मथुरा

मथुरा । प्रदेश सरकार द्वारा गरीबों के हित में कई योजनाओं का शिलान्यास किया गया जिसमें खाद्यान्न के जरिए गरीबों को अब काफी मात्रा में सुविधाएं मुहैय्या हो रही है। गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों के लिए बीपीएल राशन कार्ड आज सोमवार को सभासद द्वारा बांटे गए। जिसे पाकर गरीब तबके लोगों में हर्ष की लहर थी। यह राशन कार्ड पूरी तरह से सही प्रकार से बने हुए है।  गरीबों के पास राशन कार्ड न होने की वजह से हो रही परेशानियों को देखते हुए वार्ड नं. 11 की सभासद राजरानी निमेष इसे गंभीरता से लेते हुए गरीबों के फार्म भरवाकर आज सोमवार को संग्रहालय के पास स्थित राशन डीलर राम सिंह के सहयोग से गरीबों को कार्ड वितरित किए। राशन डीलर राम सिंह के अनुसार आज 100 के लगभग राशन कार्ड वितरित किए गए है तथा जो भी और बचे है उनको कल दिए जाएंगे उसी के बाद सभी को राशन वितरित किया जाएगा। वहीं सभासद राजरानी निमेष के अनुसार अपने वार्ड की समस्याओं का समाधान करना सर्वप्रथम सभासद का काम होता है। आज वे स्वयं उपस्थित होकर गरीबों को राशन कार्ड प्रदान किए। उन्होंने कहा कि उनके अंडर में दो राशन डीलर आते है, उनका सही तरीके से कार्य चल रहा है। 

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मथुरा । नोटबंदी भारत के गरीब, किसानों, मजदूरों, दुकानदारों, मध्यम वर्ग तथा छोटे कारोबारियों पर एक सर्जिकल स्ट्राइक है। विगत 8 नवम्बर को देश की 86 फीसदी करेंसी को बंद करके प्रधानमंत्री ने एक प्रतिशत काला धन रखने वालों को पकड़ा है जिसमें 99 प्रतिशत ईमानदार, मेहनतकश भारतियों पर मुसीबतों का पहाड़ तोड़ दिया है। भारत में तरक्की का पहिया जाम हो गया है और पूरे देश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आर्थिक अराजकता  फैला दी है।  यह बात आज जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय पर आयोजित प्रेस वार्ता में उत्तरप्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष उपेदर सिंह उपाध्याय ने कही। उन्होंने मीडिया से कहा कि नोटबंदी के नाम पर भारत में सबसे बड़ा घोटाला साबित हुआ है जिसमें प्रमुख रूप से कोलकाता बैंक में भाजपा के खाते सं. 554510034 में पांच सौ, एक हजार के तीन करोड़ रूपया जमा हुआ, नोटबंदी से पहले भाजपा ने सैकड़ों करोड़ की सम्पत्ति खरीदी, 8 सितम्बर 2016 को इंदिरापुरम गाजियाबाद में हरियाणा के नम्बर की मारूति से 3 करेाड़ रूपया जब्त हुआ उसका क्या हुआ, इसी प्रकार से कई प्रदेश उपाध्यक्ष ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाए और कहा कि इन सारे सवालों के जवाब न तो प्रधानमंत्री मोदी के पास है और न ही भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के पास है।  प्रेसवार्ता में जिला कांग्रेस अध्यक्ष सोहन सिंह सिसोदिया, कांग्रेस कमेटी शहराध्यक्ष आबिद हुसैन, मलिक अरोड़ा, विनेश सनवाल जिला महासचिव, नूतन बिहारी पारीख, महैदर प्रताप गौतम, डा आशुतोष भारद्वाज, राजकुमार तिवारी, प्रकाश शर्मा,आशीष चतुर्वेदी, जितेदर मणी,कीरती कौशिक, मनोज गौड, अनिल चतुर्वेदी, विकरम वालमीक,  पुरषोतम सैनी,  घनश्याम चैधरी, बिहारी लाल, तैयब कुरैशी, नीरज वाल्मीकि, अभिषेक  आदि प्रमुख रुप से मौजूद रहे। 

