108 गांवों एवं हजारों लोगों का निजी भण्डारा व परिक्रमा में उमडेगा भक्तों का सैलाब संकरी राहों वाले संकुचित राधाकुण्ड का आयोजन खुफिया ऐजेन्सियों की मुसीबत राधाकुण्ड। आतंकी हमलों की संभावना के मद्देनजर देश के साथ मथुरा में हमलांे की कड़ी आशंका के चलते पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्थाऐं कड़ी कर दी है। वहीं विभिन्न सुरक्षा एजेन्सी भी हमलों की प्रबल आशंकाओं के चलते यहां के धार्मिक व औधोगिक क्षेत्रों पर कड़ी निगाह बनाये हुए है। सुरक्षा एजेन्सियों ने विश्व विख्यात गिरिराज धाम गोवर्धन को भी आतंकी हमलों की आशंका का क्षेत्र मानकर व्यापक स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था परखी व जांची है इसके लिये यहां के दानघाटी जैसे प्रमुख मन्दिर आदि स्थल सुरक्षा उपकरणों से लैस किये गये है। इसके बावजूद सुरक्षा बलों की परेशानी यहां तब बढ़ सकती है जब गिरिराज धाम में 31 दिसम्बर और 01 जनवरी को उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के जत्थे के साथ यहां अनकों धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों की बाढ़ सी आयी होगी। इसी भीड़ भाड़ के दौरान यहां के कस्बा राधाकुण्ड मंे नववर्ष पर आयोजित होने वाले 108 गांवों के लोगों और देश भर के हजारांें धर्मानुयाईयों का होने वाला एक निजी भण्डारा सुरक्षा एजेन्सियों के लिये बड़ी परेशानी का सबब बन सकता है। यहां जारी हाई अलर्ट के बीच आयोजित हो रहा ऐसा विशाल भण्डारा न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था पर भारी आशंकाऐं खड़ी कर रहा है बल्कि ऐसे आयोजन के औचित्य पर भी सवाल खड़े कर रहे है जो संसार के किसी भी धर्म मंे कभी भी कहीं भी न तो बताया गया है और न ही कहीं लिखा पड़ा गया है। जी हां गिरिराज धाम के कस्बा राधाकुण्ड में नववर्ष के मौके पर एक ऐसा ही धार्मिक आयोजन होने जा रहा है जो न तो कभी हिन्दू धर्म के ग्रन्थ पुराणों में पढ़ा गया है और न ही कभी सुना गया है। यहां धर्म के ज्ञाता एक धर्माचार्य जी इस मौके पर भगवान श्री कृष्ण की अहलादिनी शक्ति राधारानी के स्वरूप कुण्ड राधाकुण्ड का 108 टन फलों का छप्पन भोग लगाने जा रहे है। हिन्दू धर्म में सिर्फ गिरिराज महाराज के छप्पन भोग तो अब तक पढ़े, देखे और सुने जाते रहे है लेकिन इन धर्माचार्यों ने तो हिन्दू धर्म में ही एक ऐसा नया इतिहास जोड़ दिया जो भले ही धार्मिक भावनाऐं पैदा करे या न करे लेकिन धार्मिक बहस जरूर आरम्भ कर रहा है। सवाल ये भी पैदा होता है कि जिस छप्पन भोग का वर्णन भी हिन्दू धर्म में कभी नहीं मिला वो विशाल आयोजन धार्मिक कहलाया जाये या सिर्फ भौतिक शक्ति प्रदर्शन का एक स्वरूप कहा जाये। बताया गया है अभी तक शासन प्रशासन से इस आयोजन के लिये भी कोई अनुमति नहीं ली गयी है। इसके बावजूद इस आयोजन का जोरदार प्रचार प्रसार किया जा रहा है यदि सुरक्षा कारणों और हाईअलर्ट के चले शासन प्रशासन इस कार्यक्रम को अनुमति नही देता है तो क्या ये आयोजन रोका जायेगा और फिर बिना अनुमति के ही क्यों इस आयोजन का इतना व्यापक प्रचार प्रसार किया जा रहा है। यदि प्रशासन इस आयोजन के लिये अनुमति देता