मथुरा

मथुरा। ग्रामीण अंचल में बसे हुए सैंकड़ों दूर-दराज के गाँवों को आधुनिक चिकित्सीय राहत व स्वास्थ्य सम्बन्धी अनेकों बीमारियों से निजात दिलाने के उद्देश्य से जनपद में अपने अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाएं मुहैया कराने के लिए प्रख्यात अस्पताल केडी मेडीकल काॅलेज हाॅस्पीटल एण्ड रिसर्च सेन्टर अकबरपुर मथुरा ने ग्राम राल में सभी प्रकार के नेत्र रोगों की चिकित्सा हेतु एक निःशुल्क कैम्प लगाया। इस कैम्प में ग्रामीण पुरूषों व महिलाआंे एवं उनके परिवार से सीधे संवाद कर उनकी नेत्र सम्बन्धी सभी रोगों के साथ साथ अन्य छोटे मोटे रोगों से निजात दिलाने के लिए इस कैम्प में विशेषज्ञ डाक्टरों ने न केवल चिकित्सीय परामर्श दिया बल्कि स्वास्थ्य सम्बन्धी अन्य जरूरी एवं आवश्यक तथ्यांे के बारे में हिदायद भी दी। ज्ञातव्य है कि इस केडी मेडीकल काॅलेज हाॅस्पीटल एण्ड रिसर्च सेन्टर द्वारा ग्राम राल में लगाए गए शिविर में प्रसिद्व नेत्र रोग विशेषज्ञ डाॅ. अरविन्दम मौर्या, फिजिशयन डाॅ. बीपी सारस्वत, स्त्री रोग विशेषज्ञ डाॅ. नीलम राजपूत एवं दन्त चिकित्सक डाॅ. महावीर शर्मा के साथ कम्पाउन्डर, नर्स व टैक्नीशियन आदि सहयोगी टीम को भेजा गया था। इस शिविर मंे करीब 106 मरीजों ने अपनी नेत्र सम्बन्धी चिकित्सा प्राप्त की, जबकि लगभग 150 स्त्री व पुरूष वर्ग के मरीजों ने अपनी अन्य बीमारियों के लिए चिकित्सीय राहत प्राप्त की। इस मौके पर आरके एजूकेशन हब एवं केडी मेडीकल काॅलेज हाॅस्पीटल एण्ड रिसर्च सेन्टर के चेयरमैन डाॅ0 रामकिशोर अग्रवाल ने बताया कि इस शिविर में ग्रामीणों की उमड़ी भीड़ स्पष्टतः इशारा कर रही है, कि अभी भी जनपद के अनेकों गाँवों में न केवल आधुनिकतम बल्कि प्राथमिक चिकित्सा का भी काफी अभाव है एवं केडी मेडीकल काॅलेज हाॅस्पीटल एण्ड रिसर्च सेन्टर का यह संकल्प है कि समाज में कोई भी व्यक्ति चाहे वो किसी भी अवस्था में हो, उसको कभी भी चिकित्सा व शिक्षा का अभाव नहीं होने देंगे। उन्होंने आगे बताया कि सभी गरीब एवं असहायों की समय समय पर सहायता करना हमारा परम धर्म है। हमें अपने दैनिक जीवन में भी ऐसे लोकोपकारी कार्यों को प्राथमिकता देकर अपना सामाजिक एवं नैतिक दायित्व निभाना चाहिये। केडी हाॅस्पीटल एण्ड रिसर्च सेन्टर का यह संकल्प है कि आगे भी लगातार ऐसे कैम्पों का आयोजन कर जनता को समुचित चिकित्सा सेवायें मुहैया कराते रहेंगे।

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कलैक्ट्रेट सभागार में अधीनस्थों के साथ कामधेनु डेयरी के सम्बन्ध में बैठक करती डीएम बी0 चन्द्रकला एवं अन्य मथुरा। जिलाधिकारी बी0चन्द्रकला की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में कामधेनु एवं मिनी डेयरी की बैठक पशुचिकित्सक व संबंधित बैंक मेनेजरो के साथ सम्पन्न हुयी। कामधेनु के 5 व मिनी कामधेनु डेयरी के 30 मामले  बैंक मेनेजरो व लाभार्थियों के बीच निस्तारण हेतु प्रस्तुत किये गये। जिलाधिकारी ने बैंक मेनेजरो को सख्त