मथुरा

मथुरा। यमुना नदी में जल की स्थिति भारी गंदगी होने से इतनी दयनीय हो गई हैं कि जल में लाल रंग के छोटे-छोटे कीड़े घाटों के आगे ही जल में भारी संख्या में देखे जाते हैं। जिससे लोग जल का आचमन लेने से भी कतराने लगे हैं। धर्मालु लोगों ने जिलाधिकारी से गुहार की है कि कार्तिक मास दो दिन बाद प्रारंभ हो जाएगा। कार्तिक मास में धर्मालु महिला व पुरुष पूरे कार्तिक मास में यमुना स्नान, पूजन, दीपदान का व्रत लेते है। अतः यमुना में बह रहे गंदे जल से धर्मालु परेशांन हैं। धर्मालुजनों ने जिलाधिकारी से राम गंगा कमांड, हरनौल आदि से यमुना में जल छुड़वाने की मांग की है। इसके साथ ही यमुना में घाटों की सफाई जो कि पूरी तरह नहीं की जा रही है उसे भी करवाने की अपील धर्मालु भक्तों ने की है। 

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मथुरा। घर परिवार में हर दिन गंुजते उपरोक्त वाक्य अलग अलग जरूर है, किन्तु हर संम्बोधन नारी के लिए ही है। जो हर घर परिवार का अहम किरदार है। वंे कामकाजी हैं, घर संम्भालती हैं, बच्चों को पालती है, सभी की जरूरतों का ख्याल करती हैं। इसके बावजूद पति टंेशन में रहते हैं, बच्चे कहना नहीं मानते। घर के कामों से फुर्सत नही ंमिलती अपने लिए हर नारी जो सभी को खुश करने के प्रयास में लगी रहती है, वह घर के हर कार्य कर के भी स्वयं परेशान रहती है। ऐसे में हर नारी जो स्वयं में खुश रहना चाहती हंै और घर परिवार को भी खुशामय बनाना चाहती हैं तो निरंकारी सत्संग से बेहतर कोई विकल्प नही है। संत निरंकारी मिशन के मार्ग दर्शक सदगुरूदेव निरंकारी बाबा हरदेव सिंह जी महाराज समझाते है कि ग्रहस्थ का संम्बध हमारे सांसारिक या सामाजिक जीवन से है। इसके कुछ अपने असूल हंै। जब इंसान इन असूलों की पालना में चूक कर जाता है,वहीं कोई न कोई परेशानी आ जाती है। वे असूल यही ंहै ंकि घर मे सभी सदस्यो को यथा योग्य सम्मान दिया जाये। मां हो या सास, बहिन या नन्द, पिता हो या सुसर हरे किसी रश्तें का अपना स्थान है और अपना महत्व है। जो कोई भी अपनी सीमा से बाहर जायेगा तो ग्रहस्थ मे हल चल होना स्वाभाविक है। इसलिये एक दूसरे के गुण स्वभाव को अच्छी तरह समझें। एक दूसरे की रूचि का आदर करें। अधिकार जताने के बजाय कर्तव्यों के पालन पर ध्यान दें कि घर में सभी सदस्यों का तथा योग्य सम्मान दिया जाऐ। माँ हो या सास, बहन हो या ननद, पिता हो या ससुर, हर एक रिश्ते का अपना स्थान हैै, अपना महत्व है। जब कोई भी अपनी सीमा से बाहर जायेगा तो ग्रहस्थ में हल चल होना स्वाभाविक है। इसलिए एक दूसरे के स्वभावको समझें। एक दूसरे की रूचि का आदर करें। अधिकार जताने की बजाय कर्तव्यों के पालन पर ध्यान दें। निरंकारी सत्संग से सीख ले कर हजारों नारियों ने अपने घर परिवार की तस्वीर बदल दी, वें सिर्फ प्रवचन सुनने तक सीमित नहीं रहीं बल्कि सत्गुरू द्वारा प्रदान ब्रम्हज्ञान को अपने जीवन का हिस्सा बनाकर, अपने आचरण द्वारा प्रेम, शान्ति तथा