धर्म, कला और संस्कृति

राजस्थान के दौसा जनपद में करीब एक हजार साल पुराना पपलाज माता का मंदिर है। यहां स्थापित माता की मूर्ति को एक चमत्कारी मूर्ति माना जाता है। यह स्थान जिला मुख्यालय से 35 किमी और उपखंड क्षेत्र लालसोट से 15 किमी की दूरी पर घाटा में स्थित है।

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सनातनी परंपरा में ‘चिरंजीवी’ उसे कहा जाता है जो अमर हो अर्थात जिसका कोई अंत न हो। वैदिक परंपरा में ऐसे आठ चिरंजीवियों का उल्लेख आता है। ये आठों व्यक्तित्व किसी न किसी वचन, नियम या शाप से बंधे, दिव्य शक्तियों से संपन्न हैं। योग में जिन अष्ट सिद्धियों की बात कही गई है, वे सारी शक्तियां इनमें विद्यमान है। जो लोग परामनोविज्ञान को जानते और समझते हैं, वे इन पर विश्वास करते हैं।

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ब्रज में एक लोकोक्ति बहुत प्रसिद्ध है – “हलुआ में हरि बसत हैं, घेबर में घनश्याम। मक्खन में मोहन बसैं, रबड़ी में श्री राम।। यहां बात हो रही है भगवान की खान-पान से संबंधित रुचियों की। और, यदि भगवान के खान-पान की बात चले तो सबसे पहले याद आता है ‘छप्पन भोग’...

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होली के सात दिन बाद बसौड़ा त्योहार मनाया जाता है। इस दिन शीतला माता की पूजा की जाती है और कुत्ते को खाना खिलाकर पूजा जाता है...

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होली का त्योहार फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यहां हम आपको इस दिन की संपूर्ण पूजा विधि के बारे में बता रहे हैं...

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भगवान श्रीकृष्ण कभी एक ‘गुरु’ की भूमिका में नजर आते हैं, कभी ‘सखा’, कभी एक भाई और कभी युद्ध में मैदान रण छोड़ने वाला ‘रणछोड़’ के रूप में। भगवान के इसी रूप को समर्पित गुजरात के खेड़ा जिले स्थित डाकोर धाम में एक कृष्ण मंदिर है जिसे ‘रणछोड़दास का मंदिर’ कहा जाता है...

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