मथुरा

मथुरा। पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मारक समिति द्वारा फरह कस्बे से नगला चंद्रभान गांव जाने वाले मार्ग पर स्थित फरह टाउन स्टेशन का नाम पं. दीनदयाल के जन्मशती वर्ष के अवसर पर उनके नाम पर करने का प्रस्ताव इन दिनों प्रदेश सरकार की फाइलों में बंद हो निर्णय का इंतजार कर रहा है। स्मारक समिति के सचिव नवीन मित्तल ने बताया कि हमने करीब पांच माह पूर्व नियमानुसार जिलाधिकारी के माध्यम से राज्य सरकार को पं. दीनदयाल उपाध्याय की जन्मस्थली एवं भारतीय जनता पार्टी यह चाहती है कि उत्तर प्रदेश सरकार गृह मंत्रालय के माध्यम से भेजे गए इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दे तो ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ जारी करने की औपचारिकता पूरी कर दे जिससे रेल मंत्रालय इस मसले में अंतिम निर्णय लेकर मुंबई के ‘राम मंदिर’ रेलवे स्टेशन की स्थापना के समान ही ‘फरह टाउन’ की पहचान ‘दीनदयाल उपाध्याय’ स्टेशन के नाम पर परिवर्तित कर दी जाए। सूत्रों के अनुसार स्मारक समिति की मांग पर गृह मंत्रालय कई माह पूर्व एक प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज चुका है। जिस पर सितंबर में मुख्य सचिव बनाए गए राहुल भटनागर को सरकार के निर्णय से गृह मंत्रालय को अवगत कराना है। इसीलिए, देश के किसी भी गांव, शहर, जिले अथवा स्टेशन के नाम परिवर्तन पर अनापत्ति प्रमाण जारी करने वाला गृह मंत्रालय खुद इस मामले में राज्य सरकार से जल्द निर्णय लिए जाने का इंतजार कर रहा है और समाजवादी पार्टी की सरकार है कि जैसे उसे इस मसले पर विचार करने की कोई जल्दी नहीं है। दीनदयाल उपाध्याय स्मारक समिति के सचिव नवीन मित्तल ने बताया कि मैं इस संबंध में गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिला था। उन्हें समिति के निर्णय से अवगत कराते हुए स्टेशन के नाम में परिवर्तन से संबंधित प्रस्ताव भी दिया था। जिसे गृह मंत्रालय के स्तर से राज्य सरकार को भेजे जाने की जानकारी मिली थी लेकिन अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई निर्णय लिए जाने की सूचना नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि समिति ने अब मथुरा से भाजपा सांसद हेमामालिनी एवं आगरा के रामशंकर कठेरिया से आग्रह करेंगे कि वे दोनों मिलकर राज्य सरकार से इस मामले में जल्द से जल्द हरी झण्डी दिलाने का काम करें।  मित्तल ने बताया कि समिति रेल मंत्रालय को एक और प्रस्ताव देने जा रही है जिसमें इस स्टेशन पर शताब्दी और राजधानी एक्सप्रेस जैसी गाड़ियों का हाल्ट बनाने की मांग की जाएगी जिससे लोग बडे़ पैमाने पर यहां आकर दीनदयाल धाम का भ्रमण कर सकें।

