धर्म, कला और संस्कृति

ब्रजभूमि में कई ऐसी जगहें हैं जो सदियों से लोगों के बीच न केवल आस्था का केंद्र रही हैं बल्कि इनमें से कई स्थानों को चमत्कारी भी माना जाता है। ऐसी ही एक जगह है वृंदावन का निधिवन, जिसके बारे में मान्यता हैं कि यहां हर रात भगवान श्री कृष्ण, गोपियों संग रासलीला करते हैं...

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मां कैलादेवी मंदिर ‘आदि ऊर्जा’ और ‘महायोगिनी माया’ के अवतार के रूप में प्रतिष्ठित है। स्कंद पुराण के 65वें अध्याय में मां कैलादेवी का विस्तृत विवरण दिया गया है। इस अध्याय में देवी घोषणा करती हैं कि कलयुग में उनका नाम ‘कैला’ होगा और उनके भक्त ‘कैलेश्वरी’ के रूप में उनकी पूजा करेंगे...

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लद्दाख अपनी अनूठी संस्कृति, धार्मिक विरासत और शांतिप्रिय लोगों के साथ एक अलग पहचान रखता है। यहां के कई इलाकों में ग्रामीणों द्वारा पत्थरों पर की जाने वाली नक्काशी की कला लेह की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है।

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वृंदावन में यमुना पार स्थित मांट क्षेत्र के ग्राम डांगौली का ‘बेलवन’ लक्ष्मी देवी की तपस्थली है। यहां से यमुना पार मांट की ओर जाने पर, रास्ते में बेलवन मंदिर आता है। यहां लक्ष्मी माता का भव्य सिद्ध मंदिर है।

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मथुरा के दक्षिण में भगवान शिव श्री रंगेश्वर महादेव के रूप में अवस्थित हैं। माना जाता है कि कंस ने श्री कृष्ण और बलदेव को मारने का षड्यंत्र रचकर इसी तीर्थ स्थान पर एक रंगशाला का निर्माण कराया था...

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उत्तर प्रदेश में सिद्धार्थनगर जिले के 365 मंदिर व कुओं वाले प्राचीन कस्बा बिस्कोहर की पहचान मिटती जा रही है। उदासीनता और प्रशासनिक उपेक्षा के चलते ये निर्माण अब खंडहर में तब्दील होते जा रहे हैं। इसे भारतीय स्थापत्य कला के अद्भुत नमूने के रूप में देखा जाता है...

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