शाली माता का माहौल देकर अपने ही घर को स्वर्ग बना दिया है। निरंकारी नारी सत्संग भी होते हैं। हर शहर में जहाँ सास-बहु, ननद भौजाई, देवरानी जेठानी, पति पत्नी, के बीच रिश्तों में मिठास लाने तथा आपस मे पे्रम बढाने का प्रयास किया जा रहा है। जिन घरो मे सत्संग होता है वहाँ सास बहु लडती नही बल्कि माँ बेटी सा प्रेम करती हैं। नारी अगर चाहे तो घर परिवार को एकत्व की डोर मे बांधे रख सकती है, इसके लिए प्रेम नम्रता तथा सहनशीलता के आभूषणो को धारण करना जरूरी है। तभी घर परिवार की तस्वीर बदलेगी और स्वर्गमय नजारा भी दिखेगा।  

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मथुरा। सर्वोदयी ब्राहमण विकास संस्थान द्वारा हरवर्ष की भांति इस वार भी मेधावी छात्र छात्रा सम्मान समारोह आयोजित किया जायेगा। उक्त जानकारी देते हुए अध्यक्ष सोहन लाल शर्मा ने बताया कि उक्त कार्यक्रम स्थानीय मसानी स्थित चित्रकूट पर 12 अक्टुबर को दोपहर 2 बजे से आयोजित किया जायेगा। कार्यक्रम में कक्षा 10 व 12, स्नातक व स्नात्तोतर एवं अन्य व्सवसायिक पाठ्यक्रमों में 80 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले 400 विद्यार्थियों को सम्मानित किया जायेगा। उन्होंने बताया कि अब तक 436 छात्र छात्राओं द्वारा अपनी अंक तालिकाएं प्रस्तुत की जा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के विद्यार्थियों को सम्मानित कर उन्हें प्रोत्साहित करना है जिससें समाज में छिपी प्रतिभाओं को आगे बढ़ाया जा सकें। सचिव नारायण प्रसाद शर्मा ने बताया कि आयोजन को सफल बनाने हेतु जिम्मेदारी दी गई हैं। छात्राओं की सूची तैयार कर ली गई है कार्यक्रम में सर्वप्रथम उच्च अंक प्राप्त करने वाले तीन विद्यार्थियों को कम्प्यूटर, तथा द्वितीय श्रेणी वालों को टेवलेट व तृतीय सम्मान के रूप में नोटबुक पत्र प्रदान किये जायेगे। इसी के साथ तीन बच्चों को 11 सौं रूपयें की नगद धनराशि महन्त परमेश्वर दास आचखर्य की स्मृति में दिये जायेगे। लक्ष्मी ग्रुप के चैयरमैन पं0 गजेन्द्र शर्मा ने कहा कि संस्थान द्वारा सामाजिक कार्यो में अग्रणी भूमिका रखनें वाले समाजसंेवियों को भी सम्मानित किया जायेगा। उन्होंने समाज के लोगों से कार्यक्रम में भाग लेने की अपील की हैं। बैठक में नारायण प्रसाद शर्मा, विजय गोड़, कृष्ण कुमार शर्मा, मुन्ना भईया, अनिल कौशिक, यूडी शर्मा, योगेन्र्द शर्मा, हरीबाबू शर्मा, कृष्ण मुरारी दीक्षित, रमेश दत्त शर्मूा, महेन्द्र दत्त आचार्य, घनश्याम हरियाणा, दिवाकर आचार्य, बीएल तिवारी, प्रदीप शर्मा, राजकुमार शर्मा आदि थे।  

