मथुरा

गोवर्धन। मंगलवार 20 जनबरी को कस्वा के ब्लाॅक तिराहे के निकट घनश्याम आश्रम में सपा के जिला उपाध्यक्ष दौलतराम चतुर्बेदी तहसील की घोषणा होने के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को गोवर्धन क्षेत्र की जनता की सभा को संबोधित करेगें जिसमेें सभा में जिले कई बउे नेताओं की आने की संभावनाऐ जताई जारही है। इसकी जानकारी बरिष्ठ सपा नेता गोपाल शर्मा ने दी है।इस मौके पर डा0 दौलतराम चतुर्बेदी ब्यापार सभा के बिधान सभा अध्यक्ष धीरेन्द्र कौशिक राजकुमार मामा राजकुमार लबानियाॅ छेलों पण्डित आदि कार्यकर्ता मौजूद थे।

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पुलिस ने तीन चार पहिया की गाड़ी सहित दो अभियुक्त को पकड़ा दो तमंचा बरामद   गोवर्धन। पुलिस को जुआ खेलते असमाजिक तत्वों को टोकना महंगा पड़ गया। बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। पुलिस ने जबावी कार्यवाही की और करीब चार किमी. तक बदमाशों का पीछा किया। पुलिस पीछा करते हुए दो अभियुक्तों के साथ तीन चार पहिया की गाडिय़ों के साथ अवैध असलाह को बरामद किया है। पुलिस के अनुसार मुखबिर की सूचना मिली कि थाना क्षेत्र के दौसेरस में मस्जिद के समीप कुछ असमाजिक तत्व जुआ खेल रहे हैं। सूचना पर थाना प्रभारी निरीक्षक राजा सिंह, एसएसआई वीपी गिरि मय फोर्स दोसेरस पहुंचे। जैसे ही उन्होंने जुआरियों को टोका तो देखते ही देखते बदमाशों ने पुलिस पार्टी पर फायरिंग कर दी। पुलिस ने भी जबावी कार्यवाही करते हुए फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस को देख बदमाश गाडिय़ों से मुड़सेरस की ओर भागने लगे। पुलिस ने पीछा किया। कार्यवाही में पुलिस ने दो अभियुक्त जहांगीर पुत्र जानू मेव निवासी सुरीर मथुरा, जहरूद्धीन पुत्र वेदामी खां निवासी गांव बरौस सादाबाद हाथरस को पकड़ा है। पुलिस ने आगरा नंबर की एक जायलो और दो वुलेरो गाड़ी जो कि अलीगढ़ व हाथरस नंबर की है। पुलिस को पकड़े गये बदमाशों से दो तमंचा बरामद हुए हैं।

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नई दिल्ली : हरिशंकर ब्रह्मा ने 19वें मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त का पदभार संभाल लिया है। निवर्तमान मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त वीएस संपत ने गुरुवार को अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद पद छोड़ दिया था।  इससे पहले ब्रह्मा 25 अगस्‍त, 2010 से चुनाव आयुक्‍त के पद पर थे। भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1975 बैच (एपी काडर) के अधिकारी ब्रह्मा चुनाव आयोग में आने से पहले ऊर्जा मंत्रालय में सचिव के पद पर थे। 19 अप्रैल, 1950 को जन्‍मे ब्रह्मा ने गुवाहाटी विश्‍वविद्यालय (असम) से राजनीतिक विज्ञान में स्‍नातकोत्‍तर और सेंट एडमंड्स कॉलेज, शिलांग से स्‍नातक की डिग्री हासिल की थी। उन्‍होंने डोन बॉस्‍को स्‍कूल, गुवाहाटी से अपनी पढ़ाई पूरी की थी। वह भारत सरकार और राज्‍य सरकार में विभिन्‍न वरिष्‍ठ पदों पर रहे हैं।  