'दो दीवाने सहर में' हां, बिल्कुल सही लिखा है। शब्द 'सहर' है, 'शहर' नहीं। सहर का अर्थ उर्दू में 'सुबह' होता है। हालांकि, इस 'सुबह' से फिल्म का कोई लेना-देना नहीं है। अब, चूंकि फिल्म का हीरो 'श' को 'स' बोलता है, तो फिल्म के टाइटल में भी 'स' है। वैसे फिल्म की हीरोइन को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि उसका हीरो 'श' को 'स' बोले या 'फ'। फिल्म के अंत तक वह अपने रिश्ते को लेकर 'फ्योर', मतलब 'स्योर', नहीं हो पाती है। निर्देशक रवि उदयवार की कारकिर्दगी भी कुछ-कुछ ऐसी ही लगती है।
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