भारत में ‘तानाशाही’ का एक नया और बेहद क्रिएटिव मॉडल आया है। इसमें पुलिस से ज्यादा ताकतवर कैमरा है, हथकड़ी से ज्यादा चमकदार हैशटैग हैं, और जेल जाने से पहले, वकील से ज्यादा जरूरी है वीडियो का एंगल और लाइटिंग...
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भारत में ‘तानाशाही’ का एक नया और बेहद क्रिएटिव मॉडल आया है। इसमें पुलिस से ज्यादा ताकतवर कैमरा है, हथकड़ी से ज्यादा चमकदार हैशटैग हैं, और जेल जाने से पहले, वकील से ज्यादा जरूरी है वीडियो का एंगल और लाइटिंग...
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ज़रा ठहरो! दुनिया में आखिर लड़ कौन रहा है, और किससे? ईरान इजरायल से, रूस यूक्रेन से, अमेरिका रूस को सबक सिखा रहा है, और यूरोप शांति के भाषण दे रहा है। भारत क्रूड साफ कर रहा है। और तेल? वह सबके पहिए में ग्रीस लगा रहा है, ताकि कोई चरमराए नहीं, चाहे ग्लोबल वार्मिंग से दुनिया क्यों न उबल जाए...
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वर्तमान दौर के भारत में महात्मा गांधी ‘आउट ऑफ फैशन’ हैं। यह अलग बात है कि विदेशों में भारत की पहचान महात्मा गांधी से ही है। विदेशी मेहमानों को आज भी सबसे पहले राज घाट स्मारक पर ही ले जाया जाता है। तो क्या गांधी गलत थे, या दुनिया के लालची इरादे ही सही थे?
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आह, गर्मी की छुट्टियां! यह वाक्य कभी आज़ादी की महक लेकर आता था। तीस-चालीस साल पहले भारत में पले-बढ़े बच्चों के लिए गर्मी की छुट्टियां कैलेंडर की तारीख़ नहीं, साल का सबसे बड़ा उत्सव होती थीं। स्कूल की आख़िरी घंटी बजते ही लगता था, मानो जेल का फाटक खुल गया हो। वे भी क्या दिन थे...
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रात के अंधेरे में शहर डराते नहीं; डर तब लगता है, जब उजाले में इंसानियत खोने लगे। डर तब लगता है, जब किसी अस्पताल की कतार में खड़ी बीमार मां को पीछे धकेलकर कोई सीना तानकर कहे, "जानते नहीं, मैं कौन हूं?
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कभी घर सिर्फ ईंट और छत नहीं होते थे, यादों के गोदाम होते थे। उन यादों की रखवाली करते थे, कई भारी-भरकम ट्रंक और खनखनाते कनस्तर...
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एक गांव में एक बुजुर्ग काका बहुत बीमार पड़ गए और उन्हें शहर के अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। कुछ दिन बाद गांव वालों ने आपस में तय किया कि वे सब मिलकर उन्हें देखने शहर जाएंगे। फिर सबके सामने एक समस्या आ खड़ी हुई कि शहर कैसे जाएं?
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दूर से ट्रेन की सीटी सुनाई देती है। चार लड़के मुस्कराते हुए मोबाइल कैमरे की तरफ देखते हैं। एक लड़का हाथ और आगे बढ़ाता है ताकि “परफेक्ट सेल्फी” आ सके। अगले ही पल तेज रफ्तार ट्रेन उन्हें कुचल देती है। उनकी तस्वीर कभी सोशल मीडिया तक नहीं पहुंचती...
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अहा, आनंद लें असली भारतीय पल का! आप लेट हैं। फैशनेबली लेट नहीं। बॉलीवुड हीरो की एंट्री वाली लेट नहीं। बल्कि सही मायने में, ट्रैजिकली, “हे भगवान, बॉस मुझे नौकरी से निकाल ही देगा” वाली लेट।
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प्यार अंधा होता है, यह कहावत पुरानी है। पर अब प्यार खून भी करने लगा है, यह नया सच है। आगरा की एक घटना ने दिल दहला दिया। एक मां ने अपनी ही मासूम बच्ची को मार डाला। वजह गुस्सा नहीं थी, गरीबी नहीं थी। वजह था एक नया रिश्ता। बच्ची “रास्ते की दीवार” बन गई थी। सवाल सीधा है। क्या अब रिश्ते बोझ बनते जा रहे हैं...
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