नए मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त का पदभार संभालने के बाद ब्रह्मा ने अपनी प्राथमिकताओं को गिनाते हुए कहा कि यह उनका व्‍यक्तिगत प्रयास रहेगा कि चुनाव प्रबंधन की गुणवत्‍ता को सुधारने के लिए नई तकनीकों का इस्‍तेमाल किया जाए। ईसीआई 25 जनवरी को इलेक्‍ट्रॉनिक मतदाता सूची प्रबंधन प्रणाली (ईआरएमएस) की राष्‍ट्रव्‍यापी शुरुआत करने की घोषणा करेगा, जो राष्‍ट्रीय स्‍तर पर मतदाता सू‍ची उपलब्‍ध कराएगा, जिसमें मतदाता अपने सम्‍पूर्ण विवरण को देख सकेंगे।  ब्रह्मा ने कहा कि आयोग उच्‍चतम न्‍यायालय के निर्देशों के बाद एनआरआई मतदाताओं के लिए मतदाता अधिकारों को बढ़ाने के लिए आधारभूत कार्य योजना बनाएगा।

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केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से शुरू की गई डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर टू एलपीजी कस्टमर, जिसका प्रचलित नाम डीबीटीएल या सीधे खाते में रियायत की योजना सरकार के लिए सब्सिडी चोरी रोकने का नया मार्ग प्रशस्त करती दिख रही है।  देशभर में 31 दिसंबर तक करीब छह करोड़ लोगों ने इस योजना को अपना लिया था। इसका मतलब यह है कि देश के करीब 15.5 करोड़ एलपीजी ग्राहकों में से इतने ग्राहकों ने अपने एलपीजी कनेक्शन को अपने बैंक खातों से लिंक कर दिया है। इससे रियायत अब सीधे उनके खाते में आएगी, जबकि वह अपने घर पर सिलेंडर की डिलीवरी बाजार भाव पर लेंगे। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान कहते हैं कि इस योजना को अमल में लाने के पहले दौर में ही यह पता चल गया था कि सिर्फ 'आधार' से इसे लिंक करने की बाध्यता इसका मार्ग रोक सकती है। यही वजह है कि हमने बैंक खातों को भी योजना के साथ जोड़ा। ऐसे लोग जिनके पास आधार नंबर नहीं है उनके लिए यह सुविधा दी गई कि वह योजना का लाभ लेने के लिए अपना बैंक खाता एलपीजी कनेक्शन से जोड़ें। इसका अप्रत्याशित लाभ हुआ। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक हर दिन करीब 15 लाख एलपीजी ग्राहक इस योजना से जुड़ रहे हैं। अगर यही गति बरकरार रही तो अगले दो महीनों में पूरे देश में डीबीटीएल योजना पूरी तरह लागू हो जाएगी। प्रधान कहते हैं कि पहले चरण में योजना को सिर्फ 54 जिलों में शुरू किया गया था, जबकि 1 जनवरी 2015 से पूरे देश में यह योजना शुरू की जा रही है। लेकिन ऐसा नहीं है कि 1 जनवरी से ही रियायती सिलेंडर की आपूर्ति रुक गई है और सभी को बाजार भाव पर सिलेंडर मिलने लगा है। एलपीजी ग्राहकों को अगले तीन महीने का समय दिया गया है कि वे इस दौरान अपना आधार कार्ड बनवा लें या फिर अपना बैंक एकाउंट खुलवाकर उसे अपने एलपीजी कनेक्शन के साथ जोड़ें। ऐसे इलाके जहां पर बैंक एकाउंट खोलना मुश्किल हो रहा है वहां पर स्थानीय बैंक अधिकारियों को योजना से जोड़ा गया है, जिससे कि वे ऐसे लोगों के एकाउंट खोल पाएं जिनके पास अभी तक बैंक खाता नहीं है। इसमें प्रधानमंत्री जन धन योजना की भी सहायता हासिल की जा रही है। उन्होंने कहा कि योजना के सही क्रियान्वयन के लिए देश के सभी 676 जिलों में एक—एक प्रभारी अधिकारी की नियुक्ति की गई है। पेट्रोलियम सचिव, सभी संयुक्त सचिव, सरकारी तेल कंपनियों के सीएमडी और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही सभी अधिकारियों को एक—एक जिला का प्रभारी बनाया गया है, जिससे कि यह सुनिश्चित हो पाए कि सभी जिलों में डीबीटीएल या रियायत सीधे खाते में योजना सही ढंग से क्रियान्वित हो रही।  