धर्म, कला और संस्कृति

होली का त्योहार दस्तक दे रहा है और समूचा बृज मंडल रंगों के इस जश्न की तैयारी में जुट गया है। पूरे देश की तरह, बृज क्षेत्र में होली के दौरान रंग, मस्ती, और हुल्लड़ की भरपूर झलक देखने को मिलती है। फाल्गुन में जब यह पर्व आता है तो पिचकारियों से रंगों की बौछार और मीठी ठंडाई की खासियत बढ़ जाती है।

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विपक्षी नेता और वामपंथी चिन्तक बेशक हाल ही में सम्पन्न हुए महाकुंभ मेले से प्रभावित न हुए हों, लेकिन प्रयागराज में महाकुंभ मेले के सफल समापन ने न केवल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कद बढ़ाया है, बल्कि भारत की परंपरा को आधुनिकता के साथ मिलाने की क्षमता को भी प्रदर्शित किया है।

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प्रयागराज में 144 वर्षों के उपरांत आयोजित महाकुंभ में देश-विदेश के संत, आचार्य, पीठाधीश और चारों शंकराचार्य सहित करीब 67 करोड़ से ज्यादा लोग गंगा मैया में पुण्य स्नान के माध्यम से नई शक्ति और ऊर्जा प्राप्त करने के लिए संगम की पावन धरती पर पधारे...

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मध्यकालीन युग में मथुरा, वृंदावन व गोकुल के श्री कृष्ण मंदिर भक्ति संगीत और गायन से गूंजते थे। ठाकुरजी तभी दर्शन देते थे जब घंटे दो घंटे गायन न हो जाए। आजकल सिर्फ भीड़, हो-हुल्लड़, कुंज गलियों में डेक पर फूहड़ गाने बजते हैं...

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प्रयागराज महाकुंभ में देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए स्वच्छ और शुद्ध पेयजल की व्यापक व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के लिए महाकुंभ मेला क्षेत्र में 233 जल एटीएम स्थापित किए गए हैं, जो 24 घंटे बिना किसी बाधा के कार्यरत हैं...

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महाकुंभ में अखाड़े लंबे समय से सनातन धर्म की विभिन्न परंपराओं और संप्रदायों का प्रतिनिधित्व करते हुए इस आयोजन का केंद्र रहे हैं। 'अखाड़ा' शब्द 'अखंड' से लिया गया है जिसका अर्थ है ‘अविभाज्य’...

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