मथुरा

मथुरा। विश्व भारती पब्लिक स्कूल द्वारा जनवादी लेखक कामरेड सव्यसांची की पूण्य तिथि विद्यालय में मनाई गई। इस अवसर पर विद्यालय के वाल कलाकारों ने कविता, कहानी एवं चित्रों पर आधारित कार्यक्रम का मंचन किया। कार्यक्रम में विद्यालय के बच्चों और परिवार ने सव्यसांची को पूण्य तिथि पर अपनी पुष्पाजंलि अर्पित की। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि स्व0 सव्यसांची ने समाज के विकास के लिए विभिन्न कार्यो के साथ योगदान किया। कार्यक्रम में हर्ष अग्रवाल, योगेश, ज्योति, पूजा, रैनू, मोंहित राठोर ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में रोहित, मानिका, आसु, विशाल, जितेन्द्र, कौशल, वासुदेव का सहयोग सराहनीय रहा। जनवादी लेखिका विजय लक्ष्मी ने प्रस्तुत सभी रचनाओं का संकंलन युगान्तर के प्रकाशन करने का आश्वासन दिया।  

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राजेश मल्होत्रा / एन देवन भारत में बिजली संकट हमेशा से एक ज्वलंत मुद्दा रहा है। दिनों-दिन बिजली की कई गुणा बढ़ती मांग के साथ बिजली की 24 घंटे उपलब्धता की जरूरत ज्यादा से ज्यादा अहम होती जा रही है। एकीकृत बिजली विकास योजना (आईपीडीएस) के शुभारंभ के साथ बिजली कटौतियां अब अतीत की बात हो जाएगी।  चौबीस घंटे बिजली आपूर्ति मुहैया कराने के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ते हुए, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में देश के कोने-कोने तक पारेषण और वितरण नेटवर्कों को बेहतर बनाने के लिए कई योजनाओं को मंजूरी दी है। एकीकृत बिजली विकास योजना (आईपीडीएस) बिजली मंत्रालय की एक प्रमुख योजना है और इसकी कोशिश देश में सभी को 24 घंटे बिजली सुनिश्चित करने की होगी। केंद्रीय बजट 2014-15 में घोषित आईपीडीएस में उप-पारेषण नेटवर्क, मीटर लगाने, आईटी आवेदन, ग्राहक देखभाल सेवाओं, सौर पैनल के प्रावधानों को मजबूत बनाने और पुनर्गठित त्वरित बिजली विकास एवं सुधार कार्यक्रम (आरएपीडीआरपी) को पूरा करने की परिकल्पना की गई है। यह योजना एटी एवं सी नुकसानों में कमी लाने, आईटी सक्षमकारी ऊर्जा लेखांकन एवं लेखा परीक्षण प्रणाली की स्थापना करने, मीटर उपभोग पर आधारित बिजली बिल तैयार करने एवं संग्रहण कुशलता को बेहतर बनाने में मदद करेगी। शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ताओं के लिए मीटर लगाने समेत उप-पारेषण एवं वितरण नेटवर्कों को मजबूत बनाने के तत्वों के साथ वर्तमान योजना की अनुमानित लागत 32,612 करोड़ रुपये है जिसमें संपूर्ण क्रियान्वयन अवधि के लिए भारत सरकार से 25,354 करोड़ रुपये की बजटीय सहायता की जरूरत शामिल है। वितरण क्षेत्र की आईटी सक्षमता का तत्व और 12वीं एवं 13वीं योजनाओं के लिए आरएपीडीआरपी के रूप में जून 2013 में आर्थिक मामलों पर मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) द्वारा मंजूर वितरण नेटवर्क को मजबूत बनाने की योजनाएं इस योजना में सम्मलित हो जाएंगी और 22,727 करोड़ रुपये की बजटीय सहायता समेत 44,011 करोड़ रुपये की सीसीईए द्वारा मंजूर योजना परिव्यय आईपीडीएस की नई योजना में आगे बढ़ा दिया जाएगा। निजी डिस्कॉम एवं राज्य बिजली विभागों समेत सभी डिस्कॉम इस योजना के तहत वित्तीय सहायता के लिए योग्य होंगी। डिस्कॉम विशिष्ट नेटवर्क जरूरत पर विचार करते हुए शहरी ढांचागत कार्यों को मजबूत बनाने को वरीयता देंगी और इस योजना के तहत आने वाली परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करेंगी। इस योजना के तहत परियोजनाएं कार्य के लिए पत्र जारी किये जाने की तारीख से 24 महीनों की अवधि के भीतर पूरी हो जाएंगी। इस योजना के संचालन