मथुरा

वृन्दावन। पालिकाध्यक्ष मुकेश गौतम वार्ड नं0 15 में इंटरलाॅकिंग सड़क एवं सीवर लाइन का शिलान्यास वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य नारियल फोडकर किया। पालिकाध्यक्ष मुकेश गौतम द्वारा नगर पालिका परिषद वृन्दावन के राज्य वित्त आयोग की धन राशि से वार्ड नं0 15 में अखण्ड लक्ष्यधाम के बराबर वाली गली में जगदम्बा भवन से परिक्रमा मार्ग मैन रोड तक एवं राधारानी अन्नक्षेत्र से साध्वी दिव्य चेतना तक सीवर लाइन एवं इंटरलाकिंग सड़क निर्माण कार्य का भूमि पूजन कर शिलान्यास किया गया। इससे पूर्व क्षेत्र के लोगों ने माल्यार्पण कर पालिकाध्यक्ष एवं सभासदों का भव्य स्वागत किया। पालिकाध्यक्ष मुकेश गौतम ने कहा कि वृन्दावन एक धार्मिक नगरी हैं, यहां देश विदेश लाखों श्रद्वालु दर्शनार्थ हेतु यहां पधारते हैं, उनके विश्वास को कायम रखना ही हमारा कर्तव्य है, वृन्दावन नगर का चहुंमुखी विकास कराया जाना ही हमारी प्रथम प्राथमिकता है सडक जैसी समस्याओं का पूरे क्षेत्र में पूरी तरह से समाधान कराये जाने का पूर्णतः प्रयास किया जाएगा। विकास कार्यों में किसी भी क्षेत्र के साथ कोई भी भेदभाव नहीं किया जाएगा। इस मौके पर पालिकाध्यक्ष मुकेश गौतम ने कहा कि वृन्दावन नगर को विकासशील बनाने के लिए वह स्वयं कृत संकल्पित हैं। नगर की जनता द्वारा उन्हें जो भी दायित्व सौंपे गए हैं, वह उनका निष्पक्षता एवं ईमानदारी पूर्वक निर्वहन कर रहे हैं। पालिकाध्यक्ष ने कहा कि आगामी समय में वृन्दावन नगर में बहुत सी सड़कों का शिलान्यास किया जायेगा जिससे कि स्थानीय नागरिक एवं बाहर से आने वाले श्रद्वालु को कोई भी परेशानी नहीं होगी। इस अवसर पर सभासद श्रीमती राधादेवी, विष्णु प्रसाद शर्मा, रविन्द्र यादव, पं0 बिहारी लाल वशिष्ठ, पं0 छैल विहारी शर्मा, प्रदीप गोस्वामी, रमेशचन्द्र विधि शास्त्री, बालकिशन शर्मा, रमेशचन्द्र शर्मा, स्वामी गयानन्द, हरियानन्द, राजेश रावत, मोहन श्याम, धनीराम गौतम, रमेश चन्द्र सैगल, मौहित पटेल आदि गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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गोवर्धन। भीमराव अम्बेडकर विश्व विद्यालय आगरा ने ललित शर्मा को पीएचडी की उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया है। श्री शर्मा ने अपनी इस उपलब्धि से मथुरा का नाम रोशन किया है। आगरा विश्व विद्यालय से डा0 विपिन मंहलोत्रा हेड एपलाईड बिजनिस इकाॅनोमिक्स एसआरके पीजी काॅलेज फिरोजाबाद के निर्देशन में काॅम्प्रेटिव स्टडीआॅफ द बर्किग इन पब्लिक सैक्टर पंजाव नेशनल बैंक 2011 के टाॅपिक पर पीएचडी की उपाधी से सम्मानित किया गया है। वर्तमान में डा0 ललित शर्मा गोवर्धन के प्रहलाद मुखिया महाबिद्यालय में प्राचार्य पद पर कार्यरत है।

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श्रीकृष्ण जन्म स्थान के निकट रेलवे क्रॉसिंग पर बना ओवरब्रिज आवागमन खुलने के एक माह में ही ध्वस्त हुआ। विना जांच पड़ताल के ही आवागमन के लिये खोल दिया  विद्युत कार्य की आड़ में सेतुनिगम जुटा मरम्मत कार्य में मथुरा। विकास कार्यों के तहत लम्बे समय की सोच कर भविष्य की योजनाएं सरकार बनाती है। इन योजनाओं में सड़क, पुल, व सरकार द्वारा निर्माण कार्य कराये जाते हैं। लगभग पचास वर्षों की लम्बी अवधि के लिये पुलों का निर्माण कार्य किया जाता है लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम प्रदेश सरकार का एक ऐसा उपक्रम है जो अपने प्रदेश में ही नही देश के तमाम प्रान्तों में भी पुलों का निमार्ण करता है। जिसको अन्तराष्ट्रीय मानकों के अनुसार प्रमाणित भी किया गया है लेकिन कुछ नौसिखिये इन्जीनियरों के और प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी के कारण आम जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का इस्तेमाल, गलत डिजायन और अनुभव हीन इन्जीनियरों के कारण कार्यदायी संस्था व सरकार की फजीहत हो ही जाती है। नेशनल हाइवे-2 