मथुरा

पूज्य काष्र्णि गुरू शरणानन्द जी महाराज की असीम अनुकम्पा एवं पावन सानिध्य में रमणरेती महावन में आज बडी धूमधाम के साथ दिव्य चुनरी मनोरथ मनाया गया। गुरूवार 19 अक्टूबर को चुनरी मनोरथ कार्यक्रम की शुरूआत प्रातः 9ः30 बजे से यमुना पूजन कार्यक्रम के साथ हुयी वेदपाठी बालकों दिव्य मंत्रोच्चारण के साथ यमुना महारानी का पूजन किया गया। इसके पश्चात् यमुना भक्तों द्वारा महाराज श्री के सानिध्य में बंसल परिवार के सदस्यों द्वारा यमुना महारानी को चुनरी ओढा कर चुनरी मनोरथ मनाया गया। यमुना पूजन एवं चुनरी मनोरथ कार्यक्रम के पश्चात् प्रातः 11ः30 पर यमुना महारानी को 56 भोग अर्पित किये गये एवं भक्तों द्वारा छप्पन भोग की आरती कर मनोकामना मांगी गई। परम पूज्य काष्र्णि गुरू शरणानन्द जी महाराज ने आशीर्वाद देते हुये यमुना महारानी की दशा सुधारने के लिये सभी के एकजुट हो प्रयास करने की बात कही।   यमुना मिशन के संस्थापक प्रदीप बंसल जी ने बताया कि यमुना महारानी भगवान श्री कृष्ण की शाश्वत संगीनी है एवं ब्रज में वह भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं की साक्षी है। वर्तमान में उनकी स्थिति समस्त वैष्णवों के लिये चिन्ता का विषय है। इसके लिये सभी वैष्णवों को एकजुट हो मजबूत ईच्छाशक्ति के साथ यमुना की स्वच्छता के लिये कार्य करने की। यमुना मिशन यमुना की स्वच्छता के लिये कटिबद्ध है एवं उस दिशा में कार्य कर रहा है।  दोपहर 1 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम की छलकियां देखने को मिली जिसमें बाहर से आये कालाकारों द्वारा भजन प्रस्तुत किये गये इसके पश्चात इस्काॅन वृन्दावन के भक्तों द्वारा संकीर्तन प्रस्तुत किया गया कार्यक्रम का आकर्षण केन्द्र प्रसिद्ध गायिका अनुराधा पौडवाल जी द्वारा गाये गये भजन रहे। उनके द्वारा प्रस्तुत स्वर लहरियों में पूरा पण्डाल झूमने लगा। अनुराधा पौडवाल जी द्वारा यमुना महारानी पर कई भजन गाये गये जिनकों सुन भक्त भाव विहोर हो गये।  इस अवसर पर राजेन्द्र प्रसाद बंसल, हरदेवानन्द जी महाराज, पं अनिल शर्मा, के.एन शशी, पं. देवेन्द्र शर्मा जी, दाउ दयाल जी, राजीव गोस्वामी, मुकेश ठाकुर, लपुटी पंडित, आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।   

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दीपक एक युवक है जो कुल्‍लू में एक स्‍थानीय रेस्‍टोरेंट में बरतन धोने का काम करता है। उसकी आंखों की रोशनी चली गई है। आंखों की जांच के बाद उसे पता चला कि उसकी दृष्टि लौट सकती है, किन्‍तु इसमें हजारों रुपये लग सकते हैं। मण्‍डी जिले के तालीहाद पंचायत के एक अर्द्ध-वैधानिक स्‍वयंसेवी मनीष को उसके बारे में पता चला। मनीष ने बताया कि उसे मुख्‍यमंत्री कोष से वित्‍तीय सहायता मिल सकती है। उसने आवेदन तैयार करने में उसकी मदद की। आवेदन को मुख्‍यमंत्री कार्यालय में भेज दिया गया, जहां से उसे सकारात्‍मक ऊत्‍तर मिला। अब दीपक को 40 हज़ार रुपये मिलेंगे जिससे वह अगले माह पीजीआई, चण्‍डीगढ़ में अपना ऑपरेशन कराएगा। बाजोत गांव के कुछ बच्‍चे स्‍कूल नहीं जा सकते, क्‍योंकि उन्‍हें एक निजी भूमि से होकर जाने की अनुम‍ति नहीं दी गई थी जो एक वरिष्‍ठ माध्‍यमिक विद्यालय तक जाने में उनके रास्‍ते में आती थी। मनीष ने इस मुददे का समाधान निकाला और बच्‍चे