मथुरा

चार्ल्‍स कोर्रिया ने कहा था, ''भारत के शहरों में से सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण बात यह है कि यहां हमें विश्‍व प्रसिद्ध शिल्‍पकार मिलते हैं।'' निकट भविष्‍य में भारत के व्‍यापक मानचित्र पर स्‍मार्ट शहरों के उभरने के बाद वह अपने इस धारणा के प्रति और अधिक आश्‍वस्‍त हो गए होते। अफसोस! उनका देहांत हो चुका है। परियोजना को पूरा करने के लिए व्‍यापक स्‍तर पर तैयारियां चल रही हैं ताकि विकास एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए इस महत्‍वपूर्ण पहल को साकार रूप दिया जा सके। केंद्र की ओर से 48,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ अगले पांच वर्षों में 100 स्‍मार्ट शहरों को विकसित किया जाएगा। देश के शहरी क्षेत्र को तीव्र गति से विकसित करने के अपने एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रिमंडल ने अगले पांच वर्षों में दो नए शहरी अभियानों के अंतर्गत शहरी विकास पर करीब एक लाख करोड़ रुपये के खर्च को स्‍वीकृति दे दी है। क्रमश: 48,000 करोड़ रुपये और 50,000 करोड़ रुपये के परिव्‍यय से इस वर्ष 25 जून तक प्रारंभ की जा रही यह दो परियोजनाएं स्‍मार्ट सिटी अभियान और 500 शहरों के कायाकल्‍प और शहरी बदलाव के लिए अटल अभियान (एएमआरयूटी) हैं। स्‍मार्ट सिटी अभियान के अंतर्गत शहरी क्षेत्रों में जीवन की शानदार गुणवत्‍ता को समर्थ बनाने के लिए मूल्‍य बुनियादी सुविधाओं, स्‍वच्‍छ और दीर्घकालिक पर्यावरण और कुशल समाधानों को अपनाने को सुनिश्‍चित करना है। अधिकारियों का दावा है कि स्‍मार्ट शहरी मिशन का उद्देश्‍य अभियान के अंतर्गत उन्‍नत शहरी पर्यावरण आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा जिससे सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने और इसे सार्वजनिक स्‍थलों तक पहुंचाने के माध्‍यम से गरीबों को शहरी विकास के लाभ प्रदान करना है। साल 2011 की जनगणना के अनुसार, शहरी जनसंख्‍या के कुल जनसंख्‍या के 31 प्रतिशत के लिए करीब 37 करोड़ रुपये था। नवीनतम अनुमानों के अनुसार, करीब 5.80 करोड़ शहरी जनसंख्‍या गरीब है। सूत्रों ने बताया कि पिछल सरकार के द्वारा 2005 में शुभारंभ किए और मार्च, 2014 तक कार्याविन्‍त हुए जवाहरलाल नेहरू शहरी नवीकरण अभियान के कार्यान्‍वय से सबक लेते हुए नवीन पहलों को गठित किया जा चुका है। अमरीकी व्‍यापार विकास एजेंसी (यूएसटीडीए) ने इलाहाबाद, अजमेर और विशाखापत्‍तन शहरों को स्‍मार्ट शहरों में बदलने के लिए राजस्‍थान और आंध्र प्रदेश सरकारों के साथ एक समझौते पत्र पर हस्‍ताक्षर किए। चौदह देशों ने स्‍मार्ट शहरों को बनाने में रुचि दिखाई है। इनमें अमरीका, जापान, चीन, सिंगापुर, जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैण्‍ड, स्‍वीडन, इजरायल, तुर्की और ऑस्‍ट्रेलिया शामिल हैं। अभियान के अतंर्गत, उन्‍नत शहरी वातावरण आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा जिससे बढ़े हुए रोजगारों और आजीविका अवसरों के माध्‍यम से गरीबों को लाभ मिलेगा। स्‍मार्ट शहरी अभियान के अंतर्गत, प्रत्‍येक चयनित शहर को पाँच वर्षों के लिए प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये की केन्‍द्रीय सहायता प्रदान की जाएगी और मानदंडों के अनुसार प्रत्‍येक राज्‍य आकांक्षी स्‍मार्ट शहरों की निश्चित संख्‍या की संक्षित सूची तैयार करेगा। