संपादकीय

भारत में विकास की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं, लेकिन क्या सिर्फ सड़कों और हवाई अड्डों की गिनती बढ़ाने से हमारा समाज वास्तव में प्रगति कर रहा है? क्या जुमलेबाजी, बड़बोलापन, चालबाजी, और ड्रामेबाजी से हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं? नहीं, असली प्रगति तभी होगी जब हम अपने दिल और दिमाग को दुरुस्त करेंगे...

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कोलकाता, हाथरस, मैनपुरी या कोलकाता से क्रूर यौन उत्पीड़न की दुखद और शर्मनाक घटनाएं इतनी जानी-पहचानी लगती हैं और सुनाई देती हैं कि हमारी सामूहिक प्रतिक्रिया ने पाखंड और दिखावटी रंग ले लिया है। दशकों से यह पैटर्न एक जैसा ही है। खूब सारा राजनीतिक शोर-शराबा, कैंडल मार्च, धरने और प्रदर्शन, जिनमें से अधिकांश में सत्ताधारी पार्टी को निशाना बनाया जाता है।

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक संत, योगी और सनातन धर्म के विशिष्ट प्रचारक हैं। उनकी निष्ठा, ईमानदारी व निश्छलता से सभी परिचित हैं। गोरखपीठ के पीठाधीश्वर के रूप में उनके अनुयायी उन्हें ईश्वर-सदृश मानते हैं। अब सवाल यह है कि ऐसे महान व्यक्तित्व के नेतृत्व बावजूद उत्तर प्रदेश ‘उत्तम प्रदेश’ क्यों नहीं बन पा रहा है...

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चुनावी मंच पर इंडिया गठबंधन के नेतागण, अम्बानी को पानी पी-पीकर कोस रहे थे। परन्तु, भारत के प्रथम उद्योगपति के विवाह समारोह में वही नेतागण शाही व्यंजनों का आंनद लेने से स्वयं को रोक नहीं सके।

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लोक सभा अध्यक्ष का पद अत्यधिक गरिमापूर्ण होता है। जिस किसी को भी यह पद मिले, इसे प्राप्त करना उसके लिए एक विशिष्ट उपलब्धि मानी जाती है। इस पद पर नियुक्त व्यक्तित्व के कार्यकलापों का आंकलन न केवल देश बल्कि पूरी दुनिया के नेताओं और नागरिकों द्वारा किया जाता है...

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बिहार हमेशा से आकर्षण का केन्द्र रहा है। इस राज्य में नालन्दा जैसे विश्वविद्यालय शिक्षा के प्रमुख केन्द्र रहे हैं। यह राज्य महात्मा बुद्ध की कर्मस्थली रहा है एवं भगवान श्रीराम का भी बिहार से अटूट संबंध रहा है। ऐसे ऐतिहासिक महत्व वाला बिहार राज्य वर्तमान में असामाजिक तत्वों तथा भ्रष्टाचार का केन्द्र बन गया है।

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वर्ष 2024 में सम्पन्न हुए लोकसभा चुनाव के परिणामों को देखकर सत्ता पक्ष एवं विपक्ष दोनों ही प्रसन्न हैं। जनता ने इन चुनावों में सभी को प्रसन्न होने का अवसर दिया है। लोकतंत्र की यही विशेषता है कि इसमें जनता का निर्णय ही सर्वोपरि होता है।

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भारत देश में लोकतांत्रिक शासन है। इसका अभिप्राय यह है कि यहां जनता का, जनता के लिए और जनता द्वारा शासन करने का प्रावधान है। लेकिन, 75 साल से ज्यादा के आधुनिक भारतीय इतिहास में नेताओं के दल-बदल के चलते कई बार सरकारें अस्थिरता के भंवर में फंसती रही हैं।

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साल 2024 के लोकसभा चुनाव शांतिपूर्ण सम्पन्न हो जाने के बाद अब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई एनडीए सरकार का शपथग्रहण समारोह भी सम्पन्न हो चुका है। भाजपा ने मोदी जैसे व्यक्तित्व के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और चुनाव परिणामों से यह पूर्णतया स्पष्ट हो जाता है कि देश में मोदी के समकक्ष नेतृत्व देने वाला फिलहाल कोई अन्य नेता जनता को स्वीकार्य नहीं है।

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बीजेपी का दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 10 सालों के दौरान लगातार देश व जनता के उत्थान के लिए कठिन परिश्रम किया, जिसके फलस्वरूप उसे यह आशा थी कि जनता उसके उम्मीदवारों को 400 सीटों पर विजयश्री दिलाने में पूर्ण सहयोग करेगी...

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