के लिए पावर फाइनेंस कार्पोरेशन नोडल एजेंसी है। योजना के लिए अनुदान हिस्सा विशिष्ट वर्ग राज्यों के अतिरिक्त अन्य राज्यों के लिए 60 फीसदी (अनुशंसित उपलब्धि अर्जित करने पर 75 प्रतिशत तक) और विशिष्ट वर्ग राज्यों के लिए 85 फीसदी (अनुशंसित उपलब्धि अर्जित करने पर 90 प्रतिशत तक) तक है। अतिरिक्त अनुदान के लिए अपेक्षित उपलब्धियां हैं : योजना का समय पर पूरा होना, एटी एंड सी में अपेक्षित कमी और राज्य सरकार द्वारा सब्सिडी को अग्रिम रूप से जारी करना। सिक्किम समेत सभी पूर्वोत्तर राज्य, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड विशिष्ट वर्ग राज्यों में शामिल हैं।  इस योजना के तहत अनुशंसित दिशा-निर्देशों के अनुरूप योजना का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए बिजली मंत्रालय, राज्य सरकार और डिस्कॉम के बीच एक उपयुक्त त्रिपक्षीय समझौता किया जाएगा जिसमें पावर फाइनेंस कार्पोंरेशन एक नोडल एजेंसी होगी। राज्य बिजली विभागों के मामलों में द्विपक्षीय समझौते होंगे। शहरी क्षेत्रों में बिजली प्रणालियों के लिए एक आदर्श मानदंड, जोकि डिजिटल/ प्रीपेड मीटरिंग, 11 केवी का भूमिगत तार बिछाना और एलटी लाईन, एटीएंडसी नुकसान के लिए अधिकतम सीमा जैसे मानदंडों का निर्धारण करता है, केंद्रीय बिजली प्राधिकरण द्वारा 5 जनवरी, 2015 के भीतर तैयार कर दिया जाएगा।

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देश के नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रम को प्रोत्‍साहन देते हुए नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व वाली नई सरकार ने देश में ‘स्‍वच्‍छ ऊर्जा’  को बढ़ावा देने के लिए अपने छ: महीने के कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इनमें 1000 मेगावॉट क्षमता वाली ग्रिड कनैक्टिक सौर फोटोवॉल्टिक विद्युत परियोजनाओं के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को एक हजार करोड़ रुपये की सहायता देना, केन्‍द्र से 4050 करोड़ रुपये की वित्‍तीय सहायता की आवश्‍यकता वाले 500 मेगावॉट क्षमता के 25 सौर ऊर्जा पार्कों की स्‍थापना करना और रक्षा एवं अर्द्धसैनिक प्रतिष्‍ठानों द्वारा 300 मेगावॉट क्षमता की सौर विद्युत परियोजनाओं की स्‍थापना करना शामिल है। इन फैसलों से भारत एक प्रमुख सौर विद्युत उत्‍पादक देश के रूप में उभरेगा, क्‍योंकि दुनिया के किसी भी हिस्‍से में इतने बड़े पैमाने पर सौर पार्क विकसित नहीं किए जा रहे हैं। सरकार ने पवन ऊर्जा उत्‍पादकों और उत्‍पादन को बढ़ावा देने के लिए बहुप्रतीक्षित राहत देने के वास्‍ते 2014 के केन्‍द्रीय बजट में त्‍वरित मूल्‍यहृास लाभ को बहाल किया है। इससे पवन ऊर्जा कार्यक्रम को तेजी से शुरू करने और इसे बढ़ावा देने का मार्ग प्रशस्‍त होगा। सरकार ने डंपिंगरोधी शुल्‍क विवाद को शांतिपूर्वक निपटा लिया है। भारत को सौर ऊर्जा हब बनाने के लिए अनेक उपाय किए गए हैं, जिनमें मेक-इन-इंडिया कार्यक्रम के एक हिस्‍से के रूप में घरेलू उत्‍पादकों को प्राथमिकता दी जाएगी। इन प्रयासों के साथ ही घरेलू निर्माताओं को ज्‍यादा ऑर्डर मिल सकेंगे और उन्‍हें अपनी तकनीक को उन्‍नत बनाकर लागत मूल्‍य को कम करने का अवसर मिलेगा। देश में नवीकरणीय ऊर्जा उत्‍पादन के तेजी से विकास के लिए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय नवीकरणीय ऊर्जा विधेयक तैयार कर रहा है। इसके अलावा मंत्रालय अगले पांच वर्षों में सौर विकास के लिए बड़े स्‍तर पर योजना बना रहा है। ऊर्जा के क्षेत्र में नई सरकार की प्राथमिकताओं को गिनाते हुए 16वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव के बाद, संसद के दोनों सदनों