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यमुना को हथिनी कुण्ड बैराज से मुक्त कराने व यमुना में गिरते नालों को रोकने के लिये हथिनी कुण्ड बैराज पर यमुना रक्षक दल व भारतीय किसान यूनियन(राष्ट्रवादी) द्वारा संयुक्त रूप से किये जाने वाले सत्याग्रह की तैयारियों की समीक्षा करने के लिये भाकियू (राष्ट्रवादी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ राष्ट्रीय पदाधिकारी सत्याग्रह की तैयारियों व रणनीतियों पर चर्चा करने के लिये गोविन्द मठ वृन्दावन स्थित यमुना रक्षक दल के कार्यालय पहुँचे। भाकियू (राष्ट्रवादी)  के राष्ट्रीय अध्यक्ष सी.पी. सिंह यादव ने कहा कि 2 नबम्बर को हरियाणा के हथिनी कुण्ड बैराज पर होने वाले सत्याग्रह में भाकियू (राष्टवादी) के हजारों किसान कार्यकर्ता भाग लेंगे। यमुना की लड़ाई किसानों की लड़ाई है क्योंकि यमुना के निर्मल जल से उसके किनारे बसने वाले किसान उसके जल का पान व अपनी कृषि को सिंचित करते है परन्तु वर्तमान में यमुनोत्री से 170 किमी नीचे ही यमुना को बांधकर सारा जल हरियाणा की ओर मोड दिया जाता है और उससे नीचे 1200 किमी में यमुना किनारे बसने वाले किसनो को मिलता है सिर्फ गन्दे नालो का भंयकर प्रदूषित जल, यह सरासर अन्याय है। किसान नेता ने आगे बताते हुये कहा कि गांव- गांव में भाकियू (राष्ट्रवादी) के कार्यकर्ता किसानों को सत्याग्रह में भाग लेने के लिये तैयार कर रहे है। यमुना प्रदूषण का मुद्दा सीधे तौर पर किसान से जुड़ा हुआ है क्योकि यमुना के प्रदूषित जल से सर्वाधिक हानि यमुना किनारे बसने वाले किसनो की स्वाास्थ व कृषि दोनों को हानि पहुॅचा रहा है। इसलिये अब की बार किसान हथिनी कुण्ड पर आर या पार की लड़ाई के लिये एकत्रित होगें और बिना यमुना जल लिये बे वहां से नहीं हटेगें। भाकियू (राष्ट्रवादी) के प्रदेश अध्यक्ष रामचन्द्र सिंह ने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों व गांव के अध्यक्षो व कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर दिया गया है । गांव-गांव जाकर सीधे किसानों से संपर्क कर उनसे यमुना आन्दोलन में भाग लेने की अपील कि जायेगी। जब तक केन्द्र सरकार हथिनी कुण्ड ये यमुना जल छोडा जाता तब तक किसान हथिनी कुण्ड बैराज से नहीं हिलेगें। इस अवसर पर  यमुना रक्षक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राकेश यादव, राष्ट्रीय महासचिव रमेश सिसौदिया, हाशिम खान, अरूण चतुर्वेदी, राजेन्द्र भगत जी, बाबा नागरी दास, सत्यपाल सिंह, अखंड सिंह, अरविन्द, आदि उपस्थित थे।

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नई दिल्ली : दशहरे के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों के साथ रेडियो पर ‘मन की बात’ कही। आकाशवाणी पर प्रसारित इस कार्यक्रम के तहत इस कार्यक्रम के तहत उन्होंने देशवासियों को जो संदेश दिया वह इस प्रकार है... मेरे प्यारे देशवासियो, आज विजयदशमी का पावन पर्व है। आप सबको विजयदशमी की अनेक- अनेक शुभकामनाएं। मैं आज रेडियो के माध्यम से आपसे कुछ मन की बाते बताना चाहता हूं और मेरे मन में तो ऐसा है कि सिर्फ आज नहीं कि बातचीत का अपना क्रम आगे भी चलता रहे। मैं कोशिश करूंगा, हो सके तो महीने में दो बार या तो महीने में एक बार समय निकाल कर के आपसे बाते करूं। आगे चलकर के मैंने मन में