देश के नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रम को प्रोत्साहन देते हुए नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली नई सरकार ने देश में ‘स्वच्छ ऊर्जा’ को बढ़ावा देने के लिए अपने छ: महीने के कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इनमें 1000 मेगावॉट क्षमता वाली ग्रिड कनैक्टिक सौर फोटोवॉल्टिक विद्युत परियोजनाओं के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को एक हजार करोड़ रुपये की सहायता देना, केन्द्र से 4050 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की आवश्यकता वाले 500 मेगावॉट क्षमता के 25 सौर ऊर्जा पार्कों की स्थापना करना और रक्षा एवं अर्द्धसैनिक प्रतिष्ठानों द्वारा 300 मेगावॉट क्षमता की सौर विद्युत परियोजनाओं की स्थापना करना शामिल है।
इन फैसलों से भारत एक प्रमुख सौर विद्युत उत्पादक देश के रूप में उभरेगा, क्योंकि दुनिया के किसी भी हिस्से में इतने बड़े पैमाने पर सौर पार्क विकसित नहीं किए जा रहे हैं।
सरकार ने पवन ऊर्जा उत्पादकों और उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बहुप्रतीक्षित राहत देने के वास्ते 2014 के केन्द्रीय बजट में त्वरित मूल्यहृास लाभ को बहाल किया है। इससे पवन ऊर्जा कार्यक्रम को तेजी से शुरू करने और इसे बढ़ावा देने का मार्ग प्रशस्त होगा। सरकार ने डंपिंगरोधी शुल्क विवाद को शांतिपूर्वक निपटा लिया है। भारत को सौर ऊर्जा हब बनाने के लिए अनेक उपाय किए गए हैं, जिनमें मेक-इन-इंडिया कार्यक्रम के एक हिस्से के रूप में घरेलू उत्पादकों को प्राथमिकता दी जाएगी। इन प्रयासों के साथ ही घरेलू निर्माताओं को ज्यादा ऑर्डर मिल सकेंगे और उन्हें अपनी तकनीक को उन्नत बनाकर लागत मूल्य को कम करने का अवसर मिलेगा।
देश में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के तेजी से विकास के लिए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय नवीकरणीय ऊर्जा विधेयक तैयार कर रहा है। इसके अलावा मंत्रालय अगले पांच वर्षों में सौर विकास के लिए बड़े स्तर पर योजना बना रहा है।
ऊर्जा के क्षेत्र में नई सरकार की प्राथमिकताओं को गिनाते हुए 16वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव के बाद, संसद के दोनों सदनों के पहले सत्र को संबोधन में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सरकार, ऊर्जा संबंधी ढांचागत मानव संसाधन और प्रौद्योगिकी विकास संबंधी पहलुओं को बढ़ावा देने के लिए एक समग्र राष्ट्रीय ऊर्जा नीति लाएगी। सरकार का लक्ष्य परंपरागत और गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोतों के उचित उपयोग से ऊर्जा उत्पादन क्षमता में खासी बढ़ोतरी करना है। इससे राष्ट्रीय ऊर्जा अभियान का विस्तार होगा और घरों एवं उद्योगों को गैस ग्रिड से जोड़ा जा सकेगा।
भारत की नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता को वैश्विक स्तर पर दर्शाने के लिए मंत्रालय ने भारतीय नवीनकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी लिमिटेड- आईआरईडीए की साझेदारी में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और फिक्की, 15-17 फरवरी, 2015 से प्रधानमंत्री के मेक-इन-इंडिया प्रयास का अनुकरण करते हुए वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा विनिवेश संवर्धन सम्मेलन (पुनर्निवेश) का आयोजन कर रहा है। 'री-इन्वेस्ट' कार्यक्रम वैश्विक विनिवेश समुदाय को भारत में नवीकरणीय ऊर्जा हितधारकों से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगा।
देश में 'स्वच्छ ऊर्जा' को बढ़ावा देने के लिए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा कई उपाय किए जाने हैं।
