धर्म, कला और संस्कृति

हिन्दू धर्म के अनुसार प्रत्येक जीव पंचमहाभूतों से मिलकर बना है। इन पंचमहाभूतों में जल, अग्नि, वायु, आकाश व पृथ्वी सम्मिलित है। अधिक मास में समस्त धार्मिक कृत्यों, चिंतन मनन, ध्यान व योग आदि के माध्यम से साधक अपने शरीर में समाहित इन पांचों तत्वों में संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है...

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चातुर्मास के दौरान दुनियाभर के श्रद्धालु ब्रज में चौरासी कोस की परिक्रमा करते हैं। चातुर्मास जुलाई से लेकर नवंबर तक रहता है। इस दौरान मांगलिक कार्य नहीं होते हैं, लेकिन धार्मिक आयोजनों की धूम जमकर होती है। सावन, भादों, क्वार व कार्तिक माह के दौरान मथुरा-वृंदावन इलाके में आस्था की अविरल धारा बहती नजर आती है। मंदिरों में सोने-चांदी के हिंडोले सजाए जाते हैं। माना जाता है कि चौरासी कोस की परिक्रमा से सभी तीर्थों का पुण्य मिलता है।

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मुख्य मथुरा शहर के कोलाहल से दूर, शांत वातावरण में सघन वनों के बीच आशेश्वर महादेव का प्राचीन शिव मंदिर है। निकटवर्ती नंदगांव स्थित यह मंदिर ब्रज के प्रसिद्ध पंच महादेव मंदिरों में से एक है। सावन के तीसरे सोमवार को दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु यहां बड़ी आस्था के साथ महादेव की पूजा-अर्चना करते हैं...

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दीपावली के पांच पर्वों में से एक गोवर्धन पूजा का ब्रजभूमि में विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन सार्वजनिक स्थानों पर गोबर से बड़े-बड़े गोवर्धन स्वरूप बनाए जाते हैं। साथ ही, यह परम्परा यहां हर घर में भी निभाई जाती है।

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राजस्थान के सींकर जिले में श्री खाटू श्याम मंदिर एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थान है। श्री खाटू श्याम को भगवान श्री कृष्ण का अवतार माना जाता है। मन्दिर में हर वक़्त भक्तों का तांता लगा रहता है। होली से कुछ दिन पहले यहां एक विशाल मेला आयोजित होता है, जिसमें राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों के श्रृद्धालु भी बाबा के दर्शन करने आते हैं...

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ब्रजभूमि में कई ऐसी जगहें हैं जो सदियों से लोगों के बीच न केवल आस्था का केंद्र रही हैं बल्कि इनमें से कई स्थानों को चमत्कारी भी माना जाता है। ऐसी ही एक जगह है वृंदावन का निधिवन, जिसके बारे में मान्यता हैं कि यहां हर रात भगवान श्री कृष्ण, गोपियों संग रासलीला करते हैं...

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