पूज्य काष्र्णि गुरू शरणानन्द जी महाराज की असीम अनुकम्पा एवं पावन सानिध्य में रमणरेती महावन में आज बडी धूमधाम के साथ दिव्य चुनरी मनोरथ मनाया गया। गुरूवार 19 अक्टूबर को चुनरी मनोरथ कार्यक्रम की शुरूआत प्रातः 9ः30 बजे से यमुना पूजन कार्यक्रम के साथ हुयी वेदपाठी बालकों दिव्य मंत्रोच्चारण के साथ यमुना महारानी का पूजन किया गया। इसके पश्चात् यमुना भक्तों द्वारा महाराज श्री के सानिध्य में बंसल परिवार के सदस्यों द्वारा यमुना महारानी को चुनरी ओढा कर चुनरी मनोरथ मनाया गया। यमुना पूजन एवं चुनरी मनोरथ कार्यक्रम के पश्चात् प्रातः 11ः30 पर यमुना महारानी को 56 भोग अर्पित किये गये एवं भक्तों द्वारा छप्पन भोग की आरती कर मनोकामना मांगी गई। परम पूज्य काष्र्णि गुरू शरणानन्द जी महाराज ने आशीर्वाद देते हुये यमुना महारानी की दशा सुधारने के लिये सभी के एकजुट हो प्रयास करने की बात कही। यमुना मिशन के संस्थापक प्रदीप बंसल जी ने बताया कि यमुना महारानी भगवान श्री कृष्ण की शाश्वत संगीनी है एवं ब्रज में वह भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं की साक्षी है। वर्तमान में उनकी स्थिति समस्त वैष्णवों के लिये चिन्ता का विषय है। इसके लिये सभी वैष्णवों को एकजुट हो मजबूत ईच्छाशक्ति के साथ यमुना की स्वच्छता के लिये कार्य करने की। यमुना मिशन यमुना की स्वच्छता के लिये कटिबद्ध है एवं उस दिशा में कार्य कर रहा है। दोपहर 1 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम की छलकियां देखने को मिली जिसमें बाहर से आये कालाकारों द्वारा भजन प्रस्तुत किये गये इसके पश्चात इस्काॅन वृन्दावन के भक्तों द्वारा संकीर्तन प्रस्तुत किया गया कार्यक्रम का आकर्षण केन्द्र प्रसिद्ध गायिका अनुराधा पौडवाल जी द्वारा गाये गये भजन रहे। उनके द्वारा प्रस्तुत स्वर लहरियों में पूरा पण्डाल झूमने लगा। अनुराधा पौडवाल जी द्वारा यमुना महारानी पर कई भजन गाये गये जिनकों सुन भक्त भाव विहोर हो गये। इस अवसर पर राजेन्द्र प्रसाद बंसल, हरदेवानन्द जी महाराज, पं अनिल शर्मा, के.एन शशी, पं. देवेन्द्र शर्मा जी, दाउ दयाल जी, राजीव गोस्वामी, मुकेश ठाकुर, लपुटी पंडित, आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
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