संपादकीय

साल 1925 में हिन्दुत्व की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित एक दल जनसंघ का अवतरण हुआ। श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, बलराज मधोक, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी व मुरली मनोहर जोशी जैसे नेताओं ने जनसंघ को सुदृढ़ करने के लिए अथक प्रयास किए और आज वही जनसंघ भाजपा के रूप में भारतीय राजनीति के मैदान में एक बड़े खिलाड़ी के रूप में मौजूद है...

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साल 1984 में 14 अप्रैल को दलितों के हितों के रक्षार्थ कांशीराम ने बहुजन समाज पार्टी का गठन किया। उनसे पहले, संभवत: दलित समाज के हितों के लिए विशेष समर्पित कोई भी पार्टी अस्तित्व में नहीं थी। इस पार्टी के गठन के पश्चात दलितों को कांशीराम के रूप में एक ‘मसीहा’ प्राप्त हुआ। अति वयोवृद्ध हो जाने के बाद कांशीराम ने एक शिक्षित, परिश्रमी एवं युवा मायावती को पार्टी के दायित्व स्थानान्तरित कर दिए...

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आज कर्नाटक सम्पूर्ण विश्व में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के पौत्र प्रज्ज्वल रेवन्ना की अनैतिकता के कारण कुख्यात हो रहा है। यदि हम इतिहास पर नजर डालें तो प्रज्ज्वल रेवन्ना का चरित्र हमें मुगल शासकों का स्मरण दिलाता है।

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स्वतंत्रता के 75 सालों बाद अब भारत का लोकतंत्र परिपक्वता की ओर अग्रसर हो चुका है। अब से पहले जनता जाने-माने राजनीतिक चेहरों तथा आकर्षक नारों से प्रेरित होकर वोट देती रही है, लेकिन, मौजूदा चुनावी रुझानों का यदि आंकलन करें तो एक बड़ी संख्या में लोग राजनीतिक दलों द्वारा किए गए कार्यों की समीक्षा करके ही अपने मताधिकार का प्रयोग करते दिख रहे हैं...

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भारतीय जनता पार्टी विश्व का एक वृहद राजनैतिक दल है। इस दल की प्रगति का यदि हम आकलन करें तो इसके कार्यकर्ताओं का पार्टी के प्रति समर्पण, निष्ठा व त्याग का भाव देखते ही बनता है...

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वर्ष 2024 के सत्ता संग्राम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीत पक्की मानी जा रही है। लेकिन, क्या अगले, यानी, साल 2029 के चुनावों में मोदी ही सत्ता के केंद्र में बने रहेंगे…? मोदी के बाद सत्ता का ताज किस मस्तिष्क पर सुशोभित होगा, यह यक्ष प्रश्न अब भारतीय जनमानस को गुदगुदाने लगा है।

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