवेन्द्र शर्मा, सर्वेश शर्मा, ब्रजभान गोस्वामी, रमेशदत्त शर्मा, शैलेन्द्र शर्मा आदि ने भगवान परशुराम का पूजन किया। तत्पश्चात आयोजित बैठक में प्रतिवर्ष निकलनें वाली भगवान परशुराम की शोभायात्रा निकाले जाने पर मन्थन किया गया। बैठक में विचार विमर्श के बाद 17 मई को भगवान परशुराम की भव्य शोभायात्रा निकाले जाने का निर्णय किया गया। जिसकी सभी व्रिप्र बन्धुओं ने स्वागत किया। शोभायात्रा समिति के अध्यक्ष पं0 रामगोपाल शर्मा ने बताया कि विगत वर्षो की भांति भगवान परशुराम की शोभायात्रा 17 मई को वृन्दावन गेट, बाटीवाली कुन्ज से सांय चार बजें भव्य रूप से प्रारंभ होगी तथा शहर भ्रमण कर डीगगेट स्थित द्वारिका पेड़ा वालों के प्रतिष्ठान पर पहुंचेगी। जहाॅ भगवान परशुराम की आरती उतारी जायेगी। शोभायात्रा को भव्यता प्रदान करने के लिए यात्रा मार्ग में जगह जगह स्वागत द्वारा बनाये जायेगे। बैठक में पंडित रामगोपाल शर्मा, राधा बिहारी गोस्वामी, आचार्य मूलचन्द्र शर्मा, प्रेम बिहारी शास्त्री, अनिल स्वामी, गोपाल आचार्य, राजीव आचार्य, बप्पन जी, केके शर्मा, देवेन्द्र शर्मा, शैलेन्द्र शर्मा, डा0 एसपी गोस्वामी, रामनरेश गौतम, कुन्ज बिहारी भारद्वाज, रूपकिशोर शर्मा, गणेश चन्द्र शर्मा, अनिल शर्मा, सदानन्द, दयानन्द शर्मा, अभिषेक मिश्रा, बीनू पंडा, रामबाबू पंन्डा, अजय शर्मा, घनश्याम हरियाणा, महेश व्यास, पं0 भोला शर्मा, आयुष शर्मा, अन्श शर्मा, अमित भारद्वाज राजेश शर्मा, राज नारायण शर्मा, योगेश शर्मा, उमेश शर्मा, डा0 मोहिनी शर्मा, वन्शी शर्मा आदि थे। वहीं दूसरी ओर सर्वोदयी ब्रम्हाण विकास संस्थान द्वारा परशुराम जयन्ती के अवसर पर स्थानीय वाटीवाली कुन्ज में परशुराम जयन्ती मनाई गई। इस अवसर पर भगवान परशुराम की पूजा अर्चना के पश्चात संस्थान के अध्यक्ष पं0 सोहनलाल शर्मा ने कहा कि ब्रहामणों के प्रमुख कार्य में दान लेना और देना, पढ़़ना और पढ़ाना, यज्ञ करना व कराना, प्रमुख हैं। और ब्राहमण समाज इसी के लिए जाना जाता हैं। उन्होंने कहा कि सर्वोदय ब्रम्हामण संस्थान महर्षि परशुराम के बताये मार्ग पर चलकर असहाय विप्रों को चिकित्सा, शिक्षा, व गरीब कन्याओं की शादी में समय समय पर सेवा करता हैं। इस अवसर पर रमाकान्त गोस्वामी ने परशुराम के जीवन चरित्र पर विस्तार से प्रकाश डालतें हुए सभी विप्र बन्धुओं से उनके बताये सद्मार्ग पर चलनें की अपील की। कार्यक्रम में अनिल शर्मा, योगेश आवा, ब्रजभान गोस्वामी, कृष्ण कुमार शर्मा, देवेन्द्र शर्मा, रमेशदत्त शर्मा, दिवाकर आचार्य, राजेन्द्र शर्मा, कृष्ण मुरारी दीक्षित, घनश्याम हरियाणा, देवकी नन्दन गौड़ वीएल तिवारी, रामनरेश गौतम, सुधाकर आचार्य, डालचन्द्र, अनिल शर्मा, कृष्ण कुमार शर्मा, मुरारीलाल जोयशी, डा0 जमुना शर्मा, पंकज मिश्रा आदि ने भग्रवान परशुराम के चित्र पर माल्यार्पण व दीप जलका अपनी पुष्पाजंलि अर्पित की। कार्यक्रम का संचालन नारायण शर्मा ने किया।
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