फिर से स्‍कूल जाने लगे हैं। एक अर्द्ध-वैधानिक स्‍वयंसेवी की सहायता मिलने के कारण दीपक ने 120 से अधिक मामले का समाधान निकालने अथवा मदद करने का संकल्‍प लिया है, जिसमें विभिन्‍न कल्‍याण योजनाओं के बारे में ग्रामीणों को शिक्षित करना और अपने अधिकार के तहत लाभ का दावा करने के लिए आवेदन तैयार करने में उनकी मदद करना तथा विवादों का निपटारा करने में मदद करना शामिल है। राज्‍यों में हजारों अर्द्ध-वैधानिक स्‍वयंसेवी हैं, जो अपने अधिकारों, हकों से वंचित ग्रामीणों और विवाद में फंसे लोगों की मदद करते हैं। वर्ष 2009 में राष्‍ट्रीय वैधानिक सेवा प्राधिकरण (नाल्‍सा) ने अर्द्ध-वैधानिक स्‍वयंसेवी योजना तैयार की। इसका उद्देश्‍य जीवन के विभिन्‍न क्षेत्रों के चुनिन्‍दा स्‍वयंसेवियों को वैधानिक प्रशिक्षण प्रदान करना था ताकि इस प्रकार की वैधानिक सेवा संस्‍थाओं तक लोगों के पहुंचने के बजाय लोगों के दरवाजे तक वैधानिक सेवा पहुंचाई जा सके। अर्द्ध-वैधानिक स्‍वयंसेवी, गांव के आम लोगों की बीपीएल कार्ड प्राप्‍त करने, महात्‍मा गांधी नरेगा योजना के अधीन जॉब कार्ड प्राप्‍त करने, प्रार्थना-पत्र तैयार करके खोए हुए राशन कार्ड आदि बनवाने, आवेदन तैयार करने जैसी समस्‍याओं का समाधान करने में मदद करते हैं। ये मेड़ों, अथवा वृक्ष की शाखाओं के अधिक लटकने, पानी अथवा सिंचाई नहर आदि से जुड़े साधारण विवादों की स्थिति में भी ग्रामीणों की सहायता करते हैं। एक प्रशिक्षित अर्द्ध-वैधानिक स्‍वयंसेवी समस्‍याओं के समाधान करने में ग्रामीणों की सहायता कर सकते हैं। आवश्‍यकता पडने पर पेशेवर पैनलबद्ध वकील की सहायता ली जा सकती है। ये अर्द्ध-वैधानिक स्‍वयंसेवी जहां काम करते हैं, उसे वैधानिक सहायता क्‍लीनिकों के नाम से जाना जाता है। प्रत्‍येक वैधानिक स‍हायता क्‍लीनिक में कम-से-कम दो अर्द्ध-वैधानिक स्‍वयंसेवी उपलब्‍ध होना चाहिए। वैधानिक सेवा संस्‍था की ओर से वैधानिक सहायता क्‍लीनिकों में प्रशिक्षित अर्द्ध-वैधानिक स्‍वयंसेवी को तैनात किया जा सकता है। ऐसे क्‍लीनिकों में तैनात अर्द्ध-वैधानिक स्‍वयंसेवियों का काम प्रार्थना-पत्र, आवेदन, दलीलें और अन्‍य वैधानिक दस्‍तावेज तैयार करने में वकीलों की सहायता करना भी है। निकटवर्ती वैधानिक सेवा संस्‍था अपने क्षेत्राधिकार में स्थित वैधानिक सहायता क्‍लीनिक में अपने पैनल के वकीलों अथवा फीस देकर वकीलों को भी तैनात कर सकती है। नाल्‍सा का अंतिम उद्देश्‍य यह है कि दूरस्‍थ गांव में रहने वाले लोग भी अपने वैधानिक अधिकारों और विभिन्‍न सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहें। राष्ट्रीय वैधानिक सेवा प्राधिकरण (नाल्सा) द्वारा ट्रांसजेंड़र (किन्नर) लोगों को कानूनी सेवा देने के लिए नई योजना शुरू की गई। इससे पहले इसी साल नाल्सा द्वारा सर्वोच्च न्यायलय में दायर याचिका की सुनवाई करते हुए किन्नर समुदाय को तीसरे लिंग के रूप में मान्यता दी गई थी। सर्वोच्च न्यायालय का कहना था कि हमारे संविधान और संसद तथा राज्य विधानसभा द्वारा बनाए गए कानूनों के तहत इस समुदाय के लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए तीसरे लिंग के रूप में व्यवहार किया जाना चाहिए। न्यायपीठ ने केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया था कि उन्हें सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ी जातियों की तरह सुविधांए दी जाएं और शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में आरक्षण दिया जाए। विभिन्न न्यायालयों में लंबित लाखों मामलों के चलते लोक अदालत कई मामलों को निपटाने में सहायता दे रहा हैं। देश के सभी जिलों में लंबित मामलों और साथ ही साथ अदालत में पहुंचने से पहले ही विवादों के निपटारे के लिए नाल्सा स्थायी तौर पर प्रचलित लोक अदालतों के गठन की जिम्मेदारी निभा रहा है। (ब) वैधानिक प्राधिकरण और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों में लंबित मामलों और साथ ही साथ अदालत में पहुंचने से पहले ही विवादों के निपटारे हेतु सरकारी विभागों के लिए पृथक स्थायी और प्रचलित लोक अदालतों का गठन। (डी) देश के सभी मजिस्ट्रेट न्यायालयों में कानूनी सहायता परामर्शदाता की नियुक्ति। कानूनी सहायता योजनाओं के बारे में अभी भी जानकारी का अभाव है और इसलिए नाल्सा कानूनी अज्ञानता दूर करने और कानूनी जागरूकता अभियानों को चलाने पर जोर दे रहा है। नाल्सा कानूनी साक्षरता और कानूनी जागरूकता अभियानों को चलाने के लिए गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) के प्रमाणन के लिए भी जिम्मेदार है। नाल्सा के मुताबिक सभी राज्य वैधानिक सेवा प्राधिकरण देश के पिछडे औऱ दूर-दराज इलाकों में कानूनी जागरूकता अभियानों को चलाने के लिए उपयुक्त और विश्वसनीय गैर-सरकारी संगठन(एनजीओ) की पहचान कर रही है। जरूरतमंद लोगों को वैधानिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम के तहत मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान किये जाने के उद्देश्य के लोगों को इन योजनाओं की जानकारी प्रदान करने के लिए यह प्रयास किया जा रहा है। राज्य और जिला स्तर पर आयोजित मेलों में भी नाल्सा की मुफ्त कानूनी सहायता की जानकारी मोबाइल वैन के माध्यम से दी जा रही है। शिक्षा विभाग की सहायता से सभी राज्यों में नियोजित तरीके से स्कूलों और कॉलेजों में कानूनी जानकारी कार्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। युवा पीढ़ी के बीच कानून का पालन और कानूनी नियमों के मनोविज्ञान की जानकारी और कानूनी जागरूकता बढाने के लिए राज्य कानूनी सहायता प्राधिकरण की देख-रेख में सभी उच्च माध्यमिक शिक्षा विद्यालयों में स्कूल लीगल लिटरेसी क्लब बनाए जा रहे हैं। लोग नि:शुल्क प्रदान की जाने वाली कानूनी सहायताओं से तभी लाभान्वित हो सकेंगे जब अधिक से अधिक लोगों को योजनाओं की जानकारी होगी। (लेखिका स्‍वतंत्र पत्रकार हैं)

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समंदर के किनारे आस्थाओं की लहरों का मचलना देखना हो तो आपको मेलबर्न के इस्कॉन मंदिर चलना होगा। एक शाम यहां गुजारी तो कई नई मजेदार बातें मालूम हुईं। वृन्दावन के इस्कॉन मंदिर में ‘हरे कृष्ण’ का उद्घोष करते विदेशी ज्यादा दिखाई देते हैं। इस मंदिर को अंग्रेज़ों का मंदिर कहकर भी काम चलाया जाता है लेकिन मेलबर्न के मंदिर में हज़ारों भारतीय कृष्ण – राधा का स्मरण करते दिखाई देते हैं और अंग्रेज बहुत कम…। सेंट किल्डा बीच के पास बड़ी रिहायशी कालोनी में सैकड़ों भारतीय केवल इसलिए रहना पसंद करते हैं क्योंकि यहां इस्कॉन मंदिर है। कई भारतीय नौजवान (अधिकांश सॉफ्टवेयर