के पहले सत्र को संबोधन में राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सरकार, ऊर्जा संबंधी ढांचागत मानव संसाधन और प्रौद्योगिकी विकास संबंधी पहलुओं को बढ़ावा देने के लिए एक समग्र राष्‍ट्रीय ऊर्जा नीति लाएगी। सरकार का लक्ष्‍य परंपरागत और गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोतों के उचित उपयोग से ऊर्जा उत्‍पादन क्षमता में खासी बढ़ोतरी करना है। इससे राष्‍ट्रीय ऊर्जा अभियान का विस्‍तार होगा और घरों एवं उद्योगों को गैस ग्रिड से जोड़ा जा सकेगा। भारत की नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता को वैश्‍विक स्‍तर पर दर्शाने के लिए मंत्रालय ने भारतीय नवीनकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी लिमिटेड- आईआरईडीए की साझेदारी में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और फिक्‍की, 15-17 फरवरी, 2015 से प्रधानमंत्री के मेक-इन-इंडिया प्रयास का अनुकरण करते हुए वैश्‍विक नवीकरणीय ऊर्जा विनि‍वेश संवर्धन सम्‍मेलन (पुनर्निवेश) का आयोजन कर रहा है। 'री-इन्‍वेस्‍ट' कार्यक्रम वैश्विक विनिवेश समुदाय को भारत में नवीकरणीय ऊर्जा हितधारकों से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगा।  देश में 'स्‍वच्‍छ ऊर्जा' को बढ़ावा देने के लिए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा कई उपाय किए जाने हैं। सरकार ने हाल ही में प्रत्‍येक 500 मैगावाट क्षमता और उससे अधिक के 25 सौर पार्क तथा अगले पांच वर्षों में विभिन्‍न राज्‍यों में अल्‍ट्रा मेगा सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्‍थापित करने को मंजूरी दी है और इसके लिए केन्‍द्र सरकार की 4050 करोड़ रुपये की सहायता से ये पार्क 20 हजार मेगावाट से ज्‍यादा सौर ऊर्जा उत्‍पादन कर सकेंगे। अब तक 12 राज्‍यों ने सौर पार्क स्‍थापित करने को सहमति प्रदान की है। ये राज्‍य गुजरात, मध्‍य प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, उत्‍तर प्रदेश, मेघालय, जम्‍मू एवं कश्‍मीर, पंजाब, राजस्‍थान, तमिलनाडु और ओडिशा हैं। इन सौर पार्कों का विकास राज्‍य सरकारों और उनकी एजेंसियों के सहयोग से किया जाएगा। साल 2014 से 2019 यानी पांच साल की अवधि में जवाहरलाल नेहरू राष्‍ट्रीय सौर मिशन (जेएनएन एसएम) के अंतर्गत व्‍यवहारिक अंतर वित्‍त पोषण के जरिए रक्षा मंत्रालय के तहत रक्षा प्रतिष्‍ठानों और गृह मंत्रालय के तहत अर्द्धसैनिक बल प्रतिष्‍ठानों द्वारा 300 मेगावॉट से अधिक क्षमता वाली ग्रिड से जुड़ी और ऑफ- ग्रिड सौर पीवी ऊर्जा परियोजनाएं स्‍थापित की जाएंगी। इस योजना के तहत यह जरूरी होगा कि सौर संयत्रों में इस्‍तेमाल किए जाने वाले पीवी सेल और मॉडयूल भारत में बने हों। इस योजना को लागू करने के लिए नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छ ऊर्जा कोष से 750 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।   सरकार ने, 2015-16 से 2017-18 की तीन वर्ष की अवधि में केन्‍द्र और राज्‍य की विभिन्‍न योजनाओं के तहत सीपीएसयू द्वारा व्‍यावहारिक अंतर वित्‍त पोषण वाली एक हजार करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और ग्रिड से जुड़ी एक हजार मेगावॉट क्षमता की परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इस योजना में यह अनिवार्य है कि सौर सयंत्रों में इस्‍तेमाल किए जाने वाले पीवी सेल और मॉडयूल भारत में बने होने चाहिए। एनटीपीसी, एनएचपीसी, सीआईएल, आईआरईडीए, और भारतीय रेलवे जैसे सीपीएसयू और भारत सरकार के संगठन सौर ऊर्जा परियोजनाए स्‍‍थापित करने के लिए आगे आ रहे हैं। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुरोध पर पर्यावरण मंत्रालय ने केन्‍द्र और राज्‍य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लाल श्रेणी के अंतर्गत आने की सौर, पवन और जल ऊर्जा परियोजनाओं को हरित श्रेणी में लाने का फैसला लिया है। केन्‍द्रीय और राज्‍य प्रदूषण बोर्ड ने उद्योगों की श्रेणी में संशोधन जारी किया है जिसके अनुसार सभी क्षमता की पवन और सौर ऊर्जा परियोजनाओं और 25 मेगावॉट कम क्षमता वाली जल ऊर्जा परियोजनाओं को हरी श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब यह है कि परियोजना संचालकों को अब शुरू में केवल एक बार ही स्‍थापना एवं संचालन के लिए राज्‍य प्रदूषण नियंत्रण केन्‍द्र से मंजूरी प्रमाण-पत्र लेना होगा। जुलाई में संसद द्वारा पारित मंत्रालय के नियमित बजट में अंतरिम बजट के 1519 करोड़ रुपये के प्रावधान के मुकाबले 2519 करोड़ रुपये यानी 65.8 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। कोयले पर स्‍वच्‍छ ऊर्जा शुल्‍क की दर 50 रुपये प्रति टन से बढ़ाकर 100 प्रति टन कर दी गई है ताकि नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के वित्‍त पोषण के लिए प्रयाप्‍त धनराशि उपलब्‍ध रहे। 1 अप्रैल, 2012 से पवन ऊर्जा क्षेत्र के लिए मूल्‍य हृास लाभ वापस लिए जाने से हुए काफी नुकसान के बाद इसे 18 जुलाई, 2014 से पुन: लागू कर दिया गया है। सरकार के इस निर्णय से देश में पवन ऊर्जा टरबाईन के निर्माण में सहायता मिलेगी। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने 228 करोड़ रुपये की केन्‍द्रीय वित्‍तीय सहायता और 12वीं योजना में 975 करोड़ रुपये की लागत से नहरों के किनारें और उनके मुहानों पर स्‍थापित ग्रिड से जुड़े सौर पीवी ऊर्जा  संयंत्रों के विकास के लिए योजना शुरू की है। इस योजना का उद्देश्‍य है कि नहरों के मुहानों के आस-पास की इस्‍तेमाल न की गई जगह का लाभपूर्ण उपयोग का लक्ष्‍य हासिल किया जाए और नहरों के किनारे जहां कहीं भी सरकारी भूमि उपलब्‍ध हो वहां पर सौर पीवी ऊर्जा उत्‍पादन संयंत्र स्‍थापित किए जाए। इन्‍हें ग्रिड से जोड़ा जाए ताकि इन ऊर्जा संयंत्रों से 100 मेगावॉट की कुल क्षमता प्राप्‍त हो सके। केंद्रीय वित्‍त मंत्रालय के अंतर्गत वित्‍तीय सेवा विभाग ने सभी बैंकों को छत पर सौर पीवी लगाने के लिए गृह ऋण/और गृह सुधार के लिए ऋण चाहने वालों को प्रोत्‍साहित करने की सलाह दी है। इसमें गैर सौर लाइटिंग, वायरिंग तथा अन्‍य फिटिंग की तरह गृह ऋण प्रस्‍ताव में उपकरण लागत शामिल करने की सलाह भी शामिल है। इसके अतिरिक्‍त भारतीय रिवर्ज बैंक ने सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को निर्देश दिया है कि घरेलू ऑफ ग्रिड सौर तथा अन्‍य ऑफ ग्रिड नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण के लिए बैंक द्वारा प्रत्‍यक्ष रूप से व्‍यक्तियों को मंजूर किए गए ऋणों को प्राथमिकता ऋण के तहत शामिल किया जाएगा। सौर पंपों के वर्तमान कार्यक्रम को बढ़ाया गया है ताकि एक लाख सौर पंपों को सौर ऊर्जा दी जा सके और इस बाबत पूरक दिशा निर्देश जारी किए गए है। एक लाख सौर पंपों में से 20 हजार पेयजल आपूर्ति और स्‍वच्‍छता मंत्रालय को दिए गए हैं। (20 हजार पंप पेयजल के लिए, एमएनआरई) राज्‍यों के माध्‍यम से सिंचाई के लिए 50 हजार पंपों के लिए सौर ऊर्जा तथा नाबार्ड (30 हजार पंप) नवाचार कार्यान्‍वयन के लिए। उन्‍नत चूल्‍हा अभियान कार्यक्रम ग्रामीण अर्द्धशहरी तथा शहरी क्षेत्रों में खाना पकाने के लिए बायोमास के इस्‍तेमाल से भोजन पकाने की स्‍वच्‍छ ऊर्जा उपलब्‍ध कराने के उद्देश्‍य से प्रारम्‍भ किया गया। इससे ग्रामीण महिलाओं को परंपरागत जलावन से उठने वाले धुंआ से