से श्री कुष्ण जन्म स्थान जाने के लिये बीच में रेलवे लाइन पड़ती है जिसको पार करके लोग आवागमन करते थे साथ ही तीर्थयात्रियों की कार बस इसी रेलवे लाइन को पार करके श्री कृष्ण जन्म स्थान तक आती थी। इस रेलवे फाटक संख्या 528 पर दिल्ली मुम्बई, दिल्ली चैन्नई समेत देश के तमाम हिस्सों को जोडने के लिये रेल गाडियों का आवागमन होता है। अति व्यस्त रेलवे ट्रेक के कारण इस रेलवे फाटक को पार करने के दौरान सैकड़ों लोगों ने अब तक अपने प्राणों की आहुतियां दी हैं। अति व्यस्त रेलवे ट्रेक के कारण यहां यात्रियों देशी-विदेशियों को लम्बे जाम के बाद जन्मस्थान तक आना पड़ता था। लम्बे इन्तजार के वाद स्थानीय लोगों के और क्षेत्रीय विधायक के प्रयास के वाद इस पुल का निमार्ण कार्य शुरू हो सका। उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम को इस ओवरब्रिज के निमार्ण की जिम्मेदारी दी गई। लगभग चार वर्षों में बन कर तैयार हुआ यह ओवरब्रिज विधिवत लोकार्पण के विना ही आवागमन के लिये खोल दिया गया पिछले महीने प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को इस पुल का लोकार्पण करना था व्यस्त कार्यक्रम के चलते इसका लोकार्पण अधर में लटक गया। कुछ समय वाद ही पुल का एक हिस्सा उपर से नीचे आ गिरा जिससे कोई हताहत तो नही हुआ लेकिन इस ओवरब्रिज के निमार्ण की कलई अवश्य खुल गई। 4 अप्रेल को तेज वर्षा आंधी तूफान के वाद गोविंद नगर रेलवे फाटक संख्या 528 पर वना ओवर ब्रिज का लेटंर गिर गया जिसमें कृष्ण जन्म भूमि को जाने वाली दो महिला श्रद्धालु व विजय शर्मा नामक युवक घायल होने से बाल बाल बच गये। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस ओवर ब्रिज निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया है इसी कारण ऐसा हुआ है इस ओवर ब्रिज निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग किया जाने की शिकायत पहले भी अधिकारियों से की जा चुकी हैं लेकिन किसी भी अधिकारी ने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम द्वारा बनाया गया उक्त ओवरब्रिज आवागमन के लिए विधिवत खोले जाने से पूर्व ही ध्वस्त होने लगा है और उसमें जगह-जगह पड़ चुकी दरारें यह बता रही हैं कि यह किसी भी दिन बड़े हादसे का कारण बन सकता है। इस पर बेफिक्र होकर दौड़ रहे वाहन चालकों को इस बात की जानकारी तक नहीं है कि भ्रष्टाचार के गारे से बने करीब पचास वर्ष की मियाद वाले इस ओवरब्रिज ने तो 50 दिन में ही सेतु निगम की असलियत बता कर रख दी है।  ओवरब्रिज की सड़क का एक हिस्सा जहां टूटकर गिर गया वहीं कई स्थानों पर दरारें आ गईं। ऐसे में सेतु निगम के स्थानीय प्रोजेक्ट मैनेजर तथा अभियंताओं के माथे पर बल पड़ना स्वाभाविक था। करीव 38 करोड़ों की लागत से बने लगभग 900 मीटर लंबे इस ओवरब्रिज की खामियां तथा अपना भ्रष्टाचार छिपाने के लिए सेतु निगम के स्थानीय अधिकारियों ने आनन-फानन में ओवरब्रिज पर सावधान! विद्युत कार्य प्रगति पर है का स्टॉपर लगाकर आवागमन बंद कर दिया और जहां से ओवरब्रिज की सड़क ध्वस्त हुई थी उसकी मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया। उस हिस्से को मोटी पाॅलीथिन से ढ़क दिया गया और पाॅलीथिन के उपर कुछ विद्युत केबिलों को ड़ाल कर यह दिखाने का प्रयास किया गया कि यहां विद्युत कार्य किया जा रहा है और ठीक इसी स्थान के नीचे चार बड़ी बड़ी सेटरिंग को नट वोल्ट के सहारे जोड़ कर सड़क पर ड्रिल करके इन सेटरिंग को उपर की तरफ लगाया गया जिसमें सीमेन्ट कोंकरीट का घोल डाल कर उसके सेट होने तक ओवर ब्रिज पर पहरे के लिये। सेतु निगम के कर्मचारियों को लगा दिया गया। जो दिन रात उस हिस्से की देख रेख करते पाये गये। मानक के अनुसार पचास वर्षों तक चलने वाला ओवरब्रिज मात्र 50 दिनों से पहले ही क्षतिग्रस्त हो जाने पर अन्य तकनीकी जानकारों का कहना है कि इसका एकमात्र कारण मानक के अनुरूप निर्माण सामग्री का इस्तेमाल न किया जाना और उसके अनुपात में भारी हेरफेर किया जाना ही हो सकता है। दूसरे किसी कारण से कोई ओवरब्रिज इतने कम समय में क्षतिग्रस्त हो ही नहीं सकता।     