निर्देश दिये है कि इस योजना के तहत लाभार्थी की जांच शीघ्र पूर्ण कराकर उन्हें राशि उपलब्ध कराये ताकि लाभार्थी अपना रोजगार शुरू कर सके। किसान के्रडिट कार्ड तथा अन्य लाभो के बारे में जिलाधिकारी ने कडा रूख अपनाते हुए बैंक प्रबंधको से कहा है कि किसी भी लाभार्थी व्दारा मांगे जा रहे ऋण के आवेदन पत्रो को अधिक समय तक लंबित न रखा जाये। आवेदन पत्रो पर शीघ्र जांच कर अपनी आख्या सहित ऋण उपलब्ध कराये यदि कोई पात्रता की श्रेणी में नही आता है तो उसपर भी अपनी आख्या सहित टिप्पणी अंकित करे जिससे कि आवेदक को इधर उधर न भटकना पडे। जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल तथा अच्छे प्रगतिशील कृषकों को बधाॅई देते हुए उन्हें आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं का शीर्ध निदान किया जायेगा। इस अवसरपर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एस0के0 मलिक ने अपनी विभागीय योजनाओ उपस्थित जनों को अवगत कराया। 2671

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विप्रा सभागार में विप्रा अधिकारियों के साथ बैठक कर यमुना प्रदूषण मुक्ति पर चर्चा करती डीएम बी0 चन्द्रकला एवं अन्य मथुरा। जिलाधिकारी बी0 चन्द्रकला की अध्यक्षता में यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त कराने के सम्बन्ध में एक बैठक का आयोजन मथुरा वृन्दावन विकास प्राधिकरण के सभागार में आयोजित की गयी। उन्होंने जनपद में यमुना को प्रदूषण मुक्त कराने के सम्बन्ध में अधिकारियों, पर्यावरण विशेषज्ञों तथा माॅनीटरिंग कमेटी के सदस्यों के साथ गम्भीरता पूर्वक मन्थन किया। जिलाधिकारी ने शहर के बड़े मसानी नाले के प्रदूषित जल को ट्रीटमेन्ट प्लान्ट द्वारा शोधित करके ही यमुना में छोड़ने के लिये अधिकारियों को निर्देशित किया है। जिलाधिकारी ने प्रदूषित नाले जो कि यमुना को भी प्रदूषित कर रहे है के सम्बन्ध में गम्भीरता पूर्वक विचार करते हुए कहा कि यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिये गन्दे जल को ट्रीटमेन्ट करके ही यमुना में ही छोड़ने हेतु कहा।  यमुना सहित नाले, नदी तथा धाार्मिक कुण्डों को भी प्रदूषण मुक्त बनाने के लिये काफी प्रयास करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कई टेक्नोलाॅजी है जो त्यौहारों के समय किये गये प्रदूषण को काफी हद तक समाप्त करता है और इसके लिये हमें ईमानदारी से प्रयास करने होंगे। स्वीट एण्ड वायलो नीरी टेक्नोलाॅजी प्रोथोरोज के अंकित श्रीवास्तव ने सीडी के माध्यम से कई देशो में अपनाई जा रही विभिन्न तकनीको के संगंध में अवगत कराया गया जिसमें कि पर्यावरण विशेषज्ञो सहित सभी अधिकारियो ने अपनी सहमति प्रकट की। इस अवसर पर मथुरा वृन्दावन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष नागेन्द्र प्रताप सिंह, सचिव श्याम बहादुर सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष मनीषा गुप्ता, पर्यावरण विशेषज्ञ रमनी एवं सक्सेन सहित सभी विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। 

