वृंदावन में एक ऐसा मंदिर है, जहां ठाकुरजी की रसोई तैयार करने के लिए पिछले 477 वर्ष से एक भट्टी लगातार जल रही है। कार्य पूरा होने पर रात को इसमें लकड़ियां डालकर ऊपर से राख ओढ़ा दी जाती है, जिससे अग्नि पूरी तरह से शांत न हो। अगले दिन पुन: उसमें उपले व लकड़ियां डालकर भट्टी की अग्नि के प्रज्ज्वलन को जारी रखा जाता है। हम बात कर रहे हैं यहां के प्रसिद्ध मंदिर श्री राधारमण मंदिर की। यह मंदिर श्री गौड़ीय समाज के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है।
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