मथुरा

मथुरा। अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान विद्या भारती के मार्गदर्शक भाईजी को  स्वतन्त्रता दिवस पर पद्मश्री पुरस्कार मिलने पर समस्त शिक्षा जगत में में हर्ष व्यक्त किया गया। ब्रम्ह्देव शर्मा विद्या भारती में भाई जी के नाम से प्रख्यात हैं। समाज सेवी और प्रकाण्ड विद्वान भाई जी ने समाज सेवा के काम करते हुए, अनेक पुस्तकों का लेखन भी किया है। संघ के प्रचारक के रूप में कार्य करते हुए, उन्होंने समाज सेवा में भी उल्लेखनीय और अभूतपूर्व योगदान दिया है। भाई जी मूलतः उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के रहने वाले हैं। अपनी शिक्षा पूर्ण करने के बाद उन्होंने सम्पूर्ण भारत में विद्याभारती के विद्यालयों में अभूतपूर्व योगदान दिया है। वे काफी समय तक विद्या भारती के राष्ट्रीय सगंठन मंत्री रहे हैं। उनका सम्मान सभी समर्पित शिक्षाविद् का सम्मान है। भाई जी को पदम्श्री पुरस्कार से सम्मानित करने पर श्रीजी बाबा सरस्वती विद्या मन्दिर के प्रधानाचार्य डा0 अजय शर्मा, प्रबन्धक जगदीश प्रसाद अग्रवाल, आचार्य डा0 राकेश चतुर्वेदी, विजय यादव, डा0 धर्मेन्द्र अग्र्रवाल व समस्त विद्यालय परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई।

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यमुना मुक्तिकरण अभियान के संयोजक राधाकान्त शास्त्री जी द्वारा अन्य पदाधिकारियों के साथ ब्रज के प्रसिद्ध सन्त काष्र्णि गुरू शरणानन्द जी महाराज से भेंट कर अभियान की सफलता हेतु आर्शीवाद लिया गया । यमुना की अविरल और निर्मल धारा को ब्रज में लाने के सन्दर्भ में सन्तों की सहभागिता व अभियान में उनके आशीर्वाद को लेकर गहन चर्चा हुयी । संयोजक राधाकान्त शास्त्री ने कहा कि सन्त शक्ति और उनके आशीर्वाद से ही अभियान को बल मिलेगा जो अभियान को सफल बनायेगा। इस अभियान में आपके और और सभी सन्तो के आशीर्वाद से हमारा मनोबल बढेगा।  रमणरेती के काष्र्णि गुरू श्रद्धेय श्री शरणानन्द जी महाराज ने यमुना को निर्मल बनाने के लिये जो मुहिम को सराहनीय बताते हुये कहा कि हमें विश्वास है कि आपके अभियान द्वारा किये जा रहे प्रयासों से यमुना जी अवश्य ब्रज में अपनी अविरलता के साथ आयेगीं । जो व्यक्ति श्री यमुना महारानी की रक्षा के लिये निस्वार्थ भाव से कार्य कर रहे है वे सभी प्रशंसा के पात्र है। श्री रमेश बाबा जी हमारे गुरू भाई है और वह ब्रज संस्कृति के रक्षार्थ बहुत बड़ा कार्य कर रहे है क्योकि श्री यमुना महारानी ब्रज संस्कृति की प्राण है। इस कार्य में हमारा पूर्ण समर्थन है  एवं इस अभियान में सभी सन्त उनके साथ है। हम स्वयं भी यमुना की निर्मल धार ब्रज के घाटों पर पुनः हिलोरे मारते देखना चाहते है। इसी सन्दर्भ में उन्होने बताया कि रमणरेती आश्रम पर 19 से 21 फरवरी तक होने वाले वार्षिकोत्सव में यमुना मुक्तिकरण पर विशेष चर्चा की जायेगी। उक्त वार्षिकोत्सव में मलूकपीठाधिश्वर जगद्गुरू द्वाराचार्य श्री राजेन्द्रदास जी महाराज द्वारा उपस्थित सभी साधु -सन्तों व वैष्णवों के समक्ष यमुना जी को लेकर व इस अभियान