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि आकांक्षी स्‍मार्ट शहरों को एक पारदर्शी ''इस महत्‍वाकांक्षी अभियान के उद्देश्‍यों को पूरा करने के लिए पूरी तरह से बेहतर प्रदर्शन की संभावनाओं के साथ वित्‍त पोषण के लिए शहरी चुनौती प्रतिस्‍पर्धा'' के माध्‍यम से चुना जाएगा। केन्‍द्र सरकार से मिलने वाली धनराशि के लिए राज्‍यों की योजना का मूल्‍यांकन किया जाएगा। सूत्रों ने यह भी स्‍पष्‍ट किया कि स्‍मार्ट शहर अभियान का लक्ष्‍य जीवन स्‍तर में सुधार के लिए उपलब्‍ध परिसम्पत्तियों, संसाधनों और बुनियादी ढांचे का कुशल उपयोग करने के लिए स्‍मार्ट शहरों को अपनाने को प्रोत्‍साहन देना है। शहरी योजना में स्‍थानीय लोगो की भागीदारी को प्राथमिकता दी जाएगी। इनमें पुनर्संयोजन, पुनर्विकास, शहरी पहलों और नए शहरों के विकास को शामिल करते हुए क्षेत्र आधारित दृष्टिकोण के माध्‍यम से कार्यान्वित किया जाएगा। एक संवाददाता ने हाल ही में कुछ प्रमुख हिन्‍दी राज्‍यों के क्षेत्रों का दौरा किया तो देखा कि स्‍थानीय लोग स्‍मार्ट शहरों के संभावित स्‍थलों का आकलन कर रहे है और उन्‍होंने इन क्षेत्रों के अंदर और आसपास भूमि मूल्‍यों में वृद्धि के अपनी स्‍वयं की संभावनाएं तलाश करनी प्रारंभ कर दी हैं। ''यह सिर्फ धन लाभ की गणना नहीं है बल्कि हम बेहतर शहरी जीवन के लिए भी उत्‍सुक है और यदि हमने एक निर्धारित अवधि के भीतर बेतरतीब विकास की इस वर्तमान परंपरा को नहीं रोका तो आगामी पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगी।'' कुछ स्‍थानों पर स्‍मार्ट शहरों के संभावित स्‍थलों पर शर्तें लगाई जा रही है और स्‍थानीय लोगों में पूर्ण उत्‍साह है। सूचना के अनुसार एक सांविधिक शहर वह है जिसमें एक नगर निगम होता है। 2011 के रिकार्डों के अनुसार, कुल 4,041 सांविधिक शहर / कस्‍बे हैं। इनमें से करीब 500 शहरों की जनसंख्‍या एक लाख से ज्‍यादा है। इन 500 शहरों में भारत की जनसंख्‍या का 73 प्रतिशत हिस्‍सा है। जानकार सूत्रों के अनुसार, स्‍मार्ट शहरों और AMRUT के तौर पर नामांकित हो सकने वाले शहर क्रमश: इस प्रकार हैं: अंडमान और निकोबार (1 और 1), आंध्र प्रदेश (3 और 31), असम (1 और 7), दिल्‍ली (1 और 1), कर्नाटक (6 और 27), केरल (1 और 18), उत्‍तरप्रदेश (13 और 54), पश्चिम बंगाल (4 और 28), महाराष्‍ट (10 और 37), आदि। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि चिह्नित क्षेत्रों में पुनर्संयोजन और कमियों को अहमदाबाद की स्‍थानीय योजना की तर्ज पर ही आवश्‍यक सुधारों और हस्‍तक्षेपों के माध्‍यम से हल किया जाएगा। मुंबई के भिंडी बाजार और दिल्‍ली के पश्चिमी किदवई नगर जैसे मामलों में पहले से ही निर्मित क्षेत्र के पुनर्निर्माण के विकास के मामले स्‍मार्ट सिटी के लिए उत्‍तरदायी नहीं होंगे। पैन सिटी शहरों के घटकों में बुद्धिमता से किए गए परिवहन समाधान जैसे सुधार किए जा सकते हैं। स्‍मार्ट शहरों की पहल के योजनाकारों ने इनकी प्रमुख बुनियादी सेवाओं में पर्याप्‍त और स्‍वच्‍छ जलापूर्ति, स्‍वच्‍छता और ठोस अपशिष्‍ट प्रबंधन, कुशल शहरी गतिशीलता और सार्व‍जनिक परिवहन, गरीबों के लिए किफायती आवास, बिजली आपूर्ति, मजबूत सूचना-प्रौद्योगि‍की संपर्क, प्रशासन, विशेष रूप से ई-शासन, निवासियों की सुरक्षा, बेहतर तरीके से विकसित स्‍वास्‍थ्‍य और शिक्षा सेवाओं के अलावा दीर्घकालिक शहरी विकास को शामिल किया है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि स्‍मार्ट शहरी कार्ययोजना को विशेष उद्देश्‍य वाहनों के माध्‍यम से कार्यान्वित किया जाएगा जिसे प्रत्‍येक शहर के लिए बनाया जाएगा और राज्‍य सरकारें इन एसपीवी के संसाधनों को त्‍वरित गति से उपलब्‍ध कराने को सुनिश्चित करेंगी। स्‍मार्ट शहर और AMRUT दोनों ही एक विशेष माध्‍यम से एक दूसरे से जुड़े हैं। AMRUT में 50,000 करोड़ रुपये के निवेश के माध्‍यम से जलापूर्ति, सीवरेज प्रबंधन, तूफानी पानी का निकास, बच्‍चों की सुवि‍धाओं को पूरा करने के लिए विशेष योजना के साथ परिवहन और हरित क्षेत्रों एवं उद़यानों का विकास शामिल है। इस अभियान का उद्देश्‍य ई-शासन, पेशेवर नगरपलिका कैडर का गठन, स्‍थानीय शहरी निकायों के लिए विकास