गौरतलब है कि देश के सर्वाधिक व्यस्त और सबसे अधिक तीव्र गति वाले रेल मार्ग पर बने गोविंद नगर ओवरब्रिज को अनौपचारिक तौर पर आवागमन के लिए खोल दिया गया। क्या इससे पहले इसकी क्वालिटी की जांच की गई। बिना जांच के ओवर ब्रिज को आमजन के लिये केसे खोल दिया गया यह भी जांच का विषय है। जबकि यह ओवरब्रिज नेशनल हाईवे नंबर-2 को कृष्ण की पावन जन्मस्थली से जोड़ता है और कृष्ण जन्मस्थली के दर्शनार्थ प्रतिदिन हजारों की संख्या में देशी-विदेशी लोग यात्री बसों से अथवा निजी वाहनों से आते हैं अतः इस ओवरब्रिज के खुलते ही इस पर वाहनों का आवागमन शुरू हो गया।  इस पर बेफिक्र होकर दौड़ रहे वाहन चालकों को इस बात का इल्म तक नहीं हुआ कि भ्रष्टाचार के गारे से बने करीब 50 वर्ष की लाइफ वाले इस ओवरब्रिज ने तो 50 दिन में ही सेतु निगम की पोल खोल कर रख दी। बड़ी चालाकी के साथ टूटी हुई सड़क के ऊपर काले रंग की मोटी पॉलीथिन बिछा दी गई और उसके ऊपर बिजली के तारों के बंडल रख दिये गये ताकि किसी को शक न हो। पॉलीथिन के निकट कुछ इस अंदाज में त्रिपाल की तरह कपड़ा डालकर काम किया जाने लगा जैसे धूप से बचाव किया जा रहा हो। दरअसल इस सब की आड़ में ओवरब्रिज के नीचे की ओर काफी बड़े हिस्से पर लोहे की शटरिंग लगाकर और उसे नटबोल्ट आदि से कसकर दुरुस्त करने का प्रयास किया जा रहा था। सेतु निगम के इस कारनामे की जानकारी होने पर मौके पर जाकर अधिकारियों द्वारा की जा रही लीपापोती के फोटोग्राफ्स लिये गये और पूरे मामले की जानकारी करने का प्रयास किया। ओवरब्रिज पर मरम्मत कार्य करा रहे सेतु निगम के कर्मचारी द्वारा सूचित किये जाने पर कोई वीरेन्द्र सिंह नामक अभियंता और उनके साथ आये किन्हीं सिंह साहब और शर्मा जी ने अधिकृत रूप से अपना वक्तव्य देने से बचते रहे और इतना जरूर स्वीकार किया कि बेमौसम हुई बारिश के कारण ओवरब्रिज क्षतिग्रस्त हुआ है। हमसे कुछ गल्तियां हुई हैं हम उसे ठीक करने में लगे हैं। जल्द ही ठीक हो जायेगा। पूछे जाने पर कि 50 वर्ष की मियाद वाला ओवरब्रिज 50 दिन से पहले ही कैसे क्षतिग्रस्त हो सकता है जबकि उसके निर्माण में बारिश आदि के होने का ध्यान तो रखा गया होगा, वह तीनों कर्मचारी इसका कोई उत्तर नहीं दे सके। उनके द्वारा बताया गया कि आर. के. सिंह इस ओवरब्रिज के प्रोजेक्ट मैनेजर हैं जो आगरा बैठते हैं और यहां आते-जाते रहते हैं। प्रोजेक्ट मैनेजर आरके सिंह का न तो उन्होंने कोई कॉन्टेक्ट नंबर बताया और ना ही उनसे बात कराना जरूरी समझा। बरावर समझाने का प्रयास करते रहे कि यह ज्यादा बड़ा मामला नहीं है, आप इसे इतनी गंभीरता से न लें।  आवागमन के लिये खोल दिये जाने के एक माह के अंदर हुए ओवरब्रिज के इस हाल की पुनरावृत्ति आगे नहीं होगी, इस बात की गारंटी कोई नही ले सकता है और यह किसी बड़े हादसे का कारण नहीं बनेगा, यह भी कोई कह नही सकता, इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, इन शंकाओं के बारे में सेतु निगम के इन अधिकारी व कर्मचारियों के पास कहने को कुछ नहीं था।  सेतु निगम की यही टीम मथुरा में यमुना नदी पर बने पुराने पुल की मियाद खत्म हो जाने के कारण अब नये पुल का निर्माण कर रही है। यह पुल गोविंद नगर रेलवे क्रॉसिंग पर बने पुल से काफी लंबा बनना है और उससे कई गुना अधिक लागत से बनाया जा है। क्षेत्रीय विधायक उत्तर प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता प्रदीप माथुर से फोन पर सम्पर्क करने पर उन्होंने बताया कि उनके और सोनिया गांधी जी के प्रयास से इस ओवर ब्रिज का निमार्ण कार्य हो सका। यह ओवर ब्रिज प्रदेश सरकार और केन्द्र सरकार के विशेष सहयोग से बन सका है। निमार्ण कार्य में कुछ कमियां आई हैं उन्हे जल्द सुधारने के लिये कहा गया है और अधिकारियों से भी इस सम्बन्ध में वार्ता हो चकी है कि जो कमियां रह गई हैं उनको जल्द से जल्द ठीक किया जाय।        