भी है तो हाईअलर्ट के दौरान इस बड़े आयोजन की सुरक्षा व अन्य व्यवस्थाआंे के लिये प्रशासन क्या इन्तजाम करेगा। वहीं इस कथित धार्मिक आयोजन के नाम पर लाखों भक्तों की आस्था के केन्द्र राधारानी के सार्वजनिक कुण्ड को पूरी तरह से हाईजैक कर लिया जायेगा जिससे भक्तों को राधाकुण्ड के प्रति वास्तविक धार्मिक आस्था के आचमन, स्नान आदि किये बिना ही अपनी गिरिराज परिक्रमा पूरी करनी पड़ेगी। जो प्राकृतिक संसाधनों पर हर भारतीय के बराबर के हक के भारतीय संविधान के नियम का एक खुलेआम और जोरदार उल्लंघन प्रशासन के सानिध्य में किया जायेगा। जब कि हिन्दू धर्म में ऐसे किसी धार्मिक आयोजन का वर्णन ही नहीं है जिससे प्रकृति और उसके संसाधनों पर अतिक्रमण होता हो। वर्ष 2014 के गुजरने और नववर्ष 2015 की आगमन की खुशियों के साथ ही हमलों की आशंका के बीच ऐसे विशाल धार्मिक आयोजन भी आतंकी निशाने का केन्द्र बन सकते है। वहीं इतना बड़ा आयोजन हाईअलर्ट और आतंकी हमलों की चुनौतियों के बीच बिना कड़े सुरक्षा प्रबन्धों के आयोजित होना सुरक्षा के लिये बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। वहीं ऐसे बड़े आयोजनों का प्रबन्धन पूर्व में भरना खुर्द में एक ऐसे ही भण्डारे में घटित हुई दुर्घटना की पुनरावृत्ति न होने की गारण्टी किन आधारों पर दे सकता है। क्या शासन प्रशासन ने पूर्व में घटित हुई भरना खुर्द के भण्डारें में हुई करीब 8 मौतों के दर्जनों के घायल होने की घटना से सबक लेकर सुरक्षा व व्यवस्था के पर्याप्त इन्तजाम जांच लिये है। गिरिराज धाम का ये पवित्र स्थल राधाकुण्ड और श्यामकुण्ड के संगम का अलौकिक मिलन का पवित्र स्थल है ऐसे में कुछ सनातन धर्माचार्यों द्वारा राधाकुण्ड पर तो 108 टन फलांे का छप्पन भोग लगाया जा रहा है वहीं ठीक राधाकुण्ड से संगम करते श्याम कुण्ड पर ऐसे किसी आयोजन का कोई प्रतिविम्ब भी नजर नहीं आ रहा। जबकि सनातन धर्म में कोई भी पूजा बिना आराध्य और बिना शक्ति के पूर्ण ही नहंी मानी जाती है। गिरिराज धाम में राधाकुण्ड कस्बे की सर्वाधिक संकरी गलियां व कुण्ड का छोटा स्वरूप और छोटे घाट भी इस आयोजन के लिये परेशानी बन सकते है। इस आयोजन के दौरान यहां संकुचन की परेशानी भी कहीं बड़ा रूप न धारण कर ले जो बड़ी मुसीबत भी बन सकती है। यदि इस विशाल कार्यक्रम के औचित्य पर नजर डाले तों ये सिर्फ एक व्यापक खर्चों वाला और आयोजक के मात्र व्यक्तिगत शक्ति प्रदर्शन जैसा ही कार्यक्रम नजर आता है। जिस व्यापक स्तर पर यहां इस कार्यक्रम की तैयारियां और खर्चे किये जा रहे है उससे अन्दाजा लगा पाना बहुत ही आसान है कि इस आयोजन में कितना रूपया पानी की तरह बहाया जा रहा है। करोड़ों की तादात में खर्च कर सम्पन्न होने वाले इस बेवजह के धार्मिक आयोजन में लोगों की भावनाओं को जोड़ने व इसके सिर्फ औचित्य मात्र को स्थापित करने को लिये ये लोग शहीदों के नाम का भी सहारा लेने से नहीं चूके। शहीदों के परिजनों के सम्मान आदि के नाम पर भी इस कार्यक्रम को बढ़ावा दिया जा रहा है। यदि इन आयोजकों के मन में उन शहीद परिवारों के प्रति कोई सहानुभूति और श्रद्धा को भाव है तो क्यों न इस विशाल आयोजन में खर्च