विविधा

वह अदालत के सामने खड़ी थी, उसकी आंखों में सवाल नहीं, एक जंग थी। उसका 'अपराध'? एक लिव-इन रिलेशनशिप। समाज की नज़रों में वह 'बदचलन' थी, लेकिन अपने लिए, वह आज़ादी की सेनानी थी। उसने पूछा, "क्या प्यार की इजाज़त के लिए सर्टिफिकेट चाहिए?" उसकी आवाज़ में वही दर्द था जो सदियों से दबाया गया है। यह मामला सिर्फ एक लड़की का नहीं, हमारे समाज के ढांचे की जड़ों पर प्रहार था। क्या न्याय व्यवस्था समाज के दोगलेपन के आगे झुकेगी...

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लाख कोशिशों के बावजूद महात्मा गांधी के जीवन आदर्श और गांधीवादी विचारधारा से भारत की वर्तमान राजनैतिक व्यवस्था के कप्तान मुक्ति नहीं पा सके हैं। कांग्रेसियों ने कभी गांधी को जीया ही नहीं, और हिंदुत्ववादी विचारकों को हमेशा गांधी नाम से ही घिन या चिढ़ ही रही...

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हाल ही में ग्रेटर नोएडा में एक दिल दहलाने वाली घटना ने तथाकथित आधुनिक भारतीय समाज की काली सच्चाई को प्रकाशित किया है। 28 वर्षीय निक्की को उनके पति और ससुराल वालों ने 36 लाख रुपये की दहेज मांग के लिए क्रूरता से प्रताड़ित कर जला दिया। यह भयावह घटना 21 अगस्त को हुई, जिसे निक्की के छह साल के बेटे ने अपनी आंखों से देखा, जिसने बताया कि उसकी मां पर कोई पदार्थ डाला गया, थप्पड़ मारा गया और फिर जिंदा जला दिया गया...

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रात के सन्नाटे में जब घरों की रोशनी बुझ जाती है, तब भी लाखों युवाओं की आंखें चमकती स्क्रीन पर टिकी रहती हैं। अनगिनत नोटिफिकेशन्स की खनक मानसिक जंजीर बन चुकी है...

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साल 1973 में जब बॉबी फिल्म आई थी, करोड़ों बूढ़े और जवानों में करेंट आ गया था। सोलह वर्ष में प्यार हो जाने से जूली को पहचान मिली। किशोरावस्था के प्यार और रोमांस के किस्से सदियों से आकर्षित करते रहे हैं।

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आज के युवा पति, नीले प्लास्टिक ड्रम और सीमेंट के बोरों से डरते हैं, मानो ये कोई जानलेवा संकेत बन गए हों। वहीं, संयुक्त परिवारों की बुजुर्ग सासें अब शादी के बर्तन नहीं, ‘कटोरे’ इस डर से खरीद रही हैं कि बहू अब केवल रसोई तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसके इरादे कहीं और हैं।

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