सरकार ने हाल ही में प्रत्येक 500 मैगावाट क्षमता और उससे अधिक के 25 सौर पार्क तथा अगले पांच वर्षों में विभिन्न राज्यों में अल्ट्रा मेगा सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने को मंजूरी दी है और इसके लिए केन्द्र सरकार की 4050 करोड़ रुपये की सहायता से ये पार्क 20 हजार मेगावाट से ज्यादा सौर ऊर्जा उत्पादन कर सकेंगे। अब तक 12 राज्यों ने सौर पार्क स्थापित करने को सहमति प्रदान की है। ये राज्य गुजरात, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, मेघालय, जम्मू एवं कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु और ओडिशा हैं। इन सौर पार्कों का विकास राज्य सरकारों और उनकी एजेंसियों के सहयोग से किया जाएगा।
साल 2014 से 2019 यानी पांच साल की अवधि में जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन (जेएनएन एसएम) के अंतर्गत व्यवहारिक अंतर वित्त पोषण के जरिए रक्षा मंत्रालय के तहत रक्षा प्रतिष्ठानों और गृह मंत्रालय के तहत अर्द्धसैनिक बल प्रतिष्ठानों द्वारा 300 मेगावॉट से अधिक क्षमता वाली ग्रिड से जुड़ी और ऑफ- ग्रिड सौर पीवी ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी। इस योजना के तहत यह जरूरी होगा कि सौर संयत्रों में इस्तेमाल किए जाने वाले पीवी सेल और मॉडयूल भारत में बने हों। इस योजना को लागू करने के लिए नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा कोष से 750 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
सरकार ने, 2015-16 से 2017-18 की तीन वर्ष की अवधि में केन्द्र और राज्य की विभिन्न योजनाओं के तहत सीपीएसयू द्वारा व्यावहारिक अंतर वित्त पोषण वाली एक हजार करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और ग्रिड से जुड़ी एक हजार मेगावॉट क्षमता की परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इस योजना में यह अनिवार्य है कि सौर सयंत्रों में इस्तेमाल किए जाने वाले पीवी सेल और मॉडयूल भारत में बने होने चाहिए। एनटीपीसी, एनएचपीसी, सीआईएल, आईआरईडीए, और भारतीय रेलवे जैसे सीपीएसयू और भारत सरकार के संगठन सौर ऊर्जा परियोजनाए स्थापित करने के लिए आगे आ रहे हैं।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुरोध पर पर्यावरण मंत्रालय ने केन्द्र और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लाल श्रेणी के अंतर्गत आने की सौर, पवन और जल ऊर्जा परियोजनाओं को हरित श्रेणी में लाने का फैसला लिया है। केन्द्रीय और राज्य प्रदूषण बोर्ड ने उद्योगों की श्रेणी में संशोधन जारी किया है जिसके अनुसार सभी क्षमता की पवन और सौर ऊर्जा परियोजनाओं और 25 मेगावॉट कम क्षमता वाली जल ऊर्जा परियोजनाओं को हरी श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब यह है कि परियोजना संचालकों को अब शुरू में केवल एक बार ही स्थापना एवं संचालन के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण केन्द्र से मंजूरी प्रमाण-पत्र लेना होगा।
जुलाई में संसद द्वारा पारित मंत्रालय के नियमित बजट में अंतरिम बजट के 1519 करोड़ रुपये के प्रावधान के मुकाबले 2519 करोड़ रुपये यानी 65.8 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। कोयले पर स्वच्छ ऊर्जा शुल्क की दर 50 रुपये प्रति टन से बढ़ाकर 100 प्रति टन कर दी गई है ताकि नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिए प्रयाप्त धनराशि उपलब्ध रहे।
