मथुरा

मथुरा। लोकसभा क्षेत्र के बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी पंडित योगेश कुमार द्विवेदी ने मांट क्षेत्र के नगला विंदा, पीरीगढी, मिलक, नगला दानी, महादीन, जुनैदिया, पाराशर, नगला भामा, अंडुआ, गुहरवली, नीमगांव और नया वास सहित दर्जनों गांवों में घर घर जाकर जनसम्पर्क किया। इस दौरान वे ग्रामीणों से मिल रहे आशीर्वाद से काफी प्र्रफुल्लित नजर आये और उन्होने विश्वास जताया कि इस बार के चुनावों में प्रत्येक वर्ग के लोग उनके साथ है। और बाहरी प्रत्याशीयों को इस बार के चुनाव में बाहर का रास्ता दिखाने के लिए तैयार है। साथ ही उन्होंने कहा कि जो सांसद जीतने के बाद जनपद में कभी नजर नही आये और न ही उनके द्वारा कोई विकास कार्य ही कराया गया।  जबकि बसपा सरकार ने अपने शासन काल में जनपद में कई योजनाएं लागू करके विकास कार्य कराये। वर्तमान सपा सरकार में कानून व्यवस्था इस प्रकार बिगडी हुई कि महिलाएं व बेटियां अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रहीं हैं। जनपद में रालोद सांसद पूरे पांच वर्ष तक रहे उन्होंने जनता की कितनी समस्याओ को हल किया सडके जर्जर है गांवों में महिलाएं कोसो दूर से पानी भरकर ला रही हैं। बिजली का आने जाने का कोई समय निश्चित नहीं है। फिर वर्तमान सांसद किस मूह से जनता से एक और मौका मांग रहे है। साथ ही भाजपा की उम्मीदवार हेमा मालिनी के बारे में कहा कि मुम्बई में रहने वाली सिपर्फ फिल्मी पर्दो पर ही नजर आएंगी। चुनाव के बाद जनपद में पिछले सांसद की तरह नजर नहीं आएंगी, ब्रज के विकास के लिए ब्रज का प्रत्याशी जीतना जरूरी हैं। क्योंकि जो ब्रज की हकीकत से वाकिफ है। इस अवसर पर देवकीनंदन शास्त्री, ब्रहामण समाज के अध्यक्ष तोताराम उपाध्याय, हरी प्रसाद अचार्य, सुरेश चंद, देवेंद्र कुमार शर्मा, ब्रजमोहन खांडाल, राधेश्याम सिंह, पूर्व प्रधान, खचेरमल हजारी प्रसाद, सौरभ, विष्णु, मुकंेश, मोहनलाल शर्मा, रमेश, चंद्रपाल, विनीत, गोपीचंद, जानकी प्रसाद, राकेश उपघ्याय, नेत्रपाल, लक्ष्मी नारायण, बाबूलाल वघेल, बली मोहम्मद, नत्थीलाल, प्रेमसिंह, सहित सैकडों लोग उपस्थित रहे।

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नई दिल्ली रू देश की 16वीं लोकसभा के लिए आम चुनाव के दूसरे दौर में पांच राज्यों की कुल सात सीटों पर मतदान जारी है।   मेघालयए अरुणाचल प्रदेशए मणिपुरए मिजोरम  और नागालैंड राज्य की कुल सात सीटों पर चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला शाम तक ईवीएम मशीन में बंद हो जाएगा।   अरुणाचल प्रदेश और मेघालय की दो.दो सीटों पर तथा नागालैंडए मणिपुर और मिजोरम की एक.एक सीट पर 16वीं लोकसभा के लिए मतदान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जारी है।   इस चुनाव के जरिए पीबीएम बसियावमोइतए विन्सेंट पालाए पीए संगमा और पॉल लिंग्दोह आदि के भाग्य का फैसला होना है।    