इंजिनियर) जो मंदिर में हाथ में पकड़ी पोटली में रखी माला का जाप करते मिले। बेहतर जीवन की तलाश में भारत के विभिन्न प्रदेशों से आए ये नौजवान भगवद्गीता के विभिन्न प्रसंगों का उद्धरण बात – बात में देते हैं। सभी विशुद्ध शाकाहारी हैं। लॉर्ड कृष्ण के प्रति इतने आस्थावान कि कृष्ण के सिर्फ अवतारी चरित्र की व्याख्या करना और सुनना पसंद करते हैं। एक भक्त से चुटकी लेते हुए जब पूछा कि ‘हर कोई अपनी मातृभूमि को मरते दम तक याद करता है जबकि भगवान कृष्ण ने 22 साल की अवस्था में मथुरा से करीब 1200 किमी दूर द्वारिका पलायन कर लिया और रणछोर कहलाए… महाभारत के युद्ध में कुरुक्षेत्र आए जो मथुरा से मात्र 200 किमी दूर है लेकिन मथुरा आने और वहां का हालचाल लेने की नहीं सूझी, ऐसा क्यों?’ भक्त तत्काल बोला, ‘जहां आस्था हो, वहां सवाल – जवाब नहीं होते…।’ इससे मुझे वृन्दावन के बांके बिहारी मंदिर का एक किस्सा स्मरण हो आया। मेरे मित्र डॉ. केएम शर्मा एक दिन मंदिर गए। भगवान के ठीक सामने भरपूर दर्शन के इन्तजार में आंख मूंदे खड़े हो गए। तभी उन्हें आभास हुआ कि उनके कोट की जेब में कोई हाथ डाल रहा है। प्रोफ़ेसर साहब ने कोई हील-हुज्जत नहीं की। मन ही मन सोचा कि आज ठाकुरजी की यही इच्छा है कि मेरी जेब कटे। मंदिर के बाहर निकले तो मालूम हुआ कि कोई साथी भक्त उनकी जेब में रखे पर्स को ले उड़ा। मित्र की आस्थाओं की पराकाष्ठा का यह किस्सा मेलबर्न के इस्कॉन मंदिर में अचानक याद आ गया। परदेश में बसे भारतवंशियों की सबसे बड़ी दिक्कत यही है कि जीवन की सभी भौतिक सुख-सुविधाओं का आनंद लेने के बाद अपनेपन का अभाव खलने लगता है। भारत जैसी सामाजिकता तो यहां है नहीं, ऐसे में इस्कॉन मंदिर में आकर कृष्ण की कथाओं में डूब जाने का अपना अलग आनंद है। यह रास्ता अपनेपन की कमी का विकल्प भी है।

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पंच शताब्दी कार्यक्रम में शामिल हुये राष्ट्रपति मथुरा। अनेकता में एकता ही हमारे देश की सांस्कृतिक पहचान है। दूसरे देशों को इसे देख हैरानी होती है, चेतन्य महाप्रभु एक अच्छे संत थे, उन्होंने विश्वभर में लोगों को प्रेम का संदेश दिया। मुझे भी ब्रज से विशेष पे्रम है। यहीं कारण है कि एक वर्ष के अंतराल में मैं दूसरी बार यहां आया हूं। यह बात आज वृंदावन में देश के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने परमेश्वरी देवी धानुका सरस्वती विद्या मंदिर परिसर में श्री चेतन्य महाप्रभु ब्रज वृंदावन आगमन पंचशती महोत्सव के उद्घाटन के दौरान कही।  राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने कहा कि मुझे ब्रज से लगाव है, मेरा मन यहां आने पर बेहद प्रसन्न होता है। पांच सौ वर्ष पूर्व चेतन्य महाप्रभु ने बंगाल के नवदीप से यहां पहुंच वृन्दावन की खोज की तथा वृन्दावन का इतिहास रचाया। उन्होंने कहा कि 125 करोड़ की आबादी वाले भारत देश में लगभग सौ भाषायें तथा इतने ही समुदायों के लोग रहते हैं। हमारा देश सभी धर्म सम्प्रदायों का सम्मान करता है। हमारे देश की मिसाल पूरी दुनिया में अलग ही छाप रखती है। उन्होंने कहा कि हमें चेतन्य महाप्रभु के बताये प्रेम संदेश, भाईचारे को आत्मसात करते चलना है। इस दौरान मंच पर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक, सांसद हेमामालिनी, जीएलए विश्व विद्यालय के कुलाधिपति नारायण दास अग्रवाल, नेता कांग्रेस विधान मंडल दल प्रदीप माथुर, प्रदेश के वन मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव, वृंदावन पालिका अध्यक्ष मुकेश गौतम एवं आयोजक पदमनाभ गोस्वामी मौजूद रहे।        