माननीय मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चाचा और सपा मुखिया मुलायम सिंह के भाई शिवपाल सिंह यादव ही सेतु निगम के चेयरमैन हैं और वो भी अक्सर मथुरा आते रहते हैं। किंतु लाखों लोगों की आंखों में धूल झोंककर भ्रष्टाचार करने में माहिर सेतु निगम के अधिकारियों को उनकी आंखों में धूल झोंकते परेशानी क्यों होने लगी। अब देखना सिर्फ यह है कि सीमेंट, बजरी, लोहे और कंक्रीट के साथ भारी भ्रष्टाचार के गारे से श्रीकृष्ण जन्म स्थान केनिकट बना ओवरब्रिज मरम्मत के सहारे कितने दिन चलता है और कितने बड़े हादसे का गबाह बनता है।         

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जनता परिवार का बिखरा हुआ कुनबा फिर से एक बार ‘एकसाथ’ हो गया है। जनता परिवार के छह दल देश में ‘सांप्रदायिक’ ताकतों को रोकने के लिए एकसाथ आने का दावा किया है। यह बिखरा हुआ कुनबा किसी दल के लिए ‘मुसीबत’ बनता है या फिर दलों को यह मिलन खुद ‘दलदल’ बन जाता है यह बिहार में होने वाले विधानसभा चुनावों में साफ होगा। दलों के इस गठबंधन में हर राजनेता की अपनी एक ‘महत्वाकांक्षा’ है। जिन दलों ने आपस में ‘मिलकर’ राजनीति करने का मन बनाया है उन सभी दलों का अपने क्षेत्र विशेष में राजनैतिक दबदबा है और कुछ सत्ता पर काबिज भी हैं। बिहार में जद(यू) की सरकार है तो लालू प्रसाद यादव की आरजेडी विपक्ष की भूमिका में है। यूपी में मुलायम सिंह अपने बेटे के साथ सत्ता संभाले हुए हैं। नए गठबंधन की सबसे बड़ी मुसीबत यह है कि इसका हर नेता या तो प्रधानमंत्री पद का ‘दावेदार’ है या फिर अपने राज्य में मुख्यमंत्री पद का दावेदार… या मौजूदा समय में अपने राज्य का मुख्यमंत्री है। इस दल की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा बिहार में होने वाले विधानसभा चुनावों में होगी जहां से कई मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं। नीतीश कुमार जद(यू) से मुख्यमंत्री हैं तो लालू यादव भी कोर्ट के फैसले के बाद भले ही राजनीति के मैदान में न उतरें पर राबड़ी यादव को मुख्यमंत्री बनाने का दावा जरूर पेश करेंगे। इन दलों के साथ आने से इनके समर्थक शायद आपसी कड़वाहट भूलकर आपस में सामंजस्य स्थापित कर लें पर क्या ये दल खुद अपनेआप को संभाल सकेंगे... इसमें थोड़ा संदेह है। छह दलों के इस मिलन से अगर सबसे ज्यादा फायदा अगर किसी को हुआ है तो वह है समाजवादी पार्टी। यूपी में सत्तारूढ़ यह दल बिहार और अन्य राज्यों में भी अपने पैर जमाने की जुगत में है। इस मिलन का नाम संभवत: ‘समाजवादी’ शब्द के साथ ही रखा जाना है। पीएम की कुर्सी का सपना देख रहे मुलायम सिंह भले ही इस लड़ाई को ‘सांप्रदायिकता के खिलाफ’ बोल रहे हों पर हकीकत यह है कि इस दल के मिलन में सभी दलों के नेताओं की अपनी एक राजनीतिक महत्वाकांक्षा ही है और उस महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए नए-नए पैंतरे भर अपनाए जा रहे हैं। इन दलों के साथ आने से देश की राजनीति में कौन सी खिचड़ी बनेगी और कौन सी परोसी जाएगी यह कहना तो मुश्किल है पर देश की जनता को तो एक ही उम्मीद है कि कोई भी दल मिले पर देश आगे बढ़े। लेकिन, यह तो सभी राजनीतिक दलों के संविधान और उनके कार्य करने की शैली में है ही नहीं... शायद... अगर कुछ है तो वह है कि किस तरह से देश या प्रदेश की सत्ता में खुद को कैसे भी काबिज कर लिया जाए।   जातिगत समीकरणों के सहारे भाजपा और कांग्रेस के लिए ये दल मुसीबत बन सकते हैं। उसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि जो दल अभी तक आपस में लड़ रहे थे, अब मिलकर भाजपा और कांग्रेस को रोकने का प्रयास करेंगे। अब दलों की यह खिचड़ी भाजपा की विजय को बिहार में रोक पाएगी या फिर से आपने आप को स्थापित करने का प्रयत्न कर रही कांग्रेस को उसके पैर नहीं जमाने देगी... यह आने वाला वक्त ही बताएगा पर इतना जरूर है कि देश की राजनीति में आप किसी भी दल को दूसरे दल का ‘दुश्मन’ नहीं कह सकते क्योंकि वक्त आने पर कब कौन किसके साथ हो जाए यह कहना और समझना बहुत मुश्किल है शायद इसी का नाम ‘राजनीति’ है।