होने वाले धन को उन शहीद परिवारों और उनके बच्चों की पढ़ाई में खर्च किया जाये। कार्यक्रम के आयोजक लाउड स्पीकरों, टीवी चैनलों, अखबारों और न्यौतों के माध्यम से प्रचार प्रसार कर भोज के लिये भारी भीड जुटाने के प्रयास कर रहे है। ऐसे में यहां जारी हाईअलर्ट के बीच भी छोटे से कस्बे राधाकुण्ड के इस निजी कार्यक्रम में इतनी भीड एकत्रित करने को पुलिस प्रशासन द्वार कहीं नजरन्दाज तो नहीं किया जा रहा। वहीं थाना प्रभारी राजा सिंह से नववर्ष के सुरक्षा उपायों पर जब हमने जानकारी चाही तो उन्होने बताया कि इस दौरान परिक्रमा मार्ग में पुलिस की 6 गाडि़यां गश्त करेंगी। वहीं गोवर्धन में प्रवेश से पूर्व ही वाहनों को रोक दिया जायेगा। सिविल और वर्दी में पुलिसकर्मी विभिन्न मन्दिरों व परिक्रमा मार्ग की सुरक्षा में तैनात रहेंगे। दानघाटी में मैटल डिटैक्टर लगाये है। वहीं सुरक्षा एजेन्सी भी पल पल की जानकारी लेती रहेंगी। राधाकुण्ड के छप्पन भोग आयोजन की सुरक्षा के बारे में पूछने पर थाना प्रभारी राजा सिंह ने बताया कि उसके लिये राधाकुण्ड कस्बे के बाहर एक सब इंस्पैक्टर और दो सिपाही तैनात रहेगे जो वाहनों को प्रवेश से रोकेंगे। वहीं कार्यक्रम की सुरक्षा के बारे में वे कुछ खास नहीं बता सके। उन्होने सुरक्षा की आवश्यकता स्वीकार करते हुए बताया कि इसके लिये अतिरिक्त पुलिस बल भी मांगा गया है। कहीं धर्मान्तरण तो मकसद नहीं ऐसे आयोजनों का आखिर हिन्दू धर्म के नाम पर धर्मग्रन्थों और पुरातन परम्पराओं को भी परे रखकर अपनी मनमर्जी से नित नयी परम्पराओं को जन्म देने वाले ऐसे धर्माचार्य क्या खुद को धर्म से भी श्रेष्ठ साबित करने में जुटे है। कहीं ऐसा तो नहीं कि धर्म के ठेकेदार इन मनमर्जी की परम्पराओं से अपने किसी नये धर्म की परम्परा को विकसित करने का प्रयास कर रहे है। कहीं ऐसा तो नही कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से धीरे धीरे विशाल और गहरी परम्पराऐं स्थापित कर पाने की कोशिशों में शायद कामयाब होने के बाद ये धर्माचार्य कहीं अपना नया धर्म घोषित करने का ख्वाब तो नहीं बुन रहे। यदि ऐसा होगा तो ये हिन्दुओं का एक बड़ा धर्मान्तरण होगा। यदि इसमें थोड़ी भी सच्चाई है तो वास्तव में वर्तमान की सरकारों में चल रही पुराने धर्मान्तरण की बहस को छोड़ कर भविष्य में सम्भावित होने वाले इस धर्मान्तरण को रोकने के ज्यादा प्रयास करने चाहिए। अब तक सिर्फ गिरिराज जी के छप्पन भोग ही सुने व देखे हिन्दू धर्म में अभी तक सिर्फ गिरिराज महाराज को ही छप्पन भोग लगाये जाने का प्रवधान और वर्णन मिलता रहा है। सभी धर्म गन्थों और वेद पुराणों में मिलता है। ऐसे में धर्म के नाम पर राधाकुण्ड का छप्पन भोग लगाये जाने का ये विशाल कार्यक्रम सिर्फ धर्माचार्य जी का शक्ति प्रदर्शन मात्र नजर आता है। गिरिराज महाराज के भी छप्पन भोग का महत्व और वर्णन सिर्फ दीपावली के अगले दिन पड़वा के दिन होने वाली गोवर्धन पूजा के दौरान ही मिलता है। साल भर अक्सर होने वाले छप्पन के ये विशाल आयोजन भी धर्म का अनुसरण नहीं बल्कि शक्ति प्रदर्शन मात्र के आयोजन है।
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