कोष और कार्य, भवन उपनियमों की समीक्षा, नगरनिगम करों के संग्रह और मूल्‍यांकन में सुधार, शहरी स्‍थानीय निकायों की ऋण रेंटिग, ऊर्जा और जल ऑडिट, नागरिक केन्द्रित शहरी योजना जैसे सुधारों को प्रा़प्‍त करना है। सूत्रों ने बताया कि सुधारों को आगे बढ़ाने के क्रम में, सरकार ने पिछले वर्ष के दौरान सुधारों की प्राप्ति के आधार पर प्रोत्‍साहन के तौर पर राज्‍यों / संघ शासित प्रदेशों को 10 प्रतिशत बजट आबंटन की भी योजना बनाई है। समयसीमा के साथ एक सुधार प्रक्रिया को दिशा-निर्देशों में राज्‍यों को वितरित की जाएगी। AMRUT अभियान को एक लाख और इससे ज्‍यादा जनसंख्‍या वाले 500 शहरों और कस्‍बों में कार्यान्वित किया जाएगा। इसे नदियों के किनारे बसे शहरों, कुछ राजधानी शहरों, पहाड़ी, द्वीपों और पर्यटन क्षेत्रों के कुछ महत्‍वपूर्ण शहरों में भी कार्यान्वित किया जाएगा। जेएनएनआरयूएम से भिन्‍न, केन्‍द्र सरकार व्‍यक्तिगत परियोजनाओं का मूल्‍यांकन करेगी लेकिन सूत्रों ने बताया कि राज्‍यों को चिह्नित शहरों की आवश्‍यकताओं, निष्‍पादन और निगरानी के आधार पर योजनाओं की डिजाइनिंग में लचीलापन अपनाने की सुविधा दी जाएगी। राज्‍य सिर्फ व्‍यापक सहमति के आधार पर केन्‍द्र को अपनी वार्षिक योजना प्रस्‍तुत करेंगे जिनके आधार पर निधि जारी की जाएगी। 10 लाख की जनसंख्‍या वाले शहरों और कस्‍बों के लिए परियोजना लागत की 50 प्रतिशत और 10 लाख की आबादी वाली परियोजना लागत की एक तिहाई केन्‍द्र सरकार द्वारा मदद की जाएगी। निधि को राज्‍य वार्षिक कार्ययोजनाओं में संकेतित महत्‍वपूर्ण उपलब्धियों के आधार पर 20:40:20 के अनुपात में तीन किश्‍तों में जारी किया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि सरकार पहले से ही जेएनएनयूआरएम के अंतर्गत स्‍वीकृत और अपूर्ण परियोजनाओं को AMRUT के तहत केन्‍द्रीय वित्‍त पोषण को स्‍वीकृति दे चुकी है। 2005-2012 के दौरान स्‍वीकृत शहरी विकास से संबंधित जेएनएनयूआरएम परियोजनाओं और 50 प्रतिशत तक की प्रगति प्राप्‍त कर चुकी परियोजनाओं और 2012-14 के दौरान स्‍वीकृत परियोजनाओं को मार्च 2017 तक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अनुसार, 102 और 296 परियोजनाओं को पूरा करने के लिए संतुलन बनाने के लिए केन्‍द्रीय सहायता प्रदान की जाएगी। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि दो लाख करोड़ रुपये से ज्‍यादा के न्‍यूनतम निवेश को अगले पाँच वर्षों में शहरी क्षेत्रों में लगाया जाएगा जबतक राज्‍य और शहरी स्‍थानीय निकाय 50 से 60 प्रतिशत तक के संसाधनों नहीं जुटा लेते हैं। इसके अतिरिक्‍त, परियोजना लागतों को पूरा करने के लिए आवश्‍यकता के अनुसार सार्वजनिक-निजी साझेदारी के आधार पर राज्‍यों और शहरी स्‍थानीय निकायों के द्वारा पर्याप्‍त निजी निवेश को भी जुटाया जाएगा।

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नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साइबर संबंधी जोखिमों को रक्तहीन युद्ध का वैश्विक खतरा बताया और देश के आईटी समुदाय का आह्वान किया कि वह विश्वसनीय साइबर सुरक्षा प्रणाली बनाकर पूरे विश्व की सेवा करे। नरेन्द्र मोदी यहां डिजिटल इंडिया सप्ताह के शुभारंभ समारोह में बोल रहे थे।  प्रधानमंत्री ने भारतीय आईटी उद्योग नेतृत्व से ‘ मेक इन इंडिया ’ कार्यक्रम के हिस्से के रूप में तथा आयात पर निर्भरता कम करने के लिए इलेक्ट्रोनिक उपकरणों तथा सामग्रियों का उत्पादन बढ़ाने को कहा।  नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आज भारत के लिए यह कहना पर्याप्त नहीं है कि वह प्राचीन सभ्यता है और जनसांख्यिकी लाभ के साथ 125 करोड़ लोगों का देश है। उन्होंने कहा कि आधुनिक टेक्नोलॉजी को इन मजबूतियों से जोड़े जाने की जरूरत है।  