Read More

लंदन । पेशेवर मुक्केबाजी में धाक जमा चुके भारत के विजेंदर सिंह का कहना है कि वे 17 दिसम्बर को अपने अगले पेशेवर मुकाबले के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। विजेंदर ने सोमवार को कहा कि पूर्व विश्व चैंपियन फ्रांसिस चेका भले ही अपार अनुभव रखते हों, लेकिन वे चेका को हराने का दमखम रखते हैं। ओलम्पिक में कांस्य पदक जीत चुके विजेंदर 17 दिसम्बर को दिल्ली में अपना डब्ल्यूबीओ सुपर मिडिलवेट एशिया पैसेफिक खिताब बचाने के लिए चेका से भिड़ेंगे।    यह मैच त्यागराज स्टेडियम में होना है। उल्लेखनीय है कि तंजानिया के 34 वर्षीय अनुभवी मुक्केबाज चेका के पास करियर के 300 राउंड मुकाबलों का अनुभव है, वहीं विजेंदर ने 2015 में शुरू की गई पेशेवर मुक्केबाजी में 27 राउंड मुकाबले खेले हैं। ऐसे में चेका जैसे अनुभवी खिलाड़ी से मुकाबला भारतीय पेशेवर मुक्केबाज के लिए काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। लंदन से फोन पर आईएएनएस के साथ साक्षात्कार में चेका जैसे अनुभवी खिलाड़ी से मुकाबले के बारे में विजेंदर ने कहा कि मैं इसके लिए पूरी तरह से तैयार हूं। उनका अनुभव भले ही कितना अधिक हो लेकिन मेरा अनुभव भी कुछ कम नहीं। मेरे पास पेशेवर मुक्केबाजी की अनुभव भले ही कम हो लेकिन ओलम्पिक खेलों, एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों का अनुभव बहुत अधिक है और चेका को हराने के लिए यह काफी है।   चेका ने हाल ही में एक बयान में कहा था कि वे 17 दिसम्बर को होने वाले मुकाबले में विजेंदर का करियर समाप्त कर देंगे। इस बारे में भारतीय मुक्केबाज ने कहा कि लोग तो बोलते रहते हैं लेकिन कोई कुछ भी बोले, हमें अपने खेल पर ध्यान देना है। ऐसी बातों को नजरअंदाज कर देना ही सही है। जहां तक करियर समाप्त करने की बात है, तो यह मुकाबले के दिन पता चल जाएगा। विजेंदर ने कहा कि वे 17 दिसम्बर को होने वाले मुकाबले को लेकर बिल्कुल भी चिंतित नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने इसके लिए हर तरह से तैयारी कर रहे हैं। विजेंदर ने 2015 में पेशेवर मुक्केबाजी में कदम रखा था और अब तक खेले गए सात मुकाबलों में विजयी रहे हैं। उन्होंने 2008 बीजिंग ओलम्पिक में कांस्य पदक जीता था। इसके अलावा उन्हें 2006 एशियन खेलों में भी कांस्य पदक अपने नाम किया। पेशेवर मुक्केबाजी में विजेंदर के प्रवेश से प्रेरणा लेते हुए बीजिंग ओलम्पिक में क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय कर चुके अखिल कुमार और जितेंद्र कुमार जैसे कुछ मुक्केबाजों ने भी पेशेवर जगत में कदम रखा है। विजेंदर से जब पूछा गया कि उनके इस कदम से मुक्केबाजों के लिए पेशेवर मुक्केबाजी में जाने के दरवाजे खुल गए हैं। इस बारे में उन्होंने कहा कि मेरी नजर में एक खिलाड़ी का काम है अपने प्रदर्शन से आगे बढ़ते रहना। अब इससे किसी प्रकार की शुरुआत हुई है, यह अच्छी बात है लेकिन मेरा काम अपने शानदार खेल को जारी रखना है। विजेंदर ने कहा कि यह अच्छी बात है कि मेरे खेल से लोग प्रेरित हुए हैं और आशा है कि ऐसा चलता रहे। और भी प्रतिभाएं निखर कर आएं। एक खिलाड़ी के लिए अपने मुकाबले को जीतना सबसे महत्वपूर्ण है।    साभार-khaskhabar.com  

Read More

बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्टनिस्ट आमिर खान अपनी सुपर हिट फिल्मों के लिए जाने जाते है। उनकी आगामी फिल्म दंगल है। हाल ही आमिर खान ने कहा कि अगर लोग उन्हें फैशन को लेकर आंकते हैं तो इससे उन्हें डर नहीं लगता, क्योंकि ये एक ऐसी चीज है जिसकी उम्मीद लोग उनसे नहीं करते। आमिर के मुताबिक उनको फैशन में काई समझ नहीं है। इसक साथ ही उन्हें रैंप पर वॉक करते हुए भी शर्म आती है।  मु्ंबई में आयोजित एक इवेंट के दौरान जब पत्रकारों ने आमिर से फैशन से जुड़े सवाल किए तो आमिर का कहना था कि मैं वैसे भी खराब कपड़े पहनता हूं और मुझे इसकी आदत हो चुकी है। लोग मेरे फैशन के बारे में कोई अच्छी राय नहीं रखते, इसलिए मुझे इसका कोई भय भी नहीं है। आगे आमिर ने कहा, मैं बस एक बार सलमान खान के बीइंग ह्यूमन के लिए रैंप पर चला था। आमतौर पर मुझे काफी शर्म आती है कि मैं रैंप पर चलूं और लोग मुझे देखें। मुंबई में आयोजित एक इवेंट में पहुंचे आमिर का साथ फिल्म दंगल में उनकी को-स्टार फातिमा सना शेख और सानिया मल्होत्रा भी मौजूद थीं।    साभार-khaskhabar.com  