यह भी सोचा है कि जब भी बात करूंगा तो रविवार होगा और समय प्रात: 11 बजे का होगा तो आपको भी सुविधा रहेगी और मुझे भी ये संतोष होगा कि मैं मेरे मन की बात आपके मन तक पहुंचाने में सफल हुआ हूं। आज जो विजयदशमी का पर्व मनाते हैं ये विजयदशमी का पर्व बुराइयों पर अच्छाइयों की विजय का पर्व है। लेकिन एक श्रीमान गणेश वेंकटादरी मुंबई के सज्जन, उन्होंने मुझे एक मेल भेजा, उन्होंने कहा कि विजयदशमी में हम अपने भीतर की दस बुराइयों को खत्म करने का संकल्प करें। मैं उनके इस सुझाव के लिए उनका आभार व्यक्त करता हूं। हर कोई जरूर सोचता होगा अपने-अपने भीतर की जितनी ज्यादा बुराइयों को पराजय करके विजय प्राप्त करे, लेकिन राष्ट्र  के रूप में मुझे लगता है कि आओ विजयदशमी के पावन पर्व पर हम सब गंदगी से मुक्ति का संकल्प करें और गंदगी को खत्म करके विजय प्राप्त करना विजयदशमी के पर्व पर हम ये संकल्प कर सकते हैं। कल 2 अक्टूबर पर महात्मा गांधी की जन्म जयंती पर “स्वच्छ भारत” का अभियान सवा सौ करोड़ देशवासियों ने आरंभ किया है। मुझे विश्वास है कि आप सब इसको आगे बढ़ाएंगे। मैंने कल एक बात कही थी “स्वच्छ  भारत अभियान” में कि मैं नौ लोगों को निमंत्रित करूंगा और वे खुद सफाई करते हुए अपने वीडियो को सोशल मीडिया में अपलोड करेंगे और वे ‘और’ नौ लोगों को निमंत्रित करेंगे। आप भी इसमें जुड़िए, आप सफाई कीजिए, आप जिन नौ लोगों का आह्वान करना चाहते हैं, उनको कीजिए, वे भी सफाई करें, आपके साथी मित्रों को कहिए, बहुत ऊपर जाने की जरूरत नहीं, और नौ लोगों को कहें, फिर वो और नौ लोगों को कहें, धीरे-धीरे पूरे देश में ये माहौल बन जाएगा। मैं विश्वास करता हूं कि इस काम को आप आगे बढ़ाएंगे। हम जब महात्मा गांधी की बात करते हैं, तो खादी की बात बहुत स्वाभाविक ध्यान में आती है। आपके परिवार में अनेक प्रकार के वस्त्र होंगे, अनेक प्रकार के वस्त्र होंगे, अनेक प्रकार के फैब्रिक्स होंगे, अनेक कंपनियों के प्रोडक्ट होंगे, क्या उसमें एक खादी का नहीं हो सकता क्या,  मैं अपको खादीधारी बनने के लिए नहीं कह रहा, आप पूर्ण खादीधारी होने का व्रत करें, ये भी नहीं कह रहा। मैं सिर्फ इतना कहता हूं कि कम से कम एक चीज, भले ही वह हैंडकरचीफ,  भले घर में नहाने का तौलिया हो, भले हो सकता है बैडशीट हो, तकिए का कवर हो, पर्दा हो, कुछ तो भी हो, अगर परिवार में हर प्रकार के फैब्रिक्स का शौक है,  हर प्रकार के कपड़ों का शौक है, तो ये नियमित होना चाहिए और ये मैं इसलिए कह रहा हूं कि अगर आप खादी का वस्त्र खरीदते हैं तो एक गरीब के घर में दीवाली का दीया जलता है और इसीलिए एकाध चीज ... और इन दिनों तो 2 अक्टूबर से लेकर करीब महीने भर खादी के बाजार में स्पेशल डिस्काउंट होता है, उसका फायदा भी उठा सकते हैं। एक छोटी चीज… और आग्रहपूर्वक इसको करिए और आप देखिए गरीब के साथ आपका कैसा जुड़ाव आता है। उस पर आपको कैसी सफलता मिलती है। मैं जब कहता हूं सवा सौ करोड़ देशवासी अब तक क्या