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मथुरा। लायन्स क्लब आॅफ मथुरा रेशनल ने जेपी हाॅस्पीटल नोएडा के सहयोग से निःशुल्क चिकित्सा जांच शिविर का आयोजन किया। दो दिवसीय जांच शिविर का शुभारम्भ मथुरा के विधायक प्रदीप माथुर एवं अपर जिला अधिकारी वित्त एवं राजस्व धीरेन्द्र सचान के कर कमलों द्वारा हुआ। यह चिकित्सा शिविर दो दिवसीय है। इसमें जेपी हाॅस्पीटल में दिल्ली नोएडा से विशेषज्ञ उपलब्ध रहे। निम्न हड्डड्ी रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, केंसर रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, हदय रोग विशेषज्ञ, फिजीशियन, डाइटीशियन आदि विशेषज्ञ उपलब्ध रहे। शिविर के मुख्य अतिथि रहे विधायक प्रदीप माथुर एवं अपर जिला अधिकारी वित्त एवं राजस्व धीरेन्द्र सचान ने लायन्स क्लब आॅफ मथुरा रेशनल द्वारा चलाये जा रहे निःशुल्क चिकित्सा जांच शिविर के लिये लायन्स क्लब सदस्यों का अभिनन्दन एवं प्रेरित किया जिस तरह से लायन्स क्लब आॅफ मथुरा रेशनल मथुरा शहर की गरीब जनता के हितों के लिये सामाजिक कार्य कर रहा है। वह आगे भी करता रहेगा एवं आश्वासन दिया कि शहर की जनता की मदद के लिये क्लब का सहयोग करते रहेंगे। क्लब के अध्यक्ष विकास अग्रवाल ने बताया कि जेपी हाॅस्पीटल की उच्च चिकित्सा पद्दति से मथुरा वासियों को लाभ के उद्देश्य से इस कैम्प का आयोजन किया गया है।  क्लब के सचिव चैधरी मोहित अग्रवाल ने बताया कि पहले दिन के कैम्प में 250 मरीजों ने इस चिकित्सा शिविर का लाभ उठाया। लायन्स क्लब आॅफ मथुरा रेशनल ने इसी उद्देश्य से यह पहल की है कि मथुरा की जनता इस विश्वस्तरीय जांच शिविर का लाभ उठा सकें। क्लब के कोषाध्यक्ष नितिन अग्रवाल ने अपने विचार साझा करते हुये बताया कि मथुरा की जनता के लिये क्लब समय-समय पर चिकित्सा शिविरों के साथ आगे भी सामाजिक कार्य करता रहेगा। मीडिया कोर्डिनेटर अनुज गोयल ने सभी दैनिक पत्रिका समय समय पर सामाजिक कार्य के उद्देश्य की पूर्ति के लिये क्लब का सहयोग करते रहेंगे जिससे मथुरा की जनता अधिक से अधिक इन सामाजिक कार्यो का लाभ उठा सकें। निःश्ुाल्क चिकित्सा शिविर की व्यवस्थाओं में क्लब के पूर्व अध्यक्ष विनीत अग्रवाल एवं संयोजक जितेन्द्र गोयल, दिलीप अग्रवाल, राहुल बंसल, अमित मित्तल, अमित गोयल, अंकुश अग्रवाल, अरूण अग्रवाल, आशीेष अग्रवाल, मनेाज, मुकुल, नितिन मिडलेण्ड, पंकज, पारस, टिंकल, सुमित, तन्मय, वरूण विकास आदि उपस्थित रहे।

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मथुरा। जम्मू कश्मीर में आई भीषण आपदा को लेकर जिला प्रशासन द्वारा सहयोगी की अपील के बाद अब सहयोगियों का आगे आना प्रारंभ हो चुका हैं। इसी क्रम में जिला युवक कांग्रेंस द्वारा जम्मू कश्मीर में आई आपदा में परेशान नागरिकों की सहायता हेतु सहयोग करने के चलते एक कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। जिसमें युवक काग्रेंस के कार्यकर्ता