नॉर्वे की सुप्रसिद्ध लेखिका सिग्रिड अनसेट को नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था। जिस समय उन्हें यह पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई, उनसे भेंट करने बहुत से पत्रकार उनके घर जा पहुंचे...
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नॉर्वे की सुप्रसिद्ध लेखिका सिग्रिड अनसेट को नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था। जिस समय उन्हें यह पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई, उनसे भेंट करने बहुत से पत्रकार उनके घर जा पहुंचे...
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अंग्रेजी उपन्यासकारों में हेनरी जेम्स को बेहद ऊंचा स्थान प्राप्त है। बात उस समय की है जब उनकी प्रसिद्धि अपने चरम पर थी...
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रहस्य से भरी कथाओं के प्रख्यात लेखक सर आर्थर कानन डायल पुनर्जन्म पर पूरा विश्वास रखते थे और आत्माओं से बातचीत करने में भी उनकी काफी दिलचस्पी रहती थी...
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रुडयार्ड किपलिंग अंग्रेजी के प्रसिद्ध कवि और लेखक थे। हालांकि, उनका जन्म तत्कालीन बंबई यानी आज के मुंबई में हुआ था। यह बात तब की है जब एक बार एक स्थानीय समाचार पत्र में असावधानी से उनकी मृत्यु की खबर छप गई।
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बात उस समय की है जब सुप्रसिद्ध विज्ञान गल्प लेखक एचजी वेल्स अपनी टाइम मशीन जैसी विज्ञान गल्पों के दम पर अपार लोकप्रियता अर्जित कर चुके थे। उसी दौरान एक युवती को उनका साक्षात्कार लेने के लिए कहा गया। वह युवती उस साक्षात्कार के जरिए अपना पत्रकारिता जीवन शुरू ही करने वाली थी...
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मौजूदा समय में जब पूरे देश पर चुनावी बुखार चढ़ा हुआ है तो दोहे और व्यंग्य को समेटे कुमार अतुल का नया कविता संग्रह ‘पोल डांस’ बेहद प्रासंगिक हो चला है। मौजूदा सियासत की विसंगतियों पर इसमें करारा व्यंग्य किया गया है।
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जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने एक पुस्तक 'एन इलस्ट्रेटेड गाइड टू द लेपिडोप्टेरा ऑफ इंडिया : टैक्सोनोमिक प्रोसेजर्स, फैमिली कैरेक्टर, डायवर्सिटी एंड डिस्ट्रीब्यूशन' प्रकाशित की है।
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क्या ऐसा भी कोई होगा जो गालिब को न जानता हो...! खैर, जो नहीं जानते हैं, उनके लिए स्वयं गालिब का यह जवाब हाजिर है... “पूछते हैं वो कि 'ग़ालिब' कौन है, कोई बतलाओ कि हम बतलाएं क्या”...
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... खूब लड़ी मर्दानी, वो तो झांसी वाली रानी थी...! बरसों पुरानी यह कविता ज्यादातर हिंदुस्तानियों को आज भी याद है। इस कविता के माध्यम से कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान ने जिस तरह से रानी लक्ष्मी बाई के शौर्य का चित्र खींचा है, वैसा विरले ही देखने को मिलता है...
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आज से करीब 100 साल पहले मदुरै में जब महात्मा गांधी देश के लिए विदेशी कपड़े छोड़कर सूत की धोती को धारण कर रहे थे, उसी समय बिहार के अररिया में शीलानाथ मंडल के यहां एक बालक ने जन्म लिया। बच्चे के जन्म पर परिवार को ऋण लेना पड़ा तो परिवार वाले बच्चे को ‘रेनुआ’ पुकारने लगे। यही रेनुआ अपनी लेखनी से हिंदी साहित्य प्रेमियों को ऋणी कर गये।
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