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विरक्त संत रमेश बाबा महाराज, गुरू शरणानन्द जी व संत विज्ञानाचार्य जी के सानिध्य मे यमुना सफाई कार्य 3 फरवरी से निरन्तर रूप से जारी है। बुधवार को 2 जेसीबी व 6 टेक्टर द्वारा सफाई कार्य को तेजी दी गई। 9 अप्रैल को श्री ग्रुप एवं अनूप मामा जी द्वारा जेसीबी व टेक्टर चलवाये गये।  अबैध कब्जे से दबा चक्रतीर्थ घाट अब यमुना रक्षक दल करायेगा जीर्णोद्धार   मथुरा परिक्रमा मार्ग स्थित चक्रतीर्थ घाट उपेक्षा की धूल से लगभग ढक सा चुका है। एक समय यमुना की धारा इस घाट को पावन किया करती थी परन्तु यमुना की चाल में फेर आते ही चक्रतीर्थ घाट के भी दिन फिरने प्रारम्भ हो गये। दशकों पहले यमुना के इस घाट से दूर जाते ही अनदेखी के कारण भूमाफियाओं के अबैध कब्जे का शिकार बन  यह घाट मिट्टी में दबने लगा और इस घाट की सीढियां तथा बुर्जियां जमींदोष हो गई। इस घाट का वर्णन भागवत व पुराणों में विस्तृत रूप से मिलता है। इस घाट से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार जब दुर्वाशा ऋषि ने भगवान विष्णु के परम भक्त अम्बरीश जी महाराज पर क्रोधित हो कृत्या को भेजा तो स्वयं विष्णु के चक्र द्वारा अम्बरीश की रक्षा कर उसके द्वारा दुर्वाषा ऋषि का पीछा किया जाने लगा उस पर जब अन्त में दुर्वाषा जी विष्णु जी के पास पहुॅचे तब उन्होने उनको अम्बरीष जी के पास इसी चक्रतीर्थ घाट पर भेजा और यहां आकर वह चक्र शान्त हो गया इसी कारण यह घाट चक्रतीर्थ घाट कहलाने लगा। वर्तमान में इस घाट का ज्यादातर हिस्सा मिट्टी में दब चुका है और साथ ही इस घाट के उपर से नगर पालिका द्वारा मथुरा परिक्रमा की सड़क बना दी गई है। यमुना रक्षक दल के द्वारा बुधवार को चक्रतीर्थ घाट पर बैठक कर घाट के जीर्णोद्धार व उसके सामने सरोवर बना घाट पर स्वच्छ जल लाने के विकल्पों पर विचार किया गया।  यमुना रक्षक दल के राष्टिय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास ने कहा कि चक्रतीर्थ घाट की सफाई कर उस पर स्वच्छ जल लाया जायेगा। घाट के सामने सुन्दर विशाल सरोवर का निर्माण किया जायेगा जिसमें भक्त एवं दर्शनार्थी नौका विहार का भी आनन्द उठा सकेगें। चक्रतीर्थ घाट के समीप जो नाले यमुना में सीधे जा रहे है उन नालोे को नगर पालिका की मदद से सीधे मसानी नाले की ओर डायवर्ट कर दिया जायेगा और गउघाट व चक्रतीर्थ घाट पर बन्द पडे़ शौचालयों को चालू करवाया जायेगा ताकि यमुना का किनारा स्वच्छ रह सके। संत ने यह भी बताया कि 15 दिन के बाद चक्रतीर्थ घाट की सफाई कार्य आरम्भ करा दिया जायेगा। यमुना रक्षक दल के राष्टिय उपाध्यक्ष राकेश यादव ने कहा कि ये सभी घाट उपेक्षा के शिकार रहे है। यमुना रक्षक दल के यमुना सफाई अभियान के चलते लोगो में जाग्रति आयी है और यमुना भक्त आगे बढकर सहयोग कर रहे है जिससे इस अभियान को गति मिल रही है। वृन्दावन से आयी साध्वी गीता जी ने कहा यमुना हमारी मां है वह सदैव हम सभी के लिये पूज्यनिय है। घाटों से यमुना की शोभा और अधिक बढ जाती है इसलिये घाटों की रक्षा व उनकी देखभाल भी परम आवश्यक है। ठस अवसर पर त्रिलोकी व्यास, राजू पेन्टर, सत्यप्रकाश शर्मा, पवन अग्रवाल कटाई वाले, डा. सुनील अग्रवाल, ठा. हरिसिंह, भगवती चैधरी, श्याम ठाकुर, विवेक शर्मा, सुभाष चैहान, पवन ठाकुर, लछ्छो राजपूत, सुरेश हलवाई, मुरारी तौमर, शेरसिंह तौमर, जीतू ठाकुर आदि उपस्थित थे।    

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नई दिल्ली रू कांग्रेस ने इतनी जद्दो.जहद के बाद वाराणसी से बीजेपी पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपने उम्मीदवार का ऐलान कर दिया है। पांच बार विधायक रह चुके अजय राय बनारस में मोदी को चुनौती देंगे। अजय राय की चर्चा काफी समय से हो रही थी। पांच बार विधायक रह चुके हे और दो बार पार्टी बदल चुके हैं। वह बीजेपी में भी रहे हैं। इस वक्त वह पिंडरा से कांग्रेस के विधायक हैं। साथ ही उन्होंने 2009 के लोकसभा चुनावों में कड़ी टक्कर दी थी। आखिरकार पार्टी ने अजय राय को टिकट देने का फैसला किया है। पिछले लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने वाले अजय राय तीसरे नंबर पर थेए यह चुनाव बीजेपी के मुरली मनोहर जोशी ने थोड़े अंतर से जीता था। कांग्रेस लीडर्स ने बताया कि बाहर से उतारे गए किसी प्रत्याशी की तुलना में उनका आकर्षण कहीं ज्यादा होगा। 2009 के चुनाव में वाराणसी से लोकसभा का टिकट न दिए जाने के कारण अजय राय ने बीजेपी छोड़ दिया था।