हुआ है... हमको लगता है सब कुछ सरकार करेगी और हम कहां रह गए, हमने देखा है ... अगर आगे बढ़ना है तो सवा सौ करोड़ देशवासियों को... करना पड़ेगा… हमें खुद को पहचानना पड़ेगा, अपनी शक्ति को जानना पड़ेगा और मैं सच बताता हूं हम विश्व में अजोड़ लोग हैं। आप जानते हैं हमारे ही वैज्ञानिकों ने कम से कम खर्च में मार्स पहुंचने का सफल प्रयोग, सफलतापूर्वक कर दिया। हमारी ताकत में कमी नहीं है, सिर्फ हम अपनी शक्ति को भूल चुके हैं। अपने आपको भूल चुके हैं। हम जैसे निराश्रित बन गए हैं... नहीं मेरे प्यारे भाइयों बहनों ऐसा नहीं हो सकता। मूझे स्वामी विवेकानन्द जी जो एक बात कहते थे, वो बराबर याद आती है। स्वामी वि‍वेकानन्द  अक्सर एक बात हमेशा बताया करते थे। शायद ये बात उन्होंने कई बार लोगों को सुनाई होगी। विवेकानन्द जी कहते थे कि एक बार एक शेरनी अपने दो छोटे-छोटे बच्चों को ले कर के रास्ते से गुजर रही थी। दूर से उसने भेड़ का झुंड देखा, तो शिकार करने का मन कर गया, तो शेरनी उस तरफ दौड़ पड़ी और उसके साथ उसका एक बच्चा भी दौड़ने लगा। उसका दूसरा बच्चा पीछे छूट गया और शेरनी भेड़ का शिकार करती हुई आगे बढ़ गई। एक बच्चा भी चला गया, लेकिन एक बच्चा बिछड़ गया, जो बच्चा बिछड़ गया उसको एक माता भेड़ ने उसको पाला-पोसा बड़ा किया और वो शेर भेड़ के बीच में ही बड़ा होने लगा। उसकी बोलचाल, आदतें सारी भेड़ की जैसी हो गईं। उसका हंसना खेलना, बैठना, सब भेड़ के साथ ही हो गया। एक बार, वो जो शेरनी के साथ बच्चा चला गया था, वो अब बड़ा हो गया था। उसने उसको एक बार देखा ये क्या बात है। ये तो शेर है और भेड़ के साथ खेल रहा है। भेड़ की तरह बोल रहा है। क्या‍ हो गया है इसको। तो शेर को थोड़ा अपना अहम पर ही संकट आ गया। वो इसके पास गया। वो कहने लगा अरे तुम क्या कर रहे हो। तुम तो शेर हो। कहता- नहीं, मैं तो भेड़ हूं। मैं तो इन्हीं के बीच पला-बढ़ा हूं। उन्होंने मुझे बड़ा किया है। मेरी आवाज देखिए, मेरी बातचीत का तरीका देखिए। तो शेर ने कहा कि चलो मैं दिखाता हूं तुम कौन हो। उसको एक कुएं के पास ले गया और कुएं में पानी के अंदर उसका चेहरा दिखाया और खुद के चेहरे के साथ उसको कहा- देखो, हम दोनों का चेहरा एक है। मैं भी शेर हूं, तुम भी शेर हो और जैसे ही उसके भीतर से आत्म सम्मान जगा, उसकी अपनी पहचान हुई तो वो भी उस शेर की तरह, भेड़ों के बीच पला शेर भी दहाड़ने लगा। उसके भीतर का सत्व जग गया। स्वामी विवेकानंद जी यही कहते थे। मेरे देशवासियों, सवा सौ करोड़ देशवासियों के भीतर अपार शक्ति है, अपार सामर्थ्य है। हमें अपने आपको पहचानने की जरूरत है। हमारे भीतर की ताकत को पहचानने की जरूरत है और फिर जैसा स्वामी विवेकानंदजी ने कहा था उस आत्म-सम्मान को ले करके, अपनी सही पहचान को ले करके हम चल पड़ेंगे, तो विजयी होंगे और हमारा राष्ट्र भी विजयी होगा, सफल होगा। मुझे लगता है हमारे सवा सौ करोड़ देशवासी भी सामर्थ्यवान हैं, शक्तिवान हैं और हम भी