विभिन्न क्षेत्रों में तीन दिन राशि एकत्रित कर आपदा से पीडि़त लोगों को भेजेगे। युवक काग्रे्रस के लोकसभा अध्यक्ष विक्रम बाल्मीकि ने बताया कि उक्त कार्यक्रम के तहत प्रथम दिन सौख रोड पर कार्यकताओं ने नागरिकों से सहयोग राशि एकत्रित की हैं। द्वितीय दिन मंडी समिति, तथा तीसरी दिन होलीगेट पर कार्यकर्ता नागरिकों से व्यक्तिगत रूप से अनुरोध कर धनराशि एकत्रित करेगे। अभियान में चैधरी साबूददीन, यासिन मलिक, जिलानी कादरी, उमेश भारद्वाज, संजय शर्मा, राजू फारूखी, रिन्कू चैधरी, दीपक करोतिया, अहमद आदिल, विनेश सनवाल, सुमित श्रीवास्तव, दौलतराम गोला, लोकेश शर्मा, सन्देश पाठक, आसिम खान, अनिफ गुड़वालें, हाजी हनीफ, शंकर सिंह, मनोज गोड़, रसीद खान, अशोक शर्मा, वेदरिया कुरैशी, मुकेश धनगर, रिक्की अहमद ने बताया कि उक्त राशि एकत्रित कर ड्राफ्ट बनाकर पीडि़तों को भेजी जायेगी।

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मथुरा में गहराईयों तक जुड़ी रही मावी के आपराधिक सम्बन्धों की जड़े मथुरा। गैंगेस्टर ब्रजेश मावी की अपराधिक पेशा दुनिया का कार्य क्षेत्र चाहे दिल्ली से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों तक फैला हुआ था परंतु मथुरा में उसके शुभचिंतकों की फेहरिस्त काफी लंबी थी। मथुरा में मावी के शुभचिंतकों की इस फेहरिस्त को यदि रेखांकित करने बैठें तो पता लगेगा कि उसमें न सिर्फ राजनीतिज्ञ बल्कि प्रसिद्ध डॉक्टर, तथाकथित पत्रकार और नामचीन व्यापारी तथा उद्योगपति भी शामिल थे। कृष्णा नगर के एक प्रसिद्ध डॉक्टर और उनके छोटे भाई से तो मावी की घनिष्ठता इस कदर थी कि वह उनके साथ आये दिन शराब की महफिल सजाने बैठता था। बाद में जब मावी ने उधार की आड़ में इसी डॉक्टर और उसके भाई से आये दिन चैथ वसूली शुरू कर दी तो वह उससे कन्नी काटने लगे। ब्रजेश मावी ने भी डॉक्टर फैमिली के व्यवहार में आये बदलाव को भांपकर अपना पैंतरा बदल लिया और फिर उसने उन्हें अपना इन्फॉरमर बनने को राजी किया। बताया जाता है कि इन्फॉर्मर बनकर कृष्णा नगर में अपना नर्सिंग होम चलाने वाले इस डॉक्टर ने बाद में अपने कई हमपेशा लोगों को मावी का शिकार बनवाया जिसमें एक भूतेश्वर स्थित नर्सिंग होम संचालक डॉक्टर तथा एक मथुरा-वृंदावन रोड पर मसानी क्षेत्र में नर्सिंग होम चलाने वाला डॉक्टर भी है। जहां तक सवाल मशहूर फिजीशियन डॉ. उमेश माहेश्वरी के अपहरण में ब्रजेश मावी की संलिप्तता का है, तो उसका नाम माहेश्वरी अपहरण केस में नहीं आया अलबत्ता तत्कालीन सीओ सिटी आलोक प्रियदर्शी और एक अपर पुलिस अधीक्षक, अपने अधीनस्थों की टीम के साथ ब्रजेश मावी से पूछताछ करने दिल्ली जरूर गये थे क्योंकि मावी तब दिल्ली पुलिस की हिरासत में था। कहा जाता है उसने माहेश्वरी अपहरण कांड से खुद को बचाये रखने के लिए ही दिल्ली पुलिस से सेंटिंग करके खुद को अरेस्ट करवाया था।  