Read More

चेन्नई । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तमिलनाडु की सीएम जयललिता के अंतिम दर्शन करने और उन्हें श्रद्धांजलि देने चेन्नई पहुंचे। पीएम चेन्नई के राजाजी हॉल पहुंचे, जहां जयललिता के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शनों के लिए रखा गया है। गौरतलब है कि लंबी बीमारी के बाद कल जयललिता की मौत हो गई। जयललिता को लंग इंफेक्शन था। उन्हें 22 सितंबर को चेन्नई के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था।    रविवार देर शाम जयललिता को दिल का दौरा पडा। इसके बाद उनकी स्थिति नाजुक हो गई। जयललिता को बचाने की हरसंभव कोशिश की गई लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। सोमवार देर रात 11.30 बजे उन्होनें अंतिम सांस ली। जयललिता के पार्थिव शरीर को राजाजी हॉल में अंतिम दर्शनों के लिए रखा गया। पीएम मोदी ने भी चेन्नई पहुंच उनको श्रद्धांजलि दी।    तमिलनाडु के नए सीएम और जयललिता के सबसे विश्वस्त ओ. पन्नीरसेल्वम पीएम मोदी के कंधे पर सिर रखकर रोए। पीएम मोदी ने उनको ढांढस बंधाया। पीएम ने जयललिता के पार्थिव शरीर को नमन कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। श्रद्धांजलि देते समय पीएम मोदी भावुक हो गए। सुपरस्टार रजनीकांत भी पहुंचे श्रद्धांजलि देने: साउथ के सुपरस्टार रजनीकांत भी तमिलनाडु की सीएम जयललिता को श्रद्धांजलि देने राजाजी हॉल पहुंचे। रजनीकांत ने जयललिता के पार्थिव शरीर को नमन किया और उनको श्रद्धांजलि दी।    राष्ट्रपति वापस रवाना हुए: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी जयललिता को श्रद्धांजलि देने के लिए सुबह चेन्नई रवाना हुए थे लेकिन रास्ते में उनके विमान में कुछ तकनीकी खराबी आ गई थी। इस वजह से उन्हें रास्ते से ही वापस लौटना पडा। इसके बाद राष्ट्रपति फिर से चेन्नई के लिए रवाना हो गए हैं।    साभार-khaskhabar.com  

