22 मार्च का दिन ब्रज के इतिहास में एक ऐतिहासिक दिन था जो समस्त ब्रजवासियों और यमुना भक्तों के लिये अपार खुशियाँ लेकर आया। अविरल यमुना निर्मल यमुना का संकल्प लेकर ब्रज के परम श्रद्धेय विरक्त संत श्री रमेश बाबा जी महाराज की प्रेरणा से एवं सत् संकल्प से दिनांक 15 मार्च को कोसीकलाँ से प्रारम्भ हुये यमुना मुक्तिकरण अभियान के अन्तर्गत जन्तर मन्तर पर बैठे हुये पदयात्री उस समय खुशी से झूम उठे जब माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी एवं केन्द्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी के निर्देश अनुसार केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री एवं ब्रज के परमभक्त माननीय श्री रविशंकर प्रसाद जी ने यमुना भक्तों की समस्त मांगो को बिना किसी शर्त के मानने की घोषणा की। माननीय श्री रविशंकर प्रसाद जी ने कहा कि गंगा एवं यमुना भारतीय अस्मिता का प्रतीक है और बिना यमुना के ब्रज की कल्पना ही नहीं की जा सकती। जिस प्रकार ब्रजमण्डल में श्री राधाकृष्ण की लीलास्थलियों की महत्वता है, श्री गिर्राज जी की महत्वता है उसी प्रकार श्री यमुना जी ंभी वैष्णवों के लिये अन्यय श्रद्धा का प्रतीक है। जैसा कि ब्रज में नियम रहा है कि बिना यमुना स्नान के ठाकुर का दर्शन नहीं किया जाता पर आज स्नान करना तो दूर यमुना का जल आचमन योग्य भी नहीं रह गया है और इससे भी बडी बात कि मन्दिरों में ठाकुर को स्नान कराने के लिये शुद्ध यमुना जल उपलब्ध नहीं है। साथ ही सम्मूर्ण यमुना तट के निकटवर्ती गांव और शहरों में कैंसर जैसी घातक बिमारिया महामारी का रूप ले रही है। इस कारण प्रधानमंत्री जी को बहुत चिन्ता हुयी साथ ही सरकार को अपार कष्ट हुआ कि यमुना को शुद्ध करने के लिये यमुना मुक्तिकरण अभियान के अन्तर्गत श्री राधाकान्त शास्त्री जी के संयोजकत्व में हजारों हजार साधु सन्त, ब्रजवासी, छोटे छोटे बालक, महिलायें एवं भागवताचार्य गण सड़कों पर उतर पड़े है। इस कारण गहन मंथन के बाद सरकार ने निर्णय लिया कि यमुना भक्तों की मांगो को अविलम्ब रूप से मान लिया जाये। केन्द्रीय मंत्री जी ने घोषणा कि अविरल यमुना के संकल्प के अन्तर्गत पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के अनुसार यमुना में पर्याप्त पर्यावरणीय प्राकृतिक शुद्ध यमुना जल प्रवाह निरन्तर रूप से बनाये रखने हेतु सरकार अतिशीघ्र एक अध्यादेश जारी करेगी। जिसके सन्दर्भ में एन जी टी में भी निर्देशित किया है। माननीय मंत्री जी ने कानूनी प्रक्रिया दृष्टिगत रखते हुये इस हेतु दो माह का समय मांगा जिसके लिये पूज्य श्री रमेश बाबा जी महाराज के निर्देश पर 1 जून से पहले लागू करने का समय दिया गया। इसके साथ ही निर्मल यमुना के संकल्प को देखते हुये दिल्ली में यमुना किनारे 22 किमी लम्बे नाले का निर्माण किया जायेगा। जिसमें मलमूत्र गन्दगी यमुना जी में न जा पाये। इससे पूर्व आज प्रातः काल तेजी से बदले घटनाक्रम में सन्तों के दबाब को और यमुना भक्तों अनशन को देखते हुये केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने चार सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल को वार्ता के लिये बुलाया। केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावेडकर जी से विचार विमर्श किया। और प्रतिनिधि मंडल को मांगो को मानने की हरी झण्डी दे दी। उन्होने प्रतिनिधि मंडल के चारों सदस्यो गोस्वामी पंकज बाबा जी, आचार्य मृदुलकान्त शास्त्री, आचार्य बद्रीश जी और रवि मोंगा का मुूह मीठा कराया। उसके बाद राजनाथ सिंह जी ने तुरन्त प्रधानमंत्री के मुख्य सचिव माननीय श्री नृपेन्द्र मिश्र एवं श्री रविशंकर प्रसाद जी से विचार विमर्श कर के माननीय श्री रविशंकर प्रसाद जी को यमुना भक्तों को सूचना देने और अनशन तुडवाने के लिये जन्तर मन्तर पर भेजा। श्री रविशंकर प्रसाद जी द्वारा घोषणा की जाते ही । सारा माहौल और जन्तर मन्तर यमुना मैया की जय नारे से गूँज उठा। इसके पश्चात श्री रविशंकर प्रसाद जी ने नारियल पानी पिलाकर अनशन पर बैठे हुये समस्त अनशन कारियों का अनशन तुडवाया। यमुना मुक्तिकरण अभियान के राष्ट्रीय संयोजक श्री राधाकान्त शास्त्री ने सन्तों, भागतवाताचार्यो, ब्र्रजवासियों, चतुर्वेदी समाज, वैष्णवों एवं किसानों का अपार सहयोंग के लिये धन्यवाद दिया एवं उनका अभार व्यक्त किया है। इस अवसर पर संजीवकृष्ण ठाकुर जी, पूज्य देवकी नन्दर ठाकुर जी, अभियान के युवा शाखा के राष्ट्रीय संयोजक अनुभव तैलंग, राष्ट्रीय महासचिव हरेश ठेनुआ, प्रदेश संयोजक श्याम चतुर्वेदी, गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
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