राहत मिलेगी। गुजरात तट पर पहली प्रदर्शन अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजना के लिए संयुक्‍त उद्यम कंपनी स्‍थापित करने पर 1 अक्‍टूबर 2014 को सहमति पत्र पर हस्‍ताक्षर किए गए। समझौते पर नवी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, राष्‍ट्रीय पवन ऊर्जा संस्‍थान (एनआईडब्‍ल्‍यूई) तथा राष्‍ट्रीय ताप ऊर्जा निगम (एनटीपीसी) पावर ग्रिड कॉरपोरेशन इंडिया लिमिटेड (पीजीसीआईएल), भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (आईआरईडीए) पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी), पावर ट्रेडिंग कारपोरेशन (पीटीसी) तथा गुजरात पावर कारपोरेशन लिमिटेड (जीपीसीएल) जैसे साझेदारों के समूह ने हस्‍ताक्षर किए। संयुक्‍त उद्यम कंपनी विस्‍तृत संभावना अध्‍ययन करेगी और पहली अपतटीय प्रदर्शन पवन ऊर्जा परियोजना के कार्यान्‍वयन के लिए आवश्‍यक कदम उठाएगी। नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रमों को लागू करने वाली राज्‍य नोडल एजेंसियों को एक दूसरे के अनुभव साझा करने के लिए संवाद बढ़ाने के लिए एमएनआरई ने राज्‍य की नोडल एजेंसियों की सलाह से पहल करते हुए राज्‍यों की नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसियों का संघ (एआरईएएस) बनाया और यह सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के अंतर्गत 27 अगस्‍त, 2014 को सोसायटी के रूप में पंजीकृत हुआ।

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  मुंबई। शनिवार २० दिसंबर २०१४ को "सोसाइटी ऑफ़ दी हेलपर्स ऑफ़ मैरी" चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा "क्रिसमस" के उप्लछ में एक कार्यक्रम का आयोजन मालाड( पश्चिम) के मालवणी गेट नंबर आठ में किया गया था। जहाँ पर बच्चों द्वारा डांस, नाटक, गीत इत्यादि का कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया और "क्रिसमस" मनाया गया। ट्रस्ट द्वारा बच्चों को फल और कपड़ा वितरित किया गया। तथा सामजिक संस्था" गांधी विचार मंच" के अध्यक्ष मनमोहन गुप्ता की तरफ से जयप्रकाश पाण्डेय द्वारा बच्चों को नास्ता वितरित किया गया।       " सोसाइटी ऑफ़ दी हेलपर्स ऑफ़ मैरी" चैरिटेबल ट्रस्ट की सिस्टर एल्सा और सिस्टर जोआना ने बताया कि हम लोग गरीब और जरुरतमंद बच्चों के लिए क्लासेस चलते है और उनसे बीस रुपये महीने का लेते है। और लोगों से मदद लेके टीचर लोगों की फीस देते है। क्योंकि गरीब बच्चे  क्लासेस की फीस नहीं दे पाते है। हम लोग सभी जरुरतमंदों की मदद करते है चाहे बच्चे हो, महिला हो या और कोई। हमारा मानना है कि भगवान, खुद, जीसेस सभी एक है और हम लोगों  के अंदर है ,हम उन्हे  अलग अलग नाम से पुकारते है। हर इंसान में भगवान है, हम लोग एक दूसरे के दुःख और सुख में हिंस्सा लेते है, वही भगवान तक पहुँचने का जरिया है।    इस उप्लक्ष में मनमोहन गुप्ता ने कहा," कई लोग कहते है कि आप कुछ करते है या दान धर्म करते है तो उसे छपवाते क्यों है?  मेरा जवाब है कि मैं जब कुछ करता हूँ या कुछ दान धर्म करता हूँ तो मैं कुछ लोगों का ही भला कर पाता हूँ लेकिन जब फोटो छपवाता हूँ तो कई लोगों का भला करता हूँ। क्यों कि छपा हुआ देखकर कई लोग और प्रभावित होते है और उनमे जोश आता है की मैं यह क्यों नहीं करुँ? और वे लोग भी दान धर्म करते है और इससे ज्यादा से ज्यादा गरीबों और जरुरतमंदों की मदद होती है। आज मोदीजी ने केवल झाड़ू हाथ में उठाया और अब देखो देश के बड़े से बड़ा आदमी झाड़ू उठा लिया है, भले ही इतने बड़े लोगों ने काफी भी एक चाय का कप तक न धोया हो या कभी भी झाड़ू को छुया भी न हो।"                 Sanjay Sharma Raj   (P.R.O.)

