मथुरा

संसदीय क्षेत्र में हो रहे महिलाओं के दुव्र्यवहार पर की चिता व्यक्त सौख चेयरमैन का कार्य सराहा, बृज को साफ सुधरा बनाने की अपील की संसदीय क्षेत्र मथुरा में महिलाएं सुरक्षित रहें और बृज भूमि को साफ और सुन्दर रहे। अपने व्यक्त में यह कसक व्यक्त कर मथुरा की सांसद हेमा मालिनी ने सोमवार को कस्बा में हो रहे शुद्व पेयजल योजना का लोकापर्ण किया। सांसद सीेधे लोकापर्ण के लिए गयी और मशीन में एटीएम डालकर योजना का शुभारम्भ किया। तदउपरान्त विद्या मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए सांसद हेमामालिनी ने मंच से नगर पंचायत अध्यक्ष शिवशंकर वर्मा के कार्य की सराहना की और बृजवासियो से सम्पूर्ण बृज को आदर्श क्षेत्र बनाने की अपील की। मंच से उन्होने महिलाओं के साथ हो रहे दुव्र्यवहार पर चिंता व्यक्त की और भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर भी किसानों की संसद में उठाने की बात कही। इससे पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष शिवशंकर वर्मा ने शुद्ध पेयजल योजना के बारे में विस्तार से बताया और आगामी योजनाओं का खाका भी खींचा। उन्होने मंच से ग्रामीण क्षेत्रों में व्याप्त समस्याओं से सांसद को अवगत कराया। एडीएम वित्त और राजस्व धीरेन्द्र सचान ने कहा कि सभी नगर पंचायत अध्यक्षों का दायित्व बनाता है  कि वह इस  तरह की योजनाओं को मूर्त रूप दें। उन्होने पालीेथिन का प्रयोग न करने की अपील भी उपस्थित जनसमूह से की। इस मौके पर नगर पालिका अध्यक्ष मथुरा मनीषा गुप्ता, सुबोध यादव, रामकिशन अग्रवाल, रामनाथ बंसल, जगपाल सिंह, बलरामसिंह, दाउजी, भगवत रूहेला, रोहिताश्व वर्मा, सौनू अग्रवाल, सुधीर बाबू अग्रवाल, विष्णु अग्रवाल, राजेश चैधरी, खेमचंद, उधम सिंह, प्रेमसिंह माहौर, छीतो सिंह, सुभाष अग्रवाल, अभय बंसल, संजू बंसल, गिरीश चोैधरी, महादेवी वर्मा, बीना वर्मा, सारिका वर्मा, राजकुमार चैधरी, साकेत अग्रवाल, मोहन लाल शर्मा, देवेश सोनी, बृजविहारी, रमाशंकर वर्मा, धीरज वर्मा, आदि उपस्थित थे। संचालन भूपेन्द्र शर्मा ने किया।  

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शिव परिवार की मूर्ति स्थापना से पूर्व नगर भ्रमण के दौरान  गोवर्धन। कस्बे के प्राहित पायसा मौहल्ले मंे विगत रोज ब्रजेश्वर महादेव जी और उनके परिवार की मर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा का अयोजन बड़े ही धूमधाम से किया गया। अप्राण मूर्तियों के साथ नगर परिक्रमा करने के उपरान्त विधि विधान से नवीन निर्मित मन्दिर में हुई शिव परिवार कह मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा के पश्चार प्रसाद वितरण कार्यक्रम भी देर रात तक चला।  कस्बे के प्रमुख समाजसेवी सुरेन्द्र नाथ शर्मा के प्रण के अनुसार विगत रोज गिरिराज महाराज की धरा पर कस्बे के सघन बस्ती क्षेत्र पुराहित पायसा मौहल्ले में इस मन्दिर की स्थापना की गयी। प्रातः काल शिव परिवार की सभी मूर्तियों पार्वती गणेश कार्तिक नन्दी आदि के साथ नगर भ्रमण किया गया। उसके उपरान्त मन्दिर में आकर विधि विधान से पूजा अर्चना कर मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की गयी। मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा के बाद भोजन प्रसादी का दौर देर रात तक चला। भण्डारे की व्यवस्थाऐं ठा0 तेजपाल सिंह एवं सचिन शर्मा द्वारा नियंत्रित की गयी।

