देश

कल्पना कीजिए, यदि भारत ने परिवार नियोजन कार्यक्रम न अपनाया होता तो आज आबादी 250 से 300 करोड़ के बीच होती। ऐसे में भूमि, जल और खाद्य संसाधनों पर भयानक दबाव पड़ता। पहले से ही सीमित कृषि क्षेत्र का विस्तार असंभव है, जबकि जल संसाधनों के 2030 तक 50 फीसदी घटने का अनुमान है। ऐसी परिस्थिति में भूख, पलायन और अराजकता का साम्राज्य होता...

Read More

भारत की सुप्रीम कोर्ट को लोकतंत्र का सबसे बड़ा पहरेदार माना जाता है। महिलाओं के अधिकार, समलैंगिक बराबरी और पर्यावरण सुरक्षा जैसे ऐतिहासिक फ़ैसलों ने अदालत की साख मज़बूत की है। लेकिन, हाल के बरसों में कई फ़ैसलों ने यह बहस छेड़ दी है कि अदालतें अपने दायरे से बाहर निकलकर नीति और प्रशासन का काम करने लगी हैं। न्यायिक सक्रियता पर एक बहस 1993 में भी हुई थी जब जस्टिस कुलदीप सिंह बेंच ने एमसी मेहता की याचिका पर ताज ट्रिपेजियम जोन में प्रदूषणकारी उद्योगों पर तमाम बंदिशें लगा दी थीं...

Read More

सिर्फ आंकड़ों, डेटा और तुलनात्मक विश्लेषणों से अगर नरेंद्र मोदी सरकार का मूल्यांकन किया जाए तो पिछले 11 वर्ष भारत की विकास यात्रा के इतिहास का स्वर्णिम काल कहा जा सकता है। हजारों वर्षों में ऐसी कोई राजनैतिक व्यवस्था नहीं आई जिसने इतनी बड़ी आबादी को जीने की उम्मीद दी, सहारा दिया और मुख्यधारा से जुड़ने के अवसर दिए...

Read More

कभी गरुड़-सा ऊंचा उड़ने वाला भारत आज अपनी ही टूटी-फूटी सीमाओं में कैद होकर रह गया है। यह वही धरती है जिसने अफगानिस्तान से लेकर बर्मा तक राज किया, लेकिन आज पाकिस्तान और चीन हमारी ज़मीन निगल रहे हैं और हम संयुक्त राष्ट्र की फाइलों में न्याय खोज रहे हैं।

Read More

आईटी टेकी सुरेश भाई को अपनी मंगेतकर शीला की सालगिरह पार्टी में गिफ्ट के साथ बसंत विहार से दिल्ली के दरियागंज इलाके के एक रेस्टोरेंट में पहुंचना था। जोशभरे उत्साह के साथ जब वह रेस्टोरेंट में दाखिल हुए तो महफिल पर पर्दा गिर चुका था। सुरेश ने ट्रैफिक जाम को दोषी ठहराया लेकिन शीला ने एक न सुनी और पुराने दोस्त अभिनव के साथ निकल गई। सच में, ट्रैफिक जाम ने तरह तरह के खट्टे-मीठे अनुभव लोगों को दिए हैं...

Read More

विपक्षी दलों के नेताओं की मानें तो भारत गर्त में जा रहा है। राहुल गांधी हर दिन मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते रहे हैं कि अर्थव्यवस्था चौपट हो चुकी है। सही स्थिति क्या है, यह जानने के लिए साल 2015 से पूर्व और 2025 तक के आंकड़ों का विश्लेषण करने से पता लगता है कि तमाम दिक्कतों के बावजूद भारत की विकास यात्रा सही गति से सही दिशा की तरफ अग्रसर है...

Read More



Mediabharti