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ग्यारह वर्ष पहले उषा चौमर अलवर में मैला ढोया करती थी आज वह कई राष्ट्रीय और अंर्तराष्ट्रीय मंचों पर  छूआछूत के खिलाफ़ और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों को उठा रही हैं।  साल 2003 में सुलभ अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक सेवा संगठन ने उन्हे मैला ढोने की अमानवीय प्रथा से मुक्ति दिलाई थी और आज वह इसी संगठन की अध्यक्ष हैं लेकिन शायद इससे भी ज़्यादा महत्वपूर्ण यह है कि एक राजपूत महिला शीला जिनके घर का वह मैला ढोती थीं, आज वह पहले की तरह उषा के साथ छूआछूत करने की बजाय उसके साथ उठने-बैठने और खान-पान करने में कतई परहेज़ नही करती और इससे भी ज़्यादा उषा के साथ छूआछूत के खिलाफ अभियान में हिस्सा भी ले रहीं है।  शीला का मानना है उषा के उदाहरण ने उनको सोच बदलने पर मजबूर किया है। हाल ही में ब्रिटिश एसोसिएशन ऑफ साउथ एशियन स्टडीज़ के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित कर लौटी उषा का कहना है कि वह चाहती है कि भारत समेत पूरे विश्व में जाति और रंग भेदभाव के नाम पर छूआछूत समाप्त हो और मैला ढोने जैसी अमानवीय प्रथा पूरी तरह से समाप्त हो जाए। संबोधन में अपने जीवन के कटु अनुभवों को बयान करते हुए कहा कि दलितों के लिए अभी बहुत किया जाना बाकी है। 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार हमारे देश में अब भी सात लाख चौरानवे हज़ार से ज्यादा लोगों द्वारा मैला ढोने का काम किया जा रहा है। मैला ढोने का काम करने वाले लोग और उनके परिवार सबसे ज़्यादा छूआछूत का शिकार हैं। छूआछूत को समाप्त करने का प्रावधान हमारे संविधान में ही शामिल कर दिया गया था और छूआछूत एक  दंडनीय अपराध है। लेकिन आज भी हमारे देश में जाति के नाम पर छूआछूत जारी है। नेशनल कांउसिल ऑफ अपलाइड इकोनॉमिक रिसर्च द्वारा 2011-2012 में कराए गए ‘भारत मानव विकास सर्वेक्षण‘ के अनुसार चार में से एक भारतीय ने किसी ना किसी तरह की अस्पृश्यता या छूआछूत करने की बात को स्वीकार किया। बहुत सारे गांवो में आज भी लोग जाति के अनुसार बसाई गई बस्तियों में रहते हैं। सुलभ अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक सेवा संगठन ने सुलभ शौचालय खोल कर एक तरह से तकनीक का इस्तेमाल  समाज में बदलाव लाने के लिए किया क्योंकि इससे वे काफी हद तक महिलायों को मैला ढोने की अमानवीय प्रथा से मुक्तकर उन्हें विस्थापित करने में कामयाब हो सके। लेकिन, तकनीकी के द्वारा शौचालयों में मानव द्वारा मैला ढोने की ज़रूरत भले ही ना पड़े पर वे छूआछूत की मानसिकता को बदलने के लिए कुछ हद तक ही काम आ सकती है। इसीलिए, आज संगठन ने जाति के नाम पर छूआछूत को समाप्त करने के देशव्यापी अभियान ‘‘अब और छूआछूत नहीं‘‘ की शुरुआत की है। 'अब छूआछूत और नहीं' अभियान की शुरुआत के अवसर पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह का कहना था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्वच्छ अभियान केवल गंदगी दूर करने के लिए नहीं है, बल्कि अस्पृश्यता के खिलाफ एक निर्णायक संघर्ष है। उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि हालांकि देश में छूआछूत को खत्म करने के लिए काफी कुछ किया गया है लेकिन अब भी बहुत कुछ करना बाकी है। साथ ही साथ उनका यह भी मानना था कि यह संभव है। सुलभ अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक सेवा संगठन के संस्थापक बिन्देश्वर पाठक का मानना है कि जहां एक और  शौचालयों के निर्माण से मैला ढोने के काम को मानव द्वारा ना कराए जाने में तकनीकी काम आई है। दूसरी ओर जाति को लेकर छूआछूत को पूरी तरह से खत्म करने के लिए लोगों की मानसिकता बदलने की भी बहुत आवश्यकता हैं। यह अभियान भीमराव अम्बेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर आयोजित किया गया। भीमराव अंबेडकर का कहना था कि अस्पृश्यता अछूतों के उद्धार के लिए सभी अवसरों के दरवाजे बंद कर देती है। वह उनके लिए समाज में स्वतंत्रता से चलने फिरने के अवसर को खत्म कर देती है और उन्हें अंधकूप और पृथकता की जिन्दगी बसर करने के लिए मजबूर कर देती है। वह उन्हें स्वयं को शिक्षित करने और अपनी मर्जी का व्यवसाय करने से रोकती है। हालांकि आज दलितों की स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन जैसा कि गृहमंत्री ने कहा कि अब भी अस्पृश्यता को खत्म करने के लिए बहुत कुछ किया जाना बाकी है। महात्मा गांधी का कहना था कि अस्पृश्यता के खिलाफ उनकी लड़ाई मानवता में अशुद्धता के खिलाफ़ संघर्ष है। महात्मा गांधी द्वारा छेड़ा गया अस्पृश्यता के खिलाफ अभियान आज भी अधूरा है और ज़रूरत इस अभियान  में और तेजी लाते हुए छूआछूत की मानसिकता को जड़ से मिटा दिया जाए ताकि देश के हर नागरिक गरिमा से अपना जीवन यापन कर सकें।   (लेखिका स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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पत्रकारों के हितों को लकर कार्य कर रहे संगठन ‘‘इंटेलीजेंस मीडिया एसोसियेशन’’ के प्रदेश अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार श्री अनूप गुप्ता के निर्देशानुसार व संगठन के राष्ट्रीय संयोजक श्री नरेन्द्र एम. चतुर्वेदी, संरक्षक वरिष्ठ पत्रकार श्री मोहन स्वरूप भाटिया व वरिष्ठ पत्रकार श्री विनय समीर जी के संरक्षण में जिला कार्यालय पर आम सदस्यों की बैठक आहुत की गयी। इस अवसर पर चै0 दलवीर सिंह को जिलाध्यक्ष सर्वसम्मति से घोषणा की गई। तथा संगठन के कार्यों को सुचारू चलाने के लिये कार्यकारिणी की विधिवत रूप से गठन कर घोषणा की गई। जिसमे चै0 दलवीर सिंह अध्यक्ष के अलावा गिरधारी लाल श्रोतिय वरिष्ठ उपाध्यक्ष, अनिल शर्मा उपाध्यक्ष, ओम प्रकाश शर्मा उपाध्यक्ष, विनाद अग्रवाल उपाध्यक्ष, सत्यपाल चैधरी महासचिव, किशन चन्द दुवे सचिव, रसिक बल्लभ नागार्च सचिव, यश पाल चैधरी सचिव, मिथलेश कुमार पप्पू सचिव, राजेश कुमार पाठक कोषाध्यक्ष, चन्द्र प्रकाश पान्डेय मीडिया प्रभारी, सुवीर सेन सदस्य, कुंज बिहारी शर्मा सदस्य, जितेन्द्र भारद्वाज सदस्य, राजेश कुमार बब्बू सदस्य, बृजबिहारी कौशिक, सुभाष सैनी विशेष आंमत्रित सदस्य बनाये गये हैं। इस अवसर पर नरेन्द्र एम चतुर्वेदी सुनील शर्मा, यश पाल चैधरी, चै0 दलवीर सिंह, सुभाष सैनी, के अलावा बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित थे। बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार मोहन स्वरूप भाटिया ने की बैठक का संचालन चै दलवीर सिंह ने किया।   

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मुंबई।रिपब्लिकल पार्टी ऑफ इंडिया(ऐ) के उत्तर मुंबई जिल्हा के अध्यक्ष श्री हरिहर यादव और पार्टी के पदाधिकारियों तथा कार्यकर्तायों द्वारा १४ अप्रैल २०१५ को डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर जयंती के अवसर पर मालाड (वेस्ट) में स्टेशन के पास हनुमान मंदिर के पीछे बाबासाहेब आंबेडकर जयंती उत्सव और जाहिर सभा का आयोजन किया गया था।इस अवसर पर सभी ने आंबेडकर की प्रतिमा को फूलमाला पहनाया और बाबासाहेब आंबेडकरजी को नमन और उनको याद किया।  जहाँ पर सांसद गोपाल शेट्टी, सामाजिक संस्था 'गांधी विचार मंच' के अध्यक्ष श्री मनमोहन गुप्ता, डॉ. राम बारोट, विनोद शेलार, अनघाताई म्हात्रे, डॉ.राकेश दुबे,'सहयोग ब्रॉडगेज प्रवासी ट्रस्ट' के राष्ट्रीय अध्यक्ष मो. कलामुद्दीन मंसूरी इत्यादि गणमान्य अथितियों के कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इसके बाद सामूहिक हनुमान चालीसा का घंटों पाठ किया गया और जिसका सबसे ज्यादा आनंद श्री मनमोहन गुप्ता ने उठाया और पूरे कार्यकम के दौरान संगीत मंडली को प्रोत्साहित करते रहे और भक्ति भाव में लीन रहे।       Sanjay Sharma Raj   (P.R.O.)      

