एक अरसे के बाद, मैं अपने नाती को लेने स्कूल पहुंचा। छुट्टी में अभी वक्त था, सोचा कि एक चक्कर लगा लूं। तभी मोड़ पर 7–8 बच्चे दिखे। एक एलीट स्कूल के चकाचौंधभरे कॉरिडोर में उनकी भाषा सुनकर कान सुन्न पड़ गए। ‘जेन-जी’ की तेज़, कटी-कटी, इमोजी-टपकाती जुबान… और हर वाक्य में चार-अक्षरों की भीषण आग...
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