वस्तुओं एवं सेवाओं के लिए उपभोक्ता बाजारों में हाल के वर्षों में काफी बदलाव आया है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बढ़ोतरी और ई-कॉमर्स के तीव्र विकास ने उपभोक्ताओं के लिए नए अवसर खोल दिए हैं। इसके साथ-साथ, इसने अनुचित व्यापार एवं अनुचित व्यवसाय प्रचलनों के नए रूपों का जोखिम भी उपभोक्ताओं के लिए पैदा कर दिया है।
नीतिगत सामंजस्य; समन्वित कार्यक्रम क्रियान्वयन; नियामकीय कदमों के समन्वय एवं एक संस्थागत तंत्र के द्वारा आम नागरिकों को सुशासन का लाभ दिलाते हुए अधिकतम परिणाम प्राप्त करना ही उपभोक्ता मामले विभाग (डीसीए) का लक्ष्य है।
नई सरकार के सत्ता में आने के तुरंत बाद मूल्य वृद्धि, जो कि अनिवार्य वस्तुओं के लिए बाजार का द्योतक है, को नरम बनाने के लिए त्वरित कदम उठाए गए थे। 4 जुलाई 2014 को सभी राज्य एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के खाद्य मंत्रियों का एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में विशेष रूप से खाद्य कीमतों पर मुद्रास्फीति के दबाव को कम करने के लिए एक कार्ययोजना अपनाई गई। जुलाई और दिसंबर के बीच नष्ट होने वाली वस्तुओं की कीमतें अनिवार्य रूप से बढ़ती हैं। राज्यों को तहबाजारी तथा कालाबाजारी रोकने एवं इस अवधि के दौरान अनिवार्य वस्तुओं की आपूर्ति एवं वितरण को मजबूत बनाने के लिए कदम उठाने को कहा गया है। केन्द्र सरकार एवं राज्यों द्वारा इस समन्वित कार्रवाई ने 2013 की इस अवधि की तुलना में नष्ट होने वाली अनिवार्य वस्तुओं की कीमतों को कम करने में मदद की।
डीसीए ने यह सुनिश्चित करने के लिए कि उपभोक्ता विवाद निवारण तंत्र उपभोक्ताओं की शिकायतों को त्वरित, किफायती एवं सरल तरीके से निपटाए, अनुचित व्यापार प्रचलनों को रोकने के लिए एक संस्थागत व्यवस्था स्थापित करे, उपभोक्ता सुरक्षा में उत्पाद जवाबदेही की धारणा शामिल करे और मध्यस्थता को एक वैकल्पिक विवाद निपटान (एडीआर) व्यवस्था के रूप में सक्षम बनाए, उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम तथा भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम में व्यापक संशोधनों को अंतिम रूप दिया है।
डीसीए पूरी तरह संचालनगत ई- ऑफिस कार्यक्रम से जुड़ा एक विभाग है। ज्यादातर काम ऑनलाइन किया जाता है और फाइलों की एक बड़ी संख्या इलेक्ट्रॉनिक फाइलों की है।
डीसीए का उद्देश्य जागरूकता एवं शिक्षा के जरिये उपभोक्ताओं को अधिकारसंपन्न बनाना; अनुचित व्यापार प्रचलनों को रोकने के द्वारा उपभोक्ता सुरक्षा को बढ़ावा देना; मानको एवं उनके अनुपालन के जरिये गुणवत्ता भरोसे एवं सुरक्षा में सक्षम बनाना; और एक किफायती और कारगर शिकायत निवारण तंत्र की सुविधा सुनिश्चित करना है।
उपभोक्ता मामले विभाग का कानूनी माप-पद्धति प्रभाग कानूनी माप पद्धति अधिनियम 2009 के क्रियान्वयन के जरिये सटीक वजनों एवं मापों का इस्तेमाल सुनिश्चित करने के द्वारा वस्तुओं के लिए ली जा रही कीमत की सही गुणवत्ता दिलाकर उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा करता है।
उपभोक्ता उन सभी उत्पादों, जिनकी वे खरीद करते हैं और सेवाएं जिनका इस्तेमाल करते हैं, उनकी गुणवत्ता का भरोसा और सुरक्षा पाने के हकदार हैं। गुणवत्ता भरोसा और सुरक्षाएं भारत के राष्ट्रीय मानदंड निकाय, भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा वर्णित सख्त मानकों द्वारा अनुशंसित होती हैं।
डीसीए ने बीआईएस अधिनियम में बड़े संशोधनों को अंतिम रूप दिया है। जागो ग्राहक जागो मल्टीमीडिया अभियान उपभोक्ताओं की शिक्षा और जागरूकता को बढ़ाने की दिशा में उपभोक्ता मामले विभाग की एक पहल है। डीसीए के प्रयासों का जोर उन मुख्य क्षेत्रों पर है, जो सभी उपभोक्ताओं को प्रभावित करते है जैसे कृषि, खाद्य, आवास, स्वास्थ्य, परिवहन, वित्तीय सेवाएं, शिक्षा आदि।
उपभोक्ता पक्षसमर्थन पर एक अंतःस्तरीय समूह का गठन किया गया है, जिसके अध्यक्ष डीसीए के सचिव हैं। डीसीए उपभोक्ता शिकायतों के त्वरित और कारगर निपटान को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।
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