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मथुरा । साल के पहले दिन शहर के डैम्पियर नगर स्थित महारानी अहिल्याबाई होल्कर पार्क में धनगर समाज की एक विशाल बैठक आयोजित की गई थी जिसमें उपस्थित लोगों ने एक स्वर से निरंजन  धनगर के खिलाफ आवाज उठाते हुए उन्हें सर्व सम्मति से  समाज से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया । बैठक में धनगर समाज के वक्ताओं का कहना था कि निरंजन बघेल स्वयं धनगर बने हुए हैं और उन्होंने  गलत तरीके से धनगर  प्रमाण पत्र हासिल कर लिया है जबकि धनगर समाज के लोगों के प्रमाण पत्र बनने में व अवरोध पैदा कर रहे हैं जिसको लेकर धनगर समाज में गहरा रोष व्याप्त है इस बीच सैकड़ों की संख्या में उपस्थित लोगों ने एक स्वर से हाथ उठाकर निरंजन बघेल का सामाजिक बहिष्कार कर दिया वहीं दूसरी ओर जिला अधिकारी को हरीश धनगर के द्वारा भेजी गई एक शिकायत के आधार पर सोमवार को एक जाँच करनी थी जिसको लेकर  जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में दोनों पक्षों की एक बैठक बुलाई थी जिसमें अपरजिलाधिकारी प्रशासन जिला समाज कल्याण अधिकारी तथा तहसीलदार महावन आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे थे इस मौके पर जहां हरीश धनगर ने अपने तमाम साक्ष्य प्रस्तुत किए और निरंजन धनगर पर फर्जी तरीके से प्रमाण पत्र हासिल करने का आरोप लगाया था वहीं दूसरी ओर निरंजन धनगर ने अपने अधिवक्ता के साथ पहुंचकर जिला अधिकारी को एक प्रार्थना पत्र दिया जिसमें साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा था जिस पर जिलाधिकारी ने निरंजन धनगर को 15 दिन की साक्ष्य प्रस्तुत करने हेतु मोहलत दी है सूत्रों का कहना है कि बीते 2 दिनों से निरंजन धनगर प्रशासन के आला अधिकारियों पर दबाव बना रहा था कि वह उसके साक्ष्य प्रस्तुत करने की तिथि को आगे बढ़ा दें जिसमें वहसोमवार को काफी हद तक सफल भी हो गया बताया जाता है कि चुनाव आयोग द्वारा प्रदेश में इसी सप्ताह चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी जिसका चलते  इसी सप्ताह प्रदेश में विधानसभा चुनावों की घोषणा  की जानी है निरंजन बघेल यह चाहता है कि यदि चुनाव घोषित हो गए तो वह अपने मकसद में कामयाब हो जाएगा हालाकी धनगर समाज के अलावा विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के लोग उसके खिलाफ लगे हुए हैं और उनकी मंशा है कि इसका यह प्रमाण पत्र निरस्त हो जाए सूत्रों का दावा है कि निरंजन धनगर के द्वारा 1990 में जमीनों के बैनामे में बघेल जाति दर्ज करा रखी है और इसकी धर्मपत्नी पिछड़ी जाति से जिला पंचायत चुनाव लड़ चुकी है वही निरंजन धनगर के शेक्षिक प्रमाणपत्र की जाती कॉलम में बघेला ठाकुर लिखा हुआ है जबकि धनगर जाति के अन्य लोग जिनके अभिलेखों में 1918 में धनगर जाति अंकित है उनके प्रमाण पत्र अभी तक प्रशासन के द्वारा नहीं बनाए गए हैं इससे कहीं ना कहीं प्रशासन की मंशा पर भी खोट नजर आता है वही जिला अधिकारी के द्वारा दी गई 15 दिन की मोहलत भी जहां निरंजन धनगर के लिए अमृतबाण साबित होगी वही धनगर समाज के सैकड़ों लोग इसके बाद मायूस हो गए थे धनगर समाज के लोगों का कहना है कि वह अपने अधिकार और हक के लिए अपने संघर्ष को जारी रखेंगे और अंत में सत्य की ही जीत होगी अब यह  आने वाला वक्त बताएगा कि ऊंट किस करवट बदलता है फिलहाल यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ हैं और लोंगों की प्रशासन पर ऊँगली उठ रही हैं