प्रधानमंत्री ने दोहराया कि उनकी सरकार लोगों के बीच डिजिटल-अंतर को बाधा बनने की अनुमति नहीं देने के लिए कृत संकल्प है। उन्होंने ई-गर्वनस तथा मोबाइल गर्वनस बारे में अपने विज़न को स्पष्ट किया। मोबाइल पर सभी महत्वपूर्ण सरकारी सेवाएं उपलब्ध हैं। प्रधानमंत्री ने कहा “ मैं एक डिजिटल भारत का सपना देखता हूं, जहां ऊंच गति के डिजिटल हाईवे देश को जोड़े, 1.2 बिलियन जुड़े भारतीय नवाचार को प्रेरित करें, टेक्नोलॉजी यह सुनिश्चित करे कि नागरिक- सरकार संवाद भ्रष्ट न हो पाए।  प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले सेटेलाइट लांच करने के लिए भारत की आलोचना की जाती थी, लेकिन अब यह माना जाता है कि यह सेटेलाइट आम जन के मददगार है, उदाहरण के लिए मौसम का सटीक अनुमान व्यक्त करके किसानों की मदद की जा सकती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसी तरह डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का उद्देश्य सामान्य-जन के जीवन को सुधारना है। उन्होंने कहा कि भारत भले ही औद्योगिक क्रांति चूक गया हो, लेकिन भारत आईटी क्रांति से नहीं चूकेगा। प्रधानमंत्री ने स्टार्ट-अप लांच करने के इच्छुक युवा उद्यमियों को पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया। उन्होंने युवाओं से नावचार में शामिल होने का अनुरोध किया और कहा कि ‘ डिजाइन इंडिया ‘ उतना ही महत्वपूर्ण है जितना ‘मेक इन इंडिया‘। प्रधानमंत्री ने डिजिटल इंडिया के लोगो का अनावरण किया और डिजिटल भारत से संबंधित नीति दस्तावेजों को जारी किया। उन्होंने सीएससी ग्राम स्तरीय दो महिला उद्यमियों का अभिनंदन किया। इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री अरुण जेटली, रविशंकर प्रसाद, जेपी नड्डा, थावर चंद गहलोत, जुआल ओराम तथा निर्मला सीतारमण उपस्थित थीं।

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 छाता में पूर्व मंत्री चैधरी लक्ष्मीनारायन का भाजपा सामिल होने पर चैधरी बीज भंडार पर स्वागत करते चैधरी सरनाम सिंह आदि। मथुरा। बुधवार को छाता विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक चै. लक्ष्मी नारायन बसपा की सदस्यता ग्रहण कर जब नगर में आये तो एक अजीब ही नजारा देखने को मिला। उनका जहा जहा स्वागत हुआ वहा केवल उनके अपने रिस्तेदार सगे समब्धी व बसपाई ही नजर आ रहे थे। नगर में डाकबंगला पर भाजपा के नगर अध्यक्ष ठाकुर गोपेन्द्र सिंह के अलावा और कोई बीजेपी कार्यकार्ता व पदाधिकारी मौजूद नही था। खास बात यह थी कि वरिष्ठ नेता व पूर्व चेयरमेन चै. जगपाल सिंह, महासम्पर्क अभियान के अध्यक्ष काली चरन गुप्ता, सभासद बंाकेलाल गुप्ता,  रिषी गुप्ता, मणी राम चैधरी, दिगम्बर चैधरी, अरूण भारगव, राजू अग्रवाल आदि कार्यकार्ता नही थे। नगर में जगह जगह यही चर्चा थी कि इतनी आसानी से क्या बसपाइयो की भगवा विचार धारा से मेल खायेगा या नही।    लक्ष्मी का छाता में 4 स्थानो पर हुआ स्वागत  छाता। भाजपा में सामिल होने पर पूर्व मंत्री चै. लक्ष्मी नारायन का छाता में उनके समर्थक पूर्व सभासद चैधरी प्रताप सिंह के प्रतिष्ठान पर बंेन्ड के मध्य फूलमाला व दुप्पटाओ से स्वागत किया। इसके बाद डाक बंगला पर नगर भाजपा अध्यक्ष गोपेन्द्र सिंह ने स्वागत समारोह कार्यक्रम आयोजित किया। इसके बाद चैधरी बीज भंडार की दुकान पर चैधरी सरनाम सिंह, महेश, तेजवीर आदि ने स्वागत किया। अंत में हाईवे पर रनवारी के पूर्व प्रधान हरीराम यादव के आवास पर स्वागत किया गया। इस मौके पर कुंजबिहारी लाल शर्मा, वीरीसिंह, कुवंर अजय सिंह यदुवंशी आदि ने भी स्वागत किया। इस मौके पर नरदेव चैधरी, जगदीश मेम्बर, ब्लाक प्रमुख महेन्द्र चैधरी, सरमन प्रधान, देवो, ज्ञानू देवीराम, रूपचन्द आदि मौजूद थे।  

