प्रधान वैज्ञानिक डा0 शूरवीर सिंह एवं शोध छात्र सौरभ गुप्ता सीआइआरजी वैज्ञानिकों ने खोजी पशुओं में टीबी की रोक हेतु वैक्सीन कांफ्रेंस में शोध रिपोर्ट प्रस्तुत करने शूरवीर एवं सौरभ इटली रवाना शूरवीर सिंह केे निर्देशन में शोधार्थी सौरभ का चमत्कार, मिली फैलोशिप मथुरा। मथुरा के पशु वैज्ञानिकों ने पशुओं को टीबी से बचाने की दवा की खोज कर कर विश्व में अपनी पहचान स्थापित की है। उनकी खोज को 12वीं अन्तर्राष्ट्रीय पैराट्यूबरकुलोसिस कांन्फ्रेन्स में चर्चा का विषय बनाया है। इसकी खोज करने वाले केन्द्रीय बकरी अनुसंधान परिषद (सीआइआरजी) मकदूम फरह के शोधार्थी पशु वैज्ञानिक सौरभ गुप्ता एवं प्रधान वैज्ञानिक डा0 शूरवीर सिंह को इटली में आयोजित कांन्फ्रेन्स मंे आमंत्रित किया गया है। इटली रवाना हुए वैज्ञानिक वहां अपने शोध पत्र की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के आधीन मथुरा में कार्यरत केन्द्रीय बकरी अनुसंधान परिषद (सीआइआरजी) मकदूम फरह के पशु वैज्ञानिकों द्वारा माइकोबैक्टीरियल एवियम पैराट्यूबरकुलोसिस (जाॅन्स डिज़ीज) या आम भाषा में कहें तो पशुओं की आंतों की टीबी से बचाव, रोकथाम एवं निदान के लिए वैक्सीन ईजाद की है। इसके लिये इण्टरनेशनल एसोसिएशन आॅफ पैराट्यूबरकुलोसिस ने यहां के शोध वैज्ञानिकों को प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रण सहित फैलोशिप प्रदान की है। फैलोशिप में वैज्ञानिक को एक हजार अमेरिकी डाॅलर, 610 यूरो की पंजीकरण राशि की छूट एवं आइएपी की दो वर्ष की निःशुल्क सदस्यता प्रदान की जाती है। कांफ्रेंस में दुनिया के नामचीन पशु वैज्ञानिक, पशु उद्योग से जुड़ी हस्तियां, कई विश्वविद्यालयों के शोधकर्ता, जनस्वास्थ्य वैज्ञानिक आदि भाग लेंगे। सीआइआरजी मखदूम फरह के पशु स्वास्थ्य विभागाध्यक्ष एवं प्रोजेक्ट के प्रमुख डा0 शूरवीर सिंह एवं शोध वैज्ञानिक सौरभ गुप्ता बीती रात इटली के पर्मा के लिए रवाना हो गए हैं। जो वहां 26 तक होने वाली कांफ्रेंस में भाग लेकर 29 को मथुरा लौटेंगे। यहां वे डवलपमेंट एण्ड करेक्टराईजेशन आॅफ इण्डीजीनस वैक्सीन एण्ड डायग्नोस्टिक्स अगेन्स्ट जाॅन्स डिज़ीज विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे। जाॅन्स डिज़ीज पर कार्य करने के दौरान उन्हें 3 बार व उनके शोध सहायकों को एक दर्जन से अधिक फैलोशिप मिल चुकी हैं। सरकार की अभिनव सहस्त्राब्दि भारतीय तकनीकि नेत्रृत्व पहल कार्यक्रमांतर्गत 5 करोड़ 77 लाख 78 हजार की आर्थिक सहायता के बतौर पशु स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव डालने वाले जीवाणु की खोज के लिए वर्षाें के प्रयास से ये वैक्सीन तैयार हुई है जिससे हम बिना अतिरिक्त खर्च किए दुधारू पशुओं को होने वाली टीबी का रोककर दुग्ध उत्पादन में तीन गुना व मांस उत्पादन में पांच गुना वृद्धि कर सकते है। ये जानकारी डा0 शूरवीर सिंह ने रवानगी से पूर्व यहां दी।
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