Read More

लंदन । पेशेवर मुक्केबाजी में धाक जमा चुके भारत के विजेंदर सिंह का कहना है कि वे 17 दिसम्बर को अपने अगले पेशेवर मुकाबले के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। विजेंदर ने सोमवार को कहा कि पूर्व विश्व चैंपियन फ्रांसिस चेका भले ही अपार अनुभव रखते हों, लेकिन वे चेका को हराने का दमखम रखते हैं। ओलम्पिक में कांस्य पदक जीत चुके विजेंदर 17 दिसम्बर को दिल्ली में अपना डब्ल्यूबीओ सुपर मिडिलवेट एशिया पैसेफिक खिताब बचाने के लिए चेका से भिड़ेंगे।    यह मैच त्यागराज स्टेडियम में होना है। उल्लेखनीय है कि तंजानिया के 34 वर्षीय अनुभवी मुक्केबाज चेका के पास करियर के 300 राउंड मुकाबलों का अनुभव है, वहीं विजेंदर ने 2015 में शुरू की गई पेशेवर मुक्केबाजी में 27 राउंड मुकाबले खेले हैं। ऐसे में चेका जैसे अनुभवी खिलाड़ी से मुकाबला भारतीय पेशेवर मुक्केबाज के लिए काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। लंदन से फोन पर आईएएनएस के साथ साक्षात्कार में चेका जैसे अनुभवी खिलाड़ी से मुकाबले के बारे में विजेंदर ने कहा कि मैं इसके लिए पूरी तरह से तैयार हूं। उनका अनुभव भले ही कितना अधिक हो लेकिन मेरा अनुभव भी कुछ कम नहीं। मेरे पास पेशेवर मुक्केबाजी की अनुभव भले ही कम हो लेकिन ओलम्पिक खेलों, एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों का अनुभव बहुत अधिक है और चेका को हराने के लिए यह काफी है।   चेका ने हाल ही में एक बयान में कहा था कि वे 17 दिसम्बर को होने वाले मुकाबले में विजेंदर का करियर समाप्त कर देंगे। इस बारे में भारतीय मुक्केबाज ने कहा कि लोग तो बोलते रहते हैं लेकिन कोई कुछ भी बोले, हमें अपने खेल पर ध्यान देना है। ऐसी बातों को नजरअंदाज कर देना ही सही है। जहां तक करियर समाप्त करने की बात है, तो यह मुकाबले के दिन पता चल जाएगा। विजेंदर ने कहा कि वे 17 दिसम्बर को होने वाले मुकाबले को लेकर बिल्कुल भी चिंतित नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने इसके लिए हर तरह से तैयारी कर रहे हैं। विजेंदर ने 2015 में पेशेवर मुक्केबाजी में कदम रखा था और अब तक खेले गए सात मुकाबलों में विजयी रहे हैं। उन्होंने 2008 बीजिंग ओलम्पिक में कांस्य पदक जीता था। इसके अलावा उन्हें 2006 एशियन खेलों में भी कांस्य पदक अपने नाम किया। पेशेवर मुक्केबाजी में विजेंदर के प्रवेश से प्रेरणा लेते हुए बीजिंग ओलम्पिक में क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय कर चुके अखिल कुमार और जितेंद्र कुमार जैसे कुछ मुक्केबाजों ने भी पेशेवर जगत में कदम रखा है। विजेंदर से जब पूछा गया कि उनके इस कदम से मुक्केबाजों के लिए पेशेवर मुक्केबाजी में जाने के दरवाजे खुल गए हैं। इस बारे में उन्होंने कहा कि मेरी नजर में एक खिलाड़ी का काम है अपने प्रदर्शन से आगे बढ़ते रहना। अब इससे किसी प्रकार की शुरुआत हुई है, यह अच्छी बात है लेकिन मेरा काम अपने शानदार खेल को जारी रखना है। विजेंदर ने कहा कि यह अच्छी बात है कि मेरे खेल से लोग प्रेरित हुए हैं और आशा है कि ऐसा चलता रहे। और भी प्रतिभाएं निखर कर आएं। एक खिलाड़ी के लिए अपने मुकाबले को जीतना सबसे महत्वपूर्ण है।    साभार-khaskhabar.com  