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मथुरा । साल के पहले दिन शहर के डैम्पियर नगर स्थित महारानी अहिल्याबाई होल्कर पार्क में धनगर समाज की एक विशाल बैठक आयोजित की गई थी जिसमें उपस्थित लोगों ने एक स्वर से निरंजन  धनगर के खिलाफ आवाज उठाते हुए उन्हें सर्व सम्मति से  समाज से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया । बैठक में धनगर समाज के वक्ताओं का कहना था कि निरंजन बघेल स्वयं धनगर बने हुए हैं और उन्होंने  गलत तरीके से धनगर  प्रमाण पत्र हासिल कर लिया है जबकि धनगर समाज के लोगों के प्रमाण पत्र बनने में व अवरोध पैदा कर रहे हैं जिसको लेकर धनगर समाज में गहरा रोष व्याप्त है इस बीच सैकड़ों की संख्या में उपस्थित लोगों ने एक स्वर से हाथ उठाकर निरंजन बघेल का सामाजिक बहिष्कार कर दिया वहीं दूसरी ओर जिला अधिकारी को हरीश धनगर के द्वारा भेजी गई एक शिकायत के आधार पर सोमवार को एक जाँच करनी थी जिसको लेकर  जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में दोनों पक्षों की एक बैठक बुलाई थी जिसमें अपरजिलाधिकारी प्रशासन जिला समाज कल्याण अधिकारी तथा तहसीलदार महावन आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे थे इस मौके पर जहां हरीश धनगर ने अपने तमाम साक्ष्य प्रस्तुत किए और निरंजन धनगर पर फर्जी तरीके से प्रमाण पत्र हासिल करने का आरोप लगाया था वहीं दूसरी ओर निरंजन धनगर ने अपने अधिवक्ता के साथ पहुंचकर जिला अधिकारी को एक प्रार्थना पत्र दिया जिसमें साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा था जिस पर जिलाधिकारी ने निरंजन धनगर को 15 दिन की साक्ष्य प्रस्तुत करने हेतु मोहलत दी है सूत्रों का कहना है कि बीते 2 दिनों से निरंजन धनगर प्रशासन के आला अधिकारियों पर दबाव बना रहा था कि वह उसके साक्ष्य प्रस्तुत करने की तिथि को आगे बढ़ा दें जिसमें वहसोमवार को काफी हद तक सफल भी हो गया बताया जाता है कि चुनाव आयोग द्वारा प्रदेश में इसी सप्ताह चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी जिसका चलते  इसी सप्ताह प्रदेश में विधानसभा चुनावों की घोषणा  की जानी है निरंजन बघेल यह चाहता है कि यदि चुनाव घोषित हो गए तो वह अपने मकसद में कामयाब हो जाएगा हालाकी धनगर समाज के अलावा विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के लोग उसके खिलाफ लगे हुए हैं और उनकी मंशा है कि इसका यह प्रमाण पत्र निरस्त हो जाए सूत्रों का दावा है कि निरंजन धनगर के द्वारा 1990 में जमीनों के बैनामे में बघेल जाति दर्ज करा रखी है और इसकी धर्मपत्नी पिछड़ी जाति से जिला पंचायत चुनाव लड़ चुकी है वही निरंजन धनगर के शेक्षिक प्रमाणपत्र की जाती कॉलम में बघेला ठाकुर लिखा हुआ है जबकि धनगर जाति के अन्य लोग जिनके अभिलेखों में 1918 में धनगर जाति अंकित है उनके प्रमाण पत्र अभी तक प्रशासन के द्वारा नहीं बनाए गए हैं इससे कहीं ना कहीं प्रशासन की मंशा पर भी खोट नजर आता है वही जिला अधिकारी के द्वारा दी गई 15 दिन की मोहलत भी जहां निरंजन धनगर के लिए अमृतबाण साबित होगी वही धनगर समाज के सैकड़ों लोग इसके बाद मायूस हो गए थे धनगर समाज के लोगों का कहना है कि वह अपने अधिकार और हक के लिए अपने संघर्ष को जारी रखेंगे और अंत में सत्य की ही जीत होगी अब यह  आने वाला वक्त बताएगा कि ऊंट किस करवट बदलता है फिलहाल यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ हैं और लोंगों की प्रशासन पर ऊँगली उठ रही हैं