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अभी हाल में सिनेविस्टा का दैनिक धारावाहिक,'दिल्ली वाली ठाकुर गर्ल' का प्रसारण 'एंड टी वी' पर शुरू हुआ है,जोकि प्रत्येक सोमवार से शुक्रवार रात नौ बजे दिखाया जा रहा है। इसमें बिन्नी का रोल करनेवाली मध्यप्रदेश की रहनेवाली शिल्पा रायजादा की भूमिका लोगों को काफी पसंद आ रहा है। क्युकि इसमें शिल्पा एक हाउस वाइफ बानी है। जिसे आम औरतों की तरह हमेशा शिकायत करने की आदत है,लेकिन उसको एक कॉमेडी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। शिल्पा रायजादा ने इसके पहले धारावाहिक,' हमारी देवरानी','वीर शिवजी','कृष्णाबेन खाखरवाला' में काम किया है। लेकिन धारावाहिक' जोधा अकबर' में शहनाज़ निगार के पागल की भूमिका में शिल्पा को भारत क्या विदेशों में काफी पसंद किया गया। शिल्पा रायजादा धारावाहिक,'दिल्ली वाली ठाकुर गर्ल' के अपने रोल के बारे में कहती है," यह बहुत अच्छा रोल है। मैं इसमें एक आम घर की बहू की तरह रोल निभा रही हूँ। जिसके कारण पूरे देश के परिवार की बहुओं को लगता है कि यह उनके जीवन से प्रभावित है और वे इसे पसंद कर रही है। मुझे इसमे हमेशा सभी चीजों से शिकायत रहती है। जैसे इसमे एक डायलॉग अपने पति से कहती हूँ कि आप तो केवल आठ घंटे ही काम करते है, मैं तो २४ घंटे घर में काम करती हूँ और वह भी बिना पगार के। फिर भी घर में मुझे कोई अहमियत नहीं मिलती है। मैं इसमे शिकायत का पिटारा हूँ लेकिन कॉमेडी टच के साथ   जिसे लोग काफी पसंद कर रहे है।"      Sanjay Sharma Raj (P.R.O.)