प्रधान ने कहा कि उन्होंने स्वयं भी हरियाणा के पलवल जिले का प्रभार इस योजना के तहत संभाला है। उन्होंने कहा कि योजना को पूरी तरह सफल बनाने के लिए यह जरूरी था कि हम यह देखें कि एक बार बाजार भाव पर घर पर सिलेंडर की डिलीवरी शुरू करने से किसी वर्ग पर इसका असर तो नहीं होगा?  ऐसा तो नहीं होगा कि संबंधित व्यक्ति बैंक जाकर पैसे नहीं ला पाया हो और इस बीच उसके घर की गैस खत्म हो जाए और पैसे की कमी की वजह से गरीब परिवार, निर्धन ग्राहक को परेशानी हो। इस समस्या को देखते हुए हमने पांच किलो के छोटे सिलेंडर को भी रियायत में देने का निश्चय किया। इसके तहत अगर कोई व्यक्ति 14.2 किलोग्राम के 12 सिलेंडर साल में नहीं लेना चाहता है तो उसके लिए यह विकल्प उपलब्ध होगा कि वह उतने ही वजन के अनुपात में साल में पांच किलो वाले छोटे सिलेंडर ले सकता है। प्रधान ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति बड़ा सिलेडर नहीं लेता है तो उसे साल में करीब तीन दर्जन छोटे सिलेंडर रियायत पर मिलेंगे। योजना को लेकर पेट्रोलियम मंत्रालय किस कदर सक्रिय है इसका एक अन्य प्रमाण यह है कि उसने देशभर में करीब 12 भाषाओं में करीब 40 करोड़ एसएमएस लोगों को भेज दिए हैं। एक अधिकारी ने कहा कि हमने योजना के प्रचार के लिए 12 सूत्रों का एक व्यापक प्रचार अभियान शुरू किया है। इसके तहत अखबार, टीवी, सिनेमा हॉल में विज्ञापन देने के अलावा पर्चे बंटवाना, बाजार—हाट में जाकर प्रचार करना और ऑटो के पीछे विज्ञापन देना शामिल हैं। इनके अलावा कुछ इलाकों में नुक्कड़ नाटकों का भी मंचन किया जा रहा है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि जिन 54 जिलों में प्रारंभिक स्तर पर योजना शुरू की गई थी उनमें 31 दिसंबर तक करीब 600 करोड़ रुपये लोगों के खातों में रियायत राशि के तौर पर ट्रांसफर कर दिए गए थे। हालांकि, सरकार ने इसको लेकर कोई आंकड़ा अभी तक नहीं दिया है कि इस योजना के पूरी तरह लागू होने पर उसे कितनी बचत होगी। लेकिन एक अनुमान लगाया जा रहा है कि अगर यह योजना पूरे देश में सही ढंग से लागू हो गई तो सरकार को एलपीजी रियायत के मद में सालाना करीब छह हजार करोड़ रुपये की बचत होगी। एक अधिकारी ने कहा कि योजना के शुरू होने के बाद अभी तक 30 लाख से अधिक डुप्लीकेट कनेक्शन बंद कर दिए गए हैं। ये ऐसे कनेक्शन थे जिसमें एक ही व्यक्ति ने दो अलग कंपनियों से एलपीजी कनेक्शन ले रखे थे। इसके अलावा एक ही परिवार में पति—पत्नी के नाम पर भी साथ में कनेक्शन थे। इस अधिकारी ने कहा कि लोग इस योजना को लेकर सभी जानकारी हासिल कर पाएं और उन्हें एक ही जगह तीनों कंपनियों से जुड़ी सभी एलपीजी संबंधित सूचना मिल पाएं, इसके लिए Mylpg.in नामक विशेष पोर्टल शुरू किया गया है। इसमें एलपीजी कनेक्शन को डीबीटीएल से जोड़ने, एलपीजी बुक करने, उसे ट्रैक करने, नजदीकी एलपीजी डीलर देखने, योजना से संबंधित शिकायत करने और अपने डीलर को बदलने जैसी सुविधाएं एक ही जगह पर मिल रही हैं। इसके अलावा एलपीजी हेल्पलाइन 18002333555 भी शुरू की गई है। यह कई भाषाओं में है और सुबह से देर शाम तक लोग इस पर फोन करके एलपीजी संबंधित सूचनाएं हासिल कर सकते हैं। यह टोल फ्री नंबर है। ऐसे में ग्राहकों को इस पर कॉल के लिए कोई शुल्क भी नहीं देना होता है।