बहुत विश्वास के साथ खड़े हो सकते हैं। इन दिनों मुझे ई-मेल के द्वारा सोशल मीडिया के द्वारा, फेस-बुक के द्वारा कई मित्र मुझे चिट्ठी लिखते हैं। एक गौतम पाल करके व्यक्ति ने एक चिंता जताई है, उसने कहा है कि जो स्पैशली एबल्ड चाईल्ड होते हैं, उन बालकों के लिए नगरपालिका हो, महानगरपालिका, पंचायत हो, उसमें कोई न कोई विशेष योजनाएं होती रहनी चाहिएं। उनका हौसला बुलन्द करना चाहिए। मुझे उनका ये सुझाव अच्छा लगा क्यों कि मेरा अपना अनुभव है कि जब मैं गुजरात में मुख्यमंत्री था तो 2011 में एथेन्स में जो स्पेशल ओलिंपिक होता है, उसमें जब गुजरात के बच्चे गए और विजयी होकर आए तो मैंने उन सब बच्चों को, स्पेशली एबल्ड बच्चों को, मैंने घर बुलाया। मैंने दो घंटे उनके साथ बिताए, शायद वो मेरे जीवन का बहुत ही इमोशनल, बड़ा प्रेरक, वो घटना थी। क्योंकि मैं मानता हूं कि किसी परिवार में स्पेशली एबल्ड बालक है तो सिर्फ उनके मां-बाप का दायित्व नहीं है। ये पूरे समाज का दायित्व है। परमात्मा ने शायद उस परिवार को पसंद किया है, लेकिन वो बालक तो सारे राष्ट्र् की जिम्मेदारी होता है। बाद में इतना मैं इमोशनली टच हो गया था कि मैं गुजरात में स्पे‍शली एबल्ड बच्चों के लिए अलग ओलिंपिक करता था। हजारों बालक आते थे, उनके मां-बाप आते थे। मैं खुद जाता था। ऐसा एक विश्वास का वातावरण पैदा होता था और इसलिए मैं गौतम पाल के सुझाव, जो उन्होंने दिया है,  इसके लिए मैं, मुझे अच्छा लगा और मेरा मन कर गया कि मैं मुझे जो ये सुझाव आया है मैं आपके साथ शेयर करूं। एक कथा मुझे और भी ध्यान आती है। एक बार एक राहगीर रास्ते के किनारे पर बैठा था और आते-आते सबको पूछ रहा था मुझे वहाँ पहुंचना है, रास्ता कहां है। पहले को पूछा, दूसरे को पूछा, चौथे को पूछा। सबको पूछता ही रहता था और उसके बगल में एक सज्जन बेठे थे। वो सारा देख रहे थे। बाद में खड़ा हुआ। खड़ा होकर किसी को पूछने लगा, तो वो सज्जन खड़े हो करके उनके पास आए। उसने कहा – देखो भाई, तुमको जहां जाना है न, उसका रास्ता इस तरफ से जाता है। तो उस राहगीर ने उसको पूछा कि भाई साहब आप इतनी देर से मेरे बगल में बेठे हो, मैं इतने लोगों को रास्ता पूछ रहा हूं, कोई मुझे बता नहीं रहा है। आपको पता था तो आप क्यों नहीं बताते थे। बोले, मुझे भरोसा नहीं था कि तुम सचमुच में चलकर के जाना चाहते हो या नहीं चाहते हो। या ऐसे ही जानकारी के लिए पूछते रहते हो। लेकिन जब तुम खड़े हो गए तो मेरा मन कर गया कि हां अब तो इस आदमी को जाना है, पक्का लगता है। तब जा करके मुझे लगा कि मुझे आपको रास्ता दिखाना चाहिए। मेरे देशवासियों, जब तक हम चलने का संकल्प नहीं करते, हम खुद खड़े नहीं होते, तब रास्ता दिखाने वाले भी नहीं मिलेंगे। हमें उंगली पकड़ कर चलाने वाले नहीं मिलेंगे। चलने की शुरुआत हमें करनी पड़ेगी और मुझे विशवास है कि सवा सौ करोड़ जरूर चलने के लिए सामर्थ्यवान है, चलते रहेंगे। कुछ दिनों से मेरे पास जो अनेक सुझाव आते