राधारमण जू मंदिर में भाव विभोर हुये राष्ट्रपति महाप्रभु के आसन व अंगवस्त्र के किये दर्शन मथुरा। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी कार्यक्रम उदघाटन के बाद प्राचीन मंदिर राधारमण के दर्शनों हेतु पहुंचे, जहां राधारमण जू मंदिर के सेवायत पदमनाभ गोस्वामी और पदमलोचन गोस्वामी ने मंदिर वाह्य द्वार पर स्वागत किया। राधारमण जू घेरा में प्रवेश करते मंदिर प्रांगण में जाकर वैदिक मंत्रों द्वारा मंदिर में सत्कार करते हुये राष्ट्रपति ने अति भावुक हृदय से दर्शन किये। मंदिर में श्रीचैतन्य देव के आसन व अंगवस्त्र, कोपीन, डोर, वहिर्वास आदि के दर्शन किये। राधारमण लाल के दर्शन कर राष्ट्रपति गोपीनाथ बाजार वृन्दावन में अमिय निमाई गौरांग महाप्रभु मंदिर के दर्शन करने गये जहां चैतन्य महाप्रभु की सेवा अराधना विगत 80 वर्षों से हो रही है। यहां मंदिर में श्री गौर हरि का दास विग्रह है। जो नवदीप के निमाई पंडित के अपने घर में स्थित नीम वृक्ष से एक व शेष भाग से निर्मित है। श्री विग्रह का दर्शन कर राष्ट्रपति ने मौन रूप अपनी प्रार्थना की और कतिपय क्षणों के लिये भावधारा में अन्तरतम प्रमुदित हो गये।  

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परमेश्वरी देवी धानुका स्कूल में मथुरा। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी आज 11.15 मिनट पर वृन्दावन हैलीपेड पर पंहुचे जहां यूपी के राज्यपाल राम नाईक, सीएम अखिलेश यादव और सांसद हेमा मालिनी ने राष्ट्रपति का स्वागत किया। 11.25 मिनट पर वे परमेश्वरी देवी धानुका सरस्वती विद्या मंदिर पंहुचे, जहां अमिय निमाई महाप्रभु द्वारा आयोजित पंचशती महोत्सव का दीप प्रज्जवलित कर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने उदघाटन किया।  कार्यक्रम के संयोजक और परमेश्वरी देवी धानुका सरस्वती विद्या मंदिर के प्रबंधक पदमनाभ गोस्वामी और पदमलोचन गोस्वामी ने उनका स्वागत किया। उन्हें शाॅल, स्मारिका और अमिय निमाई गौरांग महाप्रभु का चित्र भेंट किया। राज्यपाल का स्वागत शिशुपाल सिंह द्वारा किया गया। मंत्री उप्र सरकार दुर्गाप्रसाद का स्वागत पदमलोचन गोस्वामी ने किया और सांसद हेमा मालिनी का पूजा सेठ ने स्वागत किया। विधायक प्रदीप माथुर का स्वागत इन्द्रेश उपाध्याय ने और नारायणदास का ब्रजगोपाल राय और मुकेश गौतम का मोहित अग्रवाल ने स्वागत किया। इस अवसर पर स्वागत भाषण प्रस्तुत करते पदमनाथ गोस्वामी ने कहा कि चेतन्य महाप्रभु द्वारा आज से पांच सौ वर्ष पूर्व सदभाव, भाईचारा, अहिंसा, भक्ति आंदोलन, प्रेम, हरिनाम संकीर्तन, प्राणी मात्र के प्रति दया का भाव, जाति-पात के भेद के बिना भक्ति आंदोलन का संदेश समस्त विश्व को दिया। महाप्रभु ने धर्म को मानवीय प्रेम से संबद्ध कर जनमानस में मूल्यों की प्रतिष्ठा कराने का वीणा उठाया। उनकी प्रेमाभक्ति के प्रबल प्रवाह में मनुष्य की दुष्प्रवृत्तियां अपने आप विलुप्त हो जाती थीं। सांसद हेमा मालिनी ने कहा कि चेतन्यदेव ने वैष्णव धर्म को एक नवीन स्वरूप