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मथुरा। वृंदावन स्थित विश्व प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर परिसर में प्रदेश के मुख्यसचिव सहित सरकारी अधिकारियों के अमले को नियम विरुद्ध भोजन कराने के मामले में मंदिर प्रबंधन ने सेवायत्त गोस्वामी पर साढ़े सात लाख का जुर्माना ठोका है। दण्ड की राशि सात दिन में जमा न करने पर मंदिर से मिलने वाले सुविधाओं से परिवार को वंचित करने की चेतावनी भी दी गई है।  मंगलवार देररात मंदिर प्रबंधन कमेटी की हुई बैठक में सेवायत्त गोस्वामी आनंद किशोर गोस्वामी व उसके भाई जुगल किशोर गोस्वामी पर मंदिर की परपंराओं को तोड़ते हुए 30 जून को देररात प्रदेश के मुख्य सचिव एवं जिलाधिकारी मथुरा सहित करीब 75 लोगों को मंदिर परिसर में कुर्सी लगाकर भोजन कराने पर साढ़े सात लाख रुपए जुर्माना तय किया गया। जुर्माना की राशि सात दिन के अंदर अदा न करने पर मंदिर प्रबंधन ने गोस्वामी बंधुओं को मंदिर से मिलने वाली सभी सुविधाएं बच्चे के जनेऊ, मुण्डन, शिक्षा, विवाह तथा वृद्धा पेंशन आदि के रूप में मिलने वाली सभी सुविधाओं से वंचित करने की चेतावनी भी दी है।  ज्ञात रहे आनंद गोस्वामी ने अपनी पूजा-अर्चना के दौरान 30 जून को जनपद दौरे पर आए प्रदेश के मुख्यसचिव आलोक रंजन सहित आगरा मंडल एवं जनपद के करीब 75 आलाधिकारियों के प्रशासनिक अमले को बांके बिहारी मंदिर परिसर में कुर्सी-मेज लगाकर दावत खिलाई थी। कोर्ट के नियमानुसार मंदिर परिसर में किसी को भी भोजन कराने पर पाबंदी है। गोस्वामी द्वारा परपंराएं तोड़े जाने पर नाराजगी जताते हुए मंदिर प्रबंधन कमेटी ने 10 हजार रुपए प्रति व्यक्ति के हिसाब से साढ़े सात लाख रुपए का जुर्माना आनंद व जुगल गोस्वामी पर ठोका है।  बैठक में प्रबंधन कमेटी अध्यक्ष नंदकिशोर उपमन्यु एडवोकेट, उपाध्यक्ष घनश्याम गोस्वामी सदस्य रजत गोस्वामी, ब्रिजेश गोस्वामी, गौरव गोस्वामी, विकास वाष्र्णेय, जयप्रकाश शर्मा, आदि मौजूद थे।     

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  किसान संघर्ष समिति ने किया खुशी का इजहार ... सपा सरकार के मुखिया को दी बधाई किसान संघर्ष समिति की महनत लाई रंग  समूचे छाता में मनी आज धूमधाम से दीवाली.......गन्ना उत्पादन संघ चेयरमेन  पूर्व मंत्री क्षेत्रीय विधायक ने दी किसानों को बधाई  किसान संघर्ष समिति ने नगर में वाॅटी मिठाई  छाता क्षेत्र के किसान होगे खुशहाल ....पूर्व मंत्री व विधायक ठा. तेजपालसिंह छाता। आगरा मण्डल की एक मात्र पिछले 6 बर्षाे से बंद पडी छाता शुगर मिल में फिर से चिमनी से धुआ निकलने के सपा सरकार के फरमान जारी होने के उपरान्त समूचे छाता क्षेत्र एंव कस्वा छाता के किसानों में खुशी की लहर दौड गई है।   मिली जानकारी के अनुसार गत रात्रि प्रदेश सरकार के केबीनेट की बैठक प्रदेश के मुखिया अखिलेश यादव ने छाता चीनीमिल को पुनः चालू करने की फरमान जारी कर अपनी अन्तिम मौहर केबीनेट में प्रस्ताव कर लगा दी है। छाता चीनीमिल के साथ प्रदेश की अन्य तीन मिल बंद पडी उनका भी जीर्ण उद्वार किया जायेगा। जैसा कि पूर्व में विदित है कि बर्ष 2009 में बसपा सरकार ने घाटे की घोषणा करते हुए शुगर निगम की रिपोर्ट पर तत्कालीन सरकार ने मिल को बंद कर दिया था । गत 7 बर्षो से चीनीमिल बंद पडी होने के कारण किसान, मजदूर, व्यापारी वर्ग को काफी नुकसान हुआ था। लेकिन बर्ष 2013 फरबरी के अन्तिम सप्ताह में किसान संघर्ष समिति के बैनर तले छाता चीनीमिल चलाओं आन्दोलन तहसील मुख्यालय पर बहद्व आन्दोलन किया गया था जिसकी गूज प्रदेश सरकार तकपहुॅची और विवश होकर प्रदेश सरकार के मुखिया अखिलेश यादव ने किसानों के 15 सदस्यी सदस्यों को लखनउ बुलाकर छाता चीनीमिल को चलाने का आस्वाशन दिया गया। यह आन्दोलन पूरे 21 दिन दिन रात कडकडाती में चला। किसान संघर्ष समिति के 15 सदस्य मण्डल को आस्वासन देने के ठीक 2 बर्ष के उपरान्त पिछले महीने संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री को पुनः आन्दोलन का ज्ञापन भेजा। और आनन फानन में क्षेत्र की जनता के दर्द को समझकर सरकार चीनीमिल चालू कराने की घोषणा कर दी। उक्त चीनीमिल की स्थापना सन् 1978 में तत्कालीन प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री एन.