गरीबी के खिलाफ जंग में मनरेगा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अगर 25 करोड़ लोग गरीबी की रेखा से ऊपर उठे हैं, तो ग्रामीण रोजगार योजनाओं ने इस क्रांति को सफल अंजाम दिया है, बेशक क्रियान्वयन बेहतर और भ्रष्टाचार मुक्त हो सकता था...
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गरीबी के खिलाफ जंग में मनरेगा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अगर 25 करोड़ लोग गरीबी की रेखा से ऊपर उठे हैं, तो ग्रामीण रोजगार योजनाओं ने इस क्रांति को सफल अंजाम दिया है, बेशक क्रियान्वयन बेहतर और भ्रष्टाचार मुक्त हो सकता था...
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‘जब शासन सोता है, तो अराजकता पनपती है’, यह कहावत भारत की सड़कों पर चरितार्थ हो रही है। आवारा कुत्ते, बेसहारा गायें और उन्मुक्त्त बंदर आज हमारे मोहल्लों और गलियों को मैदान-ए-जंग बना चुके हैं, और तमाम सरकारी एजेंसियां तालमेल के अभाव में महज तमाशबीन बनी बैठी हैं...
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राजनीति शास्त्र की किताबें कहती हैं कि लोकतंत्र की बुनियाद ‘कानून के सामने बराबरी’ के सिद्धांत पर टिकी हुई है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 भी यही कहता है, लेकिन हक़ीक़त में यह सिद्धांत उन्हीं के पैरों तले कुचला जा रहा है, जो इंसाफ़ और हुकूमत के ‘रखवाले’ होने का ढोंग करते हैं। और ये हैं... जज, राज्यपाल, नेता व नौकरशाह। ये लोग कानून को अपने हिसाब से अपने पक्ष में घुमा लेते हैं क्योंकि इनको विशेषाधिकार प्राप्त हैं। जानकार बताते हैं कि विशेष दर्जा प्राप्त इन महान विभूतियों की एक लंबी लिस्ट भारत के हर हाइवे के टोल बूथ पर लगी होती है।
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उत्तर प्रदेश में ‘ऑपरेशन लंगड़ा’ की सफलता के बाद, अनेक राज्यों में पुलिस तंत्र को अधिक कड़क और सख्त बनाने की कवायदें शुरू हो चुकी हैं। क्या बिना बुनियादी सुधारों के पुलिस तंत्र को और अधिक आजादी देना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप होगा?
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संसद में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का जोशीला भाषण जितने सवालों के जवाब देने आया था, उससे कहीं ज़्यादा प्रश्न खड़े कर गया। उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' के बहाने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला, लेकिन क्या यह ‘हमला’ सरकार पर भारी पड़ा, या फिर उनकी अपनी समझदारी पर नए सवालिया निशान छोड़ गया...
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योगी आदित्यनाथ ने कामयाबी के झंडे गाड़ दिए हैं। आंकड़ों की समीक्षा से लगने लगा है कि 2025 का उत्तर प्रदेश उड़ान भरने को तैयार है। प्रदेश का बुलडोजर मॉडल क्राइम कंट्रोल के लिए कारगर हथियार साबित हुआ है। आज नहीं तो कल वर्तमान नेतृत्व नई पीढ़ी को जगह देगी। अगर यह सवाल पूछा जा रहा है कि मोदी के बाद कौन, तो इसमें गलत क्या है?
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