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  नई दिल्ली : लोकसभा चुनाव का तीसरा चरण शुरू होने होने वाला है। इसी के साथ तीसरे चरण का चुनाव प्रचार समाप्त करने का आखरी दिन है। सभी प्रत्याशी शाम तक प्रचार कर सकेंगे। इसके बाद प्रचार थम जाएगा। वहीं, दूसरे चरण में पूर्वोत्तर के पांच राज्यों की नौ सीटों पर नौ को वोट डाले जाएंगे दूसरे चरण का चुनाव बुधवार को होना है। तीसरे चरण में राजधानी दिल्ली की सात और यूपी, ओडिशा महाराष्ट्र और हरियाणा की 10-10 सीटों पर भी मतदान होने है। वहीं 10 अप्रैल को एमपी की नौ बिहार की छह झारखंड की चार सीटों के अलावा छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर और चंडीगढ़ की एक-एक सीट पर भी मतदान होंगा।   तीसरे चरण में केरल की सभी 20 सीटों पर मतदान होगा। दूसरे चरण में अरुणाचल प्रदेश और मेघालय में दो-दो सीटों और मणिपुर, मिजोरम और नागालैंड की एक-एक सीट पर मतदान होगा।

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विश्वस के सबसे बड़े गणतंत्र में मतदान प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए क्याज कुछ आवश्यवक है? वास्तसव में यह एक बेहद कठिन काम है।  वर्ष 2009 का आम चुनाव इस बात का सरल प्रमाण है। इस विशाल एवं जटिल गणतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेकर, देश के सुदूर प्रांतों में कभी बर्फीले पहाड़ों तक पहुंचकर, कभी तपती धूप में मरुभूमि के क्षेत्रों को पार करते हुए तो कभी नदी-नालों को पार करते हुए, पूरी जिम्मेचदारी के साथ जो लोग इस प्रक्रिया में शामिल हुए- उन्हीं  के योगदान के फलस्वदरूप गणतंत्र का दीप प्रज्वेलित है। लोकसभा चुनाव-2009 पांच चरणों में पूरा हुआ था। पहले चरण का मतदान 16 अप्रैल, 2009 और पांचवें चरण का मतदान 13 मई, 2009 को हुआ। इस प्रक्रिया की विशालता इस बात से स्पलष्ट् होती है कि आम चुनाव, 2009 में 71,377 करोड़ मतदाताओं ने 8,34,944 मतदान केन्द्रोंा में 9,08,643 नियंत्रण इकाईयों तथा 11,83,543 ईवीएम के माध्य7म से अपने मत जाहिर किए। ताकि, मतदान की यह प्रक्रिया शांतिपूर्ण, पारदर्शी तथा बिना किसी अड़चन के संपूर्ण हो, 4.7 मिलियन मतदान अधिकारी, 1.2 मिलियन सुरक्षाकर्मी तथा 2046 पर्यवेक्षक तैनात किए गए थे। सुरक्षाकर्मियों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए 119 विशेष रेलगाड़ियों की व्य वस्था  की गई। साथ ही, 55 हेलीकॉप्टकर भी इस प्रक्रिया में शामिल किए गए। गणना के लिए 16 मई, 2009 को 1080 केन्द्रों  जहां लगभग 60,000 कर्मचारियों को तैनात किया गया था। भारत निर्वाचन आयोग ने एक भी मतदाता को मतदान देने से वंचित नहीं किया। गुजरात के गिर वन के गुरु भारतदासजी के मतदान को सुनिश्चिभत करने के लिए वहां एक मतदान केन्द्र  खोला गया और तीन मतदान अधिकारियों को तैनात किया गया। छत्तीरसगढ़ में घने जंगलों से घिरे, पहाड़ी क्षेत्र में स्थिखत कोरिया जिले के शेरेडन्डत गांव में दो मतदाताओं के लिए चुनाव आयोग ने विशेष व्यघवस्थाि की थी। इन दो मतदाताओं के लिए एक मतदाता केन्द्रि की स्थाशपना की गई और चार चुनाव अधिकारियों को तीन सुरक्षाकर्मियों के साथ वहां तैनात किया