डी तिवारी एंव तत्कालीन क्षेत्रीय विधायक बाबू तेजपालसिंह व जनपद के तत्कालीन सांसद चकलेश्वर सिंह के अर्थक प्रयासों से इस मिल की स्थापना सम्भंव हो सकी। उक्त चीनीमिल उ0प्र0 चीनीनिगम की सबसे अधिक राजस्व देने वाली मिलों में गिनती गिनी जाती थी। इस चीनीमिल के प्राई संत्र मेंइसकी क्षमता लगभग बर्ष में 60 लाख कुन्तल गन्ना प्राई करने की क्षमता इस मिल बताई जाती है। इस मिल के चालू होने से क्षेत्र के किसान एंव मजदूर व्यापारियों की पुनः आर्थिक स्थिति में सुधार होने के कयास भी लगाये जा रहे है। इस मिल को चलवाने के लिए आन्दोलन में अर्थक भूमिका किसान संघर्ष समिति के सयोजक ठा.मुरारीसिंह, अभयपालसिंह, खगुल भारद्वाज प्रवक्ता संघर्ष समिति , चन्द्रपालसिंह एड0, सभासद , भानू प्रताप ठाकुर, ठा. धर्मजीत सिंह, भगवत स्वरूप पान्डेय, तरूण सेठ, ठा. प्रताप सिंह, पूर्व चेयरमेन राजपालसिंह, पं0 भीमसैन शर्मा, चै. कुुलभान सिंह, आदि का विशेष सहयोग रहा। इससे पूर्व आज स्थानीय डाक बंगला पर किसान संघर्ष समिति की बैठक ठा. मुरारीसिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।     

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सौंख में आयोजित भंडारा प्रसाद वितरण से पूर्व सर्व ब्राह्मण महासभा के जिलाध्यक्ष पूरन कौशिक व पदाधिकारी भगवान परशुराम की प्रतिमा पर भोग-प्रसाद लगाते हुए विप्रों ने परिक्रमार्थिओं को किया भंडारा प्रसाद वितरित सौंख समाचार। मंगलवार को सर्व ब्राह्मण महासभा के पदाधिकारियों ने बृज चैरासी कोस परिक्रमार्थिओं के लिए भंडारा प्रसाद वितरित किया। भंडारा देर शाम तक चलता रहा। परिक्रमार्थिओं ने भी जमकर प्रसाद का लुत्फ उठाया। भंडारा सुबह से ही शुरू हुआ और ब्राह्मण सभा के पदाधिकारियों ने परिक्रार्थिओ को रोक रोककर भंडारा प्रसाद खिलाया। इस मौके पर कस्बा के गणमान्य लोगों को भी प्रसाद वितरित किया गया। इस मौके पर सर्व ब्राह्मण महासभा के जिलाध्यक्ष पूरन चंद कौशिक, सीयाराम शर्मा, नगर अध्यक्ष मोहन लाल शर्मा, भूपेन्द्र शर्मा, मेघश्याम शर्मा, चतुर्भुज शर्मा, यतेन्द्र शर्मा, चन्द्रशेखर शर्मा, देवी प्रसाद शर्मा, संजय शर्मा, पुष्पेन्द्र चतुर्वेदी, घनश्याम तिवारी, चन्द्रभान शर्मा, कैलाश चंद शर्मा, धवल शर्मा, कृष्णा शर्मा, योगेश शर्मा, मथुरेश शुक्ला, गंगाराम कौशिक आदि उपस्थित थे।    

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सौंख में परिक्रमा देते श्रद्वालु को टोल अस्था का केन्द्र बना बृज कस्बावासी कर रहे है पुण्य कार्य जगह-जगह लगाये जा रहे भण्डारे सौंख समाचार। हरे राम हरे कृष्णा, जय श्री राधे राधे, बाॅकेबिहारी लाल तेरी जय होवे, हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की, इन जायकारों के साथ संकीर्तन कर श्रद्धालु परिक्रमा लगा रहे है। इन दिनों चैरासी परिक्रमा के चलते ब्रज अस्था का केन्द्र बन चुका है। कस्बा में करीब एक दर्जन स्थानों पर श्रद्धालुओं को ठहरने व भोजन प्रसाद की व्यवस्था की गई है।  