विविधा और व्यंग्य

एक तंग-सी कोठरी में 28 साल के रमेश की अम्मा आज भी शाम होते ही उसके स्कूटर की आहट सुनने को बेचैन रहती हैं। बस 11 महीने पहले उसकी शादी हुई थी। दीवारों पर अब भी वही चमकदार, कुछ हद तक दिखावटी शादी के फ़ोटोग्राफ़ मुस्कुरा रहे हैं, लेकिन उन तस्वीरों का वह नौजवान अब कहीं नहीं है। उसकी मौत ‘शादी से जुड़े मसले’ के तहत दर्ज हुई, एक ऐसा चौंकाने वाला तथ्य जिसमें 2023 में पहली बार मर्दों की खुदकुशियाँ औरतों से ज़्यादा हुईं।

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बहुत पुरानी बात है, जब मोबाइल नहीं, पर मुंह बहुत चला करते थे। आगरा में मुगल बादशाह के जागीरदार का एक गांव था टेढ़ी बगिया के पास, ‘ठुमकपुर’। वहां की सबसे नामी ठुमकिया थी, चंपा देवी झटकनिया। नाम ऐसा कि सुनते ही पायल खुद बज उठे, पर असलियत कुछ और ही थी...

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साल 1950 में संविधान सभा ने ‘वंदे मातरम्’ को भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया। शुरू में ‘वंदे मातरम्’ की रचना स्वतंत्र रूप से की गई थी और बाद में इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के 1882 में प्रकाशित उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया...

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जैसे ही पेड़ों की पत्तियां पीली होकर ज़मीन पर गिरने लगती हैं, भारत में केक काटने का सीज़न शुरू हो जाता है। जी हां, सितंबर से अक्टूबर के बीच देशभर में जन्मदिनों की झड़ी लग जाती है। ऐसा लगता है जैसे कैलेंडर ने भी तय कर लिया हो कि ये दो महीने सिर्फ़ “हैप्पी बर्थडे” गाने के लिए आरक्षित हैं...

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किसी छोटे शहर की गली में जब एक लड़की किसी दूसरी जाति के लड़के का हाथ थाम लेती है, उसके साथ कॉफ़ी पीने चली जाती है, तो समझ लीजिए, यह सिर्फ़ मोहब्बत नहीं बल्कि एक बग़ावत है। यह वो इश्क़ है जो ऊंच-नीच की दीवारों, जात-पात की सरहदों, और सदियों पुरानी सोच के ताले तोड़ रहा है। यह नया भारत है, जहां प्यार अब पाप नहीं, परिवर्तन की पुकार बन गया है।

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किसी भी तरह के रिश्ते में शब्दों की मिठास का बेहद महत्वपूर्ण स्थान है। रिश्ता फिर चाहे मां-बाप के साथ हो, पति-पत्नी के बीच हो, आपसी दोस्ती का हो या फिर किसी भी अड़ोसी-पड़ोसी के साथ हो...

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