संपादकीय

भारत का तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनना अब उतना मुश्किल नहीं लग रहा है। अगले पांच वर्षों में यह पूरी तरह सम्भव लगता है। भारतीय अर्थव्यवस्था से ऊपर के दो पायदानों पर फिलहाल जापान व जर्मनी विराजमान हैं। इन दोनों देशों की अर्थव्यवस्था की वार्षिक वृद्धि दर एक से दो फीसदी के बीच है जबकि भारत में यह अनुमान 7.6 फीसदी का है। स्पष्ट है कि यह दर हासिल करना बिल्कुल भी मुश्किल नहीं है।

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भारत में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी जनजातीय आबादी है। साल 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में जनजातीय जनसंख्या कुल जनसंख्या की लगभग 8.9 फीसदी है। पूरे देश में जनजातीय लोगों के पास अद्वितीय जीवनशैली और रीति-रिवाजों के साथ समृद्ध परंपराएं, संस्कृतियां और विरासत हैं...

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भारत एक समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक विविधता से परिपूर्ण देश है। देश में अनेक महत्वपूर्ण प्राचीन स्थलों और हमारी विरासत को दर्शाते हुए स्मारकों की मौजूदगी से यह बात पूरी तरह सिद्ध भी होती है। लेकिन, कई दशकों की लगातार उपेक्षा के बाद, भारत के लंबे सभ्यतागत इतिहास वाले विभिन्न स्थलों को संरक्षण, पुनरुद्धार और विकास परियोजनाओं के माध्यम से अब पुनर्जीवित किया जा रहा है...

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अधिकाधिक सरकारी निवेश और विकास से जुड़ी पहलों की सहायता से भारत अपने बुनियादी ढांचे का जबर्दस्त उन्नयन कर रहा है। सड़क, रेलवे, विमानन और जलमार्ग सहित भारत के परिवहन नेटवर्क में उल्लेखनीय प्रगति हुई है और इसका देश के आर्थिक विकास पर व्यापक असर हो रहा है...

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भूटान के पीएम लाते शेरिंग का हालिया बयान भारत के लिए एक चिंता बनकर आया है। हाल ही में उन्होंने कहा कि डोकलाम की स्थिति को सुलझाने के लिए चीन भी बराबर का भागीदार है। उनके इस बयान का अर्थ यह है कि उन्होंने इस मामले में अब चीन को भी एक पक्ष मान लिया है और यह बात भारत और भूटान, दोनों के लिए ही बिल्कुल भी सही नहीं है।

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एक ही टोले-मोहल्लों में रहने वाले दलीय कार्यकर्ता बूथों पर, ज़मीन पर पार्टी, विचार के लिए मर-खप जाते हैं। उनके नेता पटना, लखनऊ, दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, चेन्नई और भोपाल में प्यार से रहते हैं। मिलते हैं। टैम टू टैम एक-दूसरे के काम आते हैं।

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