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राज्य स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता के लिये चयनित प्रतिभागी  मथुरा। जिला कुश्ती संघ के तत्वाधान में अखाडा शिव शक्ति व् भदौरिया ग्रुप ऑफ एजुकेशन के सहयोग से दिनांक 10 अप्रैल 2015 को स्व0 मोहन पहलवान स्पोर्ट्स स्टेडियम गणेशरा में राज्य स्तरीय सब जूनियर कुश्ती प्रतियोगिता के लिए बालक बालिकाओ का चयन किया गया। इस चयन प्रतियोगिता का उद्घाटन डॉ0 हरिओम चतुर्वेदी व् शेट्टी भाई ने किया। सभी अतिथियों का सम्मान चंद्रमोहन चैधरी सीएम भैया ने किया। इस मौके पर उम्मेद खलीफा, हरीश पहलवान व जयसिंह पहलवान का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम का संचालन खेलगुरु ब्रज रत्न अशोक पहलवान ने किया।

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          फसल की दुर्गति देख सदमे में मृत आरपीएफ का जवान उम्मेद सिंह फाइल फोटो विलाप करते मृतक की बहिन व परिजनों के बुरे हाल मृतक सिपाही की मौत की खबर से बेहोश हुई उसकी पत्नि परिजनों को चिंता अब कैसे होंगे बिटिया के हाथ पीले मथुरा। लम्बे अर्से से वैधव्य और गरीबी की मार झेल रहे परिवार के आंगन में उम्मीद का एक दिया रोशन हुआ तो घर में खुशियों की किरण पैर पसार ही रही थी कि प्रकृति की मार ने घर के सहारे एक मात्र कमाऊ चिराग को अचानक बुझा दिया। अब मृतक के परिजनों को चिंता सता रही है तो इस बात की कि साहूकार और बैंक से लिया गया कर्ज कैसे अदा होगा और जवान बिटिया जिसकी शादी तय हो चुकी है निश्चित तिथि को कैसे उसके हाथ पीले होंगे। पीडि़त परिजनों को ग्रामीण और रिश्तेदार ढाॅढस जरुर बंधा रहे हैं लेकिन कहीं से आर्थिक मदद को कोई हाथ नहीं उठा रहा। प्राकृतिक आपदा से बर्बाद हुई फसल से नाउम्मीद हो सदमे से मौत के बाद आरपीएफ के जवान के परिजनों को प्रशासन के अधिकारियों ने भी मुआवजा दिलाना तो दूर उसके घर पर पहुॅच पीडि़त परिवार और मृतक सिपाही की विधवा को ढाॅढस बंधाने की जहमत नहीं उठाई है। इससे ग्रामीणों में खासा आक्रोश है। सरकारी मशीनरी के साथ ही लम्बे चैड़े दावे करने वाले राजनेताओं को भी ग्रामीण पानी पी पीकर कोस रहे हैं। यह वाकया है जनपद की विधान सभा क्षेत्र बलदेव के गांव गढ़सौली जादोंपुर का। यहां का वाशिंदा 27 वर्षीय उम्मेद सिंह पुत्र स्व0 प्रेम सिंह हैदराबाद में आरपीएफ में तैनात था। 8 अप्रैल को वह छुट्टी लेकर अपने गांव आया था। 4 मई को होने वाली छोटी बहिन मीरा की शादी की तैयारियों को पूरा करने तथा खेत में खड़ी गेहूॅ की फसल को कटवाकर उससे मिलने वाली रकम से परिवार की जरुरतों को पूरा करने का उद्देश्य लेकर गांव आया था लेकिन विधाता को कुछ और ही मंजूर था। 9 अप्रैल की शाम उम्मेद अपने खेतों पर फसल का जायजा लेने गया था लेकिन बारिस और ओलावृष्ठि से बर्बाद फसल को देख उसका धैर्य जबाब दे गया। किसी तरह वह घर पहुॅचा और विधवा मां नारंगी देवी व पत्नी पूनम को फसल बर्बादी की दास्तां सुनाते सुनाते अचानक उसके घबराहट होने लगी तो परिजनों ने उसे गांव के ही एक चिकित्सक को दिखाया जिसने उसे आगरा ले जाने की बात कही। विधवा दादी 85 वर्षीय संतो देवी ने उम्मेद को तसल्ली देने की कोशिश की लेकिन अकेले कंधो पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी और बैंक का क्राॅप लोन तथा गांव में साहूकार से लिए गए उधार की रकम और सहकारी समिति से लिए गए खाद-बीज की रकम व ब्याज जो करीब पौने चार लाख रुपए के आस-पास है को चुकाने की चिंता के साथ ही 4 मई को छोटी बहिन मीरा की निकट के ही गांव जाबरा से होने वाली शादी में होने वाले खर्च की रकम के इंतजाम की चिंता उसे खाए जा रही थी। परिजन जब उसे इलाज के लिए आगरा लेकर जा रहे थे तो सदमे से रास्ते में ही उम्मेद के जीवन की डोर टूट गई और अब घर में एक और विधवा उम्मेद की पत्नी मात्र 25 वर्ष की उम्र में पूनम वैधव्य का दंश झेलने को मजबूर है। घर में एक नाबालिग भाई मोहन को नहीं पता कि कैसे वह घर का पालन-पोषण करेगा। वहीं उम्मेद की दादी, मां एवं पत्नी को बेटी मीरा के हाथ पीले करने की चिंता सता रही है। बेटे के जाने के बाद अब आखिर कैसे बिटिया की शादी होगी। जिला प्रशासन से भी राहत की उम्मीद की किरण दिखाई नहीं दे रही। बर्बाद हुई 8 बीघा गेहूॅ की फसल का मुआवजा देना तो दूर की कौड़ी है किसी प्रशासनिक अधिकारी से लेकर हलका लेखपाल तक ने मृतक किसान परिवार के घर पहुॅच सांत्वना के दो शब्द तक नहीं कहे। सूचना मिलने पर आरपीएफ के जवानों ने गांव पहुॅचकर जरुर अपने साथी की असमय मौत पर दुःख जताने के साथ परिजनों को हरसम्भव मदद करने का आश्वासन दिया है।

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