भारत की राजनीति एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है, जहां हर निगाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिकी है। क्या वह 75 साल की उम्र में स्वयं को पार्टी की उस 'अलिखित परंपरा' के हवाले करेंगे, जिसमें लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे दिग्गजों ने मार्गदर्शक की भूमिका निभाई थी? या फिर मोदी उस लकीर को मिटाकर नए राजनीतिक मानदंड गढ़ेंगे...
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