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मथुरा । सपा की घोषित सूची में मथुरा के तीनों प्रत्याशी आज अखिलेश यादव के खेमे में नजर आये। मथुरा-वृन्दावन से घोषित प्रत्याशी डा.अशोक अग्रवाल, छाता से लोकमणिकांत जादौन एवं मांट से जगदीश नौहवार ने अखिलेश को अपना नेता एवं अगला मुख्यमंत्री बनाने की दिशा में चुनाव में दमदारी से उतरने का दावा किया।  लखनऊ से फोन से वार्ता करते हुए छाता विधानसभा से सपा प्रत्याशी लोकमणि कांत जादौन का कहना था कि उनके नेता अखिलेश यादव हैं। सपा का मतलब सिर्फ अखिलेश यादव है, वहा जहां है वह वहां हैं और छाता क्षेत्र से वह ही सपा के प्रत्याशी हैं। अगर गठबंधन भी होता है तो भी वह चुनाव लडेंगे क्योंकि अखिलेश भईया ने यह सीट गठबंधन में भी अपने पास रखकर चुनाव लडाने को कहा है।  मथुरा-वृन्दावन से सपा प्रत्याशी डा.अशोक अग्रवाल ने अखिलेश यादव को अपना नेता बताते हुए आगामी चुनाव लडने का दावा किया है। इधर मांट से घोषित प्रत्याशी कॉपरेटिव बैंक के चेयरमैन जगदीश नौहवार ने कहा कि वह सपा की घोषित दोनों सूचियों में मांट से प्रत्याशी हैं। मुख्यमंत्री जी ने जो २३५ की सूची और शिवपाल यादव जी की ३२५ की सूची जारी की थी, उन दोनों में उनका मांट क्षेत्र से प्रत्याशी के रूप में नाम था। अब वह मांट से सपा प्रत्याशी हैं और अखिलेश यादव जी को नेता मानते हैं। अगला मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ही होंगे। उनसे जब पूछा गया कि वह किस राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ हैं  तो उनका कहना था कि ये परिवार पूरा एक है, इस बारे में हम कोई बयान नहीं देंगे। खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कह चुके हैं कि नेताजी उनके पिता हैं और रहेंगे। जो भी बात है परिवार के लोग आपस में सुलझा लेंगे। प्रदेश का अगला मुख्यमंत्री भाई अखिलेश यादव ही होंगे और उनको मुख्यमंत्री बनाते हेतु वह मांट से सपा प्रत्याशी के रूप में दमदारी से चुनाव लडेंगे। मथुरा जिले में पांच विधानसभा सीटों पर केवल तीन ही प्रत्याशी अब तक घोषित किये हैं। इन तीनों में अखिलेश यादव को अपना नेता माना है। जिले की दो अन्य सीट गोवर्धन व बल्देव विधानसभा से अभी तक कोई प्रत्याशी घोषित हुआ है। देखाना है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इन सीटों पर अपना उम्मीदवार उतारते हैं अथवा गठबंधन के लिए सीटें छोडते हैं। 

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मथुरा । सपा, कांग्रेस, रालोद पार्टियों में प्रदेश में चुनावी गठबंधन को लेकर चल रही चर्चाओं को अगर बल मिला और तीनों दल मिलकर आगामी विधानसभा चुनाव लडे तो सपा के घोषित प्रत्याशीयों को हटाया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि मथुरा-वृन्दावन क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक प्रदीप माथुर हैं, जो कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता भी हैं और सिटिंग विधायक भी हैं। इसलिए इस सीट पर घोषित सपा उम्मीदवार डा.अशोक अग्रवाल जो मामूली वोटों से गत चुनाव हार गये थे उनकी उम्मीदवारी वापस हो सकती है। इसी दिशा में छाता विधानसभा से वर्तमान विधायक ठाकुर तेजपाल सिंह हैं जो रालोद से विधायक हैं पर वह वर्तमान में रालोद में नहीं हैं। अगर सपा से रालोद का बठबंधन हुआ तो रालोद अपना दावा कर सकता है। क्योंकि यह सीट उसके ही सिटिंग विधायक की सीट है और फिर सपा से घोषित उम्मीदवार लोकमणि कांत जादौन जोकि गत चुनाव भी सपा प्रत्याशी के रूप में लडे थे और अब भी सपा से घोषित उम्मीदवार हैं, उनके नाम को सपा वापस ले सकती है। किंतु इस दिशा में श्री जादौन का दावा है कि वह गठबंधन होने पर भी प्रत्याशी होंगे यह सीट रालोद को नहीं जायेगी। क्योंकि उसके दल का वर्तमान विधायक उस दल में नहीं है और रालोद से ज्यादा आज की तारीख में सपा का वजूद है। इस क्षेत्र में हम ही थे और गठबंधन में भी रहेंगे। यही हाल मांट विधानसभा सीट का बताया गया। जानकारों का मानना है कि अगर प्रदेश में सपा, कांग्रेस, रालोद का गठबंधन हुआ तो मथुरा की पांचों विधानसभा सीटें सपा अपने सहयोगी दलों को दे देगी। जिसमें कांग्रेस मथुरा-वृन्दावन पर तथा बाकी पर रालोद अपना दावा करेगा। गत चुनाव में मिले वोटों और अपने दल के प्रत्याशियों को मिले वोटों को देखते हुए मानना पडेगा। अगर गत लोकसभा चुनाव की तुलना की जाये तो भी रालोद का सपा से ज्यादा मथुरा की सीटों पर दावा बनता है। इसे सपा को मानने पर विवश होना पडेगा। अब प्रश्र यह कि अगर अखिलेश वाली सपा से गठबंधन हुआ और मुलायम सिंह की सपा ने अपने प्रत्याशी उतार दिये तो जिले में इस गठबंधन पर असर पडना लाजमी है।

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