महाभारत के समय में रंगमंच का प्रभाव अपने शिखर पर था। नाट्य कला और अभिनय के महाभारत में अनेक वर्णन मिलते हैं...
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महाभारत के समय में रंगमंच का प्रभाव अपने शिखर पर था। नाट्य कला और अभिनय के महाभारत में अनेक वर्णन मिलते हैं...
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राधे-श्याम..., ये दो शब्द अटूट प्रेम का हिस्सा माने जाते हैं। ये दो व्यक्तित्व भले ही एक दूसरे के कभी हो न सके लेकिन फिर भी इनका नाम हमेशा एक दूसरे के साथ ही लिया गया। कृष्ण और राधा के जन्म और उनकी दोस्ती की कहानियां तो बहुत प्रचलित हैं, लेकिन राधा की मृत्यु कैसे हुई और कैसे उनकी प्रेम कथा अपनी परिणिति तक पहुंची, इस बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है...
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रंगों और रेखाओं के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के रूप का चित्रण इस देश की परम साधना रही है। इन चित्रों को यदि हम रेखाबद्ध काव्य या खंड काव्य कहें तो अत्युक्ति नहीं होगी। जैसे, काव्य शब्दबद्ध चित्र है, ठीक वैसे ही एक चित्र रेखाबद्ध काव्य होता है...
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कृष्ण को हम कन्हैया, कुंजबिहारी, राधेश्याम, बांकेबिहारी, नंदलाल और कई अन्य नामों से जानते हैं। इन्हीं में से उनका एक नाम ‘दामोदर’ भी है। ‘दामोदर’ शब्द में दाम का अर्थ होता है 'रस्सी' और उदर का अर्थ होता है 'पेट', यानी रस्सी से बंधा हुआ पेट। कृष्ण को ‘दामोदर’ के नाम से पुकारे जाने के पीछे एक रोचक कहानी है...
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यमुना व यमराज भाई-बहन हैं और इसीलिए यमपाश से मुक्ति के लिए भाई व बहन द्वारा यमुना नदी में एकसाथ स्नान करने का विधान हैं। माना जाता है कि कार्तिक द्वितीया यानी भैया दूज के दिन यमुना नदी में स्नान करने से यमराज के भय से छुटकारा प्राप्त होता है।
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भगवान श्रीकृष्ण को जानने के लिए राजनीति, धर्म, दर्शन, योग व प्रेम के विभिन्न मार्गों के अलावा वास्तुशिल्प भी एक पक्ष है, जिसके बिना उनसे पूरा परिचय सम्भव ही नहीं है...
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