मथुरा की पुलिस टीम ने दिल्ली पुलिस की हिरासत में जब ब्रजेश मावी से यह जानना चाहा कि क्या डॉ. उमेश माहेश्वरी के अपहरण में उसका हाथ है, तो उसने बेखौफ होकर मथुरा पुलिस से कहा कि यदि डॉ. माहेश्वरी के परिजन यह कह रहे हों कि मैंने अपहरण किया है तो मैंने ही किया होगा। मावी जानता था कि उसके खिलाफ मुंह खोलने की जुर्रत कोई नहीं करेगा। इसके बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच, ब्रजेश मावी को अपने साथ मथुरा लाई और उसने कृष्णा नगर के उसी नर्सिंग होम संचालक डॉक्टर तथा उसके भाई को मावी से रूबरू कराया जिसके इशारे पर वह मथुरा के दूसरे डॉक्टर्स से चैथ वसूला करता था। बताया जाता है कि ब्रजेश मावी ने तब इस डॉक्टर व इसके भाई का पूरा कच्चा चिठ्ठा दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के सामने खोलकर रख दिया था और बताया था कि कब-कब और कितना-कितना पैसा उसने किन-किन डॉक्टर्स से उक्त डॉक्टर व उसके भाई के कहने पर वसूला है। मावी ने तब यह जानकारी भी दी कि उसकी प्रत्येक गतिविधियों से उक्त डॉक्टर तथा उसका भाई भलीभांति परिचित रहते थे। ब्रजेश मावी के खुलासे पर दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच उक्त डॉक्टर और उसके भाई को अपने साथ पूछताछ के लिए ले जाने की तैयारी कर ही रही थी कि डॉक्टर ने एक गेम खेल दिया। डॉक्टर ने मथुरा के एक पुलिस अधिकारी को सेटिंग के तहत तब दो लाख रुपए देकर एक प्रार्थना पत्र इस आशय का दिया कि दिल्ली पुलिस बिना किसी ठोस आधार के एक अपराधी के कहने पर मुझे ले जाना चाहती है जो कानूनन सही नहीं है। चूंकि दिल्ली पुलिस ने न तो अपने आने की सूचना मथुरा पुलिस को दी थी और ना ही उनका कोई परोक्ष सहयोग लिया था इसलिए उसे इस प्रार्थना पत्र के बाद खाली हाथ लौटना पड़ा। बताया जाता है कि ब्रजेश मावी का डॉ. उमेश माहेश्वरी के अपहरण में हाथ तो था और इसने इसका भी राजफाश दिल्ली पुलिस की मौजूदगी में किया था परंतु दिल्ली पुलिस की उमेश माहेश्वरी के अपहरण कांड में कोई रुचि नहीं थी। वह तो मावी को इसलिए दिल्ली से मथुरा लेकर आई थी ताकि उसके नेटवर्क का पता लगा सके।  इधर मथुरा पुलिस और विशेष रूप से तत्कालीन सीओ सिटी आलोक प्रियदर्शी को भी माहेश्वरी अपहरण कांड में कोई रुचि नहीं रह गई थी क्योंकि डॉ. उमेश माहेश्वरी का परिवार अपने स्तर से उन्हें मुक्त कराने के प्रयास कर रहा था और इसमें उनका सहयोग तब कृष्ण जन्मस्थान की सुरक्षा में तैनात एक तेज-तर्रार सीओ त्रिदीप सिंह कर रहे थे। यह बात आलोक प्रियदर्शी तथा मथुरा में तैनात दूसरे बड़े पुलिस अफसरों को भारी नागवार गुजरी और अंततः उन्होंने अपने ही विभाग के सीओ त्रिदीप सिंह को माहेश्वरी अपहरण कांड का प्रमुख सूत्रधार बनाकर आरोप पत्र अदालत में दायर कर दिया। पुलिस ने सीओ को अपहरण का आरोपी तो बनाया ही, साथ ही माहेश्वरी परिवार द्वारा दी गई फिरौती की कुल रकम में से करीब 11 लाख रुपए की रिकवरी भी सीओ के घर से दिखा दी। पुलिस ने सीओ के अलावा साथनी अलीगढ़ के कुख्यात अपराधी प्रेम सिंह उर्फ बॉबी तथा अलीगढ़ में तैनात एलआईयू के एक सब इंस्पेक्टर को भी मुख्य