स्वदेशी अपनाने पर दिया जोर, गुरुभाई स्वदेश द्वारा लिखित पुस्तक का किया विमोचन, नवनिर्मित गौशाला व यज्ञशाला का किया लोकार्पण
मथुरा। गुरुकुल की शिक्षा से ही मनुष्य का सर्वांगीण विकास सम्भव है। प्राचीन काल में गुरुकुल की शिक्षा सर्वोपरि होती थी लेकिन अग्रेंजों के शासनकाल में लार्ड डलहौजी ने हमारी गुरुकुल प्रणाली को खत्म करने के लिए सात लाख गुरुकुलों को तोडकर उनमें काॅन्वेट स्कूल खडे किये जिससे हमारे आने वाली पीढ़ी पश्चिमी रंग में रंगती चली गयी। लेकिन हम सात लाख नये आचार्य कुलम खोलकर तथा पुराने गुरुकुलों का पुनरुद्वार कर फिर से वैदिक संस्कृति को स्थापित करेगें। उक्त विचार योगगुरु स्वामी रामदेव ने वेद मंदिर में चल रहे चतुर्वेद परायण यज्ञ में कही। बाबा रामदेव ने कहा वेद विश्व का सबसे प्राचीन ग्रंथ है। जैसे योग को सारे विश्व ने स्वीकार किया है वैसे ही जल्द ही वेद को भी सारा विश्व स्वीकार करेगा। बाबा ने कहा आह्वान करते हुए कहा कि हमारे देश का पैसा विदेशी कम्पनियों के माध्यम से बाहर जाता है इसलिए सभी को विदेशी कम्पनियों का बहिष्कार कर स्वदेशी अपनाओ। बाबा रामदेव ने कहा कि आतंवादियों ने करोडों लोगों की आंखों में आंसू दिये है, लोगों का दिल दुखाया है लेकिन आर्य समाज करोडों लोगों को खुशी देता आया है और आगे खुशी देता रहेगा। बाबा रामदेव ने वेद मंदिर पहुंचने पर अपने गुरु भाई आचार्य स्वदेश से गले मिलकर वेद मदिंर की पुरानी बातें याद की। बाबा रामदेव ने वेद मंदिर में नवनिर्मित यज्ञशाला और गौशाला का लोकार्पण किया तथा अपने गुरु भाई आचार्य स्वदेश द्वारा लिखित पुस्तक ’महाभारत के प्रेरक प्रसंग का विमोचन किया। आचार्य स्वदेश ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्वामी जी का सदैव सहयोग हमें मिलता रहता है। यज्ञ के ब्रम्हा आचार्य ब्रजेश ने यज्ञ की महिमा पर प्रकाश डाला। गुरुकुल वृन्दावन के ब्रम्हचारियों द्वारा सस्वर में वेदपाठ किया गया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष अनूप चैधरी, पालिकाध्यक्षा मनीषा गुप्ता, पूर्व मंत्री रविकान्त गर्ग, आचार्य सत्यप्रिय आर्य, कवि मनवीर मधुर, आचार्य हरीप्रकाश, आचार्य शत्रुजीत, कृष्णवीर शर्मा, रविन्द्र सिंह लोहिया, विजय गौतम, त्रिलोकचन्द्र शर्मा, दिनेश नागपाल, कपिल प्रताप सिंह, हरी सिंह आर्य, विपिन बिहारी आर्य, कृष्णगोपाल गुप्ता, ब्रजकिशोर आर्य, तोरन चैधरी, सरोज शर्मा, सरोज रानी आर्य, महाशय देवी सिंह आर्य, भगत सिंह वर्मा, प्रेम सिंह जादौन, रमेश चन्द्र आर्य, लखम सिंह आर्य आदि प्रमुख रुप से उपस्थित रहे।
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