शनिवार को अधिकमास माह के चलते ब्रज चैरासी परिक्रमा इन दिनों जोरों पर है। यह परिक्रमा करीब तीन प्रदेशों में होकर मार्ग बना है। ब्रज चैरासी परिक्रमा मार्ग उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा से हो होकर गुजरता है। आस पास के प्रदेशों से परिक्रमा देने वाले श्रद्धालुओं के टोल के टोल आ रहे है। श्रद्धालुओं को यह ब्रज चैरासी परिक्रमा आजकल खूब भा रही है। श्रद्धालु ब्रज चैरासी कोस की परिक्रमा कर  रहे है लेकिन श्रद्धा और भगवान में विश्वास के चलते कोसों दूर पैदल चलकर ब्रज धाम में परिक्रमा लगाने से पीछे नही हट रहे है। वही ऐसे में कस्बावासी पुण्य कार्य करने लगे है। कस्बा में करीब एक दर्जन धर्मशालाओं में ठहरने व खोयापाया केन्द्र की स्थानीय भक्तजनों के द्वारा व्यवस्था की गई है। और परिक्रमा मार्ग में जगह-जगह पानी की प्याउ और भोजन प्रसाद भण्डारे भी चलाये जा रहे है। चेयरमैन प्रतिनिधि की कहन इस बारे में चेयरमैन प्रतिनिधि रेहिताश्व वर्मा ने बताया कि नगर पंचायत की ओर सभी स्थानों पर परिक्रमार्थियों के लिए पेयजल की व्यवस्था की गई है। कस्बा में जगह जगह कूडेदान रखवाये गये है। और सफाईकर्मियों के द्वारा समय समय पर सफाई कार्य और रात्रि में प्रकाश व्यवस्था की गई है।  नही कराया गया सड़क निर्माण पूरा सौंख। इन दिनों अधिक मास माह में ब्रज चैरासी की परिक्रमा चल रही है। ब्रज चैरासी परिक्रमा मार्ग में आने वाला सौंख-मथुरा मार्ग आता है। लेकिन पिछले कई माह से निर्माण कार्य चल रहा है। परन्तु प्रशासन द्वारा अभी तक सड़क निर्माण कार्य पूरा नही कराया गया। इससे श्रद्धालु खासे परेशान नजर आये।  

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मथुरा : प्रशासनिक उदासीनता के चलते अधिक मास के दौरान गिरिराज धाम गोवर्धन आने वाले श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि गिरिराज तलहटी क्षेत्र में चल रहे सभी कार्य अधूरे ही पड़े हैं और अफरातफरी के बीच कई स्थानों पर काम पूरी तरह रुक गया है।

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मथुरा : प्रशासनिक उदासीनता के चलते अधिक मास के दौरान गिरिराज धाम गोवर्धन आने वाले श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि गिरिराज तलहटी क्षेत्र में चल रहे सभी कार्य अधूरे ही पड़े हैं और अफरातफरी के बीच कई स्थानों पर काम पूरी तरह रुक गया है। विदित हो कि अधिक मास में गोवर्धन परिक्रमा के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। इसमें एकादशी, पूर्णिमा, शनिवार, रविवार और अमावस्या जैसी तिथियों पर भारी संख्या में परिक्रमार्थियों का जमावड़ा रहता है।   पूर्व में जिला प्रशासन ने विभिन्न विभागों को इस मेले की व्यवस्थाएं करने की जिम्मेदारी सौंपी थी लेकिन इस बार कहीं भी व्यवस्थाएं नजर नहीं आ रही हैं। विश्व विख्यात पुरुषोत्तम मास मेले के लिए भी प्रशासन भले ही लाख इन्तजाम किए जाने का दम्भ भरता हो लेकिन हकीकत कुछ और ही है। मेले के लिए चल रहे कार्य अभी भी आधे-अधूरे पड़े हुए है। गिरिराज परिक्रमा के अन्तिम चरण में गिरिराज मुकुट मुखार बिन्द मन्दिर तक आने वाले मार्ग को करीब आधा किलोमीटर पहले से ही उखाड़ दिया गया है और उसके ऊपर सीसी रोड का निर्माण कराया जा रहा है, जो अभी बन ही रहा है।  यहां कार्यरत एक कर्मचारी ने बताया कि इस गति से चल रहे काम के चलते अभी भी इस सड़क के निर्माण कार्य को पूरा होने में करीब 10 दिन का समय और लगेगा। इस निर्माण कार्य के चलते यहां से आवागमन बुरी तरह प्रभावित है। श्रद्धालुओं के वाहन, यात्रा, काफिले आदि पिछले करीब दो सप्ताह से रास्ते बदलकर बाहर से ही निकल जाते हैं और मानसी गंगा एवं मुकुट मुखार बिन्द मन्दिर के दर्शन-आचमन से वंचित रह जाते हैं। मुकुट मुखार बिन्द मानसी गंगा मन्दिर के सेवायत इस तथाकथित विकास कार्य को जमकर कोस रहे हैं। इससे उनकी आजीविका भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।    