के सन्दर्भ में गहन चर्चा की जायेगी। यमुना मुक्तिकरण अभियान ने तेज किया पहले चरण का प्रचार-प्रसार श्री मान मन्दिर, श्रीपुष्टि मार्ग एवं भारतीय किसान यूनियन ( भानू ) के संयुक्त नेतृत्व में यमुना की अविरलता को ब्रज में पुनः स्थापित करने हेतु प्रयास किये जा रहे है। जैसे जैसे अभियान की आगामी 15 मार्च पदयात्रा की तिथि नजदीक आती जा रही है वैसे वैसे यमुना मुक्तिकरण अभियान द्वारा प्रचार – प्रसार को चरण बद्ध कर प्रचार तेज कर दिया गया। अभियान द्वारा प्रथम चरण के प्रचार क्रम में अभियान के पदाधिकारियों द्वारा ब्रज के गांव – गांव जा सघन जन संपर्क किया जा रहा है। इसी क्रम में दिनांक 30 जनवरी शुक्रवार को अभियान के सहसंयोजक सुनील सिंह के नेतृत्व में नंदगांव ब्लाक में डेडावल, ब्रजवारी, नंदगांव, मुखराई, भदावल, कामारोड, संकेत, गाजीपुर आदि गांवों में घर-घर जा संपर्क किया गया। उन्होने सभी ग्राम वासियों से 15 मार्च को पदयात्रा में चलने का आवह्न किया और कहा कि यमुना मैया की रक्षा के लिये ब्रज के घर की यमुना आन्दोलन में सहभागिता की आवश्यकता है। इस बार के निर्णायक आन्दोलन में ब्रजवासियों को अपनी सम्पूर्ण शक्ति आन्दोलन में झोंकनी पड़ेगी। इस पर सभी ग्रामवासियों ने हाथ उठाकर आश्वासन दिया कि हम श्री रमेश बाबा महाराज के हर आदेश का पालन करेगें यमुना मैया हमारी है और उसकी रक्षा के लिये हर ब्रजवासी जी जान लगा देगा। इस अवसर पर संयोजक सुनील सिंह के साथ प्रेमसिंह, चै. भरत, चै. हंसराज, कृष्णकुमार आदि प्रचार में मौजूद रहे। दूसरी तरफ  अभियान के संयोजक राधाकान्त शास्त्री, राष्ट्रीय महासचिव हरेश ठेनुआ, प्रदेश संयोजक श्याम चतुर्वेदी आदि अभियान के पदाधिकारी द्वारा भी मथुरा जिले के कई गांवो में जा लोगो से 15 मार्च की पदयात्रा में सहभागिता का आवह्न किया गया। यमुना मुक्तिकरण अभियान की मथुरा नगर ईकाई के विरोध प्रदर्शन के दबाब में मसानी नाले पर शुरू हुआ सफाई कार्य दिये गये समय में गन्दगी नहीं रोकी गई तो शुरू होगी भूख हड़ताल जहाॅ यमुना को पतित पावनी कह पूजा जाता है उसी मथुरा में गन्दगी का अम्बार लिये मसानी नाला यमुना में गिर रहा है। विगत कई महीनों से यमुना मुक्तिकरण अभियान की मथुरा नगर ईकाई द्वारा मसानी नाले की सफाई को लेकर कई विरोध प्रदर्शन किया गया। नगरपालिका और प्रशासन द्वारा केवल आश्वासन पर आश्वासन दिये गये। इसी के चलते दिनांक 30 जनवरी 2015 को यमुना मुक्तिकरण अभियान की मथुरा नगर ईकाई के अध्यक्ष पंकज चतुर्वेदी, भाकियू नगर अध्यक्ष महेन्द्र राजपूत, राजेन्द्र सक्सैना, कुलदीप, शैलू पंडित द्वारा मसानी नाले से यमुना में जा रही गन्दगी को रोकने व नाले की सफाई को लेकर मथुरा सीटी मजिस्ट्रेट से मिला गया। उन्होने मसानी नाले से लगातार यमुना में जा रही गन्दगी को रोकने व उसकी तलीझाड सफाई करने के साथ साथ मसानी टीटमेन्ट प्लान्ट को सुचारू रूप से चलाये जाना आदि मांगो को प्रमुख रूप से रखा। इसके पश्चात् नगरपालिका मसानी नाले से गन्दगी को हटाने के लिये जेसीबी लगाई गयी। पालिका द्वारा 4 दिन के अन्दर यमुना में जा रही गन्दगी को रोकने का आश्वासन दिया गया। इसके साथ ही नगरपालिका द्वारा पोपलेन मशीन नाले में उतार उसकी सफाई करने की भी बात कहीं। इस अवसर पर पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि यदि चार दिन के अन्दर गन्दगी जाने ने से नहीं रोकी गई तो मथुरा नगर ईकाई द्वारा भूख हड़ताल की जायेगी।