Read More

चेन्नई । भारतीय राजनीति की सबसे करिश्माई शख्सियतों में से शुमार जयललिता चेन्नेई के अपोलो अस्पताल में सोमवार को निधन हो गया। अपने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देख चुकी जयललिता ने कभी हार नहीं मानी थी। वह हर परेशानी के आगे अडिग खड़ी रहीं और उनसे उभरीं। चाहे व आय से अधिक संपत्ति का मामला हो, दत्तक पुत्र की शादी का मामला हो या फिर तांसी भूमि घोटाला हो। बचपन में ‘अम्मू’ से ‘अम्मा’ के मुकाम तक पहुंची जयललिता में इंदिरा गांधी जैसी दबंगी और मुद्दों को समझने की गजब की क्षमता थी। और जिद्दी भी ऐसी की उनके तीन शब्द ‘यू डोन्ट नो’ के बाद सामने वाले की बोलती बंद हो जाती थी। हालांकि ये तीन शब्द बेहद सामान्य से ही प्रतीत होते हैं, लेकिन जब जे जयललिता इन शब्दों को बोलती थीं, तो सामने वाले के लिए अंतिम आदेश जैसे होते थे।तमिलनाडु में पोस्टिंग पाने वाले नौकरशाहों को पता होता था कि जब अम्मा ‘यू डोन्ट नो’ बोलें, तो वह बातचीत खत्म कर रही हैं। इसके बाद सामने वाला कुछ नहीं बोलता था। जयललिता की न केवल अपनी पार्टी अन्नाद्रमुक पर, बल्कि सरकार पर भी बहुत मजबूत पकड़ थी। उनकी छवि इतनी कद्दावर थी कि उनके सामने कोई दूसरा टिक नहीं पाता था। जयललिता को ‘ना’ सुनने की जैसे आदत ही नहीं थी। जैसे इंदिरा गांधी के लिए कहा जाता था, ठीक वैसे ही जयललिता को भी ‘अपनी कैबिनेट का इकलौता मर्द’ बोलते थे।    नौकरशाहों का कहना है कि जयललिता अपने फैसले बड़ी जल्दी लेती थीं। जो लोग उनके फैसले के खिलाफ जाने की हिम्मत करते, उनको जयललिता का गुस्सा भी झेलना पड़ता था। उनके साथ काम करने वाले भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, समीक्षा बैठकों के लिए वह तैयारी के साथ आती थीं। बातों को समझने की उनकी क्षमता लाजवाब थी। ज्यादा से ज्यादा वह कुछ सुझाव मांगती और फैसला उसी वक्त ले लिया जाता था।जयललिता के करीबी और भरोसेमंद जो चाहे कर सकते थे, शर्त बस इतनी थी कि उन्होंने अम्मा को पहले से जानकारी दे दी हो। अगर कोई भी जयललिता का भरोसा खो देता, तो उसे निकालने में वह जरा भी नहीं हिचकती थीं। पूर्व मुख्य सचिव के गणनदेसिकन (2016) और पूर्व डीजीपी ए रवींद्रनाथ (2011) का निलंबन इसी बात का उदाहरण है। अधिकारी तो मुद्दों को समझने की उनकी काबिलियत और सुलझी सोच के कायल थे।    इतना ही नहीं, जयललिता की याद्दाश्त भी कमाल की थी। वह काफी व्यवस्थित तौर पर काम करने में भरोसा करती थीं। उनके पास एक डायरी होती थी, जिसमें तमिलनाडु में नियुक्त भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के सभी अधिकारियों का ब्योरा होता था। अधिकारियों के तबादले, नियुक्ति और प्रमोशन से जुड़े फैसले लेने के पहले वह अपनी यह डायरी जरूर देखती थीं। जयललिता ऐसे तमिल राषट्रवादी संगठनों और जातिगत राजनीति पर आधारित छोटे राजनैतिक दलों पर भी बारीक नजर रखती थीं, जो कि सामाजिक तनाव पैदा कर सकते थे।2001 से 2006 के बीच के अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में उन्होंने अपने पूर्व सहयोगी वायको को हिरासत में लिए जाने का आदेश दिया था। वायको पर आरोप था कि उन्होंने अपने एक भाषण में एलटीटीई का समर्थन किया है। जयललिता के ही आदेश पर साल 2013 में पीएमके के रामदास और उनके बेटे अंबुमणि को हिंसा भडक़ाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। जयललिता तक पहुंच पाना हर किसी के बस की बात नहीं थी। उनके इर्द-गिर्द लोगों का मजबूत घेरा हुआ करता था, जिसे पार कर जयललिता तक पहुंच पाना मुश्किल था।इसके बावजूद उनका राजनीतिक अनुमान शायद ही कभी गलत साबित हुआ हो। आय से अधिक संपत्ति के मामले में जब उनके निलंबन की तलवार लटक रही थी, तब भी उन्होंने सभी 234 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए। द्रमुक के मजबूत होने की कयासबाजियों के बीच भी जयललिता का यह फैसला गलत साबित नहीं हुआ और वह दोबारा जीतकर सत्ता में आईं। जयललित की तमिल के अलावा कन्नड, अंग्रेजी और हिंदी भाषा पर भी अच्छी पकड़ थी।    साभार-khaskhabar.com  

Read More



Mediabharti