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'केप कैमोरिन में मां कुमारी के मंदिर में इंडियन रॉक के ठीक अंतिम छोर पर जब मैं तल्लीनता के साथ बैठा हुआ था तो मेरे मन में एक विचार आया। हम इतने सारे संन्यासी भटक रहे हैं और लोगों को मेटाफिजिक्स का पाठ पढ़ा रहे हैं- यह सब बावलापन है। क्या हमारे 'गुरुदेव' यह नहीं कहा करते थे 'खाली पेट भजन नहीं होता'? हम एक राष्ट्र के तौर पर अपनी विशेषता खो चुके हैं और यही भारत में कायम सभी तरह की बुराइयों का मुख्य कारण है। हमें आम आदमी की चेतना को जगाना है।''   स्वामी विवेकानन्द ने 'एकल भारत के अपने विज़न' के बारे में यही कहा है। कन्याकुमारी में इंडियन रॉक के ठीक अंतिम छोर (बाद में यह नरेन्द्र रॉक मेमोरियल के नाम से जाना गया) पर ध्यान लगाने के दौरान स्वामी विवेकानन्द के जेहन में यह विज़न कौंधा था। भारत की आम जनता की दुर्दशा से अत्यन्त मर्माहत होकर स्वामी विवेकानन्द ने उन्हें मातृभूमि की सेवा एवं आत्म बलिदान की भावना को आत्मसात करने के लिए प्रेरित किया था। ''मैं भारतीय हूं और हर भारतीय मेरा भाई है।'' ''अबोध भारतीय, गरीब एवं फक्कड़ भारतीय, ब्राह्मण भारतीय, अछूत भारतीय मेरा भाई है।'' ''भारतीय मेरा भाई है, भारतीय मेरा जीवन है, भारत के देवी-देवता मेरे भगवान हैं, भारत का समाज मेरी बाल्यावस्था का झूला है, मेरी युवावस्था को आनंदित करने वाली वाटिका है, पवित्र स्वर्ग है, मेरी वृद्धावस्था का वाराणसी है।'' ''भारत की धरती मेरा परम स्वर्ग है, भारत की अच्छाइयां मेरी अच्छाइयां हैं।'' ये सभी महान देशभक्त संत स्वामी विवेकानन्द के उद्गार थे जो भारतीयों में एक राष्ट्र के तौर पर अपनी पहचान को जगाने में मददगार रहे हैं। वैसे तो राष्ट्रवाद के अभ्युदय को पश्चिमी प्रभाव की देन माना जाता है लेकिन स्वामी विवेकानन्द का राष्ट्रवाद भारतीय आध्यात्मिकता एवं नैतिकता से पूरी तरह ओत-प्रोत है। औपनिवेशिक भारत में जबरदस्त ढंग से उभरे राष्ट्रवाद की अवधारणा में उनका अहम योगदान रहा था और उन्होंने 20वीं शताब्दी में भारत की कामयाब छलांग सुनिश्चित करने में विशेष भूमिका निभाई थी। 20वीं शताब्दी के युवाओं पर उनका जबरदस्त प्रभाव रहा है। भुवनेश्वरी देवी और विश्वनाथ दत्त के यहां 12 जनवरी, 1863 को जन्मे नरेन्द्र नाथ दत्त ही आगे चलकर स्वामी विवेकानन्द कहलाए। वह एक संन्यासी थे और 'रामकृष्ण परमहंस' के मुख्य अनुयायी थे। उन्होंने पश्चिमी दुनिया को 'वेदांत' एवं 'योग' जैसे अनमोल भारतीय दर्शन शास्त्र से परिचय कराया। विभिन्न आस्थाओं के आपसी जुड़ाव के बारे में जागरूकता पैदा करने और 19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में हिन्दूवाद को वैश्विक मंच पर बड़ी दृढ़ता के साथ पेश करने का श्रेय स्वामी विवेकानन्द को ही जाता है। डॉ. राधाकृष्णन का यह साफ मानना रहा है, ''राष्ट्रवाद एक सियासी धर्म है जो पुरुषों के दिलों एवं अंतर्निहित अपेक्षाओं को झकझोर कर रख देता है और इसके साथ ही उन्हें सेवा करने एवं आत्म बलिदान के लिए प्रेरित करता है, जबकि इस तरह का कमाल दिखाने में तमाम हालिया विशुद्ध धार्मिक आंदोलन विफल रहे हैं।'' इस तरह के अवलोकन से बहुत पहले स्वामी विवेकानन्द ने भारतीयों के दिलो-दिमाग को कुछ इसी तरह से पूरी ताकत, जोशो-खरोश एवं निर्भयता के साथ झकझोर कर रख दिया था, जिससे वह राष्ट्र सेवा एवं आत्म बलिदान के लिए पूरी तरह से तैयार हो गए थे।   