गिरिराज धाम कस्बे में चारों तरफ गन्दगी, टूटी सड़क, बिजली, पानी, जैसी तमाम समस्याएं भी जस की तस बनी हुई हैं। परिक्रमा मार्ग में फैली पड़ी अव्यवस्थाओ से निपटने एवं कार्यपूर्ण करने के लिए जिलाधिकारी राजेश कुमार ने सम्बधित विभागीय अधिकारी कर्मचारियों को सख्त निर्देश दे रखे हैं लेकिन विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी जिलाधिकारी के निर्देशों का कहीं कोई पालन करते दिखाई नहीं पड़ रहे हैं।  डग्गेमार वाहन संचालक अलग से परेशानियां खड़ी करते हैं। स्थानीय पुलिस की मौन स्वीकृति मिली होने के कारण इन डग्गेमार वाहन संचालकों से कोई भी कुछ कहने का साहस नहीं रखता जिसके कारण कस्बे में लगने वाले जाम में वाहनों की लम्बी कतारें लग जाती हैं।  शहर में नए बस स्टैंड से लेकर भूतेश्वर और गोवर्धन चौराहे तक श्रद्धालुओं का रेला बसों के लिए भटकता देखा जा सकता है। इक्का-दुक्का बसों में लोग बुरी तरह ठुंसे रहते हैं और छतों पर बैठने के लिए होड़ लगी रहती है। भूतेश्वर से लेकर कृष्णा नगर मार्ग होते हुए गोवर्धन चौराहे पर जाम के हालात बने रहते हैं। यही हाल गोवर्धन कस्बे का है। पार्किंग स्थलों पर भारी वाहनों की भीड़ जमा है तो लोग वहां से पैदल ही आगे बढ़ पा रहे हैं। पुलिस यातायात को संभालने का प्रयास जरूर कर रही है, पर आने वाले दिनों में जो भीड़ टूटेगी, उसके हिसाब से यातायात संभल पाएगा, अभी मुश्किल नजर आ रहा है।   राधा कुण्ड निवासी केसी गौड़ ने बताया कि डग्गेमार वाहनों के जमावड़े से परिक्रमाथियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कोई बैरियर नहीं लगा हुआ है और ना ही पुलिस द्वारा कोई पुख्ता इंतजाम है। गोवर्धन निवासी सुरेन्द्र नाथ तिवारी ने बताया कि बस स्टैंड से मुखार बिन्द तक घंटों जाम लगा रहता है जिससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ श्रद्धालुओं को भी लम्बी कतार लगाकर जाना पड़ता है। जतीपुरा निवासी प्रेम पाल ने बताया कि जतीपुरा मार्ग की चौड़ाई कम है और वाहनों की संख्या सैकड़ों में है जिससे जाम हर वक़्त बना रहता है पुलिस द्वारा कोई पुख्ता इंतजाम नहीं की गए हैं।   ब्रज बचाओ समिति के सदस्य उमा शंकर सिंह ने बताया कि श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राधा कुण्ड मार्ग में सड़क खुदी हुई है। उसमें से निकलते छोटे-छोटे कंकड़ों से परिक्रमार्थियों के पैरों में छाले तक पड़ जाते हैं। परिक्रमार्थी पोप सिंह ने बताया कि जहां-जहां सीमेंट की सड़क है वहां तो परिक्रमा देना आसान है और जहा डामर की सड़क है वहां काफी तकलीफदेय है।  दिल्ली से आई भक्त सुनीता शर्मा के चेहरे पर जाम में घंटों फंसे रहने की परेशानी साफ देखी जा सकती है। आन्यौर निवासी ओम प्रकाश ने बताया कि पानी की बड़ी किल्लत है। लोगों को खारा पानी मुहैया कराया जा रहा है।  दूसरी ओर, भक्ति के सागर में आस्था की लहरें उमड़ रही हैं। गिरिराज भक्ति में आकंठ डूबे लोगों के मुंह से परिक्रमा मार्ग में बस एक ही शब्द की ध्वनि सुनाई दे रही है, गोवर्धन महाराज की जय और राधे-राधे। भीषण गर्मी में पसीने से नहाए श्रद्धालु अपने इष्ट की भक्ति में डूबे सिर्फ राधे-राधे के सहारे 21 किलोमीटर नंगे पैर चलकर अपने देव को मनाने में लगे हुए हैं। तलहटी में चारों ओर राधे-राधे के स्वर गुंजायमान हैं।  

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राया। राया में बिजली विभाग की मनमानी के विरोध में भाजपा नगर अध्यक्ष राकेश बंसल के नेतृत्व में सैंकड़ो की तादाद में राया एवं क्षेत्र नगर की जनता ने विद्युत विभाग के खिलाफ जबरदस्त धरना प्रदर्शन किया और बिजली विभाग के आॅफिस में ताला लटका दिया और सभी कर्मचारी एवं अधिकारियो को धरना स्थल कटरा बाजार फाटक पर बीच सडक पर बैठा दिया और 7 दिन का अल्टीमेटम दिया गया। यदि राया एवं क्षेत्र की विधुत व्यवस्था सही तरीके से नही  चली तो इस से भी बड़ा आन्दोलन फिर से राया मे होगा और इसकी गूँज शासन तक जाएगी।

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