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गोवर्धन। आखिर हमारे समाज और आस पास के इस पुरूष प्रधान माहौल मंे ऐसा क्या हैं जो लडकियां अपने आप को आरम्भ से ही बेहद कमजोर महसूस करती है। लड़कियों मंे लोगो को ऐसी कौन सी कमी नजर आती है जो उन्हें लड़को में नहीं दिखाई देती। वे लड़कों को क्यों इतना अग्रणी और लड़कियों को क्यों पिछड़ा हुआ समझते है। ये उदगार कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में चल अभिप्रेरण शिविर में एक छात्रा ने स्वतः स्फूर्त भावना के साथ व्यक्त किये।  इसी विद्यालय की कक्षा 8 की छात्रा करिश्मा कुन्तल का मानना है कि हमारे समाज के कुछ माँ बाप लड़कियों को पढना लिखना अच्छा नहीं समझते वहीं कुछ माँ बाप पढ़ाई में भेदभाव भी करते है। वे लड़के को तो अंग्रेजी माध्यम के बड़े स्कूल में दाखिला दिलाते है और लड़की को बगैर खर्चे वाले सरकारी स्कूल में दाखिला दिलाएंगे। वहीं उनके लिये कोई फर्क नहीं पड़ता कि लड़का चाहे किसी भी कक्षा में कितनी ही बार फेल हो जाये उसे दोबारा भर्ती करा ही दिया जाता है वहीं यदि लड़की किसी कक्षा में फेल हो गयी तो उसका स्कूल जाना ही बन्द करा देते है। छात्रा के अनुसार वे मां बाप कुछ ऐसा समझते है कि लड़के को तो उन्होंने स्वयं जन्म दिया है जबकि लड़की को वे किसी कूड़ेदान से उठाकर लाये है। लड़की की शादी भी करेंगे शादी तक एक भारी बोझ बतौर उसके साथ घर में बर्ताव किया जाता है वहीं शादी करने के बाद मां बाप एक ही बात दुहराते है कि बेटी हमने तेरी शादी में बहुत पैसा खर्च किया है। छात्रा ने पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि जो मां बाप अपने बेटे को तो अपनी पूरी सम्पति का मालिक बना देते है लेकिन उन्ही माँ बाप की नजरो में उस बेटी का उतना भी हक नहीं है जितना उसकी शादी की खर्च होता है। जितना वे मां बाप अपने बेटे का मानते है उतने जीने का अधिकार अपनी बेटी को क्यो नहीं देते है। ये भेदभाव का नजरिया लड़कियो के प्रति कब तक बनाए रखेंगे। लडकियां को चाहिये कि वे मजबूती के साथ आगे आकर इसका एक विशेष अभियान चला कर लोगो को जागरूक करे और उन्हें बतायें कि बेटी है तो कल है नही ंतो कुछ भी नहीं है।

