गिर्राजधाम में पेडा की जाॅच के बजाय सांठ गांठ कर रहे विभागीय अधिकारी मथुरा। तीनों लोकों से न्यारी कृष्ण की नगरी मथुरा व रास स्थली वृन्दावन गोवर्धन गोकुल बरसाना नन्दगांव प्रत्येक दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु भक्त तीर्थ स्थल में देश के कोने-कोने से तीर्थो के राजा श्री गिर्राज महाराज की पावन धरा पर आकर दानघाटी मंदिर मुखारबिंद मंदिर कृष्ण कुण्ड गोविन्द कुण्ड राधारानी कुण्ड सुरभि कुण्ड ललिता कुण्ड संकर्षण कुण्ड आदि स्थलों के दर्शन व आचमन कर कृष्ण नगरी के प्रसिद्ध पेडा का भोग लगाते है। वहीं ब्रज की राजधानी वृन्दावन में बाॅंकेविहारी जी मथुरा में द्वारिकाधीश कृष्ण जन्मभूमि गोवर्धन गिर्राज की पावन धरा व राधाकुण्ड में राधाकृष्ण के प्रेम को दर्शाता संगम कुण्ड के दर्शन करने एवं आषाढ़ मास के गुरूपूर्णिमा मेला पर कराडों की संख्या में श्रद्धालु भक्त मथुरा वृन्दावन आते है। और श्रद्धालु भक्त मंदिरों में भगवान का भोग लगाने के लिये मथुरा के नामी पेडे़ को स्थानीय दुकानों से खरीद रहे है। वहीं श्रद्धालु भक्त पेड़ा का भोग लगाने के बाद जब पेडा खाते है तो पेड़ा का स्वाद कुछ अटपटा लगने पर पेडा को फेंकना पडता है। क्योंकि गुरूपूर्णिमा मेला में पेडा विक्रेता पेड़ा बनाने के लिये सिथेटिक दूध के खोआ का इस्तेमाल कर रहे और कुछ सूजी की मिलावट भी की जा रही है। जिसके कारण पेडा में खटान की शिकायत है और श्रद्धालु पेडा खाने के बाद बीमार पड़ रहे है। वहीं दुकान स्वामियों की मोटी चाॅदी एवं खाद बिभाग टीम की अनदेखी के कारण मथुरा का प्रसिद्ध पेड़ा अपना अस्तत्व खो रहा है। पेडा गिर्राज तलहटी में बडी मात्रा में 300 रूपये प्रति किलो से बिक रहा है। मिलावटी खोर मिठाई विक्रेताओं का गौरख धन्धा दिन प्रति पनपता जा रहा है। इस ओर प्रशासन का कोई ध्यान नही है।
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