स्वामी विवेकानन्द का राष्ट्रवाद आध्यात्मिकता से जुड़ा हुआ है। वह भारत के अभ्युदय को आध्यात्मिक लक्ष्य से जोड़ने में सफल रहे थे, जो इस देश की प्राचीन परंपरा रही है। उनका कहना था, ''हर राष्ट्र को अपने सपनों को साकार करना है, हर देश को अपना एक संदेश भेजना है, हर राष्ट्र को सफलतापूर्वक अपना मिशन पूरा करना है। अतः हमें निश्चित रूप से यह समझना पड़ेगा कि हमारी अपनी संतति का मिशन क्या है, उसे किन-किन सपनों को साकार करना है, उसे राष्ट्रों की दौड़ में कौन सा स्थान हासिल करना है और उसे विभिन्न संततियों में सामंजस्य बैठाने में क्या भूमिका निभानी है।'' उनकी राष्‍ट्रीयता का स्वरूप भौतिकवादी नहीं, बल्कि पूर्णतया आध्‍यात्‍मिक है, जिसे भारतीय जीवन में सभी शक्तियों का स्रोत समझा जाता है। पश्चिमी राष्‍ट्रवाद के विपरीत, जो प्रकृति में धर्मनिरपेक्ष है, स्‍वामी विवेकानंद का राष्‍ट्रवाद धर्म पर आधारित है, जोकि भारतीयों की जीवन शक्ति है। आम लोगों के लिए गहरी चिंता, स्‍वअभिव्‍यक्ति के लिए समानता और स्‍वतंत्रता, सार्वभौमिक भाईचारे के आधार पर विश्‍व का आध्‍यात्मिक एकीकरण और कर्मयोग, जोकि आध्‍यात्मिक एवं राजनीतिक, दोनों तरह की स्‍वतंत्रता पाने की आचार नीतियों की एक प्रणाली है, उनके राष्‍ट्रवाद का आधार थी। उनकी लेखनी और भाषणों में जादुई प्रभाव होते थे। उनके शब्‍द न केवल भारतीयों के दिमाग को उद्वेलित करते थे, बल्कि मातृभूमि के लिए प्रेम भी जगाते थे। उन्‍होंने अपने देशवासियों के दिलो-दिमाग में पूजा करने के लिए एकमात्र देवी के रूप में भारत माता की स्‍थापना की। उन्‍होंने मुनाफा कमाने की ब्रिटेन की नीतियों का पर्दाफाश करने को प्रेरित किया ये भारतीय हितों के पूरी तरह और राष्‍ट्रीयता की भावना को प्रज्‍जवलित किया। भारतीय परिप्रेक्ष्‍य में यूरोप की औपनिवेशिक नीतियों की व्‍याख्‍या करके उन्‍होंने ब्रितानी शासकों को निरुत्‍साहित किया। जैसाकि उन्‍होंने कहा कि 'नए भारत को हल जोतकर थककर चूर हो जाने वाले किसानों की झोपड़ियों से, मछुआरों, मोचियों और सफाईकर्मियों के दिलों से उभरने दो। उसे टिकिया बेचने वालों की तंदूरों से, किराने की दुकानों से प्रस्‍फुटित होने दो। उसे फैक्‍टरियों से, हाट-बाजारों से निकलने दो। उसे जंगलों, झुरमुटों से, पहाड़ियों और पर्वतों से फूटने दो'। स्‍वामी विवेकानंद के भाषणों एवं लेखों ने भारतीयों के दिलो-दिमाग में साहस और दृढ़ता की भावना का संचार किया, जिससे कि वे हर तरह के विरोध की स्थिति में अवसरों की तलाश कर सकें। अरविन्‍दो घोष ने इसके बाद की पीढ़ी में इसी भावना का पोषण किया। सर्वोच्‍च बलिदान के लिए तैयार भारतीय सोच ने 'अहिंसा' और 'सत्‍याग्रह' पर आधारित गांधी जी के स्‍वतंत्रता आंदोलन की सफलता के लिए आधार मुहैया कराया। स्‍वामी