मथुरा से दिल्ली जाते समय राष्ट्रीय राजमार्ग-2 पर छटीकरा के निकट श्री गरुड़ गोविन्द भगवान श्रीकृष्ण की विहार स्थली है। यह छटीकरा स्थित वृंदावन के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है।
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मथुरा से दिल्ली जाते समय राष्ट्रीय राजमार्ग-2 पर छटीकरा के निकट श्री गरुड़ गोविन्द भगवान श्रीकृष्ण की विहार स्थली है। यह छटीकरा स्थित वृंदावन के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है।
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वृंदावन में एक ऐसा मंदिर है, जहां ठाकुरजी की रसोई तैयार करने के लिए पिछले 477 वर्ष से एक भट्टी लगातार जल रही है। कार्य पूरा होने पर रात को इसमें लकड़ियां डालकर ऊपर से राख ओढ़ा दी जाती है, जिससे अग्नि पूरी तरह से शांत न हो। अगले दिन पुन: उसमें उपले व लकड़ियां डालकर भट्टी की अग्नि के प्रज्ज्वलन को जारी रखा जाता है। हम बात कर रहे हैं यहां के प्रसिद्ध मंदिर श्री राधारमण मंदिर की। यह मंदिर श्री गौड़ीय समाज के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है।
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हमारे देश के हर राज्य में अनेक ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जिनका इतिहास भी काफी रोचक रहा है। राजस्थान के उदयपुर से 23 किमी दूर नागदा गांव में सास-बहू मंदिर के निर्माण की भी एक ऐसी ही रोचक कहानी है।
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मध्य प्रदेश के मुरैना में मौजूद चौसठ योगिनी मंदिर अपनेआप में अनूठा है। यह मंदिर चौसठ योगिनियों की पूजा के लिए समर्पित है, जिन्हें हिंदू धर्म में शक्तिशाली देवी माना जाता है। मंदिर की वास्तुकला, इतिहास और महत्व चौसठ योगिनी मंदिर को भारत के सबसे महत्वपूर्ण और आकर्षक मंदिरों में से एक बनाते हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा इसे प्राचीन ऐतिहसिक स्मारक घोषित किया हुआ है...
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आग के देवता अग्निदेव का हिंदू धर्म ग्रथों में विशेष स्थान है। अग्निदेव को उच्च कोटि का देवता माना गया है। मनुष्यों का सारा काम ही अग्नि पर निर्भर करता है। अग्निदेव को भगवान इंद्र का जुड़वां भाई माना जाता है। वह उन्हीं की तरह विशाल और शक्तिशाली हैं। अग्निदेव के माता-पिता के बारे में काफी मतभेद हैं...
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सौभरि ऋषि का उल्लेख श्रीमद्भागवतम् के नवें स्कंध के छठवें अध्याय में आता है। एक बार सौभरि ऋषि यमुना नदी के जल में प्रवेश कर कठोर तपस्या कर रहे थे। वहां एक महामत्स्य को अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन बिताते देख उनके मन में भी गृहस्थ जीवन बिताने की उत्कंठा जागृत हो गई।
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