गया। अरुणाचल प्रदेश में चार ऐसे चुनाव केन्द्रम हैं जहां केवल तीन मतदाता प्रति केन्द्रद हैं। वहां पहुंचने के लिए मतदान अधिकारियों के दल को हेलीकॉप्ट र से उतरकर या निकटतम रास्तेल से तीन-चार दिनों तक पैदल जाना पड़ा। अरुणाचल प्रदेश में 690 मतदान दलों को हेलीकॉप्ट र द्वारा सुदूर गांवों तक पहुंचाया गया। इनमें से कई गांव म्यांचमार तथा चीन सीमा के पास स्थिलत हैं। हिमाचल प्रदेश के कई भागों में प्रत्येसक वोट को शामिल करने के लिए मतदान अधिकारियों के दलों को ठंडी, बर्फीली हवाओं मे से होते हुए घंटों पैदल चलना पड़ता है। 15000 फीट की ऊंचाई पर स्थिडत लाहौल-स्पीगति के जनजातीय जिले में हिक्कतम नामक जगह पर स्थिलत मतदान-केंद्र 321 मतदाताओं के लिए स्थाथपित किया गया जो कि देश का सबसे ऊंचा मतदान-केंद्र है। इस जिले के एक-तिहाई से अधिक मतदान-केंद्र 13,000 फीट की ऊंचाई पर स्थि त है- मतदान अधिकारियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती थी। सुदूर पहाड़ों पर स्थिमत होने के कारण 36 मतदान केंद्रों को अति संवेदनशील तथा 23 केंद्रों को संवेदनशील घोषित किया गया था। पश्चिकम बंगाल के दार्जिलिंग ज़िले में मतदान-अधिकारियों को 12 किलोमीटर तक की चढ़ाई चढ़कर श्रीखोला मतदान केंद्र तक पहुंचना पड़ा। बाड़मेड़ निर्वाचन क्षेत्र 71,601 वर्ग किलोमीटर तक फैला हुआ हैं। मरुभूमि के क्षेत्र में फैले होने के कारण छह चलायमान केंद्र शुरू किए गए ताकि मेनाऊ, जेसिलिया, नेहदाई, तोबा, कायमकिक, धाणी तथा रबलऊओ फकीरोवाला गांव के 2324 मतदाता अपना मतदान कर सकें। इस प्रयास से मतदाताओं को मतदान के लिए लम्बीि दूरी तक पैदल नहीं जाना पड़ा। सुन्दनरवन के झाड़ीदार वनों में मतदान-दल नावों की सहायता से पानी के रास्तेत मतदाताओं तक अपना सामान लेकर पहुंचे। 700 किलोमीटर लम्बातई वाले अंडमान तथा निकोबार द्वीप समूहों में मतदान का आयोजन एक चुनौतीभरी प्रक्रिया थी। कई जगहों पर मतदान-अधिकारियों को 35-40 घंटों तक नावों पर जाकर पहुंचना पड़ा। लक्षद्वीप के 105 मतदान केंद्रों तक केवल नावों के माध्यरम से ही पहुंचा जा सका। मिनीकॉप द्वीप पर हेलीकॉप्टकर के माध्युम से ही ईवीएम पहुँचाए गए। असम के सोनितपुर जिले में दो बैलगाड़ियां तैनात थी क्योंाकि वहां के रास्तेव बहुत अच्छेन नहीं हैं। राज्यक के कई भागों में मतदान-सम्ब न्धीड उपकरण तथा अधिकारियों के आने जाने के लिए पालतू हाथी उपयोगी साबित हुए। बोक्का इजान ज़िले में जंगली हाथियों के उपद्रव के कारण पांच मतदान केंद्रों तक सामान पहुंचाने के लिए पोर्टर नियुक्त‍ किए गए क्यों कि वहां 40 किलोमीटर तक की दूरी पैदल ही तय करना पड़ता है। भौगोलिक चुनौतियों के साथ-साथ 79 चुनावी क्षेत्रों में नक्सलवादियों का दबदबा था। साथ ही, देश के ऊत्तजर-पूर्वी क्षेत्रों में अलगाववादी तत्वों  ने धमकी दे रखी थी। चुनाव आयोग ने विस्तृंत योजनाए बनाई और उनका कार्यान्व यन किया। इतनी सारी चुनौतियों के बावजूद 58 प्रतिशत से अधिक लोगों ने मतदान किया और साबित किया कि गणतांत्रिक भावनाएं अभी हमारे देश में मजबूत हैं। (Samiksha Bharti News Service)

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