स्वतंत्रता के 75 सालों बाद अब भारत का लोकतंत्र परिपक्वता की ओर अग्रसर हो चुका है। अब से पहले जनता जाने-माने राजनीतिक चेहरों तथा आकर्षक नारों से प्रेरित होकर वोट देती रही है, लेकिन, मौजूदा चुनावी रुझानों का यदि आंकलन करें तो एक बड़ी संख्या में लोग राजनीतिक दलों द्वारा किए गए कार्यों की समीक्षा करके ही अपने मताधिकार का प्रयोग करते दिख रहे हैं...
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