विवेकानंद ने आध्‍यात्मिकता को विविधता से भरे भारत के सभी धार्मिक तत्‍वों के समन्‍वय बिन्‍दु के रूप में देखा, जो राष्‍ट्रीय धारा को एकजुट करने में समर्थ था। स्‍वामी विवेकानंद की तरह, अरविन्‍दो घोष और महात्‍मा गांधी ने भी महसूस किया कि धर्म और आध्‍यात्मिकता भारतीयों की रगों में बसी है और उन्‍होंने धर्म और आध्‍यात्मिकता की ताकत को जागृत करने के जरिये भारत की समग्रता के लिए काम किया। साल 1893 में शिकागो में दिए गए भाषण ने उन्‍हें विश्‍व धर्म संसद में सबसे बड़ा व्‍यक्तित्‍व और भारत को धर्म की जननी के रूप में स्‍थापित किया। स्‍वामी विवेकानंद ने 'विश्‍व की सबसे प्राचीन कोटि के संत, वैदिक व्‍यवस्‍था के संन्‍यासी, ऐसे धर्म जिसने विश्‍व को सहिष्‍णुता और सार्वभौमिक स्‍वीकृति दोनों का पाठ-पढ़ाया' की तरफ से दुनिया के युवाओं का स्‍वागत करते हुए 'शिव महिमा स्रोतम्' के दो व्‍याख्‍यात्‍मक अवतरणों को उदृत किया। 'जिस प्रकार विभिन्‍न स्‍थानों से निकलने वाली अलग-अलग जलधाराएं अपने जल को समुद्र में समाहृत कर लेती हैं, इसी प्रकार हे ईश्‍वर, विभिन्‍न प्रवृत्तियों के माध्‍यम से लोग जिन विभिन्‍न रास्‍तों का अनुसरण करते हैं, चाहे वे सीधी हों या टेढ़ी-मेढ़ी सब मुझमें मिल जाती हैं' और 'जो कोई, जिस किसी रूप में मेरे पास आता है, मैं उसके पास पहुंचता हूं; सभी मनुष्‍य विभिन्‍न रास्‍तों के लिए संघर्ष कर रहे है, जो अंत में मुझमें मिल जाती हैं'। उनका भाषण भले ही छोटा था, लेकिन इसने संसद की सार्वभौमिकता की भावना और आशय को स्‍वर दिया। संसद में दिए गए उनके और अन्‍य भाषण में सार्वभौमिकता का समान विषय रहा, जिसमें धार्मिक सहिष्‍णुता पर जोर दिया गया। 21वीं सदी की शुरुआत से ही विश्‍व अराजक स्थिति का सामना कर रहा है और एक प्रकार के संक्रमण काल से गुजर रहा है। मानव इतिहास की इस बेला में सार्वभौमिक भाईचारे और सद्भावना के आधार पर राष्‍ट्र और विश्‍व के आध्‍यात्मिक एकीकरण को बढ़ावा देने वाले स्‍वामी विवेकानंद का संदेश और अधिक प्रासंगिक हो जाता है। उनके संदेशों में व्‍यक्तियों व राष्‍ट्रों का शांतिपूर्ण सह-अस्‍तित्‍व सुनिश्चित करते हुए युद्धों को टाल सकने की क्षमता है।

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यमुना मुक्तिकरण के लिये लीगल वेलफेयर एडवोकेट सोसायटी के अधिवक्ता गणों ने प्रधानमंत्री के नाम दिया ज्ञापन यमुना मुक्तिकरण अभियान के तत्वाधान में लीगल वेलफेयर सोसायटी के अधिवक्ता गणों द्वारा दिनांक 19 जनवरी को न्यायालय परिसर में  एक दिवसीय जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें अधिवक्ता गणों द्वारा यमुना मुक्तिकरण को लेकर प्रदर्शन किया गया और लोगो को यमुना की अविरल धारा ब्रज में लाने के लिये जागरूक किया गया। अधिवक्ता गणो द्वारा 15 मार्च को कोसी से दिल्ली तक यमुना मुक्तिकरण अभियान द्वारा निकाली जा यमुना मुक्तिकरण पदयात्रा में भाग लेने का आवह्न किया गया। अधिवक्ताओं द्वारा जिलाधिकारी की अनुपस्थिति में ए.