हैं, बड़े इण्टरेस्टिंग सुझाव लोग भेजते हैं। मैं जानता हूं कब कैसे कर पाएंगे, लेकिन मैं इन सुझावों के लिए भी एक सक्रियता जो है न, देश हम सबका है, सरकार का देश थोड़े न है। नागरिकों का देश है। नागरिकों का जुड़ना बहुत जरूरी है। मुझे कुछ लोगों ने कहा है कि जब वो लघु उद्योग शुरू करते हैं तो उसकी पंजीकरण जो प्रक्रिया है वो आसान होनी चाहिए। मैं जरूर सरकार को उसके लिए सूचित करूंगा। कुछ लोगों ने मुझे लिख करके भेजा है – बच्चों को पांचवीं कक्षा से ही स्किल डेवलेपमेंट सिखाना चाहिए। ताकि वो पढ़ते ही पढ़ते ही कोई न कोई अपना हुनर सीख लें, कारीगरी सीख लें। बहुत ही अच्छा सुझाव उन्होंने दिया है। उन्होंने ये भी कहा है कि युवकों को भी स्किल डेवलेपमेंट होना चाहिए उनकी पढ़ाई के अंदर। किसी ने मुझे लिखा है कि हर सौ मीटर के अंदर डस्ट बिन होना चाहिए, सफाई की व्यवस्था  करनी है तो। कुछ लोगों ने मुझे लिख करके भेजा है कि पॉलीथिन के पैक पर प्रतिबंध लगना चाहिए। ढेर सारे सुझाव लोग मुझे भेज रहे हैं। मैं आगे से ही आपको कहता हूं अगर आप मुझे कहीं पर भी कोई सत्य घटना भेजेंगे, जो सकारात्मक हो, जो मुझे भी प्रेरणा दे, देशवासियों को प्रेरणा दे, अगर ऐसी सत्य घटनाएं सबूत के साथ मुझे भेजोगे तो मैं जरूर जब मन की बात करूंगा, जो चीज मेरे मन को छू गई है वो बातें मैं जरूर देशवासियों तक पहुंचाऊंगा। ये सारा मेरा बातचीत करने का इरादा एक ही है – आओ, हम सब मिल करके अपनी भारत माता की सेवा करें। हम देश को नयी ऊंचाइयों पर ले जाएं। हर कोई एक कदम चले, अगर आप एक कदम चलते हैं, देश सवा सौ करोड़ कदम आगे चला जाता है और इसी काम के लिए आज विजयदशमी के पावन पर्व पर अपने भीतर की सभी बुराइयों को परास्त करके विजयी होने के संकल्पर के साथ, कुछ अच्छा करने का निर्णय करने के साथ हम सब प्रारंभ करें। आज मेरी शुभ शुरुआत है। जैसा जैसा मन में आता जाएगा, भविष्य में जरूर आपसे बातें करता रहूंगा। आज जो बातें मेरे मन में आईं वो बातें मैंने आपको कही है। फिर जब मिलूंगा, रविवार को मिलूंगा। सुबह 11 बजे मिलूंगा लेकिन मुझे विश्वास है कि हमारी यात्रा बनी रहेगी, आपका प्यार बना रहेगा। आप भी मेरी बात सुनने के बाद अगर मुझे कुछ कहना चाहते हैं, जरूर मुझे पहुंचा दीजिए, मुझे अच्छा लगेगा। मुझे बहुत अच्छा लगा आज आप सबसे बातें कर के ‍और रेडियो का... ऐसा सरल माध्यम है कि मैं दूर-दूर तक पहुंच पाऊंगा। गरीब से गरीब घर तक पहुंच जाऊंगा,  क्योंकि मेरा,  मेरे देश की ताकत गरीब की झोंपड़ी में है, मेरे देश की ताकत गांव में है, मेरे देश की ताकत माताओं, बहनों, नौजवानों में है, मेरी देश की ताकत किसानों में है। आपके भरोसे से ही देश आगे बढ़ेगा। मैं विश्वास व्यक्त  करता हूं। आपकी शक्ति में भरोसा है इसलिए मुझे भारत के भविष्य में भरोसा है। मैं एक बार आप सबको बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं। आपने समय निकाला। फिर एक बार बहुत-बहुत धन्यवाद!