1 अप्रैल, 2012 से पवन ऊर्जा क्षेत्र के लिए मूल्य हृास लाभ वापस लिए जाने से हुए काफी नुकसान के बाद इसे 18 जुलाई, 2014 से पुन: लागू कर दिया गया है। सरकार के इस निर्णय से देश में पवन ऊर्जा टरबाईन के निर्माण में सहायता मिलेगी।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने 228 करोड़ रुपये की केन्द्रीय वित्तीय सहायता और 12वीं योजना में 975 करोड़ रुपये की लागत से नहरों के किनारें और उनके मुहानों पर स्थापित ग्रिड से जुड़े सौर पीवी ऊर्जा संयंत्रों के विकास के लिए योजना शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य है कि नहरों के मुहानों के आस-पास की इस्तेमाल न की गई जगह का लाभपूर्ण उपयोग का लक्ष्य हासिल किया जाए और नहरों के किनारे जहां कहीं भी सरकारी भूमि उपलब्ध हो वहां पर सौर पीवी ऊर्जा उत्पादन संयंत्र स्थापित किए जाए। इन्हें ग्रिड से जोड़ा जाए ताकि इन ऊर्जा संयंत्रों से 100 मेगावॉट की कुल क्षमता प्राप्त हो सके।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अंतर्गत वित्तीय सेवा विभाग ने सभी बैंकों को छत पर सौर पीवी लगाने के लिए गृह ऋण/और गृह सुधार के लिए ऋण चाहने वालों को प्रोत्साहित करने की सलाह दी है। इसमें गैर सौर लाइटिंग, वायरिंग तथा अन्य फिटिंग की तरह गृह ऋण प्रस्ताव में उपकरण लागत शामिल करने की सलाह भी शामिल है। इसके अतिरिक्त भारतीय रिवर्ज बैंक ने सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को निर्देश दिया है कि घरेलू ऑफ ग्रिड सौर तथा अन्य ऑफ ग्रिड नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण के लिए बैंक द्वारा प्रत्यक्ष रूप से व्यक्तियों को मंजूर किए गए ऋणों को प्राथमिकता ऋण के तहत शामिल किया जाएगा।
सौर पंपों के वर्तमान कार्यक्रम को बढ़ाया गया है ताकि एक लाख सौर पंपों को सौर ऊर्जा दी जा सके और इस बाबत पूरक दिशा निर्देश जारी किए गए है। एक लाख सौर पंपों में से 20 हजार पेयजल आपूर्ति और स्वच्छता मंत्रालय को दिए गए हैं। (20 हजार पंप पेयजल के लिए, एमएनआरई) राज्यों के माध्यम से सिंचाई के लिए 50 हजार पंपों के लिए सौर ऊर्जा तथा नाबार्ड (30 हजार पंप) नवाचार कार्यान्वयन के लिए।
उन्नत चूल्हा अभियान कार्यक्रम ग्रामीण अर्द्धशहरी तथा शहरी क्षेत्रों में खाना पकाने के लिए बायोमास के इस्तेमाल से भोजन पकाने की स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रारम्भ किया गया। इससे ग्रामीण महिलाओं को परंपरागत जलावन से उठने वाले धुंआ से राहत मिलेगी।
गुजरात तट पर पहली प्रदर्शन अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजना के लिए संयुक्त उद्यम कंपनी स्थापित करने पर 1 अक्टूबर 2014 को सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। समझौते पर नवी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान (एनआईडब्ल्यूई) तथा राष्ट्रीय ताप ऊर्जा निगम (एनटीपीसी) पावर ग्रिड कॉरपोरेशन इंडिया लिमिटेड (पीजीसीआईएल), भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (आईआरईडीए) पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी), पावर ट्रेडिंग कारपोरेशन (पीटीसी) तथा गुजरात पावर कारपोरेशन लिमिटेड (जीपीसीएल) जैसे साझेदारों के समूह ने हस्ताक्षर किए। संयुक्त उद्यम कंपनी विस्तृत संभावना अध्ययन करेगी और पहली अपतटीय प्रदर्शन पवन ऊर्जा परियोजना के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।
नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रमों को लागू करने वाली राज्य नोडल एजेंसियों को एक दूसरे के अनुभव साझा करने के लिए संवाद बढ़ाने के लिए एमएनआरई ने राज्य की नोडल एजेंसियों की सलाह से पहल करते हुए राज्यों की नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसियों का संघ (एआरईएएस) बनाया और यह सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के अंतर्गत 27 अगस्त, 2014 को सोसायटी के रूप में पंजीकृत हुआ।
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