धर्म, कला और संस्कृति

जन्माष्टमी के लगभग एक पखवाड़े के बाद मथुरा में एक बार फिर उत्सव का माहौल है। भाद्र महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टम तिथि को राधा अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि द्वापर युग में इसी पावन तिथि पर देवी राधा का प्राकट्य हुआ था।

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भगवान कृष्ण की जीवनी हमेशा रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी रही है। उनकी कहानी हमें बताती है कि मानवीय जीवन कितने उतार-चढ़ावों से भरा हुआ है। हर क्षण और हर दौर में साम, दाम, दंड और भेद के अनुपालन से कैसे धर्म की रक्षा की जाए, इस सवाल का जवाब हमें कृष्ण की गाथा में मिलता है...

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नृत्य-संगीत मानव जीवन के उल्लास को अभिव्यक्त करने का माध्यम है। लोक नृत्य हमारे समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये लोक नृत्य न केवल भारत के लोगों को बल्कि समूचे विश्व को आकर्षित करते हैं। इन्हीं लोक नृत्यों में से एक राजस्थान की सपेरा जाति द्वारा किया जाने वाला कालबेलिया भी बेहद प्रसिद्ध है...

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शास्त्रीय और लोक संगीत के धनी लाखा खान किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। रेगिस्तान के रेत से निकली मखमली मिट्टी के समान लोक संगीत की सुरीली स्वर लहरियां बिखेरकर लाखा अब पूरी दुनिया में अपनी पहचान बना चुके हैं...

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बस्तर आर्ट के नाम से मशहूर छत्तीसगढ़ का लौह शिल्प देश और दुनिया में न सिर्फ अपनी एक पहचान बना रहा है बल्कि लोगों के रोजगार का जरिया भी बन रहा है।

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मथुरा में भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव को लेकर सभी वर्ग और धर्मों के लोग तैयारियों में जुटे हुए हैं। एक तरफ जहां हिंदू समुदाय जन्मोत्सव को दिव्य और भव्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है तो वहीं मुस्लिम समुदाय भी यहां अपना पूरा पारंपरिक योगदान दे रहा है...

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