डीएम को माननीय प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा । ज्ञापन मे अधिवक्ताओं द्वारा यमुना नदी के अध्यात्मिक और पर्यावरण दोनो की दृष्टि से प्रकाश डालते हुये उसकी अविरलता बनाये रखने के लिय मांग की गईं। जागरूकता शिविर में भाग लेने अभियान के राष्ट्रीय संयोजक राधाकान्त शास्त्री और राष्ट्रीय महासचिव हरेश ठेनुआ पहुॅचे उन्होने कहा कि यमुना की रक्षा के लिये हम सभी का संगठित होना परम आवश्यक है क्योकि सरकार जनशक्ति की सुनती है और आप सभी कानून की रक्षा करने वाले अधिवक्ताओं के साथ से अभियान को और भी बल मिलेगा।  लीगल वेलफेयर एडवोकेट सोसायटी के अध्यक्ष एड. चेतन त्रिवेदी, एड हाकिम सिंह, एड. राकेश कुमार, एड. अश्वनी शर्मा ने कहा कि यमुना की रक्षा हमारा कर्तव्य है आज यह आवश्यक हो गया है कि हम सभी मिलकर यमुना का स्वच्छ प्रवाह ब्रज में लाने के लिये हर संभव प्रयास करेंगे। हम सभी अधिवक्ता भाई यमुना को मुक्त कराने के लिये अभियान मे बढ-चढ कर भाग लेगें। इस अवसर पर अभियान के जिला कार्यकारी अध्यक्ष पंकज चतुर्वेदी, एड. ब्रजेश अग्रवाल, एड. कन्हैयालाल शर्मा, एड. दिनेश कुमार शर्मा, एड. कृष्णगोपाल , ठा. नरेन्द्र सिंह एड., हरवीर गुर्जर एड., पंकज कुमार एड., संतोष कुमार एड., ललित शर्मा एड., विष्णुकान्त शर्मा एड. आदि सैकड़ो अधिवक्ता गण मौजूद रहे।  बिजेपी से लोकसभा सासंद व पूज्य संत श्री सत्यपाल जी महाराज से यमुना मुक्तिकरण अभियान का शिष्टमंडल जयगुरूदेव में पीछे चल रहे सद्भावना सम्मेलन में उनसे भेंट की। यमुना मुक्तिकरण अभियान के राष्ट्रीय संयोजक राधाकान्त शास्त्री ने उनको ब्रज में यमुना की दुर्दशा से अवगत कराया और कहा कि यमुना की स्थिति देख आज यमुना के किनारे रहने वाले करोड़ो लोगों और यमुना भक्तों की आस्था और जीवन को हानि पहुॅच रही है। अभियान के शिष्ट मंडल द्वारा यमुना मुक्ति के मुद्दे को लोकसभा में उठाने की मांग की। संत श्री सत्यपाल जी महराज ने कहा कि आपका ध्येय पवित्र है और आपके द्वारा किये जा रहे प्रयास सराहनीय हमारी सरकार नदियों को लेकर गम्भीर है और आपकी बात भी प्रधानमंत्री तक पहुॅचायी जायेगी। आप अपने अभियान में अवश्य सफलता प्राप्त करेगें। अभियान के शिष्ट मंडल में अभियान के संयोजक राधाकान्त शास्त्री, सहसंयोजक सुनील सिंह, राष्ट्रीय महासचिव हरेश ठेनुआ आदि उपस्थित रहे। यमुना के लिये गांव में किया जन संपर्क  यमुना मुक्तिकरण अभियान के पदाधिकारियों द्वारा अभियान को तीव्रता प्रदान करने के लिये दिन रात एक कर प्रयास किये जा रहे हैं। अभियान के फरह तहसील के अध्यक्ष ठा. गिरधारी लाल ने फरह ब्लाक के झण्डी पुर, बलरई, सुल्तान पुर, सलेमपुर, गढाया आदि गांव में 15 मार्च की पदयात्रा को लेकर जनसंपर्क किया गया। उन्होने बताया कि अभियान के प्रचार प्रसार में रसिया मण्डली भी सम्मिलित रहेगी। उनके द्वारा रसिया गायकों से संपर्क किया गया । रसिया गायको द्वारा अभियान के प्रचार में सम्मिलित रहने की बात कहीं। टी.एन शर्मा की लल्लू भजना मण्डल के संचालक त्रिलोकी नाथ शर्मा ने कहा कि अभियान के प्रचार के लिये रसियायों के माध्यम से यमुना भक्तों को अभियान में प्रेरित किया जायेगा। इस अवसर पर संजू नाहर, विरेन्द्र उपाध्याय, राधेश्याम, मंजू शर्मा, साधू राम, बिजेश शर्मा, सोनी ठाकुर, हरी सिंह आदि उपस्थित रहे।    

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