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श्रीकांत शर्मा जतीपुरा, हेमा मालिनी मयूर विहार व डीपी गोयल जनरल गंज में सदस्यता प्रमुख मथुरा। भारतीय जनता पार्टी मथुरा ने बूथ स्तरीय सदस्यता अभियान को पूरे जोर शोर से करने की तैयारी की है। भाजपा के जिला अध्यक्ष डीपी गोयल व् जिला सदस्यता प्रमुख रघुवर तौमर ने बताया की भारतीय जनता पार्टी मथुरा ने 1730 बूथ व् 35 मंडलों के प्रवासी प्रभारी के नाम तय कर लिए है। सभी मंडल प्रवासी प्रभारी अपने नियत मंडल में जायेंगे व् उनके बूथ प्रवासियों के माध्यम से बूथ प्रमुख की अगुआई में सदस्यता अभियान चलाया जायेगा तथा प्रत्येक बूथ पर 100 सदस्य का लक्ष्य पूर्ण करना होगा सारे अभियान की कई स्तर पर निगरानी रखी जाएगी सभी छोटे बड़े नेता व् कार्यकर्ता निश्चित रूप से किसी न किसी बूथ पर सदस्यता करायेंगे। सदस्यता प्रमुख रघुवर तोमर ने रामकिशन पाठक ने बताया कि 19 दिसम्बर को श्रीकान्त शर्मा राष्ट्रीय सचिव भाजपा ने जतीपुरा में बूथ नं0 40 पर, सांसद हेमामालिनी ने छावनी क्षेत्र के मयूर बिहार बूथ पर एवं डीपी गोयल ने 253 बूथ जनरल गंज, रविकांत गर्ग कृष्णा नगर, प्रणतपाल सिंह नन्दगाव, रवींन्द पाण्डेय छावनी क्षेत्र, देवेन्द्र शर्मा नगर में व् मनीषा गुप्ता नया नगला व् डीएन गौतम फरह व् अजय पोइया माट में केपी सिंह सोनई ज्ञानेन्द्र राणा गोवर्धन बन्टी चैधरी उस्फार योगेश आवा छटीकरा लक्की कमल चोमुहा आदि बूथो पर सदस्यता अभियान के प्रभारी बनाये गये है। इसके आलावा सभी मोर्चा प्रकोष्ठो के अध्यक्ष मंडल अध्यक्ष मंडल प्रवासी अपने निर्धारित बूथ व् मंडल पर सदस्यता करा रहे है।    

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मथुरा। शहर काग्रेंस कमेटी के तत्वाधान में सदस्यता अभियान के अन्तर्गत एक कैम्प दरेसी रोड पर लगाया गया। जिसमें 1556 लोगों ने काग्रेंस की सदस्यता ग्रहण कर अपनी आस्था व्यक्त की। सदस्यता अभियान में इस्लामिया इन्टर कालेज के मैनेजर तौफीक कमरे वालें, बदलें कुरैशी, बिहारी कान्त तिवारी, लियाकत कुरैशी, ओमप्रकाश शर्मा, सईद सुलेमान, गिलानी कादरी, यतेन्द्र मुकदम, सादर पहलवान, भल्लुआ पहलवान, फारूख चैधरी, पप्पू आरिफ भाई, निजामुदीन काला शेख, बबलू साहिद, आबिद, साहरूख आदि का सहयोग रहा। कार्यक्रम की अध्यक्ष शहर अध्यक्ष मलिक अरोडा ने किया।

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