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नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोगों से महात्मा गांधी के स्वच्छ भारत के सपने को पूरा करने का आह्वान किया। नई दिल्ली में राजपथ पर स्वच्छ भारत अभियान की औपचारिक शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने भारत माता के दो महान सपूतों महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे शास्त्री द्वारा ''जय जवान, जय किसान'' का नारा दिए जाने के बाद किसानों ने कड़ी मेहनत की और देश को खाद्य सुरक्षा के मामले में आत्मनिर्भर बनाया। उन्होंने कहा कि गांधीजी के दो सपनों (भारत छोड़ो और स्वच्छ भारत) में से एक को हकीकत में बदलने में लोगों ने मदद की। हालांकि, स्वच्छ भारत का दूसरा सपना अब भी पूरा होना बाकी है। उन्होंने कहा कि एक भारतीय नागरिक होने की खातिर यह हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है कि हम वर्ष 2019 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाए जाने तक उनके स्वच्छ भारत के सपने को पूरा करें। प्रधानमंत्री ने देश की सभी पिछली सरकारों और सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक संगठनों द्वारा सफाई को लेकर किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत को स्वच्छ बनाने का काम किसी एक व्यक्ति या अकेले सरकार का नहीं है, यह काम तो देश के 125 करोड़ लोगों द्वारा किया जाना है जो भारत माता के पुत्र-पुत्रियां हैं। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान को एक जन आंदोलन में तब्‍दील करना चाहिए। लोगों को ठान लेना चाहिए कि वह न तो गंदगी करेंगे और न ही करने देंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के मुताबिक साफ-सफाई न होने के चलते भारत में प्रति व्‍यक्ति औसतन 6500 रुपये जाया हो जाते हैं। उन्‍होंने कहा कि इसके मद्देनजर  स्‍वच्‍छ भारत जन स्‍वास्‍थ्‍य पर अनुकूल असर डालेगा और इसके साथ ही गरीबों की गाढ़ी कमाई की बचत भी होगी, जिससे अंतत: राष्‍ट्रीय अर्थव्‍यवस्‍था में महत्‍वपूर्ण योगदान होगा। उन्‍होंने लोगों से साफ-सफाई के सपने को साकार करने के लिए इसमें हर वर्ष 100 घंटे योगदान करने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने शौचालय बनाने की अहमियत को भी रेखांकित किया। उन्‍होंने कहा कि साफ-सफाई को राजनीतिक चश्‍मे से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे देशभक्ति और जन स्‍वास्‍थ्‍य के प्रति कटिबद्धता से जोड़ कर देखा जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्‍वच्‍छ भारत अभियान में योगदान देने और सोशल मीडिया पर इसे साझा करने के लिए उन्‍होंने नौ हस्‍तियों को आमंत्रित किया है, जिनमें मृदुला सिन्‍हा, सचिन तेंदुलकर, बाबा रामदेव, शशि थरूर, अनिल अंबानी, कमल हसन, सलमान खान, प्रियंका चोपड़ा और ‘तारक मेहता का उल्‍टा चश्‍मा’ की टीम शामिल हैं। उन्‍होंने बताया कि इन कार्यों को अंजाम देने के लिए नौ अन्‍य लोगों को आमंत्रित किया गया है और इस तरह एक श्रृंखला-सी बना दी गई है। उन्‍होंने लोगों से #MyCleanIndia का इस्‍तेमाल करते हुए सोशल मीडिया पर अपने योगदान को साझा करने का आग्रह किया है। प्रधानमंत्री ने स्‍वच्‍छ भारत अभियान के प्रतीक चिह्न और इसके नारे से जुड़ी प्रतियोगिता के विजेताओं को बधाई दी। ये हैं- महाराष्‍ट्र से अनंत और गुजरात से भाग्‍यश्री। नारा है- ‘एक कदम स्‍वच्‍छता की ओर’। प्रधानमंत्री जब उपस्‍थित भीड़ को स्‍वच्‍छता की शपथ दिला रहे थे तो उस वक्‍त जाने-माने फिल्‍म अभिनेता आमिर खान ने भी मंच साझा किया। केन्‍द्रीय मंत्रियों वेंकैया नायडू और नितिन गडकरी ने भी उपस्‍थित लोगों को संबोधित किया। इससे पहले, प्रधानमंत्री राजघाट एवं विजयघाट गए और देश के दो महान सपूतों महात्‍मा गांधी और लाल बहादुर शास्‍त्री की जयंती पर उन्‍हें पुष्‍पांजलि अर्पित की। इसके बाद वह वाल्‍मीकि बस्‍ती गए, जहां महात्‍मा गांधी एक बार रुके थे। प्रधानमंत्री ने यहीं से स्‍वच्‍छता अभियान की शुरुआत की। प्रधानमंत्री ने नई दिल्‍ली स्‍थित मंदिर मार्ग पुलिस स्‍टेशन का औचक निरीक्षण भी किया। प्रधानमंत्री ने स्‍वयं एक झाडू लेकर धूल की सफाई की। बाद में उन्‍होंने पुलिस अधिकारियों से स्‍वच्‍छता बनाए रखने का आह्वान किया।

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