धर्म, कला और संस्कृति

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर चंदखुरी स्थान पर भगवान श्रीराम की मां कौशल्या का प्रसिद्ध मंदिर है। मां कौशल्या का यह मंदिर पूरे भारत में एकमात्र और दुर्लभ तो है ही, साथ ही, यह छत्तीसगढ़ राज्य की गौरवपूर्ण अस्मिता भी है...

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मौली या कलावा बांधना वैदिक परंपरा का हिस्सा है। यज्ञ के दौरान कलावा बांधे जाने की परंपरा तो पहले से ही रही है, लेकिन इसको संकल्प सूत्र के साथ ही रक्षा-सूत्र के रूप में तब से बांधा जाने लगा, जबसे असुरों के दानवीर राजा बलि की अमरता के लिए भगवान वामन ने उनकी कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधा था...

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उत्तर प्रदेश में राज्य महिला आयोग द्वारा हाल ही में पुरुषों द्वारा पारंपरिक रूप से वर्चस्व वाली भूमिकाओं में महिलाओं को नियुक्त करने की पहल महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है...

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दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक समागम के रूप में मनाया जाने वाला महाकुंभ मेला आस्था, संस्कृति और प्राचीन परंपरा का मिश्रण है। हिंदू पौराणिक कथाओं में वर्णित यह पवित्र त्योहार बारह वर्षों में चार बार मनाया जाता है, जो भारत के चार प्रतिष्ठित शहरों हरिद्वार, उज्जैन, नासिक एवं प्रयागराज और सबसे पवित्र नदियों, गंगा, शिप्रा, गोदावरी के बीच बारी-बारी से मनाया जाता है। इनमें से प्रत्येक शहर सबसे पवित्र नदियों गंगा, शिप्रा, गोदावरी और गंगा, यमुना एवं पौराणिक सरस्वती के संगम के किनारे स्थित हैं...

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कार्तिक के महीने को बहुत पवित्र माना जाता है। इस माह में ही भगवान विष्णु अपनी चार माह की योगनिद्रा से जागते हैं और तब सभी तरह के मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं। इसी कार्तिक मास में दीपावली का महापर्व आता है। पुराणों में भी कार्तिक मास की महिमा का वर्णन मिलता है...

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दीपावाली के एक दिन बाद, श्री कृष्ण मंदिरों में 56 से अधिक विभिन्न खाद्य-वस्तुओं के साथ सामुदायिक भोज 'अन्नकूट' कई भक्तों के लिए मुख्य आकर्षण है।

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