प्रदान किया। इसमें निहित नवदर्शन का ज्ञान हमें होता है। श्रीकृष्ण ही एकमात्र ईश्वर और अराध्य हैं। वे प्रेममय हैं। उनको प्राप्त करने के लिये उनके ईश्वरत्व की बात भूलकर उनको पूर्णतः अपना समझकर प्रेम करना होगा। तत्व की दृष्टि से श्री राधा सर्व शक्तिमान श्रीकृष्ण की आनंददायिनी शक्ति हैं। सांसद ने कहा कि मेरी ब्रज केे विकास कराने की पूरी इच्छा है। यही सोचकर मैं यहां आयी हूं। मेरा इस कार्य में केन्द्र व प्रदेश सहयोग कर रहे हैं। इससे पूर्व धानुका विद्यालय के छात्रों द्वारा राष्ट्रगान प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में संत, महात्मा और विद्वतजन उपस्थित थे। संचालन डा. उमेशचन्द्र शर्मा व अंजू सूद ने किया।  कार्यक्रम में विशेष रूप से केपी सिंह देव पूर्व मंत्री भारत सरकार, लेखा बोस, तमाल कान्ति घोषण, वीपी राॅय, बांकेलाल शर्मा, शाह केएस गुप्ता, अनुराग गोस्वामी, डा. सरोज गोस्वामी, मीनाक्षी गोस्वामी, एका गोस्वामी, मृत्युंजय पाठक, सुरेशचन्द्र शर्मा, धनंजय गोस्वामी, डा. रंगीली शरण, यतीन्द्र जी, विभू शर्मा, हरप्रसाद पौडेल, डा. खेमराज बराल, ललित गर्ग आदि उपस्थित थे।  

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मथुरा। आज चेतन्य महाप्रभु के पंचशती समारोह के उदघाटन में आये राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की अगवानी करने आये प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव हैलीपेड पर ही राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को फूलों का गुलदस्ता भेंट कर वापिस चले गये। वह उदघाटन स्थल पर नहीं गये।

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मथुरा। वृंदावन में मंदिर ज्यादा है या यहां की आबादी(लोग)। यह व्यंग करते हुए प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि वृंदावन में जितने मंदिर हैं, शायद उतनी आबादी नहीं होगी। यहां दोनों की संख्या का पता ही नहीं चलता। आज विज्ञान की प्रगति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आज अगर देश के किसी हिस्से में कोई आवाज उठे तो तुरंत अमेरिका तक पहुंच जाएगी। लेकिन पांच सौ वर्ष पूर्व चैतन्य महाप्रभु ने कैसे प्रेम का संदेश नवदीप से आकर वृंदावन से लेकर देश के सभी कौने में पहुंचा दिया, यह भी उनकी भक्ति का ही कमाल है। चेतन्य महाप्रभु के पंचशती समारोह के उदघाटन के मौके पर आये उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक ने उदघाटन मंच से बोलते हुये कहा कि चेतन्य महाप्रभु ने प्रेम का संदेश दिया है। उनकी सोच जाति, धर्म से हटकर थी। सभी लोगों में सौहार्द बनाये रखने की कामना करते थे। भक्तिपूर्ण कीर्तन पद्धति से प्रभु को पाया और संकीर्तन पद्धति से भी प्रभु प्राप्ति का संदेश हमें दिया। वसुधैव कुटुम्बकम का संदेश चैतन्य महाप्रभु की अनुकरणीय देन है। इस दौरान उन्होंने कहा कि विज्ञान प्रगति तो जरूर कर रही है, लेकिन लोग आज भी कुष्ठ रोगियों से नफरत करते हैं। उन्होंने स्वयं के बारे में कहा कि मैं जाति, धर्म या संप्रदाय को नहीं मानता मेरा उद्देश्य केवल लोगों की सेवा करना और भाईचारे को बढ़ावा देना है। मथुरा-वृंदावन को धर्म व संस्कृति का केन्द्र बताते हुए कहा कि यहां से भाईचारे की भावना का संदेश जाता है।   