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गोवर्धन। आखिर हमारे समाज और आस पास के इस पुरूष प्रधान माहौल मंे ऐसा क्या हैं जो लडकियां अपने आप को आरम्भ से ही बेहद कमजोर महसूस करती है। लड़कियों मंे लोगो को ऐसी कौन सी कमी नजर आती है जो उन्हें लड़को में नहीं दिखाई देती। वे लड़कों को क्यों इतना अग्रणी और लड़कियों को क्यों पिछड़ा हुआ समझते है। ये उदगार कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में चल अभिप्रेरण शिविर में एक छात्रा ने स्वतः स्फूर्त भावना के साथ व्यक्त किये।  इसी विद्यालय की कक्षा 8 की छात्रा करिश्मा कुन्तल का मानना है कि हमारे समाज के कुछ माँ बाप लड़कियों को पढना लिखना अच्छा नहीं समझते वहीं कुछ माँ बाप पढ़ाई में भेदभाव भी करते है। वे लड़के को तो अंग्रेजी माध्यम के बड़े स्कूल में दाखिला दिलाते है और लड़की को बगैर खर्चे वाले सरकारी स्कूल में दाखिला दिलाएंगे। वहीं उनके लिये कोई फर्क नहीं पड़ता कि लड़का चाहे किसी भी कक्षा में कितनी ही बार फेल हो जाये उसे दोबारा भर्ती करा ही दिया जाता है वहीं यदि लड़की किसी कक्षा में फेल हो गयी तो उसका स्कूल जाना ही बन्द करा देते है। छात्रा के अनुसार वे मां बाप कुछ ऐसा समझते है कि लड़के को तो उन्होंने स्वयं जन्म दिया है जबकि लड़की को वे किसी कूड़ेदान से उठाकर लाये है। लड़की की शादी भी करेंगे शादी तक एक भारी बोझ बतौर उसके साथ घर में बर्ताव किया जाता है वहीं शादी करने के बाद मां बाप एक ही बात दुहराते है कि बेटी हमने तेरी शादी में बहुत पैसा खर्च किया है। छात्रा ने पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि जो मां बाप अपने बेटे को तो अपनी पूरी सम्पति का मालिक बना देते है लेकिन उन्ही माँ बाप की नजरो में उस बेटी का उतना भी हक नहीं है जितना उसकी शादी की खर्च होता है। जितना वे मां बाप अपने बेटे का मानते है उतने जीने का अधिकार अपनी बेटी को क्यो नहीं देते है। ये भेदभाव का नजरिया लड़कियो के प्रति कब तक बनाए रखेंगे। लडकियां को चाहिये कि वे मजबूती के साथ आगे आकर इसका एक विशेष अभियान चला कर लोगो को जागरूक करे और उन्हें बतायें कि बेटी है तो कल है नही ंतो कुछ भी नहीं है।

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मथुरा। नवरात्र में देवी माँ की जगह जगह पूजा होती है। कोई फल फूल से पूजन करता है तो कोई मिठाई का भोग लगता है, लेकिन मथुरा में एक जगह ऐसी है जहाँ देवी का पूजन लाठियों से किया जाता है। मथुरा के नरी सेंमरी गाँव में नवरात्र मेले के आखिरी दिन देवी की यह विशेष लाठी पूजा होती है और इस विशेष पूजा को देखने के लिए दूर दूर से भक्तगण यहाँ पहुंचाते है। घोडे पर सवार होकर हाथ में लाठी डंडे लेकर दौड़ते ये लोग किसी से लड़ने नहीं जाते बल्कि ये देवी माँ का पूजन करने जाते है।  दरअसल मथुरा के नरी सेंमरी गाँव में केला देवी का बेहद प्राचीन मंदिर है, इस मंदिर की विशेष धार्मिक मान्यता है। इसीलिए हर साल यहाँ नवरात्र के मौके पर बहुत बड़े मेले का आयोजन होता है। इस मेले के आखिरी दिन यानि नवमी को यहाँ देवी माँ की लाठियों से पूजा की जाती है। सैकडो साल से मंदिर में यही परंपरा चली आ रही है। लाठियों से ये पूजन भक्तो की देवी माँ से लडाई नहीं है बल्कि देवी माँ के पूजन के लिए भक्तो की आपसी लडाई है। आज से लगभग साढे सात सौ साल पहले जब यहाँ रहने वाले ठाकुर समुदाय के दो पक्ष सूर्यवंशी और चंद्रवंशी देवी माँ के पूजन को लेकर बहस करने लगे तो देवी माँ ने दोनों पक्षों से कहा था कि जो पक्ष लाठियों से जीत जायेगा, वही मेरी पहले पूजा करेगा। लेकिन जब लड़ते लड़ते पूजन का वक्त निकल गया तब देवी माँ ने दोनों पक्षों से हर साल इसी तरह अपना पूजन करने की बात कही और तब से लेकर आज तक यही परंपरा चली आ रही है। आज भी ठाकुर समुदाय के दोनों पक्ष घोडे पर सवार होकर हाथ में लाठियाँ लिए मंदिर जाते है और देवी माँ की चैखट पर लाठियाँ मरते है। इस विशेष पूजा को देखने के लिए दूर दूर से भक्तगण यहाँ आते है। इस मंदिर की परंपरा के अनुसार नवरात्र मेले के समापन के मौके पर आखिरी दिन होने वाली नवमी की इस लट्ठ पूजा का विशेष महत्त्व होता है, और इसीलिए इस विशेष पूजा में शामिल होने के लिये ठाकुर समुदाय के दोनों पक्षों को साल भर इस दिन का बड़ी बेसब्र से इंतजार रहता है।