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देश में पहला समाचार पत्र 1780 मेें निकला था हिक्की दिवस के रूप में मनाया पत्रकार दिवस मथुरा। पत्रकारिता की शुरूआत के विषय में आम धारणा है कि 30 मई को भारत में पत्रकारिता का जन्म हुआ लेकिन शायद कम ही लोगों को मालुम होगा कि हमारे देश में पत्रकारिता की बास्तविक शुरूआत 29 जनवरी 1780 में एक अंग्रेज ने की थी जो व्रिटिश सामराज्य के खिलाफ ही पत्र निकाल कर उनकी गलत नीतियों का विरोध करता था साल 1780 में 29 जनवरी के दिन भारत में पहली बार ईस्ट इण्डिया कम्पनी के कर्मचारी जेम्स अगस्टस हिक्की ने ‘‘बंगाल गजट’’ या ‘‘दी कलकत्ता जनरल एडवर्टाइजर’’ नाम से अखबार कलकत्ता से प्रकाशित किया था। इस समाचार पत्र को ‘‘हिक्की गजट’’ के भी नाम से भी जाना जाता था। यह अंग्रेजी भाषा में साप्ताहिक पत्र के रूप में प्रकाशित हुआ था। इस पत्र के प्रकाशन के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए हिक्की ने लिखा था कि ‘‘इसके प्रकाशन का उद्देश्य’’ न मात्र मेरी समाचार पत्र प्रकाशन की इच्छा अथवा रुझान है वरन् इसका उद्देश्य शारीरिक दासता के बदले मन और आत्मा की स्वतंत्रा को प्राप्त करना है। इससे पहले समाचार पत्र ब्रिटेन से आते थे जो कि कई सप्ताह विलम्ब से भारत पहुंचते थे। हिक्की के इस पत्र की लोकप्रियता और उस समय के पाठक वर्ग ने सराहा और लोग इसको पढ़ने के लिये एक स्थान पर एकत्र होते थे। उस वक्त अंगे्रज सरकार के लिये हिक्की का यह समाचार पत्र सिर दर्द बन गया था। और इसकी दिनों दिन मांग बढती गई और पाठक भी अधिक मात्रा में मिलते गये। उसने इस समाचार पत्र की नीति को ‘साप्ताहिक राजनीतिक एवं व्यवसायिक समाचार पत्र’ के रूप में घोषित की। यह पत्र बिना दबाव के सबके लिए ‘खुला’ भी घोषित किया। यह भारत का प्रथम आधुनिक ‘‘साप्ताहिक’’ समाचार पत्र था। यह समाचार पत्र दो पृष्ठों का 12 गुणा 8 इंच के आकार में प्रकाशित होता था। हिक्की ने अपने इस समाचार पत्र में ईस्ट इंडिया कम्पनी के गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स एवं उस समय के भारतीय सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति इलीजा इम्पे तथा अन्य कम्पनी के कर्मचारियों के ऊपर विशेष रूप से प्रहार करना प्रारम्भ किया। इस प्रकार हिक्की गजट मुख्य रूप से ईस्ट इंडिया कम्पनी प्रशासन के खिलाफ था। अतः वारेन हेस्टिग्स ने हिक्की को चेतावनी भी दी परन्तु हिक्की प्रेस एवं अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के लिए निरन्तर आगे बढ़ते रहे। 