आरोपियों में शुमार किया। इस तरह पुलिस की आपसी टसल ने ब्रजेश मावी को माहेश्वरी अपहरण कांड से पूरी तरह अलग करा दिया और जिसका ब्रजेश मावी को फिर पूरा लाभ मिला। ब्रजेश मावी ने उसके बाद मथुरा में अपने कथित सफेदपोश शुभचिंतकों के माध्यम से एक प्रसिद्ध हलवाई को भी अपना लक्ष्य बनाया तथा काफी पैसा वसूला। बाद में इस हलवाई के माध्यम से दूसरे व्यापारी और उद्योगपतियों से चैथ वसूली की। उक्त प्रसिद्ध हलवाई ने मावी के माध्यम से अपने कई काम करवाये और कई निशाने भी साधे। इसी तरह भूतेश्वर स्थित नर्सिंग होम संचालक के इशारे पर उससे टसल रखने वाले एक होटल मालिक को टारगेट किया। जिन लोगों को ब्रजेश मावी ने अपने सफेदपोश सहयोगियों के माध्यम से टारगेट किया उनमें कृष्णा नगर के एक जूता व्यवसाई तथा डेम्पियर नगर का एक गिफ्ट एंपोरियम का मालिक भी था। दरअसल ब्रजेश मावी जिस व्यक्ति को अपना शिकार बनाता था, उसी व्यक्ति को कुछ दिनों बाद इस बात के लिए तैयार कर लेता था कि वह उसके लिए इन्फॉर्मर का कार्य करे तथा ऐसे लोगों की जानकारी उसे दे जिससे उसकी टसल हो और वह उनसे चैथ वसूल सके। मावी के शिकार बने लोग इसलिए उसके इस झांसे में आ जाते थे कि उन्हें इस तरह एक ओर जहां अपनी दुश्मनी निकालने का मौका मिल जाता था, वहीं दूसरी ओर वह अपनी जेब से पैसा देने से बच जाते थे। ब्रजेश मावी ने इसी तरह अपने कुछ सहपाठियों, सफेदपोश शुभचिंतकों तथा पुराने शिकार रहे लोगों के सहयोग से मथुरा के अनेक लोगों को जमकर दुहा।  ब्रजेश मावी की मथुरा में गहरी पैठ तथा सफेदपोश लोगों से उसके ताल्लुकात की पुष्टि उसके मर्डर से भी होती है। जो प्रमोद चैधरी और गोपाल यादव ब्रजेश मावी के साथ हाथरस के कुख्यात अपराधी राजेश टोंटा के घर गए थे और जिन्होंने पुलिस को मावी की हत्या कर दिए जाने संबंधी जानकारी दी है, उनकी छवि अब तक कम से कम अपराधी की तो नहीं है। प्रमोद चैधरी तो भारतीय जनता पार्टी का नेता है। अब विचारणीय प्रश्न यह है कि प्रमोद चैधरी तथा गोपाल यादव जैसे लोगों का एक कुख्यात अपराधी से क्या वास्ता था? क्यों वह उसके इतने निकट थे कि उसके जमीनी कारोबार का भी हिस्सा बनने गए थे? प्रमोद चैधरी और गोपाल यादव तो केवल ऐसे दो नाम हैं जो आज सामने आ चुके हैं, अलबत्ता मथुरा में ऐसे तत्वों की कमी नहीं जिनके कारण ब्रजेश मावी ने मथुरा को अपना प्रमुख कार्यक्षेत्र बना रखा था और जिनके सहयोग से वह मथुरा में बेखौफ आता-जाता था। ब्रजेश मावी के इन सफेदपोश सहयोगियों में एसे तत्व भी हैं जिनकी पुलिस अफसरों से निकटता सर्वविदित है और जो पुलिस की सारी गोपनीय जानकारी उस तक पहुंचाते रहे हैं। पुलिस यदि आज भी इन सफेदपोशों का पता लगाकर उनके खिलाफ समुचित कानूनी कार्यवाही करे तो उसे बड़ी सफलता मिल सकती है अन्यथा आज भले ही एक मावी अपने ही साथी का शिकार बन गया हो परंतु फिर कोई दूसरा मावी खड़ा हो जायेगा और जरायम का यह पेशा इसी तरह हमेशा चलता रहेगा।

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