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गिरिराज परिक्रमा मार्ग में हुआ मानवाधिकार जगरूकता सेमीनार का आयोजन उद्धव कुण्ड पर आयोजित मानवाधिकार सेमीनार में जिला जज डीके सिंह को स्मृति चिन्ह भेंट करते करते नन्द किशोर शर्मा गोवर्धन। गिरिराज परिक्रमा मार्ग स्थित उद्धवकुण्ड पर डीएसएच आरडी मानवाधिकार के तत्वाधान में मानवाधिकार जागरूकता सेमीनार का आयोजन किया गया। श्ाििवर में बतौर मुख्यातिथि उच्च न्यायालय इलाहाबाद के जज न्यायमूर्ति रविन्द्र सिंह यादव एवं विशिष्ट अतिथि जिला जज डी0के0 सिंह ने शिरकत कर मानवाधिकारों की रक्षा हेतु लोगों को जागरूक किया।  मुख्यातिथि न्यायमूर्ति रविन्द्र सिंह यादव इस मौके पर कहा कि मानवाधिकार जन्म के आरम्भ से अंत तक होते है। व्यक्ति को रोटी, कपड़ा व मकान मिल जाये तो करीब 70 प्रतिशत उसके मानवाधिकार स्वतः ही पूरे हो जाएगे। हमारे संविधान में मानवाधिकार को दृष्टिगत रखते हुए कानून बनाये गये हैं। सभी कानूनों में मानवाधिकार उल्लंघन पर उसी अनुरूप सजा तय की गई है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीने के लिए शुद्ध हवा आॅक्सीजन और खाने पीने की व्यवस्था में भी अवरोध हो रहा है। तो कानून को मदद अवश्य लें। हमारी व्यवस्था में सरकारी फाॅर्म बने हुए है। मानवाधिकार से जुड़े संगठनों को तत्काल प्रभाव से गम्भीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। लोगों को तुरंत अस्पताल पहुॅचाना चाहिए। यहाॅ उनका इलाज निःशुल्क हो सके। सम्मान जनक जीवन में रह कर जी सकते हंै। उनका भी मानवाधिकार है। मानवाधिकार संगठनों को निःशुल्क शिक्षा व निःशुल्क इलाज पर काम करना चाहिए। व्यवस्था के लिए सामाजिक मुद्दो पर जमीनी स्थर पर कार्य करना चाहिए यहाॅ भी मानवाधिकार के हवन पर अन्याय के प्रति अवाज उठाऐंगे। तो जनमत भी मिलेगा और व्यवस्था भी सुधर जायेगी। मथुरा जनपद के न्यायधीश डी0के0 सिंह ने कहा कि न्याय सस्ता होना चाहिए। इस मौके पर विशिष्ट अतिथि इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज रविन्द्र सिंह यादव एवं जिला जज डी0के0 सिंह का आयोजकों ने जोरदार स्वागत सत्कार किया। आयोजन समिति के युवा समाज सेवी केशव देव सैंनी शीतल प्रसाद सैंनी भोला दुवे आदि ने सभी आगन्तुकों का जोरदार स्वागत सत्कार किया। डा0 विष्णु रावत, रमेश झालानी, दिनेश शंकर मिठाई वाला, अनिल सेठ, जीएस शर्मा आदि मौके पर मौजूद थे। वहीं श्री बाबू लाल महाविद्यालय के निदेशक नन्द किशोर शर्मा ने भी न्यायमूर्ति को स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। 

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