14 नवम्बर, 1780 के एक आदेश के द्वारा हिक्की के समाचार पत्र को प्रदान की गयी डाक सुविधा भी समाप्त करने का आदेश वारेन हेस्टिंग्स ने दिया। हिक्की को एक समाचार प्रकाशित करने के मामले में न्यायालय ने उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश भी दिया परन्तु हिक्की निजी मुचलके पर रिहा हो गए। न्यायालय के नियमों के तहत हिक्की को दोषी पाया गया और उन पर चार माह की सजा तथा 500 रुपये का जुर्माना किया गया। हिक्की समाचार पत्र को जेल से भी लिखते रहे। ईस्ट इण्डिया कम्पनी के संचालकों की धारणा थी कि हिक्की के जेल में जाने के बाद समाचार पत्र का प्रकाशन बन्द हो जाएगा। परन्तु, उनकी यह धारणा निराधार निकली और समाचार पत्र नियमित प्रकाशित होता रहा। हिक्की के समाचार पत्र से परेशान होकर वारेन हेस्टिंग्स और इम्पे ने इसे बन्द कराने की ठान ली। हिक्की पर जुर्मानों और जेल की सजा का दौर चला। हिक्की की आर्थिक दशा इस प्रकार की नहीं थी कि वह अधिक दिनों तक शासन से लड़ सकें। परिणाम स्वरूप मार्च 1782 को ‘‘बंगाल गजेट’’ प्रेस को प्रतिबंधित कर दिया गया। इस प्रकार भारत का प्रथम नियमित समाचार पत्र समाप्त हो गया। ईस्ट इंडिया कम्पनी के गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स एवं सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति इलीजा इम्पे ने हिक्की को देश निकाला करते हुए उसका वोरिया बिस्तर बांध कर पानी के जहाज से लन्दन के लिये रवाना कर दिया था रास्ते में ही हिक्की की मौत हो गयी थी और वह हमेशा हमेशा के लिये गुमनामी में चला गया। लेकिन आज भी इतिहास में हिक्की का नाम जिन्दा है। भारत के प्रथम समाचार पत्र के संस्थापक जेम्स अगस्टस हिक्की को स्मरण करते हुए 29 जनवरी को कुछ पत्रकारों ने एक गोष्ठी का आयोजन किया जिसमें आगरा से टाइम्स आॅफ इन्डिया के ब्रज खन्डेलवाल जी ने काॅन्फरेंस के जरिये उपस्थित पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए अपने विचार रखे उन्होंने कहा कि पत्रकारिता दिवस कौन सा है हम हमेशा से 30 मई को ‘‘उतन्ड मातण्ड’’ की शुरूआत को ही पत्रकारिता दिवस के रूप में मनाते चले आ रहे है जबकि वास्तविकता में इस दिन हिन्दी पत्रकारिता की शुरूआत हुई थी जबकि भारत में पहला समाचार पत्र 29 जनवरी 1780 में शुरू हुआ था अगर भाषा की वात न की जाय तो शुद्ध पत्रकारिता के विषय में यदि वात करें तो इसकी शुरूआत एक अंगेज ने अंग्रेज हकूमत के खिलाफ समाचार पत्र निकाल कर लडता रहा। उसकी पिटाई भी हुई मारा गया पीटा गया फिर भी वह सत्ता के खिलाफ लडता रहा विना किसी भेदभाव के गरीबों और मजबूरों के लिये लडता रहा सेवा भावना से सामाजिक सरोकार के लिये उंच नीच गरीब अमीर की परवाह किये विना ही उसने इनके हितों को ध्यान में रखकर कार्य किया। यहां तक कि हिक्की ने वारेन होस्टिंग की पत्नी के विषय में भी लिखा था कि उसको कपडे़ पहनने का सलीका नही आता है। श्री खन्डेलवाल ने कहा कि हमें सेवा भावना से समाजिक सरोकारो से विमुख नही होना चाहिए स्टेबलिस्टसमेन्ट से लडते रहो। यहां भाषा का कोई मतलब नही है पत्रकारिता कब शुरू हुई है। उन्होंने कहा कि आज की चाटुकारिता की पत्रकारिता नही करनी चाहिए जझारू पत्रकारिता को आगे बढाना चाहिये। हिक्की एक लडाकू व जुझारू पत्रकार था उसने हमें सिखाया कि हम लोगों की आवाज बनें। इस अबसर पर सुनील शर्मा, पवन गोतम, रहीश कुरेशी, सत्यपाल सिंह आदि उपस्थित थे।