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मथुरा। चैतन्य महाप्रभु के पंचशती समारोह के मौके पर उदघाटन को आये राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी उदघाटन के पश्चात आगरा के होटल अमर पैलेस से लायी गयी गोल्फ कार में बैठकर रंगजी मंदिर से राधारमण मंदिर दर्शन करने निकले। गोल्फ कार को मिस्टर जाॅन चला रहे थे। ज्ञात हो कि पूर्व में भी गोल्फ कार का ही प्रणव मुखर्जी ने उपयोग किया था।

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मथुरा। आज महामहिम राष्ट्रपति के वृन्दावन आगमन से पूर्व सभी रास्ते बंद कर देने से श्रद्धालुओं को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। रमणरेती मार्ग से ही दिल्ली और दूसरे प्रांतों से श्रद्धालु वृन्दावन आते हैं तथा वृंदावन परिक्रमा भी इसी मार्ग से होती है। कार्तिक मास के चलते बड़ी संख्या में परिक्रमार्थी परिक्रमा में व्यस्त थे। अचानक परिक्रमार्थियों को रोके जाने से उनमें मायूसी दिखी। इसी तरह मथुरा-वृंदावन मार्ग पर वृंदावन की ओर जाने वाले वाहनों को आईटीआई कालेज पर रोक दिया गया। जबकि शहर के रंगजी मंदिर से लेकर सौ शैय्या संयुक्त चिकित्सालय तक आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया गया। जिसके चलते बड़ी संख्या में लोग जहां-तहां फंस गए। एक वर्ष पूर्व जब राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी यहां आए थे, तब भी स्थानीय लोगों सहित बाहर दूरदराज से आए श्रद्धालुओं को भारी असुविधा झेलनी पड़ी थी। प्रशासन को ऐसे समय दूसरे मार्गों से प्रवेश की व्यवस्था की जानी चाहिये थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। अनेक श्रद्धालुआंे ने आज भी इसकी शिकायत की। पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा कारणों का हवाला दे, मार्ग बंद कर दिये गये थे। इसी तरह इस बार भी अघोषित कफ्र्यू जैसा माहौल दिखाई दिया।   

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कुसुम सरोवर पर आयोजित  मथुरा। गोवर्धन के कुसुम सरोवर पर आयोजित वृंदाव प्रकाश महोत्सव का सांस्कृतिक कार्यक्रमों के मध्य जोरदार आयोजन किया गया। राधाकुण्ड परिक्रमा मार्ग स्थित कुसुम सरोवर पर कल रात्रि वृन्दावन प्रकाश महोत्सव के दौरान अदभुत छटा झलकी। कुसुम सरोवर पर आयोजित काकार्यक्रम का शुभारम्भ सांसद हेमा मालिनी ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में छह प्रदेशों के कलाकार आयें जिनमें उप्र, राजस्थान, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल के कलाकारों ने भाग लिया। इस दौरान सबसे पहले प्रमुख अग्नि नृत्य चरकुला की प्रस्तुति दी गयी। इस दौरान घाटों पर मंजीरों और मृदंगों के साथ नृत्य गायन किया गया। कोलकाता के हरे कृष्ण हलधर के सानिध्य में 108 मृदंग व मंजीरों से जुगलबंदी की गयी। इसके बाद केरल की बी सुचित्रा ने अपना कार्यक्रम प्रस्तुत किया। हैदराबाद के वारसी ब्रदर्स ने सूफी गायकी में महामंत्र को गाया। राजस्थान के अनवर खान मंगनिया ने राजस्थानी सूफी गायकी प्रस्तुत की। पार्वती वाउल ने भी अपनी प्रस्तुति दी। इस दौरान कुसुम सरोवर दीपों से जगमगा रहा था। कुसुम सरोवर पर आकर्षक रोशनी के चलते अदभुत छटा बिखर रही थी।  

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