साहित्य / मीडिया

भारत दुनिया के उन अनूठे देशों में से एक है जहां भाषाओं में विविधता की विरासत है। भारत के संविधान ने 22 आधिकारिक भाषाओं को मान्यता दी है। बहुभाषावाद भारत में जीवन का मार्ग है क्‍योंकि देश के विभिन्न भागों में लोग अपने जन्म से ही एक से अधिक भाषा बोलते हैं और अपने जीवनकाल के दौरान अतिरिक्त भाषाओं को सीखते हैं। (Read in English)

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नई दिल्ली : मुंशी प्रेमचंद के 'हंस' के पुनर्संस्थापक राजेन्द्र यादव की जयंती पर चौथे 'राजेंद्र यादव हंस कथा सम्मान 2016' का आयोजन इंडिया इंटरनेशनल सेंटर एनेक्सी सभागार में किया गया। इस बार का यह प्रतिष्ठित सम्मान-पुरस्कार प्रतिभाशाली युवा पत्रकार-कथाकार योगिता यादव और पंकज सुबीर को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया। दोनों रचनाकारों को सम्मानस्वरूप 11-11 हजार रुपये की राशि और शॉल प्रदान किया गया। यह सम्मान ‘हंस’ में प्रकाशित किसी कहानी पर प्रदान किया जाता है।

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कवि-कथाकार राजेंद्र आहुति के 'वाक्यांश' (कविता-संग्रह) को पढ़ते हुए एक सुखद रचनात्मक अनुभूति होती है।  रोजमर्रा के जीवन से कदमताल करते, जीवन की कठिनाईयों और सच्चाईयों से मुठभेड़ करते हुए राजेंद्र आहुति कविता लिखते हैं। उनकी गहन अनुभूति से उपजी कविताएं इस मामले में बेपरवाह हैं कि कविता को आप कैसे देखते-समझते हैं! वह आपकी अनुभूति हो सकती है! कवि प्रयोगधर्मी है। रूप और अन्तर्वस्तु के अकादमिक विमर्श से अलग अपनी राह चलते रहने को प्रस्तुत...

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दुनिया में जब भी किसी ऐसे आंदोलन को याद करते हैं जिन आंदोलनों में मनुष्य अपने ऊपर थोपे गए कई बंधनों से मुक्ति के लिए एकजूट होता है तो उस आंदोलन का कोई न कोई गीत याद आने लगता है। यही वास्तविकता है कि कोई भी आंदोलन गीतों के बिना पूरा नहीं होता है। काव्य धारा के कई रूप हैं और वे कविता, नज्म़, गज़ल, गीत आदि के रूप में जाने जाते हैं। बल्कि यूं भी कहा जाए कि नारे भी अपनी काव्यत्मकता से ही यादगार बन पाते हैं। ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ आंदोलनों के लिए न मालूम कितने गीत लिखे गए। इस विषय पर कई शोध हुए हैं लेकिन तमाम तरह के शोधों के बावजूद ये लगता है कि वे उस दौरान लिखे गए सभी गीतों को समेट नहीं पाए।

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नई दिल्ली : हर साल सर्दियों के मौसम में नई दिल्ली पुस्तक मेला पुस्तक प्रेमियों, अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रकाशकों, लेखकों, बुद्धिजीवियों के लिए एक नायाब अनुभव साबित होता है। इस वर्ष विश्व पुस्तक मेला अधिक शीर्षकों एवं विषयों तथा पढ़ने योग्य सामग्रियों के विशाल संकलन के साथ ज्यादा व्यापक है। मेले में बदलते समय के अनुरूप ई-पुस्तकें एवं इलेक्ट्रोनिक संग्रह भी दिखे तथा पुराने समय की छपाई वाली अच्छी पुस्तकें भी दिखीं। 

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नई दिल्ली : शलाका साहित्यकार एवं अप्रतिम विमर्शकार प्रेमचंद की पत्रिका 'हंस' के पुनर्संस्थापक राजेन्द्र यादव की जयंती पर तीसरे "राजेंद्र यादव हंस कथा सम्मान 2015" का आयोजन इंडिया इंटरनेशनल सेंटर एनेक्सी सभागार में किया गया। इस बार का यह प्रतिष्ठित सम्मान-पुरस्कार प्रतिभाशाली युवा रचनाकार प्रकृति करगेती को हंस के जनवरी-2015 अंक में 'मुबारक पहला कदम' के अंतर्गत प्रकाशित कहानी "ठहरे हुए से लोग" को दिया गया। यह पुरस्कार हंस में किसी नवोदित लेखक की प्रकाशित कहानी पर प्रतिवर्ष दिया जाता है।

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