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साल 1780 में 29 जनवरी के दिन भारत में पहली बार ईस्ट इण्डिया कम्पनी के कर्मचारी जेम्स अगस्टस हिक्की ने ‘‘बंगाल गजट’’ या ‘‘दी कलकत्ता जनरल एडवर्टाइजर’’ नाम से अखबार कलकत्ता से प्रकाशित किया। इस समाचार पत्र को ‘‘हिक्की गजट’’ के भी नाम से जाना जाता है। यह अंग्रेजी भाषा में साप्ताहिक पत्र के रूप में प्रकाशित होता था। इस पत्र के प्रकाशन के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए हिक्की ने लिखा था कि ‘‘इसके प्रकाशन का उद्देश्य’’ न मात्र मेरी समाचार पत्र प्रकाशन की इच्छा अथवा रुझान है वरन् इसका उद्देश्य शारीरिक दासता के बदले मन और आत्मा की स्वतंत्रा को प्राप्त करना है। इससे पहले समाचार पत्र ब्रिटेन से आते थे जो कि कई सप्ताह विलम्ब से भारत पहुंचते थे। हिक्की के इस पत्र को लोकप्रियता और पाठक वर्ग भी अधिक मात्रा में मिले। उसने इस समाचार पत्र की नीति ‘साप्ताहिक राजनीतिक एवं व्यवसायिक समाचार पत्र’ के रूप में घोषित की। यह पत्र बिना दबाव के सबके लिए ‘खुला’ भी घोषित किया। यह भारत का प्रथम आधुनिक ‘‘साप्ताहिक’’ समाचार पत्र था। यह समाचार पत्र दो पृष्ठों का 12 x 8 इंच के आकार में प्रकाशित होता था। हिक्की ने अपने इस समाचार पत्र में ईस्ट इंडिया कम्पनी के गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स एवं उस समय के भारतीय सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति इलीजा इम्पे तथा अन्य कम्पनी के कर्मचारियों के ऊपर विशेष रूप से प्रहार करना प्रारम्भ किया। इस प्रकार हिक्की गजट मुख्य रूप से ईस्ट इंडिया कम्पनी प्रशासन के खिलाफ था। अतः वारेन हेस्टिग्स ने हिक्की को चेतावनी भी दी परन्तु हिक्की प्रेस एवं अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के लिए निरन्तर आगे बढ़ते रहे। 14 नवम्बर, 1780 के एक आदेश के द्वारा हिक्की के समाचार पत्र को प्रदान की गयी डाक सुविधा भी समाप्त करने का आदेश वारेन हेस्टिंग्स ने दिया। हिक्की को एक समाचार प्रकाशित करने के मामले में न्यायालय ने उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश दिया परन्तु हिक्की निजी मुचलके पर रिहा हो गए। न्यायालय के नियमों के तहत हिक्की को दोषी पाया गया। उन्हें चार माह की सजा तथा 500 रुपये का जुर्माना किया गया। हिक्की समाचार पत्र को जेल से भी लिखते रहे। ईस्ट इण्डिया कम्पनी के संचालकों की धारणा थी कि हिक्की के जेल में जाने के बाद समाचार पत्र का प्रकाशन बन्द हो जाएगा। परन्तु, उनकी यह धारणा निराधार निकली और समाचार पत्र नियमित प्रकाशित होता रहा। हिक्की के समाचार पत्र से परेशान होकर वारेन हेस्टिंग्स और इम्पे ने इसे बन्द कराने की ठान ली। हिक्की पर जुर्मानों और जेल की सजा का दौर चला। हिक्की की आर्थिक दशा इस प्रकार की नहीं थी कि वह अधिक दिनों तक शासन से लड़ सकें। परिणामत: मार्च 1782 को बंगाल गजेट प्रेस को प्रतिबंधित कर दिया गया। इस प्रकार भारत का प्रथम नियमित समाचार पत्र समाप्त हो गया।

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नंदू और मेघना की सगाई के लिये खास डांस सीक्वेंस कोरियोग्राफ किया गया ् बिग मैजिक के काॅमेडी शो उफ! ये नादानियां द्वारा इस सप्ताह दर्षकों के लिये एक अन्य चटपटा एपिसोड की पेषकष की जा रही है। तनाव और शोरगुल के बीच नंदू और मेघना की सगाई पर टेलीविजन की पसंदीदा अभिनेत्री अंकिता शर्मा का डांस परफाॅर्मेंस दर्षकों के लिये एक खुषनुमा सरप्राइज होगा। अंकिता सगाई के इस एपिसोड में खास तौर से नजर आयेंगी। खूबसूरत अभिनेत्री डांस के मंच पर अपनी डांसिंग से धमाल मचायेंगी। क्हानी के अनुसार, वर्मा परिवार नंदू और मेघना की सगाई की तैयारियों में व्यस्त है। इस खास अवसर को और अधिक यादगार बनाने के लिये मेघना टेलीविजन की प्रसिद्ध अभिनेत्री अंकिता शर्मा को आमंत्रित करती है, जो अपने डांस से मनोरंजन और मस्ती का तड़का लगायेगी। लेकिन अब मेघना के लिये एक दूसरी मुसीबत खड़ी हो गई है, जिससे बचने का कोई उपाय नजर नहीं आ रहा है? आखिर उसके साथ हुआ क्या है? क्या उसने किसी शख्स को आमंत्रित किया या अपनी ही सगाई की पार्टी में शामिल नहीं हो पाई? यह हास्यप्रद मनोरंजक एपिसोड देखें, शुक्रवार 30 जनवरी को रात 8ः00 बजे सिर्फ बिग मैजिक पर

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छाता में आयोजित यमुना भक्तों की सभा मथुरा। यमुना मुक्ति व शुद्धिकरण की पदयात्रा को सफल बनाने हेतु आगामी एक फरवरी को दिल्ली जंतर मंतर पर होने वाले विशाल एक दिवसीय धरना एवं सत्याग्रह के लिये लिये नरी गाँव के आदर्श जूनियर हाईस्कूल में यमुना रक्षक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास के अध्यक्षता में दल द्वारा विशाल जनसभा की गई। जिसमें सैकड़ों यमुना भक्त एवं विधालय के छात्र छात्रायें शामिल थे। जनसभा में 11 मार्च की पदयात्रा का आह्वान करते हुये आगामी धरने में शामिल होने के लिये लोगों से अपील की गई। दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास ने कहा कि यमुना की अविरल धारा को लाने के लिये एवं हथिनी कुण्ड से माँ यमुना को मुक्त कराने के लिये सभी ब्रजवासियों को बड़ी संख्या में यमुना के इस आन्दोलन में भाग लेना होगा। उन्होने आगे कहा कि सभी को दिल्ली चलना है और यमुना को मुक्त कराना है। सभी ब्रजवासी एवं यमुना भक्तों ने यमुना मैया का नारा लगाते हुये अपना समर्थन दिया तथा सभी ने यमुना को मुक्त कराने हेतु संकल्प लिया। इसी कड़ी में छाता में यमुना शुद्धिकरण के लिये तथा पदयात्रा के लिये भागवत कथा का आयोजन चल रहा है। ब्रजवासियों एवं यमुना भक्तों में यमुना को निर्मल और अविरल रूप में देखने की चाह पूर्ण रूप से पकड़ ली है। इस अवसर पर राधा जीवन पोद्यार, निरंजन बाबू, दुर्गन सिंह, रामचन्द्र मास्टर, राधे श्याम सिंसोदिया, कुलदीप गुर्जर, बलवीर सिंह, रघुबर सिंह, मोहन मास्टर, मान सिंह, वीरपाल, शिवचरण, चन्द्रदेव आदि उपस्थित थे।  

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